August 03, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    सेहत / शौर्यपथ / हम में से बहुत से लोग ऐसे होते हैं, जिनका शरीर तो जवां लगता है लेकिन उनके चेहरे पर रौनक नहीं होती। इसके अलावा उनके चेहरे पर बहुत कम उम्र में झुर्रियां आने लगती है। बदलते मौसम में तो चेहरे का रुखापन बढ़ने से कई परेशानियां सामने आ जाती है। ऐसे में सर्दियों में आपको अपनी डाइट में कुछ खास फलों को शामिल करना चाहिए-

    दही
    दही से बना रायता या लस्सी आपके हाजमे को ठीक रखती है। आप दही को चावल के आटे या बेसन के साथ मिलाकर चेहरे पर भी लगा सकते हैं। इससे आपके दाग-धब्बे दूर हो जाएंगे।

     

    नीबू
    नीबू का रस आपके पेट के लिए ही नहीं बल्कि त्वचा के लिए भी बहुत गुणकारी है। रोजाना नीबू पानी पीने से आपको पेट से जुड़ी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही आप नीबू के रस को सादा पानी या ग्लिसरीन के साथ मिलाकर चेहरे पर भी लगा सकते हैं।


    तरबूज
    ज्यादातर लोगों को तरबूज खाना पसंद होता है। ऐसे में आप तरबूज को खाने के अलावा इसके जूस को चेहरे पर भी लगा सकते हैं।


    दूध
    आप जानते ही हैं, कि दूध को संपूर्ण आहार कहा जाता है। आपको कम से कम रोजाना दो गिलास दूध पीना चाहिए। आप सुबह और रात में एक-एक गिलास दूध पी सकते हैं। आप चेहरे पर कच्चा दूध यानी बिना उबाला हुआ दूध भी लगा सकते हैं।


    सेब
    आपको अपने खाने में रोजाना एक सेब जरूर शामिल करना चाहिए। साथ ही आप सेब को पीसकर उसमें से रस निकालकर अपने चेहरे पर लगा सकते हैं। सेब से सिरका भी बनता है, जो चेहरे के लिए बहुत अच्छा होता है।

     

    खाना /खजाना / शौर्यपथ सामग्री
    बटर- 1 चम्मच
    कटा प्याज- 1/2 कप
    लहसुन पेस्ट- 1/2 चम्मच
    कटी हुई शिमला मिर्च- 1 कप
    कटा टमाटर- 1/2 कप
    लाल मिर्च पाउडर- 1/2 चम्मच
    पाव भाजी मसाला- 1/2 चम्मच
    उबले आलू के टुकड़े- 1 कप
    कटे-उबले मिक्स वेजिटेबल- 3/4 कप
    कटी हुई धनिया पत्ती- 2 चम्मच
    नीबू का रस- 1/2 चम्मच
    नमक- स्वादानुसार

    बर्गर बन-6
    बटर-आवश्यकतानुसार
    प्याज के छल्ले- सजावट के लिए


    विधि
    नॉनस्टिक पैन में मक्खन गर्म करें और उसमें प्याज और लहसुन का पेस्ट डालें। 30 सेकेंड तक भूनें। शिमला मिर्च, टमाटर, लाल मिर्च पाउडर और पाव भाजी मसाला डालकर एक मिनट तक भूनें। आलू, सब्जियां, धनिया पत्ती, नीबू का रस और नमक डालें और सभी सामग्री को अच्छी तरह से मैश करें। बीच-बीच में मिश्रण को मिलाते हुए मध्यम आंच पर एक से दो मिनट तक पकाएं। गैस ऑफ कर दें। तैयार मिश्रण को हल्का ठंडा होने दें और छह बराबर हिस्सों में बांट दें। बर्गर बन को बीच से काटें और नॉनस्टिक पैन में डालकर हल्का-सा टोस्ट करें। तैयार मिश्रण का एक हिस्सा बर्गर के ऊपर रखें। उसके ऊपर प्याज का एक छल्ला डालें। बर्गर का एक और टुकड़ा उसके ऊपर डालें और हल्के हाथों से दबाएं। इसी तरह से पांच और बर्गर तैयार करें और सर्व करें।

     

