August 08, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    धमतरी / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर द्वारा आयोजित हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी/हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक परीक्षा सत्र 2020-21 के नियमित परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा आवेदन पत्र निर्धारित शुल्क के साथ 15 दिसम्बर तक एवं कक्षा नवमीं के परीक्षार्थियों के पंजीयन की तिथि 30 नवम्बर नियत की गई थी। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कोविड 19 के संक्रमण की वजह से कक्षा दसवीं एवं बारहवीं के कई विद्यार्थी निर्धारित तिथि तक आवेदन पत्र नहीं भरे जाने एवं प्राचार्यों से प्राप्त आवेदनों को ध्यान में रख परीक्षा आवेदन पत्र एवं कक्षा नवमीं के परीक्षार्थियों के पंजीयन के लिए पूर्व अंतिम तिथि 15 दिसम्बर में आंशिक संशोधन करते हुए अब अंतिम तिथि 31 दिसम्बर निर्धारित की गई है।
    उन्होंने सभी शासकीय/अशासकीय/अनुदान प्राप्त हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी/हायर सेकेण्डरी व्यावसायिक परीक्षा सत्र 2020-21 के नियमित परीक्षार्थियों (कक्षा दसवीं/बारहवीं) के लिए परीक्षा आवेदन पत्र तथा कक्षा नवमीं के परीक्षार्थियों के लिए पंजीयन फाॅर्म अंतिम तिथि 31 दिसम्बर तक अनिवार्यतः भरवाना सुनिश्चित करें।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के निधन के बाद खाली हुई उनकी राज्यसभा सीट अब बी जे पी के खाते में जाएगी. इस सीट पर साल 2017 में हुए चुनाव में बामुश्किल अहमद पटेल ने जीत दर्ज की थी. बीते महीने एक निजी अस्पताल में 71 वर्षीय पटेल का निधन हो गया था. वह पांच बार राज्यसभा के लिए चुने जा चुके थे. 25 नवंबर को उनके निधन वाले दिन ही इस सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था. उनका कार्यकाल 18 अगस्त, 2023 तक था.
    एक और राज्यसभा सदस्य अभय भारद्वाज के निधन के बाद उनकी सीट रिक्त घोषित कर दी गई. भारद्वाज का कार्यकाल 21 जून, 2026 तक था. चुनाव आयोग ने दोनों रिक्त सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराने का फैसला किया. जिसके बाद दोनों ही सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों का चुना जाना लगभग तय है.
    गुजरात के सियासी समीकरण की बात करें तो राज्य में बीजेपी के 111 विधायक हैं, वहीं कांग्रेस के 65 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 50 फीसदी वोट या 88 वोट जरूरी हैं. पिछले साल इसी तरह बीजेपी ने अमित शाह और स्मृति ईरानी द्वारा खाली की गईं सीटों पर भी विजय हासिल की थी. 2019 में एक सीट पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जीत दर्ज की थी. उनके चुनाव को कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
    अहमद पटेल गुजरात से आए राजनेता थे, जो राष्ट्रीय पटल पर पहली बार तब दिखे थे, जब राजीव गांधी ने 1985 में उन्हें अपने तीन संसदीय सचिवों में स्थान दिया. वे तीन लोग थे- अरुण सिंह, अहमद पटेल और ऑस्कर फर्नांडिस. राष्ट्रीय स्तर पर कुछ ही वक्त के लिए मिली उस पहचान के बाद उनके करियर में काफी उतार-चढ़ाव आए और कुछ बार तो उतार काफी गंभीर रहे.
    अहमद पटेल का भाग्य तब बदला, जब कांग्रेस पार्टी की बागडोर सोनिया गांधी ने संभाली और विश्वस्त लोगों की खोज शुरू की. राजीव गांधी की टीम में होना अहमद पटेल को सोनिया गांधी के शुरुआती सालों में बहुत काम आया, क्योंकि सोनिया का मानना था कि वह उदारवाद तथा धर्मनिरपेक्षवाद के कांग्रेस के आधारभूत मूल्यों के प्रति कटिबद्ध हैं, इसलिए पटेल सटीक पसंद साबित हुए.

