February 05, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

 

दुर्ग / शौर्यपथ।
ग्राम चिंगरी में आयोजित शिव महापुराण कथा के षष्ठ एवं सप्तम दिवस (अंतिम दो दिवस) अत्यंत भव्य, भावविभोर एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल एवं सर्व समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पावन कथा श्रृंखला का समापन शिव-पार्वती विवाह, गणेश एवं कार्तिकेय जन्म-विवाह, पार्थिव शिवलिंग पूजन, तर्पण, हवन तथा महाप्रसाद वितरण के साथ श्रद्धा और दिव्यता के शिखर पर पहुंचा।

कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने अंतिम दो दिवसों में शिव-पार्वती विवाह की अमर लीला का अत्यंत रसपूर्ण, भावनात्मक एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। सती के आत्मदाह के पश्चात माता पार्वती का हिमालय के घर जन्म, कठोर तपस्या द्वारा भगवान शिव को पुनः प्रसन्न करना तथा दिव्य विवाह का प्रसंग श्रोताओं को भाव-विभोर कर गया। विवाह अवसर पर हिमालय द्वारा कन्यादान, देवताओं की उपस्थिति और शिव-पार्वती के पावन मिलन ने प्रेम, तप और त्याग की अमर कथा को जीवंत कर दिया।

इसके पश्चात भगवान गणेश के जन्म की मार्मिक कथा सुनाई गई। माता पार्वती द्वारा उबटन से निर्मित पुत्र गणेश का द्वारपाल बनना, शिव द्वारा अनजाने में उनका मस्तक विच्छेदन और पश्चात हाथी का मस्तक धारण कर पुनर्जीवन — इस प्रसंग ने माता की ममता और शिव की करुणा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। गणेश के विघ्नहर्ता एवं प्रथम पूज्य बनने का प्रसंग श्रद्धालुओं के हृदय में गहराई तक उतर गया।

तत्पश्चात भगवान कार्तिकेय (स्कंद) के जन्म एवं विवाह की दिव्य कथा का वर्णन हुआ। तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित देवताओं की प्रार्थना पर शिव-पार्वती के मिलन से उत्पन्न कार्तिकेय द्वारा तारकासुर वध और धर्म की विजय का प्रसंग शक्ति, साहस और धर्मरक्षा का प्रतीक बना।

समापन अवसर पर पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष आदि से भगवान शिव का अभिषेक किया। तदुपरांत तर्पण एवं हवन संपन्न हुआ, जिसमें पूर्वजों एवं पुण्यात्माओं की शांति के लिए आहुतियां अर्पित की गईं। कार्यक्रम के अंत में महाप्रसाद का वितरण हुआ, जिसे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति भाव से ग्रहण किया।

यह संपूर्ण आयोजन देवी इशर गौरा-गौरी (माता पार्वती) की कृपा से संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य ग्रामवासियों की आत्मिक उन्नति, सुख-शांति एवं सामूहिक कल्याण रहा। अंतिम दो दिवसों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई और पूरा ग्राम ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘जय माता दी’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

शिव महापुराण कथा की यह पावन श्रृंखला ग्राम चिंगरी के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन सिद्ध हुई, जिसने जन-जन के हृदय में शिव-पार्वती भक्ति की अमिट छाप छोड़ दी।