    सेहत / शौर्यपथ / मुंहासें एक सामान्य स्किन प्रोबल्म है, जो कई महिलाओं को परेशान करते हैं. कई तरह के महंगे स्किन प्रोडक्ट्स और ट्रीटमेंट्स के बाद बहुत सी महिलाओं ने अपने मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करना शुरू किया औरर उन्हें सही में इसका असर भी दिखाई दिया. ऐसे में गुलाब जल को आपको मुंहासें दूर करने के लिए जरूर ट्राय करके देखना चाहिए. न केवल गुलाब जल आपकी त्वचा के पीएच स्केल को बैलेंस करता है, बल्कि यह मुंहासों से भी छुटकारा दिलाता है और आपकी त्वचा को जवां बनाता है.
    मुंहासों के लिए गुलाब जल का क्यों करें इस्तेमाल?
    गुलाब जल में एस्ट्रिजेंट प्रोपर्टीज होती हैं, जो आपकी त्वचा के लिए टोनर का काम करती है. यह आपकी त्वचा से धूल मिट्टी और कीटाणुओं को निकालकर पोर्स को खोलता है और चेहरे की डीप क्लेंजिंग करता है. साथ ही ये ढीली त्वचा को वापस से टाइट भी करता है. ये आपकी त्वचा पर बहुत ही कोमल रहता है और एक्सेस ऑयल को भी रोकता है.

    हालांकि, गुलाब जल में मौजूद एंटी बैक्टीरियल, एंटीमाइक्रोबायल और एंटी इंफ्लामेटरी प्रोपर्टीज इसे मुंहासों से छुटकारा दिलाने के लिए लाभकारी बनाती हैं. इसकी एंटी बैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबायल प्रोपर्टीज मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया को दूर रखती हैं और त्वचा को साफ करती हैं.

    वहीं इसक एंटी इंफ्लामेटरी प्रोपर्टीज आपके दर्द को कम करती है और त्वचा को जल्दी से ठीक करने में मदद करती है. इसलिए हम आपके लिए कुछ ऐसे तरीके लाए हैं, जिनसे आप भी मुंहासों से छुटकारा पा सकती हैं.

    1. गुलाब जल का स्प्रे
    गुलाब जल को स्प्रे के रूप में लगाने से भी मुंहासें करने वाले बैक्टीरिया दूर रहते हैं.

    आपको चाहिए
    - गुलाब जल
    - एक छोटी स्प्रे बोतल

    ऐसे करें इस्तेमाल
    - सबसे पहले स्प्रे बोतल में गुलाब जल डाल लें और साइड में रख लें.
    - अपने चेहरे को क्लेंजर से साफ करें और सुखा लें.
    - अब अपने चेहरे पर गुलाब जल छिड़कें.
    - इसे 20 से 30 सेकेंड के लिए चेहरे पर रहने दें.
    - अब टिशू से अपना चेहरा साफ कर लें.
    - आप चाहें तो मोइश्चराइजर में मिला कर भी इसे लगा सकती हैं.
    - आप रोज इस स्प्रे को अपने चेहरे पर लगाएं और कुछ ही वक्त में आपको बदलाव नजर आने लगेगा.

    2. गुलाब जल और मुल्तानी मिट्टी
    ऑयली त्वचा के लोगों के लिए ये फेस मास्क एक दम परफेक्ट है. मुल्तानी मिट्टी चेहरे से एक्सेस ऑयल को सोख लेती है और चेहरे को डीप क्लेंज करती है. ये घरेलू नुस्खां त्वचा को ऑयल और मुंहासों से दूर रखने में मदद करेगा.

    आपको चाहिए
    - 1 टेबलस्पून मुल्तानी मिट्टी
    - 1 टेबलस्पून गुलाब जल

    ऐसे करें इस्तेमाल
    - दोनों को अच्छे से मिला लें और एक स्मूथ पेस्ट बना लें.
    - अपना चेहरा धो लें और पानी सुखा लें.
    - अब इस पेस्ट को अपने चेहरे और गले पर लगाएं.
    - पेस्ट के सूखने तक इसे लगा रहने दें.
    - अब अपने चेहरे को सामान्य पानी से धो लें.
    - इस मास्क का अपने चेहरे पर दो बार इस्तेमाल करें.

    3. गुलाब जल और सेब का सिरका
    सेब के सिरके को इसकी एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लामेटरी प्रोपर्टीज के लिए जाना जाता है. ये दोनों ही मुंहासों को दूर करती हैं और त्वचा को साफ और स्वस्थ बनाती हैं.