    होशंगाबाद / एजेंसी / पिछले दिनों मध्य प्रदेश और केन्द्र सरकार ने जोर-शोर से प्रचार किया था कि होशंगाबाद जिले के पिपरिया अनुमंडल में कैसे नया कृषि कानून किसानों के हितों की रखवाली करने वाला बनकर उभरा है और कैसे प्रशासन ने फौरन कार्रवाई करते हुए किसानों को नए कानून के तहत 24 घंटे के अंदर न्याय दिलाया? कैसे किसानों से अनुबंध के बावजूद फॉर्चून राईस लिमिटेड ने धान नहीं खरीदी तब एसडीएम कोर्ट ने नए कृषि कानून "किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) अनुबंध मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020" (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग अधिनियम) के प्रावधान के अनुसार कंपनी को खरीद के आदेश दिए? लेकिन क्या ये हकीकत है, क्या वाकई किसानों को न्याय मिला? अनुराग द्वारी की ग्राउंड रिपोर्ट से सरकारी दावों की हकीकत जानिए, उन्हीं किसानों की जुबानी, जिनके नाम पर ये प्रचार किया गया.
    भौंखेड़ी कलां के पुष्पराज सिंह, जिनकी शिकायत पर ही कार्रवाई हुई थी, ने 40 एकड़ में धान लगाया था... वैसे स्पष्ट कर दें कि ये कांग्रेस के पदाधिकारी रहे हैं. मुख्यमंत्री ने भी इनके नाम का जिक्र किया था. पुष्पराज का कहना है कि किसान उनके उदाहरण से सबक ले सकते हैं, वो कभी अनुबंध पर खेती की सलाह नहीं देंगे. वो अब नये कृषि कानूनों का विरोध करते हैं. सिंह ने कहा, "हम पिछले 4 साल से खेती कर रहे हैं लेकिन अनुबंध पर कभी दिक्कत नहीं आई. इस साल करार ये था कि मंडी का जो भी रेट होगा, उससे 50 रु. अधिक पर लेंगे. जब रेट 2300-2400 रुयपे था, तब दिक्कत नहीं थी. जैसे ही 2950 रेट निकला वैसे ही 3000 पर खरीदी करना था लेकिन फॉर्चून के अलावा जितनी कंपनियां थीं, सबके फोन बंद हो गये.
    पुष्पराज ने कहा, "मुख्यमंत्री शिवराज जी जो कह रहे हैं कि न्याय दिलाया, न्याय की बात तो तब आती जब कंपनी ने बेईमानी की होती या वो हमारी गिरफ्त से भाग गई होती तो किससे न्याय दिलाया? हमारा जो बिल है वो अन्नपूर्णा ट्रेडर्स के नाम पर है लेकिन इस पर ना तो बिल नंबर है, ना टिन नंबर. इसमें सबसे बड़ा नुकसान ये भी है कि वो दवा की जो किट देते हैं, वो भी लेना है चाहे उसकी ज़रूरत हो या नहीं हो. इधर ज्यादा दे रहे हो, उधर दवा के माध्यम से ज्यादा वसूल भी रहे हो." पुष्पराज ने कहा कि सरकार कह रही है कि किसान कहीं भी माल ले जाकर बेच सकते हैं लेकिन जब 200 क्विंटल धान पैदावार हुई तो क्या हम उसे बेचने केरल जाएंगे. उन्होंने कहा कि छोटे किसान अनुंबध की खेती में बर्बाद हो जाएंगे, पंजाब में आंदोलन चल रहा है इसलिये घबराहट में शिवराज जी ट्वीट कर रहे हैं.
    गाड़ाघाट के ब्रजेश पटेल, इन्होंने भी फॉर्चून कंपनी से अनुबंध किया था. 20 एकड़ में धान लगाया था, अब अपने खलिहान में रखने को मजबूर हैं. कंपनी ने धान उठाने से मना कर दिया ये कहकर कि धान में हैक्सा ( एक किस्म के कीटनाशक) की मात्रा आ गई है. 2 बार लैब टेस्ट करवाया लेकिन एक बार भी रिपोर्ट नहीं दी. आरोप है इस बार रिपोर्ट देने के बदले 8000 रुपये मांग रहे हैं. ब्रजेश का कहना है कि कंपनी बहाने बना रही है, अब कभी अनुबंध नहीं करेंगे. ये पूसा-वन क्वॉलिटी का धान उगाते हैं, अब कह रहे हैं मंडी में ही बेचेंगे, मंडी में आश्वासन रहता है.