   दुर्ग / शौर्यपथ / ग्राम चिंगरी में शिव महापुराण कथा का षष्ठ एवं सप्तम दिवस (अंतिम दो दिवस) अत्यंत भव्य, भावपूर्ण और समापन की दिव्यता से परिपूर्ण रहा। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल एवं सर्व समाज द्वारा आयोजित इस पावन श्रृंखला का समापन शिव-पार्वती विवाह, गणेश जन्म, कार्तिकेय जन्म एवं विवाह, पार्थिव शिवलिंग पूजन, तर्पण, हवन तथा महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिससे पूरा ग्राम शिव-पार्वती की कृपा से आलोकित हो उठा।
कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने अंतिम दो दिवसों में शिव-पार्वती विवाह की महान लीला का रसपूर्ण वर्णन किया। सती के आत्मदाह के बाद माता पार्वती ने हिमालय के घर जन्म लिया और कठोर तप से भगवान शिव को पुनः प्रसन्न किया। विवाह अत्यंत भव्य रूप से संपन्न हुआ, जहां हिमालय ने कन्यादान किया, देवताओं ने उपस्थित होकर आशीर्वाद दिया और शिव ने पार्वती को अपनी अर्धांगिनी बनाया। यह कथा प्रेम, तपस्या और दिव्य मिलन की अमर गाथा है।
इसके पश्चात भगवान गणेश के जन्म की कथा सुनाई गई। माता पार्वती ने स्नान के समय अपने उबटन से एक बालक की रचना की और उसे अपना पुत्र घोषित किया। जब भगवान शिव आए तो गणेश ने माता की आज्ञा से द्वार रक्षक बने, जिससे क्रोधित होकर शिव ने उनका सिर काट दिया। बाद में हाथी का सिर लगाकर गणेश को पुनर्जीवित किया गया, और वे विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य बने। यह कथा माता की ममता और शिव की करुणा का प्रतीक है।
तत्पश्चात कार्तिकेय (स्कंद) के जन्म एवं विवाह की दिव्य कथा का वर्णन हुआ। तारकासुर के अत्याचार से व्यथित देवताओं की प्रार्थना पर शिव-पार्वती के मिलन से कार्तिकेय का जन्म हुआ। वे छह मुखों वाले, वीर योद्धा के रूप में प्रकट हुए और तारकासुर का संहार कर देवताओं की रक्षा की। बाद में उनका विवाह भी संपन्न हुआ, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है।
समापन पर पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधान से पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष आदि से लिंग पूजा की। इसके बाद तर्पण एवं हवन संपन्न हुआ, जिसमें पूर्वजों और पुण्यात्माओं की शांति के लिए आहुतियां दी गईं। पूजन पश्चात महाप्रसाद वितरित किया गया, जिसे ग्रामवासियों ने भक्ति-भाव से ग्रहण किया।
यह समस्त कार्यक्रम देवी इशर गौरा गौरी (माता पार्वती) की कृपा से संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य ग्रामवासियों की आत्मोन्नति, सुख-शांति तथा पूर्वजों एवं पुण्यात्माओं की शांति प्राप्ति था। अंतिम दो दिवसों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई, और पूरा ग्राम 'हर हर महादेव' तथा 'जय माता दी' के जयकारों से गूंज उठा।
यह शिव महापुराण कथा श्रृंखला ग्राम चिंगरी के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन सिद्ध हुई, जिससे सभी के हृदय में शिव-पार्वती की भक्ति स्थायी रूप से बस गई।

दुर्ग। शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट ।

    पूर्व महापौर पर नियम विरुद्ध आवंटन और अनियमितताओं के आरोप लगाने वाली वर्तमान महापौर श्रीमती अलका बाघमार के सामने अब वही मामला निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। बस स्टैंड जैसे अति-व्यस्त और बेशकीमती इलाके में संचालित राम रसोई का एक वर्ष का अस्थायी अनुबंध समाप्त हुए लगभग तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन न तो संस्था पर कोई कार्रवाई हुई और न ही अवैध कब्जों को हटाया गया। विभागीय जानकारी अनुसार अब राम रसोई के संचालकों द्वारा पुनः समय-सीमा बढ़ाने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर दिया गया है, जिस पर अंतिम निर्णय नगर निगम की MIC (मेयर इन काउंसिल) को लेना है।

   गौरतलब है कि जिस राम रसोई को पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बिना पंजीकरण संस्था को अस्थायी स्थान दिया गया था, उसी अनियमितता के लिए वर्तमान महापौर ने पूर्व महापौर को सार्वजनिक रूप से जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन आज जब अनुबंध खत्म हो चुका है और नियमों के उल्लंघन के बावजूद संस्था का संचालन जारी रहा, तब बाजार विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। नियमों के अनुसार केवल पंजीकृत संस्थाओं को ही इस प्रकार की सुविधा दी जा सकती है, बावजूद इसके न तो समय पर कार्रवाई हुई और न ही अवैध अतिक्रमण हटाए गए।   