    आपको चाहिए
    - आधा कप गुलाब जल
    - 2 टीस्पून सेब का सिरका

    ऐसे करें इस्तेमाल
    - अपने चेहरे को क्लेंजर से धो लें और सुखा लें.
    - अब एक कप में सेब के सिरके और गुलाब जल को मिला लें.
    - एक रुई का टुकड़ा लें और इसे मिक्स्चर में डालें और फिर चेहरे पर लगाएं.
    - अब अपने चेहरे को सूखने दें.
    - इसके बाद अपने चेहरे पर मोइश्चराइजर लगाएं.
    - इस घरेलू नुस्खे का हफ्ते में कम से मक 2 बार इस्तेमाल करें.

    4. गुलाब जल और चंदन
    नेचुरल स्किनकेयर की बात आती है तो चंदर जादू की तरह काम करता है. चंदन में मौजूद एंटी इंफ्लामेटरी प्रोपर्टीज जलन को कम करती है और धूल मिट्टी को बाहर निकालकर त्वचा को साफ करती है.

    आपको चाहिए
    - 2 टेबलस्पून चंदन का पाउडर
    - 1 टेबलस्पून गुलाब जल

    ऐसे करें इस्तेमाल
    - गुलाब जल और चंदन के पाउडर को एक बाउल में मिक्स कर के पेस्ट बना लें.
    - अब अपने चेहरे को क्लेंजर से धो लें और सुखा लें.
    - इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने तक छोड़ दें.
    - अब अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें.
    - आप इस नुस्खे का हफ्ते में 3 से 4 बार इस्तेमाल कर सकते हैं.

    5. गुलाब जल और नींबू
    नींबू में काफी अधिक मात्रा में विटामिन सी होता है, जो मुंहासों के लिए काफी लाभकारी है. इसके अलावा नींबू बहुत ही अच्छा स्किन ब्राइटनिंग एजेंट भी है, जो आपकी त्वचा के स्कार्स को हटाता है. ये नुस्खा आपको मुंहासें से मुक्स साफ त्वचा देगा.

     

    शौर्यपथ खेल / सुरेश रैना भारतीय क्रिकेट टीम में भले ही नियमित खिलाड़ी नहीं रहे उनका टीम इण्डिया में अन्दर बाहर लगा ही रहा किन्तु टीम इण्डिया के जिस खिलाड़ी के साथ उनकी सबसे ज्यादा बनती थी तो वो महेंद्र सिंह धोनी ही थे दोनों की आपस में काफी निभती थी . महेंद्र सिंह धोनी के सन्यास की घोषणा के कुछ देर बाद सुरेश रैना ने भी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया और अपने सोशल मिडिया में पोस्ट करते हुए काहा माहि आपकी यात्रा ( क्रिकेट से संन्यास ) में हम भी साथ है और इसी के साथ क्रिकेट का एक और सितारा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया .
    भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज रहे सुरैश रैना ने सोशल मीडिया के जरिए अपने रिटायरमेंट का ऐलान किया है. महेंद्र सिंह धोनी के रिटायरमेंट के बाद रैना ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि वो भी इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं.
    अपने रिटायरमेंट के ऐलान के साथ ही सुरेश रैना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर शेयर की है. इस तस्वीर के साथ ही सुरैश रैना ने लिखा, 'माही आपके साथ खेलना अच्छा था. पूरे दिल से गर्व के साथ, मैं आपकी इस यात्रा में शामिल होना चाहता हूं. थैंक यू इंडिया. जय हिन्द!'
    बता दें कि सुरेश रैना भारतीय क्रिकेट टीम में मध्यक्रम की बल्लेबाजी क्रम में भूमिका निभाते आए हैं. हालांकि अब सुरेश रैना टीम इंडिया के लिए खेलते हुए नजर नहीं आएंगे. वहीं सुरेश रैना आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलते हैं. महेंद्र सिंह धोनी भी आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा हैं.