    पटेल ने कहा कि जो अनुबंध मिला वो एक पन्ने का है, जिसमें कंपनी का कोई सील-हस्ताक्षर नहीं हैं, जिस दुकान से दवा-खाद लेते हैं उसका नाम है लेकिन हस्ताक्षर उसके भी नहीं. उन्होंने कहा कि कंपनी का कोई प्रतिनिधि बात भी नहीं करता. पटेल ने कहा कि अनुबंध का फायदा ये होता कि हमें उपज मंडी नहीं ले जाना पड़ता लेकिन अब ये ठग रहे हैं. हालांकि, पिछली बार धान का रेट कम था तो फायदा हुआ था. नए कानून के बाद ये देखने को मिल रहा है कि उसका कोई फायदा नहीं, अब धोखाधड़ी हो रही है. जब बड़े पैमाने पर कानून लागू होगा तो बहुत नुकसान होगा.
    इसी गांव के किसान घनश्याम पटेल ने दूसरी कंपनी वीटी के साथ अनुबंध किया. इनका धान भी कंपनी ने रिजेक्ट कर दिया है. अनुबंध के नाम पर एक पन्ने के भी कागज नहीं है. कहते हैं ये खाद, दवा, कीटनाशक की पर्ची ही इनके लिये अनुबंध का सर्टिफिकेट था, अब कहते हैं मंडी में ही धान बेचेंगे. घनश्याम ने कहा कि कंपनी वालों ने कोई कागज नहीं दिया, आधार कार्ड की फोटोकॉपी ली थी. वीटी वालों के एजेंट आते हैं. पिछले साल फॉर्चून से अनुबंध किया था. कोई कागज़ नहीं है हमारे पास शिकायत करने के लिये. मोदीजी से कह रहे हैं कि अगर मंडियां खुली रहेंगी तो वहां बेच लेंगे, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग आया तो हम जैसे किसान बर्बाद हो जाएंगे, जब पिपरिया वाले हमारे साथ ऐसा कर रहे हैं तो बाहर वालों पर तो हमें कोई भरोसा नहीं है.

    गाड़ाघाट के कई किसानों की व्यथा एक जैसी है, कुछ का धान खरीदा गया है, कुछ का नहीं. किसान कहते हैं दो तीन साल से दाम चढ़े नहीं थे तो खरीद में कोई दिक्कत नहीं थी. इस साल जैसे ही 2950 का रेट मंडी में गया, कंपनी के प्रतिनिधियों ने फोन बंद कर दिया. ऐसे कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग से अब वो तौबा करते हैं.
    आपबीती सुनाने वाले सारे किसानों ने जिसकी दुकान से अनुबंध का फॉर्म लिया था वो हैं, आशीष सोडानी. ये किरदार इस कहानी में बहुत अहम है. कई किसानों के अनुबंध पर इनका नाम है, हस्ताक्षर या सील नहीं. ये फॉर्चून के मुलाजिम नहीं है. पिपरिया में खाद, बीज की एग्रो सर्विस सेंटर के नाम से बड़ी दुकान है. ये कहते हैं कंपनी इनके और किसानों के रिश्तों को भुना रही थी, इस घटना से सबक मिला है. अब वो भी ऐसे अनुबंध के भागीदार नहीं होंगे. सोडानी कहते हैं, "कंपनी को सीधे किसान से बात करने में आसानी नहीं होती, उन्हें किसानों पर भरोसा नहीं होता है इसलिए यहां हमारी भूमिका होती है. इस बार मुझे भी डर लगा है, कानूनी रूप से लिखा हुआ ज्यादा अच्छा होता है."
    पिपरिया में किसानों के नाम पर वाहवाही लूटने वाले एसडीएम साहब और कलेक्टर साहब से जब एनडीटीवी संवाददाता ने ये पूछने की कोशिश की कि नया कानून सितंबर के आखिरी हफ्ते में लागू हुआ और कॉन्ट्रैक्ट जून-जुलाई में ही हो गया था तो आखिर सरकार जो नए कानून का ढिंढोरा पीट रही है क्या वो कानून संसद से पारित होने और राष्ट्रपति का हस्ताक्षर लागू होने से पहले हा लागू हो गया? कलेक्टर साहब को कई बार फोन लगाया, मैसेज किया.. उनके दफ्तर में घंटा भर बैठे रहे लेकिन वो नहीं मिले और जवाब नहीं दे सके.
