August 03, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    दुर्ग / शौर्यपथ / सोमवार से जिला अस्पताल में फीवर सेंटर में 3 काउंटर आरम्भ हो जाएंगे। इस संबंध में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आज कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने पुनः जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां वे कैसुअल्टी वार्ड भी पहुंचे। यहां 15 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इसमें 15 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था भी करने के निर्देश कलेक्टर ने दिए।
    उन्होंने अस्पताल आने वाले पेशेंट को आते ही स्टेबल करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अस्पताल में दवा की उपलब्धता के संबंध में भी जानकारी ली। साथ ही उन्होंने कोरोना वारियर के लिए आवश्यक पीपीई जैसे सुरक्षा उपकरणों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि जो गंभीर मरीज आते हैं और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षणों से गुजर रहे हों, उन्हें आपात कालीन कोरोना प्रोटोकॉल के मुताबिक स्टेबल करे। इसके लिए पूर्व में प्रशिक्षण भी दिए गए हैं।
    कलेक्टर ने कहा कि फीवर क्लिनिक में व्यवस्था बेहद अहम है। सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे। नए काउंटर आरम्भ होने के पश्चात समय काफी घट जाएगा, इससे सोशल डिस्टेंसिंग बनाये रखने में आसानी होगी। कलेक्टर ने फीवर क्लिनिक में कार्य कर रहे हेल्थ स्टाफ से भी चर्चा की। उन्होंने सिविल सर्जन से लगातार इस दिशा में मॉनिटरिंग करने कहा ताकि जल्द से जल्द सैंपल लेने की प्रक्रिया पूरी की जा सके और लोगों को टेस्ट के लिए न्यूनतम समय लगे। कलेक्टर ने रात की पाली में जिला चिकित्सालय की व्यवस्था की जानकारी भी ली। सिविल सर्जन ने रात के समय डयूटी के लिए लगाए गए स्टाफ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी को दायित्वों की जानकारी दे दी गई है और वे इसका निर्वहन कर रहे हैं। आपात केस के लिए आवश्यक प्रोटोकॉल के मुताबिक कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि रात के समय सैंपलिंग के लिए भी दल बनाया गया है।
    इस दौरान एसडीएम खेमलाल वर्मा भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि शनिवार को मौके पर किये गए निरीक्षण के अनुरूप दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। नए काउंटर की तैयारियां हो गई हैं। सोमवार से यह आरम्भ हो जाएंगी। कलेक्टर ने अस्पताल परिसर के नियमित सैनिटाइजेशन तथा साफ सफाई की उत्तम व्यवस्था के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देशित किया।

    दुर्ग / शौर्यपथ / कगना रनौत को दिए जा रहे वाई श्रेणी सुरक्षा पर और प्रियंका गाँधी के सुरक्षा हटाने पर प्रदेश कांग्रेस महामंत्री राजेन्द्र साहू ने केंद्र सरकार की दोहरी मानसिकता की निति पर वार करते हुए कहा कि माना आज देश में भाजपा की सरकार ने एक महिला के सुरक्षा के लिए वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है किन्तु क्या ऐसी ही भावना देश की अन्य महिलाओं के लिए भी केंद्र सरकार ने अपनाई है . कौन है कंगना जिसे केंद्र ने एक प्रदेश के मुखिया सहुए बहस के कारण वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर दी जबकि इसी देश में एक महिला ऐसी है जिसके पिता की ही नहीं दादी की भी क्रूर तरीके से हत्या हुई और देश की विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी की नेता है जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए किन्तु सरकार द्वारा एक ऐसी महिला को सुरक्षा देने में इतनी तत्परता सिर्फ इस लिए कि सरकार के पुराने दोस्त जो वर्तमान में राजनैतिक विरोधी है के खिलाफ कंगना मुखर हो रही है क्या कंगना के सहारे महाराष्ट्र में अपने आप  को ताकतवार घोषित करने के लिए ये किसी साजिश के तहत हो रहा है जबकि देश की एक बेटी जिसके पूर्वजों ने देश के लिए त्याग और बलिदान किया जिसके दादी और पिता की हत्या हो गयी उसको मिलने वाली सुरक्षा छिन ली गयी मकान ख़ाली करवा दी गई और दूसरी ओर जिस परिवार का देश हित में कोई योगदान नहीं है केंद्र सरकार उसे सुरक्षा दे रही हैं और मीडिया उसे झाँसी की रानी साबित करने में लगी है जो देश का दुर्भाग्य हैऔर इस दुर्भाग्य में केंद्र सरकार परदे से पीछे अपना राजनैतिक खेल खेल रही है . केंद्र सरकार की इस दोहरी निति से भाजपा सरकार की दोहरी मानसिकता ही सामने आ रही है .