    दुर्ग / शौर्यपथ / 15 अगस्त की रात 8 बजे दुर्ग के सिकोला बस्ती में एक ह्रदय विदारक घटना से पूरा मोहल्ला सकते में है . टीवी देखने के मामूली विवाद में सगे भाई ने भाई की हत्या कर डी . मोहन नगर थाना स्थित सिकोला बस्ती में भाई ने ही भाई को मामूली विवाद में मारा .  मृतक धनराज यादव एवं छोटे भाई बसन यादव के बीच टीवी चलाने को लेकर मामूली विवाद हो गया .विवाद इतना बड गया कि छोटे भाई ने कुल्हाड़ी से किये घातक वार। अस्पताल ले जाते वक्त हुई धनराज यादव की रास्ते में ही मौत हो गयी .   आरोपी बसन यादव को पुलिस ने किया गिरफ्तार . हत्या में प्रयुक्त टंगिया भी जप्त  कर  पुलिस जांच में जुटी है .

    हत्या में प्रदत कुल्हाड़ी 

    मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार को एक्टिंग ही नहीं उनकी जिंदादिली के लिए भी जाना जाता है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अक्षय कुमार ने ट्विटर अकाउंट पर अपना एक वीडियो शेयर करते हुए लोगों से जरूरतमंदों और गरीबों की मदद करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिससे जितना हो सके मदद कीजिए, बस नजरअंदाज मत करिए।
    वीडियो में अक्षय कुमार कहते हैं, 'Óजब भी मैं घर से बाहर निकलता हूं तो मेरा ध्यान इन चेहरों पर जाता है। बूढ़े चाचा आस लगाए बैठे हैं कि उनकी टोकरी के चार-पांच दर्जन केले आज किसी तरह बिक जाए। धनिया-मिर्ची की छोटी से जायदाद लिए वो बाबा सोच में डूबे हैं कि कही ये बिकने से पहले खराब न हो जाए। ट्रैफिक सिग्नल के लाल होने पर आंख में आंसू छिपाती हुई वह बहन कोई उसकी छोटी से माला खरीद लें। भाईसाब 10 रुपये का है। ले लो न प्लीज।ÓÓ
    'Óवो इडली वाले अन्ना, ब्रेड वाले भाईसाब, फलवाले अंकल, ये सब हमारी जिंदगी का कहीं न कहीं हिस्सा बन चुके हैं। ये लोग ईमानदारी से काम करते हैं और बहुत मेहनत करने के बाद भी दिन का 50 रुपये भी नहीं कमा पाते हैं। अपने परिवार के साथ इन्हें भूखा सोना पड़ता है। लॉकडाउन और बारिश में तो इनका धंधा जैसे खत्म ही हो चुका है।ÓÓ
    इसके बाद अक्षय कुमार ने कहा, 'Óदोस्तों क्या हम सब मिलकर इनके लिए कुछ कर सकते हैं? अपने आप से ये वादा कीजिए हम इन लोगों का एक दोस्त की तरह ख्याल रखेंगे। इन्हें नजरअंदाज नहीं करेंगे। हम कोशिश करेंगे रोज कि किसी एक का दर्द कम कर सकें। हम उनकी जरूरत का ख्याल रखेंगे। उनकी थोड़ी से आमदनी करवा देंगे। जब हम सब मिलकर ये जिम्मेदारी लेंगे तो शायद हमारे देश में कोई भूखा नहीं रहेगा। जय हिंद।ÓÓ

    नजरिया /शौर्यपथ / कई मौके आते हैं, जब देश हमें प्रेरित करता है। वर्ष 1992 के ओलंपिक के समय मैं छोटा था, वहां भारतीय खिलाड़ियों की टीम को देश का प्रतिनिधित्व करते हुए देखना मेरे लिए बहुत प्रेरणादायी था। तब लिंबा राम ने कैसे निशाना साधा था, उत्सव-तमाशे का कैसा माहौल था! खिलाड़ी कैसे अपने बेहतरीन प्रदर्शन के अभियान में लगे थे। तब मुझे ओलंपिक में हॉकी महाशक्ति के रूप में हमारी विरासत के बारे में भी पता था, और यह कुछ ऐसा था, जिसने मुझे अपनी खेल यात्रा और भारत को गौरव दिलाने के लिए प्रेरित किया।

    मुझे याद है, जब 11 अगस्त, 2008 को बीजिंग ओलंपिक में मैंने स्वर्ण पदक जीता, तब मुझे नहीं लगा था कि मैंने जीत लिया है। जीतने के बाद भी मेरा ध्यान जीत की प्रक्रिया पर लगा था। कैसे सर्वश्रेष्ठ करना है, यही बात मेरे दिमाग में चल रही थी। हालांकि जैसे-जैसे चीझें साफ हुईं, मुझे स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ। जीवन के एक लक्ष्य तक पहुंचने की खुशी महसूस हुई। इस बात ने मेरे मन को छू लिया कि मेरे एक काम ने पूरे देश को कैसे प्रभावित किया है।

