August 03, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में व्यक्ति को सफल बनाने की बातों का जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य एक महान शिक्षाविद और कुशल अर्थशास्त्री भी थे। चाणक्य की नीतियां आप भी लोगों को जीवन में सही रास्ता दिखा रही हैं। नीति शास्त्र में चाणक्य ने धन, तरक्की, वैवाहिक जीवन, मित्रता और दुश्मनी संबंधी समस्याओं का उपाय बताया है।

    चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को जीवन में सफल होना है तो उसे नीति शास्त्र को जीवन में अपना लेना चाहिए। चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति में कौन-से ऐसे दो गुण होने चाहिए, जो दुश्मनों को भी मित्र बना देता है।

    1. विनम्रता-

    चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा विनम्र होना चाहिए। विनम्रता से व्यक्ति लोगों के दिलों में राज करता है। विनम्र व्यक्ति क्रोध से मुक्त होता है और उसे समाज में भी मान-सम्मान मिलता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो काम व्यक्ति धैर्य के साथ करता है, उसे सफलता प्राप्त होती है। चाणक्य कहते हैं कि क्रोध पर काबू पाने के लिए व्यक्ति को विनम्रता का गुण अपनाना चाहिए। इसके साथ ही कई बार दु्श्मन भी आपकी विनम्रता के सामने झुक जाता है और दोस्ती का हाथ खुद ही बढ़ा देता है।

    2. सत्य बोलना-

    चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में झूठ नहीं बोलना चाहिए। नीति शास्त्र के अनुसार, झूठ बोलने से व्यक्ति की प्रतिभा का नुकसान होता है। झूठ बोलने वाला व्यक्ति समाज में मान-सम्मान नहीं पाता है। ऐसे व्यक्ति से लोग दूरी बनाकर रखते हैं और कोई भरोसा नहीं करता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा झूठ से दूर रहना चाहिए।

     

    सेहत / शौर्यपथ / वजन घटाने की कोशिशों में जुटे हैं? कैलोरी में कटौती से लेकर एक्सरसाइज तक सब आजमाकर देख लिया, पर मोटापा पीछा छोडऩे का नाम ही नहीं ले रहा? अगर हां तो एक बार लो-कार्ब डाइट आजमाकर देखें। 2020 यूरोपियन एंड इंटरनेशनल ओबेसिटी कांग्रेस में पेश एक डच अध्ययन में कार्बोहाइड्रेट से परहेज को बढ़ते वजन पर काबू पाने में सबसे असरदार करार दिया गया है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे या खतरे के निशान पर पहुंचे लोगों में।
    शोधकर्ताओं के मुताबिक मोटापे के शिकार 75 फीसदी लोग इस बात से अनजान होते हैं कि उनमें इंसुलिन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है। दरअसल, 'इंसुलिन रेजिस्टेंसÓ पनपने पर शरीर में पहुंचने वाली शक्कर ऊर्जा में तब्दील नहीं हो पाती। इससे फास्टफूड, मीठे और तैलीय पकवानों से दूरी बनाने तथा जिम में घंटों पसीना बहाने के बावजूद वजन घटाने के अभियान में कुछ खास कामयाबी नहीं मिल पाती है। मोटापे पर नियंत्रण हासिल करने के लिए व्यक्ति का कार्बोहाइड्रेट की मात्रा में कमी लाना जरूरी हो जाता है।
    प्रोफेसर एलेन गोवर्स के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने टाइप-2 डायबिटीज से पीडि़त 380 वयस्कों पर 'कैलोरी रिस्ट्रिक्शन डाइटÓ, 'लो कार्ब डाइटÓ और '6*6 डाइटÓ का असर आंका। '6*6 डाइटÓ में तीन चरणों में कार्बोहाइड्रेट के सेवन में कमी लाई जाती है। प्रतिभागी के जहां प्रोसेस्ड खाने पर पूर्ण पाबंदी होती है। वहीं, प्रोटीन और फाइबर की खुराक बढ़ाते हुए उसे तीनों पहर के खाने में सब्जी जरूर शामिल करने की सलाह दी जाती है।
    एक साल बाद गोवर्स और उनके साथियों ने पाया कि '6*6 डाइटÓ वजन घटाने में 'कैलोरी रिस्ट्रिक्शन डाइटÓ से दोगुना ज्यादा असरदार थी। इससे इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ाने और रक्तचाप नियंत्रित रखने में भी मदद मिली, वो भी बिना किसी दवा के। बकौल गोवर्स, अध्ययन से साफ है कि डायबिटीज, प्री-डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम सहित इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याएं झेल रहे मरीजों में वजन घटाने के लिए सिर्फ कैलोरी में कमी लाना काफी नहीं है। कार्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन, फाइबर सहित विभिन्न मैक्रो और माइक्रो पोषक तत्वों की संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है।
    '6*6 डाइटÓ सबसे ज्यादा फायदेमंद-
    -'6*6 डाइटÓ में कैलोरी में कटौती पर जोर नहीं दिया जाता है। व्यक्ति को गुड फैट से लैस खाद्य वस्तुएं, मसलन मछली, बादाम, ऑलिव ऑयल, फलियां और अंकुरित अनाज खाने की पूरी छूट होती है। हालांकि, प्रोसेस्ड फूट खाने की मनाही रहती है। कार्बोहाइड्रेट से पूर्ण परहेज से इसलिए रोका जाता है, ताकि ग्लुटेन एलर्जी न विकसित हो। इसमें शरीर कार्बोहाइड्रेट पचाने की क्षमता खो देता है।
    तीन चरण में होती है डाइटिंग-
    -पहले चरण में दिनभर में 36 ग्राम से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट नहीं लेना होता। वहीं, प्रोटीन की खुराक 1.2 ग्राम प्रति किलोग्राम शारीरिक वजन के बराबर लानी होती है। जब मोटापे में उल्लेखनीय कमी आने लगे तो दूसरे चरण में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा थोड़ी बढ़ा दी जाती है। वहीं, तीसरे चरण में जब वजन कटौती का लक्ष्य पूरा हो जाए तो व्यक्ति सामान्य मात्रा में कार्बोहाइड्रेट लेने लगता है।
    लाजवाब असर-
    -46.9त्न प्रतिभागी सालभर में 5त्न या उससे अधिक वजन घटाने में कामयाब हुए
    -40त्न का ब्लड शुगर सामान्य हो गया, रक्तचाप में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई
    -30त्न थी ब्लड शुगर तो 40त्न थी वजन घटाने वालों की संख्या लो-कार्ब डाइट ग्रुप में
    -50 से 100 ग्राम कार्बोहाइड्रेट लेने की इजाजत होती है इस डाइट में, कैलोरी में कमी पर ज्यादा जोर रहता है