    सेहत / शौर्यपथ / हमारे जीवन में बहुत बार ऐसी स्थितियां आती हैं जब हम अपने ही विचारो में खो जाते हैं। फिर इस उलझन को सुलझाना लगभग असंभव हो जाता है। अगर आपके साथ यह बहुत कम होता है तब चिंता करने की कोई बात नही हैं। पर अगर आपको लगता है कि आपके साथ यह हर दूसरे दिन होने वाली घटना है, तब तो आपको सतर्क होकर कार्य करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।
    लगातार ज़्यादा सोचना गंभीर दिमागी परेशानी जैसे कि चिंता और अवसाद को जन्म दे सकता है। इसलिए इतनी कम उम्र में इतना ज्?यादा सोचना अच्?छी बात नहीं है।
    यदि आप बीते हुए कल के बारे में या आने वाले कल के बारे में ही सोचती रहती हैं, तो आपको अपनी मेंटल हेल्?थ के प्रति सतर्क हो जाना चाहिए। हम बता रहे हैं, ऐसे कुछ संकेत जो यह जानने में आपकी मदद करेंगे कि आप वाकई जरूरत से ज्?यादा सोचती हैं। जिसे ओवर थिंकर कहा जाता है।
    पहला संकेत : क्या आप हर चीज मे मतलब ढूंढती हैं?
    क्या आप हर छोटी से छोटी बात का भी कारण ढूंढती हैं, जो कि आपके जीवन में घटित होती है (या नहीं होती)। इसका मतलब आप खुद को हर समय हर छोटी-बड़ी चीज पर सोचने में व्?यर्थ कर रहीं हैं! आपको सार्वजनिक स्थान पसंद होंगे, परंतु वह आपके लिए एक ही समय पर आकर्षक और भारी दोनों हो सकते हैं।
    आप उन सभी चीजों के बारे में सोचेंगी जो आप के आस पास हो रही हैं और आप सभी पर विश्वास भी करने लगेंगी। जो कि असल में एक पेचीदा मामला है। आपको बस अपने आप को यह याद दिलाना है कि हर चीज के पीछे एक बहुत बड़ा कारण नहीं होता। बस बात इतनी सी है कि आपका दिमाग कुछ ज्यादा ही भार उठा रहा है ।
    दूसरा संकेत : आपको सोने में बहुत परेशानी होती है।
    अगर आप बहुत ज्यादा सोचती हैं, तो यह परेशानी आपके दिमाग को बिल्कुल सक्रिय कर देती है और इसको आराम करने की एक क्षण भी अनुमति नहीं देती। आप अच्छी तरह से सोने में इसलिए असमर्थ होते हैं, क्योंकि आपके दिमाग में बहुत सारे विचार एक साथ आ रहे होते हैं। आपको बिस्तर पर जाने से पहले कोई किताब पढऩी चाहिए या फिर ध्यान लगाना चाहिए।
    तीसरा संकेत : आप हर चीज में परफेक्?शन ढूंढती हैं।
    क्या आप एक परफेक्?शनिस्?ट हैं और हर कार्य को बिना किसी विघ्न बाधा के पूरा करना चाहती हैं। यह एक कला हो सकती है, परंतु कभी कभार यह कला भी एक कमजोरी के रूप में प्रकट हो सकती है।
    यह बस इस पर निर्भर है कि आप इस कला का किस प्रकार प्रयोग करते हैं। जब कोई काम आपके हिसाब से नहीं होता, तो आप घबरा जाती हैं और अपनी शांति खो बैठती हैं।
    चौथा संकेत : क्या आप जितना काम नहीं करतीं उससे ज्यादा सोचती हैं?