    स्थिति यह है कि राम रसोई की आड़ में बस स्टैंड की लगभग उतनी ही अतिरिक्त जमीन पर अन्य लोगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है, जिससे यातायात दबाव, पार्किंग अव्यवस्था और आम नागरिकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं, गणेश मंदिर के सामने सड़क पर कथित रूप से किए गए अवैध निर्माण ने एक पुराने मंदिर को पूरी तरह ढक दिया है, लेकिन इस पर भी निगम प्रशासन सहित धर्म के रक्षक भी मौन है जो कही ना कही धनवानों के आगे नतमस्तक नजर आ रहे है की चुप्पी सवालों के घेरे में है।

    राजनीतिक और नैतिक प्रश्न तब और गहरे हो जाते हैं जब राम रसोई के संचालक(संरक्षक) चतुर्भुज राठी और शहरी सरकार की मुखिया श्रीमती अलका बाघमार का एक साथ मंच साझा करना सामने आता है। इससे यह संकेत मिलता है कि जिन अनियमितताओं पर पहले आरोप लगाए गए, उन्हीं मामलों में अब शहरी सरकार असहज या बेबस नजर आ रही है।
अब गेंद पूरी तरह MIC के पाले में है। परिषद के 12 सदस्य, जिन्हें शहरी सरकार के ‘मंत्री’ कहा जाता है, यह तय करेंगे कि क्या शासन के नियमों के विरुद्ध एक गैर-पंजीकृत संस्था को फिर से बस स्टैंड जैसी कीमती जमीन मुफ्त या रियायती रूप में दी जाएगी, या फिर जनहित, यातायात व्यवस्था और नियमों की मर्यादा को प्राथमिकता दी जाएगी।

   पुरानी सरकार पर आरोप लगाना आसान था, लेकिन अब जब फैसला वर्तमान शहरी सरकार के हाथ में है, तो जनता यह देखना चाहती है कि क्या महापौर और MIC जनहित में कठोर निर्णय लेंगे या फिर पूर्व सरकार की कथित गलतियों को दोहराते हुए हर चूक का ठीकरा एक बार फिर अतीत पर फोड़ा जाएगा।

परिषद की बैठक न सिर्फ राम रसोई के भविष्य का, बल्कि शहरी सरकार की नीयत और नीति का भी आईना साबित होगी।

चंद्रमा मकर राशि में, कर्म–अनुशासन से तय होगी सफलता

20 जनवरी 2026, मंगलवार।
आज माघ गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है। चंद्रमा अपनी स्वराशि मकर में विराजमान हैं, जो कर्म, अनुशासन और जिम्मेदारी को मजबूती प्रदान करता है। आज सिद्धि योग और द्विपुष्कर योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो किए गए कार्यों में दीर्घकालीन सफलता और दोगुना फल देने वाला माना जाता है।


आज का पंचांग व ग्रह स्थिति

  • तिथि: माघ शुक्ल द्वितीया

  • नक्षत्र: श्रवण

  • योग: सिद्धि योग, द्विपुष्कर योग

  • चंद्र राशि: मकर (शनि की राशि)


राशिफल: जानिए किस राशि को क्या मिलेगा

♈ मेष राशि — करियर में उछाल

लाभ: निवेश से भविष्य में दोगुना लाभ, अधिकारियों से प्रशंसा।
सावधानी: वाणी पर संयम रखें, गोपनीय बातें साझा न करें।

♉ वृषभ राशि — सुख-समृद्धि का योग

लाभ: वाहन या संपत्ति खरीद के योग, प्रेम संबंध मजबूत होंगे।
सावधानी: फिजूलखर्ची से बचें।

♊ मिथुन राशि — मानसिक उतार-चढ़ाव

लाभ: विदेश या लंबी यात्रा के योग, रचनात्मक लोगों को मंच मिलेगा।
सावधानी: मानसिक तनाव से बचें, विवादों से दूरी रखें।

♋ कर्क राशि — व्यापारिक सूझबूझ

लाभ: साझेदारी में लाभ, जीवनसाथी के नाम निवेश शुभ।
सावधानी: पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है।

♌ सिंह राशि — शत्रुओं पर विजय

लाभ: कोर्ट-कचहरी में सफलता, कर्ज से राहत।
सावधानी: अहंकार से बचें, बुजुर्गों की सलाह मानें।

♍ कन्या राशि — संतान सुख

लाभ: विद्यार्थियों के लिए श्रेष्ठ दिन, शुभ समाचार मिल सकता है।
सावधानी: रिश्तों में संवाद बनाए रखें।