    पिछले वर्षों में खेलों में बढ़ती भागीदारी बहुत प्रोत्साहित करती है। एथलीटों का समर्थन करने के लिए आगे आने वाले अधिक से अधिक लोगों को देखना बहुत अच्छा लगता है। उदाहरण के लिए, एक औसत जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भी भागीदारी बढ़ गई है, जब मैं इस स्तर पर प्रतिस्पद्र्धा करता था, तब इतने लोग नहीं आते थे। आज हर खेल में किसी न किसी रोल मॉडल का उदय खिलाड़ियों को पेशेवर खेल की राह दिखाता है, इसे पोषित-प्रोत्साहित करने की जरूरत है। अगले दशक में मैं निश्चित ही अधिक एथलीटों को विश्व विजेता बनते देख सकता हूं, और उम्मीद है, मैं लंबे समय तक भारत का एकमात्र व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता नहीं रहूंगा।

    आज खेलों में निवेश की जरूरत है। देश में प्रचुर प्रतिभा है। सही खेल ढांचा हो और खिलाड़ी विकास में दूरदर्शिता हो, तो प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। कई मायने में यह हो भी रहा है। मैंने सरकार में खेलों के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता देखी है। यही वजह है, मैं इस देश में खेलों के विकास को बहुत आशावादी रूप से देखता हूं। खेल विकास के लिए सरकार भी करे और कॉरपोरेट सेक्टर जितना ज्यादा शामिल हो, उतना बेहतर होगा।
    कोरोना न होता, तो इस समय ओलंपिक का माहौल होता। यह उन खिलाड़ियों के लिए निराशा की बात है, जिन्होंने टोक्यो खेलों को ध्यान में रखते हुए वर्षों से तैयारी की है। हालांकि, इससे कई युवा एथलीटों को तैयार होने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। कोरोना ने हमें एक कदम पीछे लेने और आगे के कदमों की योजना बनाने का समय दिया है। यह अंतत: इस पर निर्भर करता है कि आप स्थिति को कैसे देखते हैं और इससे भी महत्वपूर्ण कि आप इसका अधिकतम उपयोग कैसे करते हैं। बेशक, जो अवसर का लाभ उठाएगा, वह जरूर जीतेगा।

    आज जो दौर है, उसका हममें से कई लोगों पर प्रभाव पड़ा है और इस पर काबू पाने के लिए सेहतमंद और सुरक्षित रहना हमारे लिए अहम है। जितना संभव हो, घर पर रहने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने, जैसे मास्क पहनने और हाथ धोने से भी एक बड़ा फर्क आएगा। आप एक दिनचर्या रखें और बिना अपवाद पालन करें। जो छोटे व्यायाम घर पर किए जा सकते हैं, जितना संभव हो, करें। साथ ही, अच्छे भोजन से न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक सेहत में भी मदद मिलेगी।
    हमें अपनी मजबूती के साथ देश की मजबूती के बारे में भी जरूर सोचना है। इस देश को कैसे आकार दिया जाएगा, यह बात भारत के युवाओं के परस्पर सामंजस्य और सामूहिक विकास में योगदान के लिए सक्षम होने पर निर्भर है। हमें अपने देश के युवाओं का साथ देना होगा। युवा जो कुछ कर सकते हैं, उन्हें उसी दिशा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करना होगा। ऐसा करते हुए हम भारतीयों की एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित कर सकते हैं, जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
    एक उद्यमी, खिलाड़ी या किसी अन्य पेशे में सफलता के लिए आप जिस भी क्षेत्र को चुनें, अपने इरादे को बुलंद रखें। सीखने के लिए हमेशा तैयार रहें। दुनिया का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, आपका भी बदलेगा, अगर आप पूरी लगन से अपनी मंजिल पर पूरा ध्यान लगाएंगे।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं) अभिनव बिंद्रा, ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता

     