    अगर आप जितना काम कर रहीं हैं, उससे कही ज्?यादा सोच रहीं हैं, तो यह निश्चित है कि सोचना आपकी बीमारी है। इससे उत्पादकता कम होती है।
    जी हां यह बिल्कुल सच है! आपके दिमाग में कई उम्दा विचार होंगे पर आप सोचते-सोचते ही अपना सारा समय व्यर्थ कर देती हैं और अंत में आप कुछ नहीं कर पाती। तो अपने सोचने के समय को कम करके काम करने के समय को बढ़ाएं।
    पांचवा संकेत : आप आमतौर पर सर दर्द की परेशानी से जूझती हैं
    जी हां बहुत सारे विचार अगर आपके दिमाग में हैं, तो यह सर दर्द की परेशानी को जन्म दे सकता है। यह हमारे शरीर का एक संकेत है कि अब हमारे दिमाग को आराम करने की जरूरत है। इस परेशानी से उभरने में गहरी सांस लेने वाले व्यायाम बहुत मदद कर सकते हैं।
    छठा संकेत : आपको कोई भी निर्णय लेने में बहुत समय लगता है
    अब क्योंकि आपके दिमाग में बहुत सारे विचार दौड़ रहे होते हैं, तो आप बेचैन और निर्णय लेने में असमर्थ महसूस कर सकते हैं। अगर आप यह परेशानी आम तौर पर महसूस करती हैं तो तय कीजिए कि अब एक ही चीज पर पूरी तरह फोकस करेंगी और निर्णय लेंगी।
    अब जब आपने जान लिया है कि ज्यादा सोचने की परेशानी को कैसे रोक सकती हैं, तो वर्तमान में जिएं। आने वाले कल की चिंता में अपने जिंदगी के आज के आनंद को व्?यर्थ न गंवाएं। हर एक लम्हे को अच्छी तरीके से जीने की कोशिश करें, तभी आप खुद को हल्?का महसूस कर पाएंगी।

    दुर्ग / शौर्यपथ / मुझे राजनीति की उतनी समझ नहीं कि किसी के कार्यो का आंकलन करू किन्तु जैसा कि पिछले दिनों कांग्रेस में बड़े बदलाव हुए और कई कद्दावर नेताओ के कद कम कर दिए गए और कई नेताओ को ज्यादा शक्तिया प्रदान की इस तरह की चर्चा हर कोई अपने अपने स्तर पर कर रहा है कोई इसे मनमानी फैसला दे रहा है तो कोई इसे राजनीति दबाव का नाम दे रहा है तो कोई इसे राहुल गांधी के अनुसार किये गए फैसले की बात कर रहा है . हर कोई अपने अपने स्तर पर आंकलन करते हुए किसी को अच्छा तो किसी को पार्टी के लिए घातक बता रहा है किन्तु इन सब उलटफेर के बीच ऐसा कोई भी समाचार पत्र या न्यूज़ चेनल ने मोतीलाल वोरा के सन्दर्भ में कोई पक्ष या विपक्ष की बात की सबका एक ही मत रहा कि मोतीलाल वोरा को उम्र के इस पडाव में अब आराम देने के लिए पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गयी . 92 वर्ष के मोतीलाल वोरा गांधी परिवार के बेहद करीबी है और कांग्रेस के प्रति उनकी वफादारी पर कभी कोई दाग नहीं लगा है . कांग्रेस के कई महत्तवपूर्ण पदों के साथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री , केन्द्रीय मंत्री सहित उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के रूप में भी सेवाए दे चुके है . ऐसे कांग्रेसी जो आधी सदी से भी ज्यादा कांग्रेस के साथ रहे अब उनकी उम्र को देखते हुए कांग्रेस संगठन ने उन्हें आराम करने के लिए ही कांग्रेस के संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं दी .