♎ तुला राशि — पारिवारिक चुनौतियां

लाभ: घर-सजावट, माता से आर्थिक सहयोग।
सावधानी: बीपी व तनाव से बचें, बहस न करें।

♏ वृश्चिक राशि — पराक्रम में वृद्धि

लाभ: साहस बढ़ेगा, मीडिया व मार्केटिंग से जुड़े लोगों को लाभ।
सावधानी: दस्तावेज बिना पढ़े साइन न करें।

♐ धनु राशि — धन संचय

लाभ: बैंक बैलेंस बढ़ेगा, पैतृक विवाद सुलझेगा।
सावधानी: खानपान में संयम रखें।

♑ मकर राशि — व्यक्तित्व में निखार

लाभ: रुके कार्य पूरे होंगे, सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा।
सावधानी: जिद से रिश्तों में खटास आ सकती है।

♒ कुंभ राशि — खर्च व निवेश

लाभ: दान-पुण्य से मानसिक शांति, व्यापार में लाभ।
सावधानी: उधार देने से बचें, आंखों का ध्यान रखें।

♓ मीन राशि — आय के नए स्रोत

लाभ: आय में वृद्धि, मित्र या बड़े भाई से बड़ा अवसर।
सावधानी: सफलता का दिखावा न करें।


आज के विशेष उपाय

  • मंगलवार विशेष: हनुमान चालीसा का पाठ करें, चमेली तेल में सिंदूर अर्पित करें।

  • गुप्त नवरात्रि (द्वितीया): माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करें—संयम व तप की शक्ति मिलेगी।

  • दान: मूंग की दाल या लाल वस्त्र का दान शुभ।


शुभ रंग: लाल, गहरा नीला

शुभ अंक: 1, 8, 9

आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर / आदिवासी बहुल एवं कृषि आधारित आजीविका वाले जिले मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी की ग्राम पंचायत करमरी में सोमवार को वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फ़ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन- ग्रामीण) के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर 'आत्मनिर्भर गांव - विकसित भारत' का संदेश दिया गया। इस दौरान योजना के प्रति उत्साह और सामुदायिक सहभागिता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वर्जेंस आधारित आजीविका डबरी जैसे कृषि, मछली तालाब निर्माण कार्यों का अवलोकन किया गया। ये कार्य कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सीआरईडीए एवं वन विभाग के आपसी समन्वय से तैयार कार्ययोजना के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। इन आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आदिवासी एवं सीमांत किसानों को स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह ने ग्रामीणों को वीबी-जीराम जी योजना के उद्देश्यों, स्थानीय रोजगार सृजन और कन्वर्जेंस मॉडल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सक्रिय सहभागिता, पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व के बिना किसी भी योजना की सफलता संभव नहीं है, वीबी-जी राम जी इन मूल सिद्धांतों पर आधारित है।
कार्यक्रम के दौरान हितग्राही श्री विनोद कुमार एवं श्री दलपत साई मेहरू राम को मछली जाल का वितरण किया गया। इससे मछली पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति उत्साह बढ़ेगा। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से वे मछली पालन के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती भी करेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी।ग्रामीणों ने वीबी-जीराम जी योजना को आदिवासी बहुल, कृषि-आधारित जिले के लिए सर्वांगीण विकास और
आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी भारत विकसित बनेगा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
कार्यक्रम में जिल पंचायत सीईओ श्रीमती भारती चंद्राकर,जनप्रतिनिधि श्री दिलीप वर्मा, पंचायत प्रतिनिधिगण, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर की प्रशंसा
करमरी के इस कार्यक्रम की प्रशंसा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट द्वारा करते हुए कार्यक्रम के फोटोग्राफ्स और वीडियो को भी शेयर किया गया है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में उत्कृष्ट क्रियान्वयन पर मिला राष्ट्रीय सम्मान

रायपुर ।
छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित करते हुए कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के उत्कृष्ट और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य घोषित किया गया है। इस उपलब्धि के लिए उद्यानिकी एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

यह प्रतिष्ठित सम्मान बेंगलुरु (कर्नाटक) में 18-19 जनवरी 2026 को आयोजित 13वें नेशनल रिव्यू कांफ्रेंस के दौरान प्रदान किया गया। सम्मेलन में देशभर के राज्यों द्वारा फसल बीमा योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई, जिसमें छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ पाया गया।