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / हिंदू मैरिज एक्ट के तहत समलैंगिकों की शादी का केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में विरोध किया है. केंद्र सरकार ने कहा कि हमारी कानूनी प्रणाली, समाज और समलैंगिक जोड़ों के बीच विवाह को मान्यता नहीं देती है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि अदालत को ध्यान में रखना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर किया है, इससे ज्यादा कुछ नहीं. याचिकाकर्ता समलैंगिकों की शादी को कानूनी मान्यता की मांग नहीं कर सकते. स्त्र ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत निषिद्ध संबंधों की डिग्री के खंड को पढ़ा और कहा कि यह "पुरुष" और "महिला" को संदर्भित करता है.
    वहीं याचिकाकर्ता राघव अवस्थी का कहना था कि वो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत समलैंगिकों की शादी को पंजीकृत करने की मांग कर रहे हैं. कानून यह नहीं कहता है कि विवाह एक पुरुष और एक महिला के बीच होना है. विषमलैंगिक के लिए उपलब्ध लाभ इस प्रकार समलैंगिक जोड़ों के लिए उपलब्ध नहीं हैं. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या किसी समलैंगिक जोड़े ने विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन किया लेकिन उसे इनकार कर दिया गया. अवस्थी ने कहा कि हां, लेकिन वे कोर्ट के सामने आने को तैयार नहीं थे, इसलिए जनहित याचिका दाखिल की गई है.

    नई दिल्ली / एजेंसी / चेन्नई / NEET परीक्षा आयोजित करने को लेकर कई लोगों ने आवाज उठाई और सरकार से परीक्षाओं को स्थगित करने की अपील भी की. इस बीच, मद्रास उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने लोकप्रिय साउथ स्टार सूर्या शिवकुमार के खिलाफ अवमानना का आरोप लगाया है. एक्टर सूर्या ने तमिलनाडु में तीन मेडिकल छात्रों के सुसाइड के बाद अदालत को लेकर रविवार को टिप्पणी की थी. बता दें कि तमिलनाडु में पिछले चार छात्रों ने आत्महत्या कर ली, इन छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा NEET में शामिल होना था.
    मद्रास उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में सूर्या के बयान से 'विवादास्पद हिस्सेÓ को लेते हुए जस्टिस एस एम बालासुब्रमण्यम ने कहा, "मेरी राय में उक्त कथन न्यायालय की अवमानना के बराबर है. इसमें न सिर्फ माननीय न्यायाधीशों की निष्ठा और भक्ति और हमारे देश की महान न्यायिक प्रणाली को भी कमतर दिखाया गया बल्कि बुरी तरह से आलोचना भी की गई. यह न्यायपालिका पर जनता के विश्वास के लिए खतरा है."
    सूर्या ने नीट से जुड़ी मौत की घटनाओं को "दर्दनाक" और "अंतरात्मा को झकझोर" देने वाली करार देते हुए कहा था कि कोरोना वायरस खतरे को देखते हुए कोर्ट, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्याय दे रहा है, ने छात्रों को बिना डरे जाने और परीक्षा देने का आदेश दिया है."
    चीफ जस्टिस को भेजे अपने पत्र में न्यायाधीश एस एम सुब्रमण्यम ने कहा, "बयान से पता चलता है कि माननीय जज को अपनी जान का खतरा और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्याय प्रदान करते हैं. जबकि, उनका कोई मनोबल नहीं है कि वे छात्रों को बिना किसी डर के नीट परीक्षा में बैठने का निर्देश देते हुए आदेश पारित करें."