    हर राजनेता की सक्रीय राजनीति से एक न एक दिन विदाई होती है किन्तु मोती लाल वोरा की सक्रीय राजनीती और संगठन की राजनीती का अंत बहुत लम्बे समय बाद हुआ . इस राजनीती के कारण मोतीलाल वोरा काफी सालो से अपने पुत्रो से दूर रहे अपने नातियो से दूर रहे विपरीत परिस्थिति में भी मोतीलाल जी वोरा अपनी धर्मपत्नी के साथ दिल्ली में ही निवास करते रहे अब जब संगठन ने उनकी उम्र को देखते हुए उनके सकुशल स्वास्थ्य की कामना के साथ संगठन की राजनीती से मुक्त कर दिया तो दुर्ग शहर के कांग्रेसी को अब लगने लगा कि मोतीलाल वोरा अब अपने घर आयेंगे अपने पुत्रो के साथ अपने नातियो के साथ रहेंगे . उम्र के इस पडाव में हर कोई चाहता है कि अपने सबसे प्यारे दोस्त ( दादा के लिए पोता ही सबसे प्यारा दोस्त होता है ) के साथ रहे . चूँकि प्रदेश की युवा राजनीती में संदीप वोरा के सक्रीय होने के कारण दादा मोतीलाल वोरा के साथ दिल्ली रहना सम्भव नहीं वही पुत्र और दुर्ग विधायक वोरा का भी लम्बे समय के लिए दिल्ली प्रवास संभव नहीं साथ ही दुसरे पुत्र अरविन्द वोरा का व्यवसाय भी भिलाई में होने के कारण दिल्ली प्रवास संभव नहीं यानी कि एक सम्पूर्ण परिवार जिसमे बेटा , बहु पोता सब है इनसे दूर रहना शायद अब मोतीलाल वोरा को भी ज्यादा दिन रास नहीं आएगा . अभी तक संगठन के जिम्मेदार पद पर होने के कारण मोतीलाल वोरा दिल्ली प्रवास में थे किन्तु अब कांग्रेस के किसी भी ऐसे पद पर नहीं है कि वहा रहना जरुरी हो . वही पिता को भगवान् की तरह पूजने वाले अरुण वोरा भी अब शायद अपने पिता को दिल्ली से वापस दुर्ग लाने का प्रयास करेंगे .
    यह सोंच मेरी है मुझे ऐसा महसूस हुआ कि देश के कद्दावर कांग्रेसी नेता दुर्ग के बाबूजी को अब उम्र के इस दौर में अपने गृह निवास अपने परिजनों के पास , अपने दोस्तों ( नाती पोते ) के पास आ कर उनके साथ समय बिताना चाहिए . किन्तु मोतीलाल वोरा जी की क्या मर्जी है क्या वे अभी भी अपने बच्चो से दूर रहेंगे कहने को उनके बच्चो के लिए दुरी सिर्फ दो घंटे ( हवाई जहाज से ) की दुरी है किन्तु दुरी तो दुरी है . क्या अरविन्द वोरा और अरुण वोरा अपने पिता को वापस दुर्ग लाने का प्रयास करेंगे ये उन पर निर्भर है उनके परिवार की बाते है जिस पर फैसला लेने का हक उनका है और किसी का नहीं .