राज्य सरकार की इस उल्लेखनीय सफलता पर मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री ने उद्यानिकी एवं कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को हार्दिक बधाई देते हुए इसे राज्य के किसानों के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है।

सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की ओर से उद्यानिकी विभाग के प्रभारी संयुक्त संचालक श्री नीरज शाहा ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के मार्गदर्शन और विभागीय टीम के सामूहिक प्रयासों से यह सफलता संभव हो सकी है।

यह राष्ट्रीय सम्मान न केवल राज्य सरकार की कृषि नीतियों की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि छत्तीसगढ़ किसानों की सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और आय स्थिरता के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है।

रायपुर, /
बस्तर में इमली की चटनी को काफी पसंद किया जाता है l यह चटनी खाने में बहुत स्वादिष्ठ होती है l सुकमा जिले में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बस्तर की प्रसिद्ध इमली से तैयार “इमली चटनी” को वन धन विकास केंद्र सुकमा के माध्यम से आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जा रहा है। यह उत्पाद स्थानीय वनोपज का मूल्य संवर्धन करने के साथ-साथ बस्तर की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास है।

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा किए गए अनुसंधान और गुणवत्ता मानकों के आधार पर यह चटनी तैयार की जा रही है। वन धन विकास केंद्र से जुड़ी नवा बिहान महिला स्व सहायता समूह की महिलाएँ इस चटनी के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं को निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता मानक, वैज्ञानिक विधि तथा आधुनिक पैकेजिंग संबंधी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और समूह की महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। बस्तर संभाग में इमली की अधिकता को देखते हुए यह पहल स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
इमली चटनी के उत्पादन से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। वन विभाग की यह पहल महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

आने वाले समय में यह उत्पाद न केवल छत्तीसगढ़ के घरों का स्वाद बढ़ाएगा, बल्कि सुकमा की महिलाओं की मेहनत और सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  दुर्ग, / महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013 एवं शी-बॉक्स पोर्टल के संबंध में प्रशिक्षण सह कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन 19 जनवरी 2026 को शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग एवं छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में किया गया।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को प्रत्येक कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति एवं जिला स्तर पर स्थानीय शिकायत समिति के गठन की अनिवार्यता की जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी भी महिला के साथ कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की स्थिति में वह संबंधित कार्यालय की आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष या शी-बॉक्स पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकती है। साथ ही समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार शिकायत प्राप्त होने पर की जाने वाली कार्रवाई की प्रक्रिया भी समझाई गई।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी शासकीय एवं निजी संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति का गठन नहीं करने पर 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही सभी कार्यालयों को अपनी आंतरिक शिकायत समिति को शी-बॉक्स पोर्टल पर ऑनबोर्ड करने के निर्देश दिए गए।
इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बाल विवाह प्रतिषेध, सखी वन स्टॉप सेंटर एवं महिला सशक्तिकरण केंद्र की योजनाओं की भी जानकारी दी गई। कार्यशाला में महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, आंतरिक शिकायत समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य तथा छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