    खैर कृषि मंत्री से बात हो गई. वो खुद मानते हैं कि लालफीताशाही है. अब जब कृषि मंत्री लाल फीताशाही का रोना रोते हैं तो पिपरिया के किसी भौंखेड़ी कलां या गाड़ाघाट के किसान की क्या हैसियत होगी ये समझना मुश्किल नहीं है. कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा. "लड़ाई लड़ना पड़ता है, ये सिस्टम जो है लालफीताशाही बहुत खतरनाक है. हम किसानों को विश्वास दिला रहे हैं, एक्ट के अंदर जो समझौता होगा किसान सोच समझकर करें. दोनों के लिये बाध्य होगा. पिपरिया में जैसे ही एसडीएम ने राय मांगी हमने फौरन दी फिर कार्रवाई हुई. किसानों को ऐसे अनुबंध नहीं करना चाहिये. किसानों के हित में होगा, हर चीज किसान के लिये होगी ये किसानों की सरकार है हम न्याय दिलाएंगे.

    नई दिल्ली /शौर्यपथ /नयागढ़ / ओडिशा के नयागढ़ में पांच साल की बच्ची की हत्या के मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल के प्रमुख अरुण बोथरा ने मंगलवार को कहा कि इस सिलसिले में गिरफ्तार आरोपी युवक ने बच्ची का गला दबा कर उसकी हत्या करने के बाद शव के साथ बलात्कार किया था. संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बोथरा ने कहा, ‘‘आरोपी युवक को बाल पोर्नोग्राफी का नशा था और बच्ची ने दुष्कर्म का विरोध किया तो युवक ने उसका गला दबा दिया, लेकिन उसने बच्ची के शव के साथ बलात्कार किया.''
    वहीं आरोपी की मां और बहन तथा बच्ची के अभिभावक भी विशेष जांच दल के दावे को खारिज कर रहे हैं. आरोपी की मां ने अपने बेटे को ‘निर्दोष' बता रही हैं वहीं पीड़ित बच्ची की मां ने भी आरोपी को ‘अच्छा व्यक्ति' करार दिया है.
    इसी बीच युवक की मां ने नयागढ़ सदर पुलिस थाने में लिखित शिकायत दी है कि उनके ‘निर्दोष' बेटे को एसआईटी ने गिरफ्तार किया है. उनका दावा है कि बोथरा ने उनके बेटे को अपराध स्वीकार करने के बदले पांच लाख रुपये नकद की राशि देने का वादा किया था. उन्होंने दावा किया है कि उनके बेटे को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / इस वक्त जब देश में शादी के बाद धर्म परिवर्तन को लेकर बहस छिड़ी हुई है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की है कि अगर कोई वयस्क लड़की अपनी पसंद से शादी और धर्म परिवर्तन करती है तो इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहा था कि जिसमें पिता ने दावा किया था कि उसकी बेटी को दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी करने के लिए गलत तरीके से प्रभावित किया गया है.
    याचिकाकर्ता ने अपनी 19 वर्षीय बेटी के अपनी पसंद के एक व्यक्ति से शादी करने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर शिकायत की थी कि उसकी बेटी ने मजिस्ट्रेट के सामने जो बयान दर्ज कराया है, वह हो सकता है कि ऐसे माहौल में दर्ज न कराया गया हो, जिसमें वह सहज महसूस कर रही हो. पिता के एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने युवती को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था. युवती ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है.
    न्यायमूर्ति संजीव बनर्जी और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की बेंच ने सोमवार को कहा, 'अगर कोई वयस्क अपनी पसंद से शादी करती है और धर्म परिवर्तन का फैसला करती है और अपने पिता के घर लौटने से इनकार कर देती है, तो ऐसे मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता.'
    पिता की शिकायत पर अदालत ने आदेश दिया कि युवती की तेहट्टा में वरिष्ठतम अतिरिक्त जिला न्यायाधीश से मुलाकात कराई जाए और इस बात का पूरा ख्याल रखा जाए कि उस पर कोई अनुचित दबाव न बनाया जाए. बेंच ने कहा कि अतिरिक्त जिला जज की स्पष्ट रिपोर्ट के बावजूद इस मामले में पिता संदेह जता रहे हैं.
    याचिकाकर्ता का पक्ष रख रही वकील सुष्मिता साहा दत्ता ने डिवीजन बेंच के सामने दावा किया कि जब युवती नदिया में जज के सामने पेश हुई थी तो उसका पति कोर्ट परिसर में ही मौजूद था.