    अगर ये किसी सामान्य परिवार की बात होती तो कोई चर्चा ही नहीं होती किन्तु ये एक ऐसे व्यक्ति की चर्चा है जिनसे जुडी हर बात समाचार बनती है , ये एक ऐसे व्यक्ति की चर्चा है जिन्होंने दुर्ग में वार्ड की राजनीती से केंद्र की राजनीती का सफऱ किया और राजनैतिक सन्यास भी ससम्मान मिला ना कोई विरोध ना कोई विवाद के . शायद इस समय कांग्रेस के ये अकेले ऐसे व्यक्ति है जो सालो की राजनीती के बाद भी दुर्ग से सालो दूर रहने के बाद भी दुर्ग की जनता के दिलो में बसे हुए है इस लिए इनका हर फैसला एक समाचार का रूप ले लेता है .

    सेहत / शौर्यपथ / दुनिया भर में चाय का शौक रखने वालें की कमी नहीं है। चाय के अलग-अलग स्वाद और प्रकार अपने-अपने फायदे के लिए जाने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि काली चाय भी आपके लिए बहुत फायदेमंद होती है। काली चाय से होने वाले लाभ जानना चाहते हैं, तो जरूर पढ़ें -
    1 हृदय के लिए फायदेमंद - जी हं काली चाय आपके दिल के लिए बेहद फायदेमंद है। रोजाना एक कप काली चाय पीना दिल की सेहत को बनाए रखने में आपकी मदद करेगा। इसमें मौजूद फ्लेवेनॉयड्स एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इसके
    अलावा काली चाय का प्रयोग हृदय की धमनियों को स्वस्थ रखने में मदद करती है और रक्त के जमने की प्रक्रिया को भी कम करने में सहायक है।
    2 कैंसर - काली चाय को रोजाना अपनी डाइट में शामिल कर आप प्रोस्टेट, ओवेरियन और फेफड़ों के कैंसर से बच सकते हैं। काली चाय का प्रयोग शरीर में कैंसर कोशि?काओं को खत्म करने में मदद करता है। यह महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना को रोकती है साथ ही मुंह के कैंसर से भी बचाने में मदद करती है।
    3 दिमाग के लिए - दिमाग की कोशि?काओं को स्वस्थ रखने के साथ ही उनमें रक्त के प्रवाह को और भी बेहतर बनाने के लिए काली चाय पीना बहुत उपयोगी है। दिन में लगभग 4 कप काली चाय का सेवन तनाव को कम करने में सहायक है यह दिमाग को तेज की आप की याददाश्त को बढ़ाती है और आप पहले से अधि?क सतर्क व सक्रिय होते हैं।
    4 पाचन - काली चाय में मौजूद टेनिन पाचन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह गैस के अलावा पाचन संबंधी अन्य समस्याओं में भी काफी लाभदायक होती है। साथ ही दस्त या अतिसार होने पर काली चाय का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
    5 एनर्जी - रोजाना काली चाय पीने का एक बेहतरीन फायदा यह भी है कि इसे पीने से आप अधि?क ऊर्जा महसूस करते हैं और सक्रिय भी रहते हैं। काली चाय में मौजूद कैफीन, कॉफी या कोला के मुकाबले अधि?क फायदेमंद होता है और आपके मस्तिष्क को सतर्क रखता है जिससे आपके शरीर में ऊर्जा का संचार निरंतर होता रहता है।
    6 कोलेस्ट्रॉल - यह आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करती है, जिससे आपका वजन धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसके अलावा इसमें फैल बहुत कम मात्रा में होता है, जो मोटापा नहीं बढ़ाता। साथ ही यह शरीर में मेटाबॉलिक प्रक्रि?या को बढ़ाने में सहायक है जो वजन कम होने में मदद करता है।
    7 त्वचा - काली चाय पीना आपको त्वचा की समस्याओं, खास तौर से संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसके अलावा यह झुर्रियों से आपकी त्वचा को बचाती है और इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व, त्वचा के कैंसर से भी आपको बचाने में सहायक है।