  दुर्ग, / भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के लिबरल आर्ट्स विभाग ने 15-16 जनवरी 2026 को नालंदा लेक्चर हॉल, आईआईटी भिलाई में "जेंडर मोडालिटीस ऑफ़ रेमेम्बेरिंग इन साउथ एशिएन लिटरेचर" शीर्षक पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह भारत के विश्वविद्यालयों के संकाय सदस्यों और शोध विद्वानों को दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक और साहित्यिक संदर्भों में लिंग और सन्निहित अभ्यास के रूप में स्मृति की खोज पर अपने शोध को साझा करने के लिए एक साथ लाया।
सम्मेलन की शुरुआत जामिया मिलिया इस्लामिया की प्रोफेसर सिमी मल्होत्रा के एक मुख्य व्याख्यान के साथ हुई, जिसका शीर्षक था "भारत में महिला आंदोलनों की दो शताब्दियों को याद करना: स्मृति और नारीवादी इतिहासलेखन की पुनर्विचार"। व्याख्यान में स्मृति के लेंस के माध्यम से नारीवादी इतिहासलेखन की जांच की गई, दो शताब्दियों में महिलाओं के आंदोलनों की खोज की गई और दक्षिण एशिया में लैंगिक इतिहास को सुनाने में एक महत्वपूर्ण अभ्यास के रूप में याद किया गया। सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत सेंट मीरा कॉलेज फॉर गर्ल्स, पुणे के वाइस प्रिंसिपल डॉ. स्नोबर सतारावाला के मुख्य भाषण के साथ हुई, जिसका शीर्षक था "रिमेम्बरिंग द मार्जिन: जेंडर, माइनॉरिटी मेमोरी, एंड द पॉलिटिक्स ऑफ रिप्रेजेंटेशन इन साउथ एशियन लिटरेचर"। उन्होंने यह पता लगाने के लिए व्यापक सिनेमाई, पाठ्य और मौखिक आख्यानों को आकर्षित किया कि अल्पसंख्यक समुदायों को कैसे याद किया जाता है या मिटाया जाता है, हाशिए के इतिहास और याद रखने के विभिन्न तरीकों को पुनर्प्राप्त करने में साहित्य की भूमिका को रेखांकित करता है।
पूरे सम्मेलन में पांच विषयगत पैनलों में अकादमिक चर्चा हुई। उद्घाटन पैनल ने लैंगिक आवाज और स्वदेशी सौंदर्यशास्त्र पर ध्यान केंद्रित किया, लोक और आदिवासी कला प्रथाओं को स्मृति के सन्निहित और जीवित अभिलेखागार के रूप में जांचा। इसके बाद हिंसा के लैंगिक प्रति-आख्यानों पर एक पैनल का आयोजन किया गया, जिसने जांच की कि साहित्यिक और सांस्कृतिक ग्रंथ आधिकारिक इतिहासलेखन से परे जाने वाले तरीकों से अस्तित्व, प्रतिरोध और भावात्मक स्मृति को कैसे व्यक्त करते हैं। बाद की चर्चाएं भेद्यता, जाति और पहचान के सवालों पर केंद्रित हो गईं, तीसरे पैनल ने साहित्यिक साक्ष्यों और कथात्मक स्मृति में जाति और लिंग के प्रतिच्छेदन पर प्रकाश डाला। चौथे पैनल ने रिश्तेदारी, घरेलूता और राष्ट्रीय स्मृति को ध्यान में लाया, मातृ विरासत, रोजमर्रा के स्थानों और कर्तव्य की लैंगिक धारणाओं का विश्लेषण किया। सम्मेलन स्मृति की डायजेटिक और स्थानीय भाषा की अभिव्यक्तियों पर एक पैनल के साथ संपन्न हुआ, जिसने वैकल्पिक निमोनिक रिपॉजिटरी की खोज की जो याद रखने के प्रमुख, पाठ-केंद्रित रूपों को चुनौती देते हैं।
सामूहिक रूप से, इन पैनलों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे लैंगिक स्मृति अवतार, प्रभाव, सामाजिक-सांस्कृतिक पदानुक्रम और कथा रूप जैसे कारकों द्वारा आकार दिए गए एक सक्रिय अभ्यास के रूप में कार्य करती है। सम्मेलन में हाशिए पर रहने वाली आवाज़ों को बढ़ाने और दक्षिण एशिया में स्मरण के प्रमुख तरीकों को चुनौती देने वाले प्रति-आख्यान बनाने में साहित्य और सांस्कृतिक ग्रंथों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

मृतकों के परिजनों को 5 लाख एवं घायलों को 50 हजार की सहायता

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बलरामपुर के समीप हुई बस दुर्घटना पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने इस हृदयविदारक हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि शोक की इस घड़ी में छत्तीसगढ़ शासन पीडि़त परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस दुर्घटना में मृत 10 व्यक्तियों के परिजनों को ?5 लाख तथा घायल व्यक्तियों को ?50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। यह सहायता राशि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही तत्काल राहत एवं बीमा आदि से मिलने वाली राशि के अतिरिक्त होगी।
मुख्यमंत्री साय ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दुर्घटना में घायल सभी व्यक्तियों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न हो तथा उन्हें बेहतर से बेहतर चिकित्सकीय सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही सड़क सुरक्षा के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए हरसंभव और प्रभावी उपाय सुनिश्चित किए जाएँ।
मुख्यमंत्री साय ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

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