    सम्पादकीय / शौर्यपथ / स्वतंत्र भारत ने विकसित राष्ट्र होने की ओर एक लंबा सफर तय कर लिया है, और अभी आगे का लंबा सफर हमें जल्दी पूरा करना है। बताते हैं, भारत कम से कम 2035 तक युवाओं का देश है, उसके बाद हमारी आबादी में युवाओं की तादाद कम होती जाएगी। इसलिए अगले 15 वर्ष हमारे लिए बहुमूल्य हैं। हमें 1947 में जो भारत मिला था, वह अंग्रेजी शासन द्वारा बुरी तरह प्रताड़ित व शोषित था। कृषि अर्थव्यवस्था भारत की रीढ़ थी, गुलामी के दौर में सबसे पहले उसी पर प्रहार हुआ था। साल 1901 से 1941 के बीच भारत में प्रति व्यक्ति खाद्यान्न उत्पादन में 24 प्रतिशत की गिरावट आई थी। तब देश की 70 प्रतिशत जमीन पर जमींदारों का कब्जा हो गया था। अंग्रेज और जमींदार मिलकर फसल व मेहनत का आधा हिस्सा छीन लेते थे, लेकिन आज न तो अंग्रेज हैं और न जमींदार। व्यापक समाज को सामने आने का मौका मिला। नतीजा सामने है, भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार पीपीपी (परचेजिंग पावर पैरिटी) के हिसाब से दुनिया में तीसरे स्थान पर है और भारतीय अर्थव्यवस्था का स्थान दुनिया में पांचवां माना जाता है। आज हमारी अर्थव्यवस्था उस ब्रिटेन से भी बड़ी है, जिसने हमें कभी गुलाम बना रखा था। अनेक पैमाने हैं, जिनसे भारत की आर्थिक मजबूती को देखा जा सकता है। 1946 के आसपास भारतीय अर्थव्यवस्था में कुल बचत सकल राष्ट्रीय उत्पाद का महज 2.75 प्रतिशत थी, जो 1971-75 में 12.35 प्रतिशत और मार्च 2019 में 30.1 प्रतिशत पहुंच गई। बचत से यह संकेत मिलता है कि हम नए निवेश में कितने सक्षम हैं। निवेश की हमारी क्षमता बढ़ती जा रही है। ज्यादा दशक नहीं बीते हैं, दुनिया भारत की आर्थिक ताकत नहीं जानती थी। मंदी से मुकाबले के दौर में भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने दुनिया में अपने महत्व को बेहतर ढंग से स्थापित किया।
    बेशक, हमारी आर्थिक आजादी में कमियां भी हैं और तभी तो पांचवें नंबर की अर्थव्यवस्था वाला देश प्रति व्यक्ति आय के मामले में दुनिया में 100 देशों में भी शामिल नहीं है। सामाजिक पैमाने पर भारत के विकास को लंबा सफर तय करना है। संकेत स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था के आकार मात्र से पूरे देश को नहीं देखा जा सकता। अगर हम अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में अग्रणी पांच देशों में शामिल हैं, तो सामाजिक विकास के पैमाने पर भी हमें पांच नहीं, तो टॉप 50 में तो रहना ही चाहिए। यदि हम टॉप सामरिक शक्तियों में शुमार किए जाते हैं, तो हमें कम से कम पांच टॉप रक्षा सामान उत्पादक देशों में भी होना चाहिए। बेशक तरक्की हुई है, सामाजिक, आर्थिक, सामरिक, हर मोर्चे पर, और आज जो भारत है, वह 1962 में नहीं था। लेकिन उतना ही सच है कि पूरे समर्पण के साथ अगर स्वतंत्र देश की सेवा होती, तो हम आज से कहीं ज्यादा मजबूत और सुरक्षित होते।
    भारत में जितनी कमियां हैं, उससे कहीं ज्यादा संभावनाएं हैं। हाल के वर्षों के आंकड़ों को देखें, तो कहीं न कहीं सेवा क्षेत्र पर देश का अत्यधिक भार पड़ रहा है। सेवा क्षेत्र देश के विकास में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान कर रहा है। चिंता यह है कि औद्योगिक योगदान 29 प्रतिशत और कृषि योगदान महज 17 प्रतिशत है। सेवा क्षेत्र को मजबूत करते हुए हमें कृषि और उद्योग पर पहले से ज्यादा ध्यान देना होगा, तभी हमारी स्वतंत्रता विकसित और सशक्त होगी।

     