    खाना खजाना / शौर्यपथ / अरबी के पत्तों की सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले इन पत्तों को अच्छी तरह से साफ कर लें। कोरोना काल में सब्जियों को अच्छी तरह से साफ करना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप पहले सादे पानी से इन पत्तों को धो लें, फिर गर्म पानी करके इसमें नमक डालें। फिर इन पत्तों को नमक वाले पानी से अच्छी तरह साफ कर लें।
    अब 1 कटोरी बेसन लें। इसमें अदरक, लहसुन का पेस्ट, नमक स्वाद के अनुसार, लालमिर्च पाउडर, धनिया पाउडर व हल्दी पाउडर मिला लें और इन्हें अच्छी तरह से मिक्स करके अलग रख दें।
    अब जो अरबी के पत्ते आपने धोकर रखे हैं, उन्हें लें। उन पर तेल लगा लें। फिर इस पेस्ट को उनके ऊपर लगाकर इन्हें लपेट लें। यदि ये खुल रहे हैं, तो आप ऊपर से धागा भी बांध सकते हैं ताकि ये अरबी के पत्ते खुल न पाएं।
    अब एक बर्तन में पानी गर्म कर लें और उसके ऊपर एक छन्नी रखें। जब पानी अच्छी तरह से गर्म हो जाए तो अरबी के पत्तों को छन्नी के ऊपर रख दें ताकि अरबी के पत्ते अच्छी तरह से स्टीम हो जाए।
    स्टीम होने के इन्हें थोड़ी देर ठंडा होने दें। जब ये ठंडे हो जाएं तो इन्हें कट कर लें।
    अब बारी आती है इन्हें फ्राई करने कि तो गर्म तेल में इन्हें तलकर अलग प्लेट में निकाल लें।
    ग्रेवी के लिए...
    2 प्याज, अदरक, लहसुन का पेस्ट, राई और जीरा। इनका पेस्ट तैयार कर लें।
    अब तेल गर्म होने के बाद इस पेस्ट को तेल में डालकर अच्छी तरह पका लें।
    ख्याल रखें कि आपको मसाला अच्छी तरह से पका लेना है।
    अब हल्दी, मिर्च, नमक व स्वाद अनुसार धनिया पाउडर इन मसालों को तेल में डालकर पकाना है।
    जब ये अच्छी तरह से पक जाएं और तेल ऊपर आ जाए तो इसमें पानी मिला लें। ग्रेवी के लिए फिर एक उबाल के बाद इसमें अरबी के पत्ते डालकर इसे 5 मिनट रखने के बाद गैस बंद कर दें।
    तो लीजिए तैयार है आपकी घर में तैयार अरबी के पत्तों की सब्जी।

    शौर्यपथ / पितृपक्ष में पडऩे वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जानते हैं। इस साल इंदिरा एकादशी 13 सितंबर (रविवार) यानी आज है। मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखना, भगवान विष्णु की पूजा और इंदिरा एकादशी व्रत कथा सुनना पुण्यकारी होता है। कहते हैं कि इस व्रत को रखने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इंदिरा एकादशी में व्रत कथा सुनना जरूरी होता है, वरना एकादशी का व्रत अधूरा माना जाता है।
    इंदिरा एकादशी की व्रत कथा-
    पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में महिष्मति नाम का एक नगर था। जिसका राजा इंद्रसेन था। इंद्रसेन एक बहुत ही प्रतापी राजा था। राजा अपनी प्रजा का पालन-पोषण अपनी संतान के समान करते था। राजा के राज में किसी को भी किसी चीज की कमी नहीं थी। राजा भगवान विष्णु का परम उपासक था।
    एक दिन अचानक नारद मुनि का राजा इंद्रसेन की सभा में आगमन हुआ। नारद मुनि राजा के पिता का संदेश लेकर पहुंचे थे। राजा के पिता ने कहा था कि पूर्व जन्म में किसी भूल के कारण वह यमलोक में ही हैं। यमलोक से मु्क्ति से के लिए उनके पुत्र को इंदिरा एकादशी का व्रत करना होगा, ताकि उन्हें मोक्ष मिल सके।