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / रेलवे की जमीन पर बसी 48 हजार झुग्गियों को फिलहाल हटाया नहीं जाएगा. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि फिलहाल दिल्ली में रेलवे लाइनों के साथ 48 हजार झुग्गियों को हटाया नहीं जाएगा.सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि रेलवे, शहरी विकास और सरकार एक साथ बैठकर 4 सप्ताह में एक समाधान निकालेंगे और तब तक झुग्गियों को हटाया नहीं जाएगा. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई चार हफ्ते के लिए टाली. गौरतलब है कि दिल्ली में रेलवे की जमीन पर बसी 48 हजार झुग्गियों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ कांग्रेस नेता अजय माकन की याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई. ष्टछ्वढ्ढ एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह सुनवाई की. इस मामले में माकन की ओर से वरिष्?ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा. गौरतलब है कि माकन ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने अपनी याचिका में कोर्ट द्वारा दिल्ली की रेलवे लाइन के आस-पास 48 हज़ार झुगियों को हटाने के फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है.
    माकन ने अपनी याचिका में कहा है कि कोर्ट के इस फैसले से करीब 2 लाख 40 हज़ार लोग प्रभावित होंगे. उन्?होंने कहा है कि 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इन झुग्गियों को तीन महीने में हटाने का आदेश दिया है, लेकिन आदेश देने से पहले झुग्गीवालों को नहीं सुना. इसके साथ ही माकन ने यह भी कहा है 'दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में निर्देश दिया था कि बिना पुनर्वास और वैकल्पिक आवास मुहैया कराए बिना झुग्गियों को नहीं हटाया जाना चाहिए लेकिन रेलवे और दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस आदेश से अंधेरे में रखा.Ó कांग्रेस ने याचिका में क्चछ्वक्क और ्र्रक्क पर सुप्रीम कोर्ट को अंधेरे में रखकर धोखा देने का आरोप लगाया.
    बता दें कि माकन के साथ रेलवे पटरियों के पास झुग्गी में रहने वाले कैलाश पंडित ने भी अर्जी दी है. याचिका में कहा गया है कि दिल्ली झुग्गी और जेजे पुनर्वास और पुनर्वास नीति, 2015 और प्रोटोकॉल (झुग्गियों को हटाने के लिए) में उनकी झुग्गियों को हटाने/ध्वस्त करने से पहले झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास की एक प्रक्रिया है.बेघर व्यक्तियों को आश्रय और आजीविका की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए मजबूर किया जाएगा और वह कोविड -19 के चलते हानिकारक होगा. मामले में शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की मांग करते हुए, याचिकाकर्ता ने कहा है कि अदालत सीधे रेल मंत्रालय और दिल्ली सरकार को हटाने से पहले झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए उन्हें दिल्ली स्लम और जेजे पुनर्वास और पुनर्वास नीति, 2015 और प्रोटोकॉल (झुग्गियों को हटाने के लिए) का पालन करने के लिए निर्देशित करें.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / हैदराबाद आंध्रप्रदेश की एक युवती की अमेरिका में दुर्घटनावश फिसलकर एक वाटरफॉल से गिरने के कारण मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, अपने मंगेतर के साथ सेल्?फी लेने के दौरान यह युुुुवती फिसलकर वाटरफॉल से गिर गई.पोलावारापु कमला और उसका मंगेतर अपने अटलांटा स्थित रिश्?तेदार से मिलने के बाद घर लौट रहे थे, इस दौरान वे बाल्?ड रिवर के पास रुके. एक सेल्?फी लेने के दौरान य जोड़ा फिसलकर वाटरफॉल से गिर गया. मंगेतर को तो बचा लिया गया, वहीं कमला बेहोशी की हालत में मिलीं. हरसंभव प्रयास के बावजूद उन्?हें बचाया नहीं जा सका.
    महिला के शव को भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं. हादसे के कारण कमला के माता-पिता सदमे की सी हालत में हैं. उसकी मां ने बताया, 'कमला ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी और वह आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका गई थी, यहां तक की वहां उसकी नौकरी भी लग गई थी.Ó
    कमला के पिता के अनुसार, तेलुगु एसोसिएशन ने शव को भारत लाने में मदद का आश्?वासन दिया है. कमला की बहन शादीशुदा है और चेन्?नई में रहती है. परिवार कृष्?णा डिस्ट्रिक्?ट के गुडावेलुरु में रहता है. ग्रेजुएशन के बाद कमला अमेरिका गई थी और वहां एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करती थी.

    रेडियो वार्ता ’लोकवाणी’ की दसवीं कड़ी में ’समावेशी विकास-आपकी आस’ विषय पर मुख्यमंत्री ने साझा किए अपने विचार
    सभी की आजीविका और बेहतर आमदनी की व्यवस्था समावेशी विकास का मूलमंत्र
    महान विभूतियों की न्याय की अवधारणा में मिला विकास का ’छत्तीसगढ़ी मॉडल’
    राजमेरगढ़ और कबीर चबूतरा में बनेगा ईको रिसार्ट और कैफेटेरिया


    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज प्रसारित अपनी रेडियो वार्ता लोकवाणी की दसवीं कड़ी में ‘समावेशी विकास-आपकी आस’ विषय पर श्रोताओं के साथ अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, डॉ. अम्बेडकर, शास्त्री, आजाद, मौलाना जैसे हमारे नेता जिस न्याय की बात करते थे, उसी साझी विरासत से हमें विकास का छत्तीसगढ़ी मॉडल मिला है। समावेश का सरल अर्थ होता है- समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना, सभी की भागीदारी, सबके विकास की व्यवस्था। उन्होंने कहा कि किसान को जब हम अर्थव्यवस्था की धुरी मान लेंगे तो समझ लीजिए कि समावेशी विकास की धुरी तक पहुंच गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को अर्थव्यवस्था के केन्द्र में रखा है। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था में किसान, ग्रामीण, अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के गंभीर प्रयास करते हुए राज्य सरकार सबसे विकास की व्यवस्था कर रही है।
    ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के वेदवाक्य में है समावेशी विकास की भावना
    मुख्यमंत्री ने ‘समावेशी विकास-आपकी आस’ विषय पर आपने विचार रखते हुए कहा कि मेरा दृढ़ विश्वास है कि देश और प्रदेश की आर्थिक- सामाजिक समस्याओं का समाधान, समावेशी विकास से ही संभव है। हम अपने राज्य में समावेशी विकास की अलख जगा रहे हैं और इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के वेदवाक्य में भी यही भावना है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत है। सवाल उठता है कि प्रचलित व्यवस्था में किसका समावेश नहीं है? कौन छूटा है? तो सीधा जवाब है कि जिसे संसाधनों पर अधिकार नहीं मिला, जिसके पास गरिमापूर्ण आजीविका का साधन नहीं है, विकास के अवसर नहीं हैं या जो गरीब है। वही वर्ग तो छूटा है। हमारी प्रचलित अर्थव्यवस्था में किसान, ग्रामीण, अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाओं की भागीदारी बहुत कम रही है। ऐसा नहीं है कि प्रयास शुरू ही नहीं हुए बल्कि यह कहना उचित होगा कि वह मुहिम कहीं भटक गई, कहीं जाकर ठहर गई। थोड़ा पीछे जाकर देखें तो महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, डॉ. अम्बेडकर, शास्त्री, आजाद, मौलाना जैसे हमारे नेता जिस न्याय की बात करते थे, उसी साझी विरासत से हमें छत्तीसगढ़ी मॉडल मिला है। नेहरू जी ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में पंचवर्षीय योजनाओं का सिलसिला शुरू किया था। उसी की बदौलत भारत की बुनियाद हर क्षेत्र में, विशेष तौर पर आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में मजबूत हुई थी। उन्होंने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना काल (2007 से 2012) में भारत की अर्थव्यवस्था में ‘समावेशी विकास’ की अवधारणा को काफी मजबूती के साथ रखा गया था। उस समय यूपीए की सरकार थी और प्रधानमंत्री थे मनमोहन सिंह अर्थात देश की बागडोर कुशल अर्थशास्त्री के हाथों में थी। लक्ष्य था कि देश की जीडीपी अर्थात सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक लाना है। यह भी तय हुआ था कि विकास दर को लगातार 10 प्रतिशत तक बनाए रखना है ताकि वर्ष 2016-17 तक प्रति व्यक्ति आय को दोगुना किया जा सके। 12वीं पंचवर्षीय योजना काल 2012 से 2017 के लिए भी जीडीपी को 9 से 10 प्रतिशत के बीच टिकाए रखने का लक्ष्य रखा गया था। आज भारत की विकास दर 3 प्रतिशत के आसपास है। वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में देश की विकास दर में लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो दुनिया में सर्वाधिक गिरावट है। कोरोना की समस्या तो पूरी दुनिया में है। अमेरिका के सर्वाधिक कोरोना प्रभावित होने के बावजूद वहां की जीडीपी मात्र 10 प्रतिशत गिरी है। जबकि भारत की जीडीपी दुनिया में सर्वाधिक 24 प्रतिशत गिरी है। इस हालात को समझना होगा।
    सभी की आजीविका और बेहतर आमदनी की व्यवस्था समावेशी विकास का मूलमंत्र
    मुख्यमंत्री ने समावेशी विकास की अवधारणा को छत्तीसगढ़ में लागू किया करने के संबंध में कहा कि समाज के जो लोग चाहे वे छोटे किसान हों, गांव में छोटा-मोटा काम-धंधा करने वाले लोग हों, खेतिहर मजदूर हांे, वनोपज पर आश्रित रहने वाले वन निवासी तथा परंपरागत निवासी हों, चाहे कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार की महिलाएं हों, ग्रामीण अंचलों में परंपरागत रूप से काम करने वाले बुनकर हांे, शिल्पकार हांे, लोहार हों, चर्मकार हों, वनोपज के जानकार हों, सभी के पास कोई न कोई हुनर है, जो उन्हें परंपरागत रूप से मिलता है। समय की मार ने उनकी चमक, उनकी धार को कमजोर कर दिया है। उनके कौशल को बढ़ाया जाए, उनके उत्पादों को अच्छा दाम मिले, अच्छा बाजार मिले तो वे बड़ा योगदान कर सकते हैं। ऐसे सभी लोगों की आजीविका और बेहतर आमदनी की व्यवस्था करना ही समावेशी विकास का मूलमंत्र है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें यह समझना होगा कि हर परिवार के पास आजीविका का साधन हो। मुख्यतः अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को राज्य के संसाधन और उनकी आय के साधन सौंपकर हम आर्थिक विकास के लाभों के समान वितरण का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। दिसम्बर 2018 से छत्तीसगढ़ में हमने जिस तरह की नीति-रीति अपनाई है, उसे देखकर समावेशी विकास को समझा जा सकता है।
    किसानों को माना अर्थव्यवस्था की धुरी
    मुख्यमंत्री ने रेडियो वार्ता के श्रोताओं से कहा कि किसान को जब हम अर्थव्यवस्था की धुरी मान लेंगे तो समझ लीजिए कि समावेशी विकास की धुरी तक पहुंच गए हैं। ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ से प्रदेश के 19 लाख किसानों को लाभ मिल रहा है। दो किस्तों में 3 हजार करोड़ का भुगतान हो चुका है। अब जल्दी ही पूरे 5700 करोड़ रू. भुगतान का वादा भी पूरा हो जाएगा। हमने न सिर्फ धान के किसानों को 2500 रूपए प्रति क्विंटल देने का वादा पूरा किया है, बल्कि मक्का, गन्ना के साथ छोटी-छोटी बहुत सी फसलों का भी बेहतर दाम देंगे। राज्य सरकार ने कर्ज माफी की, सिंचाई कर माफ किया और अब न्याय योजनाओं का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। गोधन न्याय योजना के चालू होते ही गौठान निर्माण में तेजी आई है। हर 15 दिन में हम खरीदे गए गोबर का भुगतान कर रहे हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं गोबर खरीदकर, वर्मी कम्पोस्ट बना रही हैं। इस तरह से ग्रामीण जनता ही नहीं, बल्कि अनेक संस्थाओं को भी अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिला। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गांव के सभी वर्गों का एकजुट होना, मेरे ख्याल से सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति भी है। जिस तरह से कुछ लोग गाय और शिक्षा प्रणाली को लेकर सिर्फ बातें करते थे, करते कुछ नहीं थे। उन्हें यह देखना चाहिए कि हमारे 40 नए इंग्लिश मीडियम स्कूलों में प्रवेश भी अब सम्मान का विषय बन गया है। ‘पढ़ाई तुंहर दुआर’ ‘पढ़ाई तुंहर पारा’, जैसे लोक अभियानों से हमने बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखा है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें वरिष्ठ सांसद राहुल गांधी जी ने ही न्याय योजना शुरू करने, हर ब्लॉक में फूडपार्क खोलने जैसे व्यावहारिक उपाय बताए थे। हमने 200 फूडपार्क खोलने की योजना बना ली है और इनमें से 100 से ज्यादा के लिए जमीन का इंतजाम भी हो गया। औद्योगिक विकास को ब्लॉक स्तर पर पहुंचाने वाली नई औद्योगिक नीति लागू कर दी है। मुख्यमंत्री को श्रोताओं ने बताया कि आमचो बस्तर, आमचो ग्राम, आमचो रोजगार योजना के माध्यम से उन्हें लाभ मिलना शुरू हो गया है। इसी तरह पंचायत में लगाए सर्वर से भी लोगों को लाभ मिल रहा है। राजनांदगांव जिले के गर्रापार के श्री मानवेन्द्र साहू ने नरवा-गरवा -घुरवा- बारी के माध्यम से समावेशी विकास और रोजगार के संबंध में मुख्यमंत्री से जानकारी चाही। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुराजी गांव योजना को आप लोगों ने जिस तरह से हाथों-हाथ लिया है, उससे मैं बहुत उत्साहित हूं। यह योजना वास्तव में ग्रामवासियों को ही चलानी है। नरवा का पानी सिंचाई के लिए भी जरूरी है और अन्य कार्यों के लिए भी। गरवा, गौठान, गोधन न्याय योजना सब एक दूसरे से जुड़ गए हैं। जैविक खाद भी बन रही है और मूर्तियां भी। हर गौठान में समिति भी हैं और इनके साथ महिला स्व-सहायता समूह भी बन रहे हैं। सब मिलकर अपने गांव की जमीन को उपजाऊ भी बना रहे हैं और रोजगार का नया-नया साधन भी अपना रहे हैं। गौठान, गोधन, बाड़ी, जैविक खाद निर्माण विपणन आदि के माध्यम से लाखों लोगों के लिए रोजगार के रास्ते बन रहे हैं। गांव के संसाधन को जब गांव के लोग अपना समझकर उसे आर्थिक उन्नति के लिए उपयोग में लाते हैं, तो यह समावेशी विकास का सबसे अच्छा उदाहरण बन जाता है। मेरा पूरा विश्वास है कि आप सब लोग मिलकर गांवों को सचमुच में चमन बना देंगे और यही छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत होगी।
    छत्तीसगढ़ ने साबित किया: समावेशी विकास ही सर्वांगीण विकास का रास्ता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने यह साबित किया है कि समावेशी विकास ही सर्वांगीण विकास का रास्ता है। उन्होंने कहा कि हमने यह देखा कि किसी भी तरह किसानों, ग्रामीणों, आदिवासियों, महिलाओं, युवाओं की जेब में नगद राशि डाली जाए। यह राशि डेढ़ साल में 70 हजार करोड़ रू. तक पहुंच गई। इस तरह प्रदेशवासियों को मान-सम्मान के साथ उनके स्वावलंबन का रास्ता बनाया है। हमारी योजनाओं से हर तबके को लाभ मिला। बिजली बिल हाफ, छोटे भू-खंडों की खरीदी-बिक्री, गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत कमी, पंजीयन शुल्क में कमी, राजस्व संबंधी मामलों का निपटारा, भूमिहीनों को भूमि प्रदाय और ऐसे अनेक सुधार किए जिसके कारण आम आदमी का जीवन आसान हुआ। इस तरह लाखों लोगों के हाथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को संभालने में मददगार बने। हमने कोरोना संकट के बीच, एक ओर जहां सरकारी कर्मचारियों का वेतन यथावत् रखा, कोई कटौती नहीं की, वहीं प्रवासी मजदूरों सहित उद्योग, व्यापार और कारोबार जगत पर विश्वास किया। किसानों से लेकर व्यापारियों तक, सबके बीच हमारा विश्वास का रिश्ता बना है, उसी के कारण खेती भी चली और उद्योगों के पहिये भी चले। हमारी नीतियों से गांवों से लेकर शहरों तक वित्तीय तरलता बनी रही जिससे लोगों को रोजगार मिला और बेरोजगारी की दर घटी। हमने यूपीए सरकार की महात्मा गांधी नरेगा योजना की विरासत को संजोया और उसमें प्राण फूंके, जिससे देश में मनरेगा के तहत काम और मजदूरी देने वाले अग्रणी राज्य बने। तेंदूपत्ता की संग्रहण मजदूरी 4 हजार रू. करके ही चुप नहीं बैठे, बल्कि लघु वनोपजों की खरीदी 7 से बढ़ाकर 31 वस्तुओं तक पहुंचा दी। जो महुआ 17 रू. में बिकता था उसे 30 रू. किलो में खरीदा। ऐसे तमाम काम जनता की जरूरतें और दुख-दर्द को समझने वाली सरकार ही कर सकती है। अपनी संस्कृति से लेकर जनता की आर्थिक स्थिति तक से सीधा जुड़ाव, उनकी स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर, हर परिस्थिति में शिक्षा-दीक्षा के इंतजाम, पोषण और प्रगति के इंतजाम करना ही हमारा मुख्य उद्देश्य रहा है। लॉकडाउन के बीच भी पीडीएस, आंगनबाड़ी, मध्याह्न भोजन योजना, कुपोषण मुक्ति अभियान पूरी गति से चलता रहा, जिसके कारण कुपोषण की दर में भी कमी आई। ऐसे सभी प्रयास जो आम जनता या कमजोर तबकों को सीधे मदद करते हैं, ये सब समावेशी विकास के प्रयास ही हैं। जिसका नतीजा राज्य के सर्वांगीण विकास के रूप में मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने यह साबित किया है कि समावेशी विकास ही सर्वांगीण विकास का रास्ता है।
    राजमेरगढ़ और कबीर चबूतरा में सात करोड़ रूपए की लागत से विकसित किए जाएगा ईको रिसार्ट और कैफेटेरिया
        मुख्यमंत्री ने कहा कि गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला गठन के 6 माह के अंदर, वहां करीब 100 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की स्वीकृति मिल चुकी है। कई कार्य प्रगति पर हैं। मरवाही अनुभाग, मरवाही नगर पंचायत, सरकारी अंग्रेजी माध्यम शाला तथा महंत बिसाहूदास उद्यानिकी महाविद्यालय, एक के बाद एक नई-नई उपलब्धियां नए जिले के खाते में जुड़ती जा रही हैं। नए जिले में पर्यटन विकास की संभावनाओं को साकार किया जाएगा। साथ ही इसे ग्रामीण विकास के रोल मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में ही घोषणा करते हुए कहा कि राजमेरगढ़ और कबीर चबूतरा की प्राकृतिक छटा और ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करते हुए यहां ईको रिजॉर्ट, कैफेटेरिया तथा अन्य पर्यटन अधोसंरचनाओं का विकास तेजी से किया जाएगा। फिलहाल इसके लिए 7 करोड़ रू. की लागत से विकास कार्य शीघ्र शुरू होंगे।
    कोरोना संक्रमण की रोकथाम और उपचार के लिए किए जा रहे हर संभव उपाय
    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कोरोना संकट से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि मार्च 2020 की स्थिति में केवल एम्स रायपुर में ही कोविड टेस्टिंग की सुविधा थी, जिसे बढ़ाना एक बड़ी चुनौती थी। आज की स्थिति में राज्य के सभी 6 शासकीय मेडिकल कॉलेज, 4 निजी लैब में आर.टी.पी.सी.आर. टेस्ट, 30 लैब में ट्रू नॉट टेस्ट तथा 28 जिला अस्पतालों सहित सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में रैपिड एंटीजन किट से टेस्ट की व्यवस्था कर दी गई है। मार्च 2020 में प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की सुविधा केवल एम्स रायपुर में थी, लेकिन राज्य शासन ने सुनियोजित कार्ययोजना से अब तक 29 शासकीय, 29 डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल, 186 कोविड केयर सेन्टर की स्थापना कर दी है। 19 निजी अस्पतालों को भी उपचार हेतु मान्यता दी गई है। मार्च 2020 की स्थिति में 54 आईसीयू बिस्तर तथा 446 जनरल बेड उपलब्ध थे, जिसमें बढ़ोतरी करते हुये अब 776 आईसीयू बेड्स तथा 28 हजार 335 जनरल बेड उपलब्ध करा दिए गए हैं, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है। राज्य के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सुविधा हेतु 148 वेन्टिलेटर थे। जो अब बढ़कर 331 हो गए हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि संक्रमण की रोकथाम और उपचार के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे है।
    एसिम्टोमेटिक मरीजों को होम आइसोलेशन की सुविधा: टेलीमेडिसिन परामर्श केन्द्र से उपचार हेतु मार्गदर्शन
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वक्त सबसे बड़ी जरूरत है कि सब लोग मिलकर हिम्मत का परिचय दें। सावधानी और साहस से यह दौर भी निकल जाएगा। राज्य में ज्यादातर व्यक्ति एसिम्टोमेटिक श्रेणी के आ रहे हैं। इसको लेकर भी भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन फेस मास्क और फेस शील्ड के महत्व को समझें। हाथ साफ करने के लिए साबुन-पानी, सेनेटाइजर का उपयोग करें। भीड़ से बचें। एसिम्टोमेटिक मरीजों के होम आइसोलेशन की सुविधा भी नियमानुसार उपलब्ध है। लगातार समीक्षा और सुधार से स्थितियों को बेहतर किया जा रहा है। टेलीमेडिसिन परामर्श केन्द्र के माध्यम से पूर्ण जानकारी, उपचार हेतु मार्गदर्शन व दवाईयॉ उपलब्ध कराने की सुविधा भी दी है। संकट अभी टला नहीं है। सावधानी जरूरी है।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ  / लद्दाख और साउथ चाइना सी के बाद चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) अब भूटान के खिलाफ नया मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि चीन ने सीमा को लेकर 25वें दौर की बातचीत को अपने पक्ष में झुकाने के मकसद से भूटान पर दबाव बनाने के लिए पश्चिमी और मध्य भाग में बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात कर दिया है।
    थिंपू को सर्वोच्च स्तर पर पीएलए के खतरे को लेकर सावधान कर दिया गया है। संभावना है कि आगामी बातचीत में पहले से अतिक्रमित क्षेत्रों और पश्चिमी भाग में दावों की सौदेबाजी के लिए बीजिंग पीएलए के घुसपैठ और अतिक्रमण का इस्तेमाल करेगा। भूटान भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में हैं क्योंकि यह देश सिलीगुरी कॉरीडोर के करीब है और भूटान की ओर से जमीन को लेकर किया गया कोई भी समझौता भारतीय रक्षा पर बुरा प्रभाव डालेगा।
    भारतीय सेना, कूटनीति और सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि 2017 में 73 दिनों तक चले डोकलाम स्टैंड ऑफ के दौरान भारत ने भूटान को पीएलए का सामना करने में मदद की, लेकिन चीनी सेना ने दोनों सहयोगी देशों की सेनाओं को परखना बंद नहीं किया है।
    चीन भूटान के पश्चिमी सेक्टर में 318 स्क्वायर किलोमीटर और सेंट्रल सेक्टर में 495 स्क्वायर किलोमीटर पर दावा करता है। विस्तारवादी नीति के तहत चीनी सेना रोड और सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने में जुटी है और आक्रामक पेट्रोलिंग के जरिए भूटान की रॉयल आर्मी को डराने की कोशिश की जाती है।
    थिंपू और नई दिल्ली में मौजूद कूटनीतिज्ञों के मुताबिक, डोकलाम तनातनी के बाद से पीएलए ने पश्चिमी भूटान के पांच इलाकों में घुसपैठ की और नई सीमा पर दावा ठोका है जो भूटान में 40 किलोमीटर भीतर चुंबी वैली तक है। इसने बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है, रक्षापंक्ति को बेहतर बनाया है, सैनिकों और रसद को अंतिम छोड़ तक पहुंचाने के लिए सड़कें, हेलीपैड्स का निर्माण किया गया है।

    मध्यकालीन साम्राज्य के अंदाज में पीएलए के सैनिक 13 और 24 अगस्त को दक्षिण डोकलाम में तोरसा नाले को पार कर गए और राजा रानी झील के पास भूटानी चरवाहों को इलाका खाली करने को कह दिया। पीएलए के इस कदम के पीछे वास्तविक सोच यह है कि भारत और भूटान इस बात पर सहमत हो जाएं कि चीनी सीमा झामपेरी रिज पर गयेमोचन तक है, नाकि सिंचे ला बतांग ला एक्सिस। यह वही है जो चीन 2017 में करना चाहता था, लेकिन भारतीय सेना ने पीएलए को रोक दिया था।
    नेशनल सिक्यॉरिटी प्लानर्स के मुताबिक, पीएलए ने नॉर्थ डोकलाम में सर्विलांस में वृद्धि कर दी है। इसने यहां सर्विलांस कैमरे लगा दिए हैं और आक्रामक तरीके से सेना का टेक्नीकल अपग्रेडेशन किया जा रहा है। थिंपू ने भी रॉयल भूटानी आर्मी को तैयार रहने को कहा है और पीएलए को तोरसा नाले के दक्षिण से आने से रोकने के लिए अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का आदेश दिया है।
    पीएलए का विस्तारवादी प्लान केवल पश्चिमी भूटान तक सीमित नहीं है। जून में चीन ने भूटान के साकटेंग वन्यजीव अभयारण्य प्रोजेक्ट पर आपत्ति जाहिर की थी। चीन ने कहा था कि यह विवादित सीमा इलाके में मौजूद है। भारत और चीन से लगती सीमा के पास यह 750 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है। नए दावा भारत को भी विवाद में खींच सकता है क्योंकि अभयारण्य अरुणाचल प्रदेश के निकल है, जिस पर चीन अपना दावा करता है।
    यह भूटान के लिए बेहद चौंकाने वाला है, क्योंकि चीन ने साकटेंग वन्यजीव अभयारण्य या पूर्वी भूटान के किसी जमीन पर पहले कभी दावा नहीं किया था। यहां तक की चीन ने 36 सालों से चल रहे कूटनीतिक बातचीत में भी कभी इसका जिक्र नहीं किया था। स्वभाविक रूप से भूटान सरकार ने इसका मजबूती से विरोध किया। चीन के दावे को खारिज करते हुए थिंपू ने यह भी साफ किया कि यह भूटान का संप्रभु हिस्सा है और यह विवादित नहीं है। हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन और भूटान के बीच सीमा निर्धारित नहीं है। पूर्वी, मध्य और पश्चिमी सेक्टर को लेकर लंबे समय से विवाद है।
    यह ध्यान देने योग्य है कि चीन का यह रुख जून में सामने आया जब बीजिंग के कहने पर पीएलए सैनिक लद्दाख में भारतीय सैनिकों के साथ तनातनी में जुटे थे। चीन का पूर्वी भूटान में नया दावा बीजिंग की मंशा की ओर संकेत करता है। अचानक क्षेत्रीय दावे ने विस्तारवादी नैरेटिव को पुष्ट किया जो जिसे शी जिनपिंग अंजाम दे रहे हैं।

    नई दिल्ली / एजेंसी / शादी के ढाई महीने बाद ही पल्ला इलाके के सूर्या विहार सेक्टर-91 इलाके में एक विवाहिता ने प्रेमी संग मिलकर पति की बेरहमी से हत्या कर दी। धारदार हथियार से गर्दन पर हमला कर हत्या की गई। खून से लथपथ शव को प्रेमी ने अपनी कार की डिग्गी में छुपाकर यूपी बागपत के जंगल में ले जाकर फेंक दिया। क्राइम ब्रांच सेक्टर-85 और पल्ला थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बागपत के जंगलों से शव बरामद कर लिया। पुलिस ने इस संबंध में महिला और प्रेमी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी प्रेमी को बागपत इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। तीन दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
    दिल्ली के सरायकाले खां निवासी रजत की शादी जून 2020 में बागपत इलाके के एक गांव में रहने वाली युवती से हुई। शादी के बाद रजत अपनी पत्नी व मां-बाप के साथ पल्ला थाना इलाके के सूर्या बिहार में किराए के मकान में रहने लगा। पुलिस के मुताबिक रजत की पत्नी का उसी इलाके के एक गांव में रहने वाले नरेंद्र नामक एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसके चलते पत्नी अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती थी। सचिन ने नौ सितंबर को पल्ला थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका भाई रजत सुबह 7:00 बजे घूमने के लिए निकला था और अभी तक घर नहीं पहुंचा है। पुलिस ने इस संबंध में गुमशुदगी की रपट दर्ज कर परिजनों से पूछताछ की। प्राथमिक दृष्टया में पुलिस ने पाया कि यह मामला गुमशुदगी का नहीं है। इसके बाद पुलिस ने बारीकी से पूछताछ शुरू कर दी तो पत्नी संदेश के घेरे में आती चली गई।
    कॉल डिटेल पर शक गहराया
    पुलिस आयुक्त ओपी सिंह के निर्देश पर मामले की जांच क्राइम ब्रांच सेक्टर-85 प्रभारी सुमेर सिंह को सौंप दी गई। पल्ला थाना प्रभारी सतीश कुमार व क्राइम ब्रांच सेक्टर-85 की सयुंक्त टीम ने साइबर टीम की मदद से मोबाइल कॉल डिटेल समेत अन्य बिन्दुओं पर बारीकी से जांच करते हुए इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली। इसके बाद बागपत में छापामारी कर महिला के आरोपी प्रेमी 22 वर्षीय नरेंद्र निवासी गांव गोठड़ा बागपत को क्राइम ब्रांच सेक्टर 85 ने गिरफ्तार किया है। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने बागपत के समीप से पति का शव बरामद किया। आरोपी महिला की तलाश की जा रही है। इसको भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
    प्रेमी के साथ बनाई योजना
    पत्नी ने अपने पति को रास्ते से हटाने के लिए प्रेमी के साथ योजना बनाई। 8-9 की रात को उसने अपने प्रेमी को फरीदाबाद बुला लिया। इससे पहले उसने अपने पति को नींद की गोलियां मिलाकर दूध पिला दिया। इससे उसका पति गहरी नींद में सो गया। इसके उपरांत आरोपी नरेंद्र ने धारदार हथियार से रात के समय जब रजत सो रहा था तब उसकी गर्दन में पर हमला कर हत्या कर दी। आरोपी ने बताया कि हत्या के दौरान रजत की पत्नी ने रजत के हाथ पकड़े थे। इससे उसका आधा गला कट गया। पत्नी और नरेंद्र ने मिलकर रजत की डेड बॉडी को पहले एक पॉलिथीन में बंद किया। उसके बाद ऊपर से चद्दर लपेटकर स्विफ्ट गाड़ी में रख कर आरोपी नरेंद्र ने मृतक रजत की डेड बॉडी को बागपत के खेकड़ा के गंदे नाले में ले जाकर डाल दी।
    पढ़ते वक्त हुई दोस्ती प्रेम में बदली
    पूछताछ पर आरोपी नरेंद्र ने बताया कि वह मृतक रजत की पत्नी मधु (बदला हुआ नाम) के साथ पढ़ता था। तभी से उन दोनों के बीच दोस्ती हो गई थी और दोस्ती प्यार में बदल गई थी। दोनों एक दूसरे के साथ शादी करना चाहते थे। मधु के घर वालों ने उसकी शादी फरीदाबाद सूर्य विहार सेक्टर 91 निवासी रजत के साथ कर दी थी। इससे वह बहुत उदास रहता था। आरोपी नरेंद्र प्रेमिका मधु से चोरी-छिपे फरीदाबाद मिलने के लिए भी आता था। इन सब बातों के बारे में रजत को नहीं पता था। मधु की शादी करीब तीन महीने पहले ही रजत के साथ हुई थी। रिमांड के दौरान हत्या के दौरान इस्तेमाल हथियार व गाड़ी बरामद की जाएगी।

    दुर्ग / शौर्यपथ / ट्यूशन फीस को लेकर प्रशासन, प्रायवेट स्कूल और पालकों के बीच टकराव चरम सीमा में पंहुच गया है और अब पैरेंट्स एसोसियेशन ने भी ट्यूशन फीस को लेकर अधिनियम और संहिता का हवाला देकर शिक्षा विभाग और प्रायवेट स्कूलों को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी कर रहा है।
    फैक्ट फाईल
    आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 सी के अनुसार ट्यूशन फीस वह फीस होता है, जो हम अपने बच्चों के पढ़ाई के लिए स्कूल को देते है, जिसमें डेवलपमेंट, डोनेशन, कैपिटेशन और लेट फीस शामिल नहीं है। शिक्षा संहिता नियम 124ए अघ्याय 9-शिक्षा शुल्क पेज नं. 831 के अनुसार ट्यूशन फीस या शैक्षणिक शुल्क का आशय यह कि शासकीय एंव आशाकीय विद्यालयों में विभिन्न पाठ्यक्रम संबंधी एवं पाठ्येत्तर गतिविधियों के संचालन हेतु जो शुल्क लिया जाता है, उसे ट्यूशन फीस या शैक्षणिक शुल्क कहा जाता है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर गत 22 अप्रैल 2016 के अनुसार स्कूल में फीस का निर्धारण स्कूल के पालकों की आम सहमति और जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में निर्धारित किया जाएगा। सीबीएसई एफिलियेशन बायलॉस 2018 के अनुसार स्कूलों में फीस पीटीए (पैरेंट्स टीचर एसोसियेशन) द्वारा स्कूलों में दी जा रही सुविधाओं के अनुसार निर्धारित होगा। यह कि, फीस अधिसूचित/अनुमोदित करने के उपरांत इसे जनसामान्य को अवगत कराने हेतु विद्यालय के सूचना पटल में प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य है। यह कि, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर 22.04.2016 के अनुसार शुल्क निर्धारण के उपरांत यदि यह पाया जाता है कि, शुल्क का निर्धारण याथोचित रूप से नहीं किया गया है एवं इस संबंध में पालक वर्ग संतुष्ट नहीं है तो जिला शिक्षा अधिकारी इस हेतु समग्र रूप से उत्तरदायी होगें।
    इन मदों में ले रहे हैं निजी स्कूल फीस
    प्रदेश के 8 हजार प्राईवेट स्कूल शिक्षण शुल्क, डेवलपमेंट फीस,मेडिकल शुल्क, बिल्डिंग शुल्क,मेंनटेंनेंश शुल्क, टर्म फीस,बागवानी शुल्क, योगा शुल्क,अमलगमेटेड फंड, निर्धन छात्र शुल्क, स्मार्ट क्लास, परिवहन शुल्क,वार्षिक शुल्क,एडमिशन शुल्क,डायरी शुल्क,आईडी कार्ड शुल्क,टाई-बेल्ट शुल्क,रेडक्रास शुल्क, परीक्षा शुल्क,क्रीड़ा शुल्क विज्ञान शुल्क,स्काउड/गाईड शुल्क, पत्रिका शुल्क, छात्र समूह बीमा योजना शुल्क, क्रियाकलाप/एक्टिविटी शुल्क, लेट फीस, बोर्ड एफिलियेशन फीस, कम्प्युटर फीस,लैब फीस, कॉसन मनी का फीस लिया जाता है।

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