    बेंच ने आदेश दिया कि पिता के संदेहों को दूर करने के लिए युवती अतिरिक्त सरकारी वकील सईबल बापुली से 23 दिसंबर को उनके चैंबर में मिलेगी. बापुली मामले में राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. कोर्ट ने आदेश दिया है कि बयान दर्ज कराते वक्त कमरे में महिला के पति के साथ-साथ और कोई भी नहीं होगा. कोर्ट ने बापुली को 24 दिसंबर को फिर से सुनवाई के लिए बयान पर एक रिपोर्ट फाइल करने को कहा है.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / पिछले सात महीने से भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा पर तनातनी और गतिरोध के बीच सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवने ने बुधवार को पूर्वी लद्दाख में विभिन्न उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों का दौरा किया और भारत की समग्र सैन्य तैयारी की समीक्षा की. सेना के आधिकारिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है. सेना ने कहा कि जनरल नरवणे ने नियंत्रण रेखा से सटे रिचिन ला सहित पूर्वी लद्दाख की अग्रिम चौकियों और क्षेत्रों का दौरा किया और लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ मौजूदा स्थिति का जायजा लिया.
    पूर्वी लद्दाख के विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों और तीव्र उंचाई वनाले स्थानों पर भारतीय सेना के करीब 50,000 जवान शून्य डिग्री तापमान में तैनात हैं जो युद्ध की स्थिति में तत्परता से जवाब देने को सक्षम हैं. सूत्रों के मुताबिक चीन ने भी इतनी ही संख्या में वहां सैनिक तैनात कर रखे हैं.
    इस मौके पर लेह स्थित 14वीं कोर कमांड जिसे 'फायर एंड फ्यूरी' कोर के रूप में जाना जाता है, के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने पूर्वी लद्दाख में स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर सेना प्रमुख को जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि सेना प्रमुख एक दिन के लेह दौरे पर आज सुबह 8.30 बजे लद्दाख पहुंचे. उनके दौरे का मुख्य मकसद कड़ाके की ठंड के बीच इलाके में वस्तुस्थिति का जायजा लेना था.
    सेना ने कहा कि जनरल नरवाने ने दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों से बातचीत की और उनकी हौसला आफजाई की. सेना प्रमुख ने सैनिकों से 'समान उत्साह' के साथ काम करते रहने को प्रेरित किया.

    सेहत / शौर्यपथ / चने सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। यदि आप वेजिटेरियन हैं तो आपके लिए चने प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत हैं। लेकिन इसके फायदे तब और ज्यादा बढ़ जाते हैं, जब हम इन्हें भिगोकर खाएं यानी अंकुरित करके अपनी डाइट में यदि चने को शामिल किया जाए तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हेल्दी फूड बन जाता है।
    चनों को अंकुरित करके खाने से यह सुपर फूड कई पौष्टिक गुणों का भंडार बन जाता है।
    अंकुरित चने खाने से आप अपने वजन को भी नियंत्रण में रख सकते हैं। इससे मोटापा बढ़ने जैसी परेशानियों से राहत मिल जाती है। अब आप सोच रहे होंगे वो कैसे, क्योंकि चने के सेवन से पेट भरा-भरा-सा लगता है और जल्दी भूख नहीं लगती है, ऐसे में हम कम ही खाना खाते हैं जिससे कि हमारा वजन कंट्रोल में रहता है।
    अंकुरित चने में प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है, साथ ही इसमें फेट की मात्रा भी कम होती है।
    चने के सेवन से आप अपनी हड्डियों और दांतों को मजबूत रख सकते हैं, क्योंकि इसमें कई प्रकार के विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं।