    पिता का संदेश सुनकर राजा इंद्रसेन ने नारद जी से इंदिरा एकादशी व्रत के बारे में बताने को कहा। तब नारद जी ने कहा कि यह एकादशी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है। एकादशी तिथि से पूर्व दशमी को विधि-विधान से पितरों का श्राद्ध करने के बाद एकादशी को व्रत का संकल्प करें।
    नारद जी ने आगे बताया कि द्वादशी के दिन स्नान आदि के बाद भगवान की पूजा करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इसके बाद व्रत खोलें। नारद जी ने कहा कि इस तरह से व्रत रखने से तुम्हारे पिता को मोक्ष की प्राप्ति होगी और उन्हें श्रीहरि के चरणों में जगह मिलेगी।
    राजा इंद्रसेन ने नारद जी के बताए अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत किया। जिसके पुण्य से उनके पिता को मोक्ष की प्राप्ति हुई और वे बैकुंठ चले गए। इंदिरा एकादशी के पुण्य प्रभाव से राजा इंद्रसेन को भी मृत्यु के बाद बैकुंठ की प्राप्ति हुई।

    शिक्षा / शौर्यपथ / आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में व्यक्ति को सफल बनाने की बातों का जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य एक महान शिक्षाविद और कुशल अर्थशास्त्री भी थे। चाणक्य की नीतियां आप भी लोगों को जीवन में सही रास्ता दिखा रही हैं। नीति शास्त्र में चाणक्य ने धन, तरक्की, वैवाहिक जीवन, मित्रता और दुश्मनी संबंधी समस्याओं का उपाय बताया है।
    चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को जीवन में सफल होना है तो उसे नीति शास्त्र को जीवन में अपना लेना चाहिए। चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति में कौन-से ऐसे दो गुण होने चाहिए, जो दुश्मनों को भी मित्र बना देता है।
    1. विनम्रता-
    चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा विनम्र होना चाहिए। विनम्रता से व्यक्ति लोगों के दिलों में राज करता है। विनम्र व्यक्ति क्रोध से मुक्त होता है और उसे समाज में भी मान-सम्मान मिलता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो काम व्यक्ति धैर्य के साथ करता है, उसे सफलता प्राप्त होती है। चाणक्य कहते हैं कि क्रोध पर काबू पाने के लिए व्यक्ति को विनम्रता का गुण अपनाना चाहिए। इसके साथ ही कई बार दु्श्मन भी आपकी विनम्रता के सामने झुक जाता है और दोस्ती का हाथ खुद ही बढ़ा देता है।
    2. सत्य बोलना-
    चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में झूठ नहीं बोलना चाहिए। नीति शास्त्र के अनुसार, झूठ बोलने से व्यक्ति की प्रतिभा का नुकसान होता है। झूठ बोलने वाला व्यक्ति समाज में मान-सम्मान नहीं पाता है। ऐसे व्यक्ति से लोग दूरी बनाकर रखते हैं और कोई भरोसा नहीं करता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा झूठ से दूर रहना चाहिए।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /जीवन में परेशानियां आना आम बात है. इस दुनिया में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है, जो कभी भी दुखी न हुआ हो। बुरे दिनों को आप कैसे हैंडल करते हैं, यह बात बहुत महत्व रखती है। कहते हैं कि कोई भी परिस्थिति स्थाई नहीं होती। ऐसे में अगर आपके सामने कोई मुसीबत आ भी जाती है, तो आपको यही बात सोचकर आगे बढऩा चाहिए। आइए, जानते हैं कि आप खुश रहकर परिस्थितियों से कैसे निपट सकते हैं-
    परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है