    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी...’ कवि मैथिलीशरण गुप्त की ये पंक्तियां नारी जीवन की दयनीय अवस्था को सटीक बयां करती हैं। हमारे देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। विडंबना है कि यहां देवियों की पूजा की जाती है, पर महिलाओं को आमतौर पर खिलौना समझ लिया जाता है। देश की लचर न्याय-व्यवस्था इसके लिए जिम्मेदार है। महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले भली-भांति जानते हैं कि कानून उन्हें कठोर दंड नहीं दे सकता। फिर, हमारा समाज अब भी इतना पुरुष प्रधान तो है ही कि आजादी के इतने वर्षों के बाद भी महिलाओं को सारे अधिकार देने से बचता है। हालांकि, सरकारें अपनी तरफ से लगातार प्रयास करती रही हैं, लेकिन अब भी संकीर्ण सोच में बदलाव लाने की कई कोशिशें करनी होंगी। यदि सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें, तो इसमें कोई दोराय नहीं कि हम महिलाओं के लिए एक आदर्श देश बना सकते हैं।
    राजेंद्र प्रसाद, रांची, झारखंड

    स्वतंत्रता दिवस का जश्न
    आज देश आजादी का महान पर्व मना रहा है। देश को स्वतंत्र हुए 73 वर्ष हो गए। इन वर्षों में हमने काफी कुछ हासिल किया है। वर्ष 1947 से 2020 तक की यात्रा पर गौर करें, तो यही लगता है कि फर्श से अर्श तक का सफर हमने तय किया है। एक वक्त यहां खाने के भी लाले थे, मगर अब हम इतना अनाज उगा लेते हैं कि जरूरतमंद देशों को भी भेजते हैं। नई-नई तकनीक और प्रौद्योगिकी को भी हमने खूब अपनाया है। कहा तो यह भी जाता है कि भारतीय प्रतिभा के बूते ही अमेरिका का सिलिकॉन वैली आकार ले सका। फिर भी, काफी कुछ किया जाना अभी शेष है। गरीबी उन्मूलन की दिशा में लगातार काम करने के बाद बावजूद हमें अब तक इसमें बहुत सफलता नहीं मिली है। इसी तरह, पठन-पाठन का माहौल भी बेहतर बनाना एक बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी खर्च भी बढ़ाने होंगे। अगर ये सब हम कर सके, तो निश्चय ही आने वाले वर्ष भारत के हैं।
    समिधा, महरौली, नई दिल्ली

    संकल्प लें आज
    स्वतंत्रता दिवस भारतीयों के लिए हर्षोल्लास का दिन है, लेकिन कोरोना-काल ने इस दिन मनने वाले विभिन्न कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया है, जिससे जश्न मानो फीका पड़ गया है। आजादी की सुखद अनुभूति जिस तरह आज से सात दशक पहले लोग किया करते थे, आज भी वैसा ही करते हैं। हालांकि, आजाद होने के बाद लोगों ने सोचा था कि अपना मुल्क होगा, तो बेहतर शासन प्रणाली कायम होगी। मगर दुर्भाग्य से लोकतंत्र की सभी खूबियों को हम अपना नहीं सके हैं। राजनेताओं-नौकरशाहों के गठजोड़ से आम जन कितने संतुष्ट हैं, यह आसानी से समझा जा सकता है। सरकार ने बेशक कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन जब तक भ्रष्टाचार का खात्मा नहीं होगा, तब तक आजादी का वास्तविक एहसास मुश्किल है।
    मिथिलेश कुमार, भागलपुर

    हर नागरिक प्रहरी
    आज क्यों देशभक्ति दो राष्ट्रीय पर्वों में सिमटकर रह गई है? 15 अगस्त और 26 जनवरी के अलावा पूरे साल शायद ही कोई इसकी बात करता है। सवाल यह है कि हम हर समय देशभक्त जैसा आचरण क्यों नहीं करते, ताकि रामराज्य कायम हो? आज आजादी के लिए नहीं, बल्कि देश के भीतर जड़ें जमा रहे आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमें लड़ना है। मुखौटा पहने अपनों से टकराना है। यह लड़ाई पहले से कहीं ज्यादा गंभीर और बड़ी है, क्योंकि इसमें कौन अपना है और कौन पराया, यह समझना मुश्किल है। इसलिए आज हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए कि वह प्रहरी बनकर भ्रष्टाचारियों, अपराधियों और आतंकवादियों से लडे़।
    शिवांगी खत्री, माछरा, मेरठ

     

    हमारा शौर्य

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