    इसमें आयरन और सोडियम सहित और भी कई पौष्टिक पदार्थ होते हैं, जो आपके शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होंगे।
    अंकुरित चने के सेवन से यानी जब आप चने को भिगोकर खाते हैं, तब यह आपकी त्वचा और बालों को स्वस्थ रखने में भी बहुत मदद करता है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो बढ़ती उम्र के साथ-साथ त्वचा पर जो प्रभाव पड़ता है उसे कम करते हैं, साथ ही यह बालों के लिए भी बेहतरीन है।
    यंग दिखना चाहते हैं तो इसका सेवन नियमित रूप से करें। बालों और आपकी त्वचा को जरूरी नमी मिल जाती है।
    अंकुरित चना आपके शरीर के ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

    सेहत / शौर्यपथ / ध्यान को अंग्रेजी में मेडिटेशन कहते हैं, परंतु धर्म की ही तरह इसका कोई प्रॉपर अंग्रेजी शब्द नहीं है। खैर, जब आंखें बंद करके बैठते हैं तो अक्सर यह शिकायत रहती है कि जमाने भर के विचार उसी वक्त आते हैं। अतीत की बातें या भविष्य की योजनाएं, कल्पनाएं आदि सभी विचार मक्खियों की तरह मस्तिष्क के आसपास भिनभिनाते रहते हैं। इससे कैसे निजात पाएं? माना जाता है कि जब तक विचार है तब तक ध्यान घटित नहीं हो सकता। अब कोई मानने को भी तैयार नहीं होता कि निर्विचार भी हुआ जा सकता है। कोशिश करके देखने में क्या बुराई है। ओशो कहते हैं कि ध्यान विचारों की मृत्यु है। आप तो बस ध्यान करना शुरू कर दें और जानिए इसके 15 लाभ।
    यदि ध्यान आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है तो यह आपके दिन का सबसे बढ़िया समय बन जाता है। आपको इससे आनंद की प्राप्ति होती है। फिर आप इसे पांच से दस मिनट तक बढ़ा सकते हैं। पांच से दस मिनट का ध्यान आपके मस्तिष्क में शुरुआत में तो बीज रूप से रहता है, लेकिन 3 से 4 महिने बाद यह वृक्ष का आकार लेने लगता है और फिर उसके परिणाम आने शुरू हो जाते हैं।
    1. जहां पहले 24 घंटे में चिंता और चिंतन के 50-60 हजार विचार होते थे वहीं अब उनकी संख्या घटने लगेगी। जब पूरी घट जाए तो बहुत बड़ी घटना घट सकती है। ध्यान से सर्वप्रथम सभी तरह की अनावश्यक मानसिक गतिविधि रूकने लगती है।
    2. रोग को शारीरिक बीमारी कहते हैं और शोक को सभी तरह के मानसिक दुख। दोनों की ही उत्पत्ति मन, मस्तिष्क और शरीर के किसी हिस्से में होती है। ध्यान उसी हिस्से को स्वस्थ कर देता है। ध्यान मन और मस्तिष्क को भरपूर ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। शरीर भी स्थित होकर रोग से लड़ने की क्षमता प्राप्त करने लगता है। चिंता और चिंतन से उपजे रोगों का खात्मा होगा।
    3. ध्यान से श्वास-प्रश्वास में सुधार होने से किसी भी तरह के दुख के मामले में हम आवश्यकता से अधिक चिंता नहीं करते। हमारी भावनाएं श्वास-प्रश्वास से संचालित होते हैं। श्वास-प्रश्वास के सही होने से भावनाएं भी नियंत्रित हो जाती है।
    4. प्रतिदिन तीन माह तक सिर्फ 10 मिनट का ध्यान करें। आपके मस्तिष्क में परिवर्तन होंगे और आप किसी भी समस्या को पहले की अपेक्षा सकारात्मक तरीके से लेंगे। मात्र तीन माह में हर तरह के रोग को रोककर शोक को मिटाने की क्षमता है ध्यान में।
    5. हम ध्यान है। सोचो की हम क्या है- आंख? कान? नाक? संपूर्ण शरीर? मन या मस्तिष्क? नहीं हम इनमें से कुछ भी नहीं। ध्यान हमारे तन, मन और आत्मा (हम खुद) के बीच लयात्मक सम्बन्ध बनाता है। स्वयं को पाना है तो ध्यान जरूरी है। वहीं एकमात्र विकल्प है।