    भगवत गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि युग, व्यक्ति, स्वभाव, जीवन, भाव सबकुछ परिवर्तनशील है, इसलिए दुख या बोझिल दिन भी एक दिन जरूर बदलेंगे।
    खुश रहने से सोचने की क्षमता बढ़ती है
    आप किसी घटना से हमेशा दुखी रहेंगे, तो इससे न सिर्फ आपकी क्रियाशीलता कम होगी बल्कि तार्किक सोचने की क्षमता भी प्रभावित होगी, इसलिए खुद को समझाते रहें कि खुश रहने से दिन उपाय जल्दी मिलता है।
    खुशियां बांटने से बढ़ती है और गम बांटने से घटता है।
    जिस तरह खुशियां शुभचिंतकों के साथ बांटने पर बढ़ती है, उसी तरह गम विश्वासपात्र और अपनों के साथ बांटने से कम होता है, इसलिए अपने मन की बात जरूर कहें।
    अपनी संभावनाओं को पहचानने का समय
    जिस तरह बुरे वक्त में अपने-पराए की पहचान होती है, उसी तरह बुरे वक्त में खुद की प्रतिभा और संभावनाओं को भी परखा जा सकता है, इसलिए बुरे दिनों में ये बातें ध्यान रखकर मुस्कुराकर आगे बढऩे की प्रेरणा मिलेगी।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / सावन का महीना शुरू हो चुका है। ऐसे में शिव भक्त अपनी भक्ति से भोलेबाबा को मनाने में लगे हुए हैं। शिव पुराण के अनुसार जो भी व्यक्ति इस महीने व्रत रखता है भगवान शिव उसकी सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। माना जाता है कि इस पावित्र महीने में अकाल मृत्यु से बचने,दुर्घटना, अनिष्ट ग्रहों के प्रभावों से दूर करने आयु बढ़ाने के साथ असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप करना बेहद शुभ होता है।
    सावन के महीने में इस मंत्र का जाप करने से इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन हर पूजा और मंत्र जाप के लिए हिंदू धर्म में कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने पर ही व्यक्ति को उसका लाभ मिलता है। जबकि पूजा करते समय की गई कुछ गलतियों से आप भगवान को नाराज कर सकते हैं। तो आइए जान लेते हैं, लंबी आयु का वरदान देने वाला भोलेनाथ के महामृत्युंजय मंत्र को करते समय साधक को भूलकर भी नहीं करनी चाहिए कौन सी गलतियां।
    महामृत्युंजय मंत्र-
    ऊँ हौं जूं स:। ऊँ भू: भुव: स्व: ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। ऊँ स्व: भुव: भू: ऊँ। ऊँ स: जूं हौं।
    महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय न करें ये गलतियां-
    -सबसे पहले इस बात को समझ लें कि भगवान शंकर के इस मंत्र का जाप करते समय मंत्र का उच्चारण ठीक होना चाहिए।
    -महामृत्युंजय मंत्र की संख्या हमेशा बढ़ाकर की जाती है। मंत्र का जाप एक निश्चित संख्या निर्धारण करके शुरू करें। अगले दिन इनकी संख्या बढ़ाते रहें, याद रखें मंत्र की संख्या कम न करें।
    -इस मंत्र का जाप करते समय शुद्ध आसन बिछा कर बैठे। कभी भी धरती में बैठकर इस मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए।
    -महामृत्युंजय मंत्र का जाप हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही करें।
    -मंत्र का जाप करते समय अपने मन को भटकने न दे।
    महामृत्युंजय मंत्र के लाभ-
    -ग्रहों के सारे कुप्रभाव नष्ट होते हैं।
    -शोक, मृत्यु के संकट टल जाते हैं।
    -लंबे समय से चल रहे रोगों से मुक्ति मिलती है।
    -पुराने कर्ज से मुक्ति मिलती है।

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision