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नई दिल्ली / शौर्यपथ /आस्ट्रेलिया के लौवी इंस्टीट्यूट के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर माइकल फुलीलव के साथ बातचीत में उनसे पूछा गया कि पश्चिम में एक अवधारणा बन रही है कि क्या भारत उदारवाद छोड़कर अनुदारवाद की तरफ़ बढ़ रहा है. हवाला द इकोनॉमिस्ट मैगजीन के आलेख का दिया गया. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने जवाब में इस मैगज़ीन पर राजनीतिक तौर पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पश्चिम के वे लोग जो भारत को लेकर लिख रहे हैं और टिप्पणी कर रहे हैं वे भारत में आ रहे बदलावों को समझ पाने में नाकाम रहे हैं. भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत मज़बूत हैं. आज से 70 साल पहले के भारत के नेताओं की तरफ़ देखें तो वे ज़्यादातर अंग्रेज़ी बोलने वाले और बड़े शहरों से होते थे.
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि मैं आपको बताना चाहूंगा कि आखिर क्यों इस तरह के विश्लेषण (भारत के अनुदारवाद की तरफ़ बढ़ने जैसे) किए जा रहे हैं. वे इसलिए कि अब जब वे यहां देखते हैं तो सोचते हैं कि ये वे लोग नहीं हैं जिनको हम जानते थे. ये अलग तरह की भाषा बोलते हैं. इनके सोचने का तरीका नहीं पता. इनके सामाजिक व्यवहार का तरीका अलग हैं. ये वो लोग नहीं हैं जिनको हम जानते थे. ये अलग हैं.
विदेश मंत्री ने कहा कि वे भारत में आए इस बदलाव को समझने की कोशिश नहीं करते. ये वैश्विकरण और कुलीनता से जुड़ी समस्या लगती है. भारत में एक सांस्कृतिक बदलाव भी हो रहा है. वे हर चुनाव में एक अलग तरह की भविष्यवाणी करते हैं. आपने जिस पब्लिकेशन का नाम लिया उनकी पिछली भविष्यवाणियों को ही देख लीजिए. पिछले 6 साल में ये लोग भारत के बारे में सब कुछ गलत समझ रहे हैं.
एस जयशंकर ने कहा कि भारत के बदलावों से दुनिया को कैसे परिचित कराया जाए, बदलता भारत दुनिया के साथ कैसे बेहतर तरीके से संवाद करे, ये काफ़ी अहमियत रखता है. उन्होंने ये भी कहा कि विदेश मंत्री के तौर पर उनके सामने ये चुनौती है और दो साल से वे इस पर काम कर रहे हैं.
खाना खजाना /शौर्यपथ / सर्दियों में खुद को हेल्दी रखने के लिए अक्सर भारतीय परिवारों में बड़े-बुर्जुग गोंद के लड्डू का सेवन करने की सलाह देते हैं। गोंद के लड्डू हल्दी होने के साथ-साथ पौष्टिक गुणों से भी भरपूर होते हैं। इन लड्डूओं का सेवन करने से सर्दियों में होने वाले हड्डियों और मसल्स के दर्द को दूर करनेमें मदद मिलती है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं कैसे बनाए जाते हैं गोंद के लड्डू।
गोंद के लड्डू बनाने के लिए सामग्री-
-200 ग्राम- आटा
-1 कप- गाय का घी
-1 कप- पिसी चीनी
-1 कप- खाने का गोंद
-50 ग्राम- कटे हुए काजू
-50 ग्राम- कटे हुए बादाम
50 ग्राम- तरबूज के बीज
गोंद के लड्डू बनाने की विधि-
गोंद के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले गैस पर एक कड़ाही गर्म करकें, उसमें घी डालकर गोंद को मध्यम आंच पर फ्राई कर लें। जब गोंद गोल्डन ब्राउन हो जाए तो गैंस बंद कर दें। गोंद को ठंडा करके उसे मिक्सी में पीसकर अलग रख लें। अब कड़ाही पर घी गर्म करके उसमें आटे को हल्का भूरा होने तक धीमी आंच पर भूनें। लेकिन ध्यान रखें की आटा जलना बिल्कुल नहीं चाहिए। इसके बाद आटे में गोंद, काजू, बादाम और तरबूज के बीज डालकर गैस बंद कर दें। फिर इस मिश्रण को कढ़ाई से बाहर निकालकर ठंडा होने के लिए रखें। अब आटा और गोंद के मिश्रण में पिसी चीनी को मिलाकर उसके गोल-गोल लड्डू बना लें।
खेल/ शौर्यपथ / भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन टी20 सीरीज का आखिरी मुकाबला सिडनी में खेला गया। भारत को सीरीज के आखिरी मुकाबले में 12 रनों से हार का सामान करना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से मैथ्यू वेड ने 53 गेंदों पर 80 रनों की पारी खेली है। मैच के दौरान एक समय ऐसा आया जब कप्तान कोहली ने मैथ्यू वेड के खिलाफ डीआरएस लिया लेकिन अंपायर ने उसे नामंजूर कर दिया। कोहली ने इसके लिए प्रोडक्शन टीम को जिम्मेदार ठहराया।
कप्तान विराट कोहली ने कहा, 'हम अभी चर्चा ही कर रहे थे और रिप्ले को बड़े स्क्रीन पर चला दिया गया। जब हमने डीआरएस लेने का फैसला किया तो अंपायर ने यह कहते हुए मना कर दिया कि अब आप अपील नहीं कर सकते हैं।' इस फैसले से कोहली काफी नाखुश थे। इस पूरे प्रकरण पर भारत के पूर्व बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने भी अंपायर का समर्थन किया और कहा,'बड़ी स्क्रीन पर डिस्प्ले देखने के बाद रिव्यू नहीं ले सकते। पहले ही डीआरएस ले लेना चाहिए था।'
क्या है पूरा मामला
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज के तीसरे और आखिरी टी20 मैच में 11 वें ओवर में नटराजन की चौथी गेंद पर मैथ्यू वेड एलबीडब्ल्यू आउट थे। लेकिन अंपायर ने नाॅट-ऑउट करार दिया। जिसके बाद कोहली अन्य खिलाड़ियों से डीआरएस लेने पर विचार कर रहे थे इसी दौरान रिप्ले को बड़े स्क्रीन पर चला दिया गया। कोहली ने डीआरएस लिया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। और अंपायर ने कोहली की अपील को नहीं माना।
मैथ्यू वेड ने 53 गेंदो पर 80 रन बनाए। जिनकी पारी की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने भारत को तीसरे और आखिरी टी ट्वेंटी मैच में 12 रनों से हराया और सीरीज क्लीन स्वीप होने से बचा लिया।
वास्तु शास्त्र /शौर्यपथ/ घर का पूजा स्थल किस प्रकार होना चाहिए? मूर्तियां कैसी या कितनी होनी चाहिए? अकसर यह सवाल हम सबके मन में उठता है। ईश्वर का चिन्तन करने के लिए सबसे सरल उपाय है कि हम नित्यप्रति श्रद्धा-भक्ति से इष्टदेव का नाम मन ही मन लेते रहें। कहा भी गया है- कलियुग केवल नाम अधारा। लेकिन विधि-विधान से पूजा करने का एक अपना ही आनंद है।
आप जानते ही हैं कि सनातन धर्म में पंचदेव पूजा के अलावा कुलदेवी-कुलदेवता की भी पूजा की जाती है। पंचदेवों में गणेश, दुर्गा, सूर्य, शिव और विष्णु हैं। इनकी पूजा सभी कार्यों में होती है। घर में किसी तरह का वास्तुदोष और नकारात्मकता न पैदा हो, इसके लिए हमें घर में पूजा स्थल जरूर बनाना चाहिए और इन पंच देवों को स्थापित करना चाहिए। लेकिन घर में पूजा स्थल बनाने से पहले सही दिशा का चुनाव करना जरूरी है।
वास्तु के अनुसार पूर्व या उत्तर दिशा में पूजा स्थल होना चाहिए। शौचालय से सटा हुआ या शयनकक्ष में पूजा स्थल नुकसानदायक है। साथ ही पूजा स्थल में मूर्तियों को रखते हुए भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे कि घर के मंदिर में एक मूर्ति के बजाय अनेक देवमूर्तियों की पूजा करें। इससे कामना सुगमता से पूर्ण होती है। लेकिन घर में दो शालिग्राम, दो शिवलिंग, तीन गणेश, दो शंख, दो सूर्य, तीन दुर्गा मूर्ति और दो गोमती चक्र नहीं होने चाहिए। इससे परिवार में अशांति फैलती है और पूजा में मन भी नहीं लगता। पत्थर, काष्ठ, सोना या अन्य धातुओं की मूर्तियां ही घर में रखें। मूर्तियों की जगह पर देवी-देवताओं के सुंदर चित्र भी रख सकते हैं।
आपको यह भी जानना चाहिए कि भगवान की मूर्तियां सजावट के लिए नहीं होतीं, इसलिए उनकी नित्य प्रति साफ-सफाई करके श्रद्धा-भक्ति से पूजा करें। संभव हो तो पंचदेवों को मौसमी फल अर्पित करें। गुड़, बताशा, शक्कर आदि का भोग लगाएं। घर में रखी मूर्तियों का जितना आदर-सम्मान करेंगे, उतना ही आप प्रसन्न रहेंगे। गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है-यत: प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानव:।। अर्थात् जिस परमेश्वर से संपूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति हुई है और जिससे यह समस्त जगत् व्याप्त है, उस परमेश्वर की अपने स्वाभाविक कर्मों द्वारा पूजा करके मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त हो जाता है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / मार्गशीर्ष माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। इस व्रत को सभी दुखों का अंत करने वाला व्रत माना जाता है। एकादशी देवी का जन्म भगवान विष्णु से हुआ। उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता प्रकट हुईं, इसलिए यह दिन उत्पन्ना एकादशी नाम से जाना जाता है। एकादशी व्रत को सिर्फ उत्पन्ना एकादशी से ही शुरू कर सकते हैं। इस व्रत का प्रभाव देवताओं के लिए भी दुर्लभ माना जाता है। इस व्रत में विधि विधान से भगवान श्री हरि विष्णु की उपासना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
इस व्रत में मन की सात्विकता का विशेष ध्यान रखें। इस व्रत के प्रभाव से मन निर्मल होने के साथ शरीर स्वस्थ होता है। इस व्रत में भगवान श्री हरि को फलों का ही भोग लगाएं। दीपदान करें। द्वादशी के दिन जरूरतमंदों को दान देकर पारण करें। एकादशी माता को खुद भगवान विष्णु ने आशीर्वाद देकर इस व्रत को पूजनीय बनाया। उत्पन्ना एकादशी का व्रत सच्चे मन से करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस व्रत से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। उत्पन्ना एकादशी का व्रत आरोग्य, संतान प्राप्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाने वाला व्रत है। इस व्रत में सारी रात भजन-कीर्तन में व्यतीत करनी चाहिए। जाने-अनजाने में हुए पाप के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। इस व्रत में अन्नदान अवश्य करें। उपवास करने में असमर्थ व्यक्ति को एकादशी के दिन अन्न का परित्याग करना चाहिए।
मनोरंजन /शौर्यपथ / बॉलीवुड के शॉटगन यानी शत्रुघ्न सिन्हा आज अपना 75वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को कई सुपरहिट फिल्में दी हैं। फिल्मों में उनके डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं। शत्रुघ्नन सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा हैं। दोनों की लव स्टोरी किसी फिल्म से कम नहीं हैं। आइए इस खास मौके पर शुत्र्घन सिन्हा की दिलचस्प लव स्टोरी के बारे में जानते हैं।
शत्रुघ्न सिन्हा ने एक बार द कपिल शर्मा शो में बताया था कि शादी से पहले उनकी सास उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थीं। यहां तक कि उन्होंने शादी के प्रपोजल तक को रिजेक्ट कर दिया है। शो में शत्रुघ्न सिन्हा ने बताया कि मेरे बड़े भाई राम सिन्हा और प्रोड्यूसर एनएन सिप्पी साहब को शादी का प्रपोजल लेकर पूनम सिन्हा की मां के पास भेजा था। मेरी होने वाली सास ने सीधा रिजेक्ट कर दिया था।
शत्रुघ्न सिन्हा ने बताया कि मेरी होने वाली सास ने उन दोनों से कहा- ''तुमने अपने भाई की शक्ल देखी है। तुम इतने बड़े और पढ़े-लिखे आदमी होकर उस जाहिल का प्रपोजल लेकर आए हो। वह तो शक्ल से ही गुंडा जैसा लगता है।'' उन्होंने आगे बताया कि जब बात आगे बढ़ी और हमारी शादी हुई, तो जो सासू मां हमारे सख्त खिलाफ थी वह हमारे पक्ष में हो गईं। इसका मतलब है कि मेरे अंदर कोई अच्छाई भी है।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में निगम मंडल में नियुक्ति को लेकर आज सीएम हाउस में अहम बैठक हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेश के सभी मंत्री एवं कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए बैठक में निगम मंडल के संभावित नामों पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि यह सूची लगभग फाइनल हो गई है। इस सूची में कई बड़े नेताओं के नाम शामिल है,मिली जानकारी में इन नामों पर मुहर लग चुकी है और जल्द ही निगम मंडल की दूसरी सूची जारी हो जाएगी सूत्रो के अनुसार अंतिम समय मे कुछ नामो मे फेरबदल किया जा सकता है .
जिन नामो को अध्यक्ष के लिए लगभग फाइनल माना जा रहा है उसमे रायपुर से (आरपी सिंह , विनोद तिवारी ) , जांजगीर से ( मंजू सिंह ) , बिलासपुर से ( नरेंद्र बोलर ) , रायगढ़ से अनिल अग्रवाल , कोरबा से गोपाल थवाईत , महासमुंद से आलोक चंद्राकर , बस्तर से मनीष श्रीवास्तव और मलकीत सिंह गैदु , राजनांदगांव से नवाज खान , बिलासपुर से अटल श्रीवास्तव व शिव सिंह ठाकुर एवं दुर्ग से
मोहम्मद इरफान खान , अजय साहू , लक्ष्मण चंद्राकर व राजेंद्र साहू का नाम लगभग तय माना जा रहा है . अंतिम समय में फेर बदल की संभावनाओ को भी इनकार नहीं किया जा रहा किन्तु ये नाम ऐसे है जिस पर सभी की सहमती मानी जा रही है .
सूत्रों के मुताबिक इन नामों पर मुहर लग चुकी है वही इनके अलावा कई और नाम है जिन पर चर्चा हुई है। बताया जा रहा है कि जल्द ही दूसरी सूची जारी हो सकती है।
बता दें कि निगम-मंडलों में नियुक्ति की एक सूची कांग्रेस की सर्कार बनने के लगभग डेढ़ साल बाद जारी हुई थी वही अब जबकि सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा हो चूका है तो दूसरी सूचि को सरकार जल्द से जल्द जारी करने की तैयारी में है . दूसरी सूची का कांग्रेस नेताओं को बेसब्री से इंतेजार है। नियुक्तियों के मद्देनजर बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया ने बैठक ली थी, जिसमें लंबित नियुक्तियों को जल्द से जल्द निपटाने की बात कही गई थी।
दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा आज चार वार्डो में लगाये गये मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य शिविर 225 ने नाम दर्ज कराकर 185 लोगों ने स्वास्थ्य की जांच कराकर नि:शुल्क दवाई लिये। पोटिया कुंदरा पारा के 11 बुजुर्गो सहित 33 लोगों ने शिविर स्थल में स्वास्थ्य की जांच कराये। 69 बच्चों ने और 73 महिलाएॅ, 76 पुरुषों ने भी जांच करा कर सामान्य बीमारियों की जांच कराये।
आज दिनांक 9 दिसंबर को बघेरा के दुर्गा मंच इंदिरा मंदिर के पास, मीलपारा गौरा चैरा डिपरा, वार्ड 55 पुलगांव साहू भवन के पास बजरंग चैक में और वार्ड 47 सिविल लाई उत्तर दुर्गा मंदिर चैक में मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जावेगा। वार्ड निवासियों से अपील है कि शासन की इस पहल व योजना का अधिक से अधिक लाभ उठायें, अपने स्वास्थ्य का नि:शुल्क जांच कर नि:शुल्क दवाई प्राप्त करें ।
भिलाई। शौर्यपथ । नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र अंतर्गत स्लम क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से शिविर लगाकर लोगों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें वहीं दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही है। संयुक्त संचालक हरि कृष्ण दुबे निगम क्षेत्र के संजय नगर, गदा चौक और खुर्सीपार के स्लम बस्ती में जाकर आज शिविर का निरीक्षण किया। इस दौरान योजना के नोडल अधिकारी एवं उपायुक्त तरुण पाल लहरें उपस्थित रहे।
संयुक्त संचालक श्री दुबे ने शिविर में चिकित्सकों व उपस्थित स्टाफ की जानकारी ली! स्वंय मोबाइल मेडिकल यूनिट में अपना ब्लड टेस्ट करवाकर लोगों को नि:शुल्क स्वास्थ्य लाभ लेने प्रेरित किए। उपायुक्त तरुण पाल लहरें ने भी शिविर में अपना जांच कराया! उन्होंने शिविर में आए हुए व्यक्तियों को परीक्षण उपरांत उनके कुशलक्षेप और प्राप्त दवाइयों के बारे में पूछकर फीडबैक प्राप्त किया। भिलाई निगम क्षेत्र में स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट और दाई दीदी क्लीनिक का निरीक्षण करने पहुंचे संयुक्त संचालक एचके दुबे ने अधिकारियों से कहा कि समय पर मोबाइल मेडिकल यूनिट शिविर स्थल में पहुंचे ताकि समय पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
निरीक्षण में उन्होंने एमएमयू के कोऑर्डिनेटर अमित चौधरी व अतुल शुक्ला से दवाई के स्टॉक की जानकारी ली तथा रजिस्टर का परीक्षण किए। संजय नगर, गदा चौक और खुर्सीपार के स्लम बस्ती में आज शिविर का आयोजन किया गया था ! उन्होंने रूट प्लान की पंजी का निरीक्षण किया! श्री दुबे ने मोबाइल मेडिकल यूनिट में इलाज कराने आए लोगों से चर्चा कर शिविर में उनके द्वारा कराए जा रहे जांच के बारे में फीडबैक भी लिया! मोबाइल मेडिकल यूनिट में चिकित्सक, फार्मास्टि और लैब टेक्निीशियनों से चिकित्सकीय कार्य हेतु पर्याप्त इक्विपमेंट्स की जानकारी और इलाज के लिए किस प्रकार के बीमारी के लोग शिविर में अधिक आ रहे इसकी जानकारी लिए और उन्होंने स्वयं अपना रक्त जांच कराया। महापौर एवं भिलाई नगर विधायक श्री देवेंद्र यादव तथा आयुक्त श्री ऋतुराज रघुवंशी कई बार शिविर स्थलों का जायजा ले चुके हैं! निगम क्षेत्र में मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से शिविर सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित होता है! स्वास्थ्य शिविर के जरिए मोहल्ले में ही चिकित्सा सुविधा मिलने पर आसानी से बच्चे, युवा, बुजुर्ग शिविर में सर्दी, खासी, बीपी और शुगर अन्य तरह की बीमारियों की जांच कराकर दवाई प्राप्त कर स्वास्थ्य लाभ ले रहे है। निरीक्षण के दौरान कार्यपालन अभियंता बीके देवांगन एवं सहायक अभियंता तपन अग्रवाल मौजूद रहे!
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खेलबो-जीतबो-गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का नारा अब धरातल पर तेजी से मूर्त रूप ले रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य मंे खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों के लिए सर्वसुविधा युक्त अत्याधुनिक खेल सुविधाएं तेजी से विकसित हो रही है। इससे खेल के नक्शे पर छत्तीसगढ़ राज्य की एक अलग पहचान होगी साथ ही यहां के खिलाड़ियों को राज्य में ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेल प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विगत दो वर्षों में खेल अधोसंरचनाओं के विकास में बड़ी उपलब्धि भी हासिल की है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व और खेल मंत्री उमेश पटेल के मार्गनिर्देशन में प्रदेश में आधुनिक खेलों के साथ ही साथ प्रदेश के ग्रामीण और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने के लिए अनेक अहम कदम उठाएं है।
प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद खेलों और खेल सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के लिए एक अहम निर्णय लेते हुए राज्य में खेल विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है। राज्य में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नई और आधुनिक खेल आकादमियां शुरू की जा रही हैे। इन अकादमियों का संचालन छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण के माध्यम से किया जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से अब तक कई ऐसे खेल मैदान व खेल अधोसंरचनाएं थीं, जिनका सही उपयोग नहीं किया जा रहा था, भूपेश सरकार ने खेल विकास प्राधिकरण के माध्यम इन अनुपयोगी खेल मैदानों का उन्नयन कर उन्हें उपयोगी बनाकर खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध कराने जा रही है।
अभी हाल ही में 19 नवंबर को मुख्यमंत्री बघेल ने रायपुर के कृषि विश्वविद्यालय सांस्कृतिक भवन से लगी 4 एकड़ भूमि में टेनिस स्पोर्ट अकादमी के निर्माण के लिए आधारशिला रखी है। इस आकादमी के निर्माण के लिए राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा 17 करोड़ 75 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। टेनिस स्पोर्ट अकादमी के अंतर्गत एडमिन बिल्ंिडग, हॉस्टल बिल्ंिडग और टेनिस कोर्ट का निर्माण किया जाएगा। टेनिस कोर्ट में 3 हजार 500 दर्शक क्षमता की होगी।
इसके साथ ही राजधानी रायपुर में बालक एवं बालिकाओं के लिए आवासीय हॉकी अकादमी एवं न्यायधानी बिलासपुर में तैराकी, कुश्ती और एथलेटिक के ‘एक्सिलेंस सेंटर’ प्रारंभ होने से अब खिलाड़ियों को प्रशिक्षण लेने बाहर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियो को ये सुविधाएं अपने ही राज्य में मिल सकेंगी। राज्य सरकार के प्रयास से इन दोनो ही संस्थाओं को सांई से मान्यता मिल गई है। इससे अब राज्य के कोने कोने से खेल प्रतिभाओें का चयन किया जाएगा। साथ ही आवासीय खेल अकादमी में खिलाड़ियों को छात्रावास, छात्रवृत्ति, शिक्षा और प्रशिक्षण की बेहतर सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विशेष प्रयासों से भारत सरकार ने अम्बिकापुर में मल्टीपरपज इंडोर हॉल के निर्माण के लिए 4 करोड़ 50 लाख रूपए तथा महासमुन्द में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रेक के निर्माण के लिए 6 करोड़ 60 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है। मुख्यमंत्री राज्य के खिलाड़ियों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रहे हैं। राज्य में विश्वस्तरीय खेल अधोसंरचनाओं के निर्माण के लिए भी कदम दर कदम राज्य सरकार आगे बढ़ रही है। बिलासपुर में नव निर्मित सिंथेटिक टर्फ के हॉकी स्टेडियम का नामकरण स्वर्गीय बी.आर.यादव हॉकी स्टेडियम करते हुए इस स्टेडियम को खिलाड़ियों के लिए खोल दिया गया है।
छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण पर सर्वाधिक जोर दे रही है। इसके लिए राज्य में शीघ्र ही विभिन्न खेलों के प्रशिक्षकों की भर्ती की भी तैयारी चल रही है। खेल एवं युवा कल्याण संचालनालय द्वारा इसके लिए कार्यवाही की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य के बाहर से भी प्रशिक्षकों की सेवाएं ली जाएंगी ताकि राज्य के खिलाड़ियों का स्तर और उंचा हो सके और वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
राजधानी रायपुर में गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना की थीम पर विगत वर्ष राज्य युवा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया था, जिसमें राज्य गठन के बाद पहली बार राज्य के युवाओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिये थे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस आयोजन को प्रतिवर्ष करने के निर्देश दिए हैं, इसके लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा पृथक से बजट प्रावधान भी रखा है। युवा महोत्सव के सभी प्रतिभागियों को 5-5 सौ रूपए की प्रोत्साहन राशि भी दी गई है।
इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा ‘वन स्टेट-वन गेम‘ के तहत ओलंम्पिक-2024 में तीरंदाजी में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रतिभाशाली तीरंदाज खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर उन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ राज्य को सौंपी गई है। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा नैसर्गिक प्रतिभा वाले युवाओं का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण देने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य के जशपुर में हॉकी के खेल को बढ़ावा देने के लिए एस्ट्रोटर्फ का काम चालू किया गया है। पाटन-मर्रा में स्टेेडियम का निर्माण किया जा रहा है। दुर्ग में जूडो एकेडमी की स्थापना की गई है। राज्य सरकार नारायणपुर में मलखम्भ को प्रोत्साहित करने के लिए वहां बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।
प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राजीव युवा मितान क्लबों का गठन किया जा रहा है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के द्वारा प्रदेश के 146 विकासखण्डों की 11 हजार 664 ग्राम पंचायतों में राजीव युवा मितन क्लब योजना लागू की जाएगी। इन क्लबों को अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए प्रतिमाह 10 हजार रूपए दिए जाएंगे। क्लब के युवाओं को विभिन्न सामाजिक गतिविधियों जैसे-स्वच्छता, वृक्षारोपण कार्यक्रमों सहित अन्य योजनाओं के प्रचार के लिए जोड़ा जाएगा।
( लेख - छेदीलाल तिवारी, जनसंपर्क )
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