    6. ध्यान का नियमित अभ्यास करने से आत्मिक शक्ति बढ़ती है। आत्मिक शक्ति से मानसिक शांति की अनुभूति होती है। मानसिक शांति से शरीर स्वस्थ अनुभव करता है। ध्यान के द्वारा हमारी उर्जा केंद्रित होती है। उर्जा केंद्रित होने से मन और शरीर में शक्ति का संचार होता है एवं आत्मिक बल मिलता है।
    7. ध्यान से विजन पॉवर बढ़ता है तथा व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है। ध्यान से सभी तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं। ध्यान से हमारा तन, मन और मस्तिष्क पूर्णत: शांति, स्वास्थ्य और प्रसन्नता का अनुभव करते हैं।
    8. ध्यान से हर तरह का भय जाता रहेगा। कार्य और व्यवहार में सुधार होगा। रिश्तों में तनाव की जगह प्रेम होगा। दृष्टिकोण सकारात्मक होगा।
    9. मानसिक क्षमता बढ़ने के कारण सफलता के बारे में सोचने मात्र से ही सफलता आपके नजदीक आने लगेगी।
    10. ध्यान से वर्तमान को देखने और समझने में मदद मिलती है। शुद्ध रूप से देखने की क्षमता बढ़ने से विवेक जाग्रत होगा। विवेक के जाग्रत होने से होश बढ़ेगा। होश के बढ़ने से मृत्यु काल में देह के छूटने का बोध रहेगा। देह के छूटने के बाद जन्म आपकी मुट्‍ठी में होगा। यही है ध्यान का महत्व।
    11. खुद तक पहुंचने का एक मात्र मार्ग ध्‍यान ही है। ध्यान को छोड़कर बाकी सारे उपाय प्रपंच मात्र है। यदि आप ध्यान नहीं करते हैं तो आप स्वयं को पाने से चूक रहे हैं। स्वयं को पाने का अर्थ है कि हमारे होश पर भावना और विचारों के जो बादल हैं उन्हें पूरी तरह से हटा देना और निर्मल तथा शुद्ध हो जाना।
    ज्ञानीजन कहते हैं कि जिंदगी में सब कुछ पा लेने की लिस्ट में सबमें ऊपर स्वयं को रखो। मत चूको स्वयं को। 70 साल सत्तर सेकंड की तरह बीत जाते हैं। योग का लक्ष्य यह है कि किस तरह वह तुम्हारी तंद्रा को तोड़ दे इसीलिए यम, नियम, आसन, प्राणायम, प्रत्याहार और धारणा को ध्यान तक पहुँचने की सीढ़ी बनाया है।
    12. शोर और प्रदूषण के माहौल के चलते व्यक्ति निरर्थक ही तनाव और मानसिक थकान का अनुभव करता रहता है। ध्यान से तनाव के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। निरंतर ध्यान करते रहने से जहां मस्तिष्क को नई उर्जा प्राप्त होती है वहीं वह विश्राम में रहकर थकानमुक्त अनुभव करता है। गहरी से गहरी नींद से भी अधिक लाभदायक होता है ध्यान।
    13. ध्यान से आपकी चेतना को लाभ मिलता है। ध्यान से आपके भीतर सामंजस्यता बढ़ती है। जब भी आप भावनात्मक रूप से अस्थिर और परेशान हो जाते हैं, तो ध्यान आपको भीतर से स्वच्छ, निर्मल और शांत करते हुए हिम्मत और हौसला बढ़ाता है। ध्यान से चिंता और समस्याएं छोटी हो जाती है।
    14. ध्यान से जहां शुरुआत में मन और मस्तिष्क को विश्राम और नई उर्जा मिलती है वहीं शरीर इस ऊर्जा से स्वयं को लाभांवित कर लेता है। ध्यान करने से शरीर की प्रत्येक कोशिका के भीतर प्राण शक्ति का संचार होता है। शरीर में प्राण शक्ति बढ़ने से आप स्वस्थ अनुभव महसूस करते हैं।
    15. ध्यान से उच्च रक्तचाप नियंत्रित होता है। सिरदर्द दूर होता है। शरीर में प्रतिरक्षण क्षमता का विकास होता है, जोकि किसी भी प्रकार की बीमारी से लड़ने में महत्वपूर्ण है। ध्यान से शरीर में स्थिरता बढ़ती है। यह स्थिरता शरीर को मजबूत करती है।
    16. जो व्यक्ति ध्यान करना शुरू करते हैं, वह शांत होने लगते हैं। यह शांति ही मन और शरीर को मजबूती प्रदान करती है। ध्यान आपके होश पर से भावना और विचारों के बादल को हटाकर शुद्ध रूप से आपको वर्तमान में खड़ा कर देता है। ध्यान से काम, क्रोध, मद, लोभ और आसक्ति आदि सभी विकार समाप्त हो जाते हैं। निरंतर साक्षी भाव में रहने से जहां सिद्धियों का जन्म होता है वहीं सिद्धियों में नहीं उलझने वाला व्यक्ति समाधी को प्राप्त लेता है।
    17. ध्यान से भरपूर लाभ प्राप्त करने के लिए नियमित अभ्यास करना आवश्यक है। ध्यान करने में ज्यादा समय की जरूरत नहीं मात्र पांच मिनट का ध्यान आपको भरपूर लाभ दे सकता है बशर्ते की आप नियमित करते हैं।
    18. धन्यान से मोमोरी पॉवर बढ़ता है। ध्यान के साथ इस जाति स्मरण का अभ्यास जारी रखने से एक माह बाद जहां मोमोरी पॉवर बढ़ेगा वहीं कुछ माह बाद यह आपमें गजब की स्मरणशक्ति का विकास कर देगा। आप किसी भी उम्र में और किसी भी हालात में भूल नहीं सकते।
    19. ध्यान से मुख्य रूप से मस्तिष्क शांत होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। इससे जहां रक्त संचार अच्छा रहता है वहीं आंखों की ज्योति भी बढ़ती है।
    20. मोक्ष प्राप्त करने का और कोई मार्ग नहीं है सिवाय ध्यान के।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / भगवान श्रीकृष्ण की आठ पत्नियां और कई प्रेमिकाएं थीं। आठ पत्नियों के नाम इस प्रकार हैं- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा। रुक्मिणी, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा के बारे में तो हम बता चुके हैं भद्रा, सत्या और लक्ष्मणा के बारे में बहुत कम ही लिखा गया है। इन्हीं में से एक जानिए लक्ष्मणा के बारे में 5 खास बातें।
    1. मद्र देश की राजकुमारी लक्ष्मणा भी कृष्ण को चाहती थी, लेकिन परिवार कृष्ण से विवाह के लिए राजी नहीं। लक्ष्मणा के पिता का नाम वृहत्सेना था।
    2. श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार श्रीकृष्ण को जब यह पता चला की लक्ष्मणा उनसे प्रेम करती हैं तो वे अकेले ही लक्ष्मणा का हरण करके ले आए थे। जैसे गरुड़ ने स्वर्ग से अमृत का हरण किया था, वैसे ही भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयंवर में अकेले ही उसे हर लिया था।
    3. यह भी कहा जाता है कि लक्ष्मणा के पिता ने स्वयंवर प्रतियोगिता का आयोजन किया था जिसमें पानी में मछली की परछाई देखकर मछली पर निशाना लगाएगा था। भगवान कृष्ण ने पानी में मछली की परछाई देखकर निशाना लगाया और स्वयंवर में विजयी हुए तब लक्ष्मणा और कृष्ण का विवाह किया गया।
    4. यह भी कहा जाता है कि भगवन कृष्णा ने जरासंध, दुर्योधन और अर्जुन सहित कई सारे योद्धाओं को धनुष प्रतियोगिता में हराकर लक्ष्मण को हासिल किया था। बाद में लक्ष्मणा ने द्रौपदी को बताया था कि मेरे स्वयंवर कितना रोचक हुआ था। क्योंकि द्रौपदी का स्वयंवर भी कुछ इसी तरह से हुआ था।
    5. लक्ष्मणा-कृष्ण के पुत्र: प्रघोष, गात्रवान, सिंह, बल, प्रबल, ऊर्ध्वग, महाशक्ति, सह, ओज और अपराजित।

    दुर्ग / शौर्यपथ / भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ जिला संघ दुर्ग द्वारा स्व. मोतीलाल वोरा जी के आकस्मिक निधन पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई ए एल टी श्रीमती सरस्वती गिरिया ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे सहज और नीति में निपुण थे एक पत्रकार के रुप में अपना सफर शुरु करने से लेकर मंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल जैसे बड़े पदों पर अपने अनुभव को साझा करने वाले मोतीलाल वोरा जी का संघर्ष  हम सबके लिए प्रेरणादायी है। ए एल टी श्री श्रवण सिन्हा ,त्रिलोक चौधरी ,हेतराम ध्रुव , नंद कुमार यादव ,कीर्तन पटेल श्रीमती अमिता हरमुख ,रेखा शर्मा ,ननकी अंदानी जिला संगठन आयुक्त  अवधेश विश्वकर्मा ,नेहा राजपूत जिला शिक्षा अधिकारी के प्रांगण में श्रद्धांजलि दी गई

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