August 03, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    ओपिनियन / शौर्यपथ / तमाम आशंकाओं के बीच रूस जब ढोल-बाजे के साथ कोरोना वायरस की वैक्सीन लेकर बाजार में उतर रहा है, तब वाल्डेमर हॉफकिन को याद करना जरूरी हो जाता है। हॉफकिन रूस के पड़ोसी देश यूक्रेन में पैदा हुए थे और उन्होंने अपनी ज्यादातर पढ़ाई रूस में ही की थी, लेकिन हम हॉफकिन को जानते हैं उन दो वैक्सीन के कारण, जो उन्होंने भारत को दी थीं। एक थी, हैजे की वैक्सीन और दूसरी, प्लेग की। इन दोनों ही वैक्सीन ने भारत को दो महामारियों से मुक्त कराने में बड़ी भूमिका निभाई थी। हैजे की वैक्सीन उन्होंने पेरिस के पास्टर इंस्टीट्यूट में विकसित की थी और प्लेग की मुंबई में रहकर। दोनों ही बार उन्होंने वैक्सीन का इंजेक्शन सबसे पहले खुद को लगाया था। वैसे यह उन दिनों का एक आम चलन भी था। वैक्सीन सुरक्षित है, इसका भरोसा दिलाने के लिए उस दौर के तमाम बॉयो-केमिस्ट उसे सबसे पहले अपने ऊपर ही आजमाते थे।
    तब से एक सदी से ज्यादा का समय बीत चुका है और इस बीच अब यह तरीका बदल गया है। वैक्सीन विकसित करने वालों को अब इस तरह का करतब दिखाने की जरूरत नहीं पड़ती। अब दुनिया भर में वैक्सीन के परीक्षण का एक निश्चित प्रोटोकॉल है, और यह माना जाता है कि उस प्रोटोकॉल के पालन से जो वैक्सीन तैयार होगी, वह पूरी तरह सुरक्षित होगी। लेकिन रूस ने इस रास्ते को नहीं अपनाया और वैक्सीन की विश्वसनीयता साबित करने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बेटी को इसका पहला इंजेक्शन लगाया गया, यानी एक ही झटके में रूस ने वैक्सीन विज्ञान को उस जगह पहुंचा दिया है, जहां वह एक सदी पहले खड़ा था। वह भी शायद इस उम्मीद में कि दुनिया रूस की इस उपलब्धि का लोहा मानने को मजबूर हो जाए।
    ऐसा सिर्फ रूस ही ने नहीं किया, बल्कि कई अन्य देश भी इसकी तैयारी कर रहे हैं। चीन ने तीसरे चरण का परीक्षण किए बिना ही रेड आर्मी के सैनिकों को वैक्सीन लगाने की इजाजत दे दी है, जहां से अच्छे परिणामों की खबरें भी दुनिया भर में प्रसारित की जा रही हैं। इस बीच खबर यह भी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह चाहते हैं कि अमेरिकी वैक्सीन 3 नवंबर से पहले बाजार में आ जाए, ताकि जब वहां राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो, तो लोग टं्रप की इस उपलब्धि का गौरव-बोध लेकर वोट डालने जाएं। हालांकि, वैज्ञानिक कह रहे हैं कि वैक्सीन को लांच करना अगले साल के शुरू में ही संभव हो पाएगा। इस बीच ऐसी खबरें भी आईं कि रूस, चीन व ईरान हैकिंग करके अमेरिका से वैक्सीन शोध के आंकडे़ चुराने की कोशिश कर रहे हैं। वैक्सीन बनाने की इस होड़ को कई विशेषज्ञों ने वैक्सीन का राष्ट्रवाद भी कहा है।
    अच्छी बात यह है कि तमाम आशंकाओं के विपरीत भारत ने अपने आप को जल्दबाजी की इस होड़ से दूर रखा। पिछले महीने स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा था कि तीसरे चरण के फास्ट ट्रैक परीक्षण के बाद भारत में बॉयोटेक की वैक्सीन को 15 अगस्त को जारी कर दिया जाएगा। तभी से यह अटकल लगाई जाने लगी थी कि प्रधानमंत्री लाल किले के अपने भाषण में इसकी घोषणा कर सकते हैं। हालांकि आलोचना के बाद मंत्रालय ने अपने रुख को बदल दिया था। लेकिन अब जब प्रधानमंत्री ने किसी तारीख की कोई घोषणा नहीं की है, तो यह साफ है कि भारत ने इसके खतरों को अच्छी तरह से समझ लिया है।
    वैक्सीन के मामले में भारत का जोखिम रूस से कहीं ज्यादा बड़ा है। इस समय दुनिया की साठ प्रतिशत वैक्सीन का उत्पादन भारत में होता है। यह भी कहा जाता है कि दुनिया भर में दस साल तक के हर बच्चे को, जिसका पूरा टीकाकरण हुआ है, कम से कम एक भारतीय वैक्सीन जरूर लगी होगी। वैक्सीन के बाजार में भारत ने अपनी यह साख गुणवत्ता के कारण कई वर्षों में बनाई है। ऐसे में, थोड़ी सी भी जल्दबाजी या एक भी गलत कदम वर्षों की इस मेहनत पर पानी फेर सकता है।
    बात सिर्फ वैक्सीन-कारोबार की ही नहीं है। मान लीजिए, परीक्षण में कुछ मामूली कमी रह जाए और बाद में पता लगे कि इससे सिर्फ आधा प्रतिशत लोगों को कोई समस्या या साइड इफेक्ट हो गया, तो कोरोना संक्रमण जिस बडे़ पैमाने पर देश में फैल चुका है, उसे देखते हुए हमें तकरीबन सभी नागरिकों को यह वैक्सीन लगानी ही पडे़गी। ऐसे में, आधा प्रतिशत का अर्थ होगा देश में साठ लाख से ज्यादा लोगों को एक नया रोग दे देना। इसलिए दुर्घटना से देर भली वाला रास्ता अपनाना ही समझदारी भी है। संक्रमण जिस तरह से फैल रहा है और उसके चलते जैसे आर्थिक और सामाजिक नतीजे देखने को मिल रहे हैं, उसमें दुनिया भर के वैज्ञानिकों पर यह दबाव है कि वे पहले जिस काम करने में कई साल लगा देते थे, उसे कुछ हफ्तों में पूरा कर लें। वे इसके लिए दिन-रात एक कर भी रहे हैं, लेकिन जल्दी के इस दबाव में गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता।
    एक सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि समस्या जब पूरी दुनिया की है, तो राष्ट्रीय स्तर पर इसके समाधान क्यों खोजे जा रहे हैं? क्यों नहीं पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इस पर एक साथ मिलकर काम करते? बात अपने आप में सही भी है, लेकिन पिछले अनुभव इस रास्ते को अपनाने की इजाजत नहीं देते। साल 2009 में जब दुनिया के बहुत सारे हिस्सों में स्वाइन फ्लू रोग फैल रहा था, तब तमाम कोशिशों के बाद अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने इसकी वैक्सीन विकसित कर ली थी। लेकिन घरेलू जरूरतों को देखते हुए उन्होंने इसके निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी। अमेरिकी संस्था सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के आंकड़ों के अनुसार, जब तक यह पाबंदी हटी और वैक्सीन सब तक पहुंची, बाकी दुनिया में 5,75,000 लोगों की इस महामारी के कारण मौत हो गई थी। जाहिर है, भारत को अपनी वैक्सीन भी विकसित करनी होगी और बड़े पैमाने पर उसका उत्पादन भी करना होगा, लेकिन बिना किसी जल्दबाजी या हड़बड़ी के।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं) हरजिंदर, वरिष्ठ पत्रकार

     

    दुर्ग / शौर्यपथ / केंद्र की मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता सँभालते ही स्वक्क्ष भारत मिशन के तहत शौचालय बनवाने का कार्य तीव्र गति से आरम्भ करवाया था और भारत के ग्रामीण इलाको में स्वक्क्षता का सन्देश देते हुए हर घर शौचालय निर्माण के लिए सार्थक पहल की गयी ऐसे सार्थक पहल के तहत दुर्ग निगम के सब इंजिनियर भीम राव ने भी एक शौचालय का निर्माण करवाया . शौचालय भी ऐसे स्थान पर जो स्थान दुर्ग में नहीं है किन्तु निगम के सब इंजिनियर द्वारा शासन के मद का खुलकर दुरूपयोग करते हुए खालसा स्कूल के पीछे स्थित उद्यान में 49,625 रूपये की लगत से शौचालय का निर्माण करवाया गया यह निर्माण 2019 के द्वितीय तिमाही में हुआ .
    इस शौचालय की सबसे ख़ास बात यह है कि शौचालय हर किसी को दिखाई नहीं देता इसका सबसे बड़ा कारण वह उद्यान है जो खालसा स्कूल के पीछे है . दुर्ग निगम के नक़्शे के अनुसार खालसा स्कूल के पीछे कोई सार्वजनिक उद्यान नहीं है फिर ऐसे में दुर्ग निगम के सब इंजिनियर भीम राव द्वारा आखिर किस स्थान पर शौचालय निर्माण कराया गया या फिर सिर्फ दस्तावेजो में ही शौचालय निर्माण करवा कर शासन के राजस्व की हेरा फेरी की गयी .
    ऐसे सब इंजिनियर जो शौचालय निर्माण में भी निगम प्रशासन के दस्तावेजो में हेरा फेरी कर सकते है उस इंजिनियर के हाँथ में केंद्र सरकार की सबसे महत्तवपूर्ण योजना अमृत मिशन के कार्यो का भरोसा निगम आयुक्त बर्मन द्वारा किया जा रहा है . जबकि शौर्यपथ समाचार पत्र ने अमृत मिशन योजना के कार्य में हो रही लापरवाही पर निगम आयुक्त के संज्ञान में बात लाई गयी और निगम आयुक्त द्वारा जाँच की बात कही गयी किन्तु आज पर्यंत तक जाँच किसी दिशा में आगे बढ़ी हो ऐसा प्रतीत नहीं होता . क्या निगम आयुक्त दुर्ग में अमृत मिशन में हो रहे भ्रष्टाचार में मौन रहकर दुर्ग वासियों के दिलो में भविष्य तक एक कडवी याद बन कर रहना चाहते है क्योकि जिस तरह लापरवाही पूर्वक कार्य हो रहा है उससे सिर्फ दुर्ग की जनता ही परेशान होगी और आयुक्त के कार्यकाल को याद करेगी .

    // दुर्ग जिले के बिरेभांठ में स्थापित होगी यह इकाई
    // विभिन्न सशस्त्र सेनाओं-थल सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ तथा राज्य सरकार के सशस्त्र बलों के लिए किया जाएगा बुलेटप्रूफ जैकेट एवं हेलमेट का उत्पादन
    // कम्पनी द्वारा लगभग 87.50 करोड़ रूपए का किया
    जाएगा पूंजी निवेश: 150 लोगों को मिलेगा रोजगार
    // प्रथम चरण में एक-एक लाख बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट का होगा उत्पादन

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपस्थिति में आज छत्तीसगढ़ में रक्षा श्रेणी के उद्योग की पहली उत्पादन इकाई की स्थापना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह औद्योगिक इकाई भारत सरकार के विभिन्न सशस्त्र सेनाओं यथा थल सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ तथा राज्य सरकार के सशस्त्र बलों के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट एवं हेलमेट का उत्पादन करेगी।
    मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग विभाग और रक्षा उत्पादों की औद्योगिक इकाई स्थापित करने वाली कम्पनी मेसर्स एटमास्टको लिमिटेड, दुर्ग के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। उद्योग मंत्री कवासी लखमा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। रक्षा उत्पादों की यह इकाई छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के बिरेभांठ गांव में स्थापित की जाएगी। इस इकाई में कम्पनी द्वारा लगभग 87.50 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश किया जाएगा। इस उद्योग के माध्यम से लगभग 150 व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा।
    प्रथम चरण में रक्षा उत्पादों की यह औद्योगिक इकाई एक-एक लाख बुलेटप्रूफ जैकेट एवं हेलमेट का उत्पादन करेगी। मुख्यमंत्री बघेल ने इस इकाई की स्थापना के लिए मेसर्स एटमास्टको लिमिटेड और उद्योग विभाग के अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
    एमओयू में उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ और मेसर्स एटमास्टको लिमिटेड के एम.डी. एस स्वामीनाथन ने हस्ताक्षर किए। प्रमुख सचिव पिंगुआ ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति में रक्षा श्रेणी के उद्योगों को उच्च प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है। छत्तीसगढ़ में स्थापित होने वाली इस प्रथम इकाई के लिए डीआरडीओ से तकनीकी के लिए अनुबंध किया गया है। मेसर्स एटमास्टको लिमिटेड के एम.डी. एस स्वामीनाथन ने बताया कि इस इकाई में नवम्बर तक उत्पादन प्रारंभ हो जाएगा।
    मेसर्स एटमास्टको लिमिटेड, दुर्ग द्वारा लायसेेंस एवं एग्रीमेंट के तहत डिफेंस टेक्नालाजी हेतु भारत सरकार से 25 मार्च 2019 को अनुबंध किया गया है, जिसके तहत स्थापित होने वाली इस इकाई को भारत सरकार की विभिन्न सशस्त्र सेनाओं यथा थल सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ तथा राज्य सरकार के सशस्त्र बलों हेतु बुलेटप्रूफ जैकेट एवं हेलमेट निर्माण हेतु 5 मई 2020 को अनुमति जारी की गई है। भारत सरकार द्वारा इस उद्योग की स्थापना के लिए दिए गए लायसेंस के परिप्रेक्ष्य में राज्य शासन द्वारा आज एमओयू निष्पादित किया गया है।
    इस अवसर पर मुख्य सचिव आर.पी. मण्डल, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव उद्योग श्री मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सचिव सामान्य प्रशासन डॉ कमलप्रीत सिंह, संचालक, उद्योग अनिल टुटेजा, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक अरूण कुमार सहित वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के विशेष सचिव व्ही.के.छबलानी, मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव सुश्री सौम्या चौरसिया, निवेशकों में मेसर्स एटमास्टको लिमिटेड के एम.डी. एस स्वामीनाथन, डायरेक्टर श्री वेंकटारमन, वाईस प्रेसीडेंट के.एल.बालासुब्रमणियम उपस्थित थे।
    मेसर्स एटमास्टको लिमिटेड, दुर्ग एक प्रतिष्ठित इकाई है, जो विगत 35 वर्ष से कार्यरत है। इस इकाई में वर्तमान में हैवी फेब्रीकेशन जैसे ब्रिज आदि का निर्माण होता है तथा इसमें लगभग 600 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त है।

    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र की पॉवर सप्लाई विभाग (पीएसडी) और इलेक्ट्रो-टेक्नीकल लैब (ईटीएल) की टीम ने उपकरण आपूर्तिकर्ता के विशेषज्ञों के साथ मिलकर एमएसडीएस-5 में युद्धस्तर पर मरम्मत और जीर्णोद्धार के कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। जिसके फलस्वरूप संयंत्र के मॉडेक्स इकाइयों के उत्पादन को प्रभावित होने से बचाया जा सका। गत 20 मई को लगभग संध्या 4 बजे भिलाई इस्पात संयंत्र के एमएसडीएस-5 जीआईएस, 132 किलावॉट बस-2 बे-17 में फॉल्ट आ गया। इस सब-स्टेशन (एस/एस) की आपूर्ति मैसर्स गेंज हंगरी द्वारा की गई थी, जो वर्तमान में सीजी ग्लोबल के नाम से जानी जाती है। यह जीआईएस एस/एस के माध्यम से संयंत्र के यूनिवर्सल रेल मिल, बार एंड रॉड मिल, स्टील मेल्टिंग शॉप 3 और ब्लास्ट फर्नेस-8 को आपूर्ति किया जाता है।
    इस दौरान सिर्फ एकमात्र बस, ही सही रूप में कार्य कर रहा था जिसके कारण मॉडेक्स इकाइयों को होने वाली बिजली की आपूर्ति की विश्वसनीयता कम हो गई थी। कार्य कर रहे 132 किलोवॉट बस-1 के किसी भी प्रकार के रूकावट आने पर सम्पूर्ण मॉडेक्स इकाइयों को लंबी अवधि के लिए बिजली की आपूर्ति बंद हो सकती थी। इसलिए, बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए जीआईएस के त्रुटिगत भाग की मरम्मत को प्राथमिकता पर किया जाना जरूरी था।
    मेसर्स गैंज, हंगरी से इस बस-2 की मरम्मत के लिए संपर्क किया गया और तदनुसार, मेसर्स गंज ने सीजीएल इंडिया को इस रिपेयर कार्य को संपादित करने का काम सौंपा। सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए जीआईएस एस/एस के मरम्मत का कार्य 132 किलोवॉट बस-1 और 2 को पूर्णत: शटडाउन लेने पर ही हो सकता था। गत 07 अगस्त को यूआरएम में उत्पादन की निरंतरता को बनाए रखने के लिए 132 किलोवॉट साइड में सीएसईबी की सहायता से वैकल्पिक अस्थायी आपूर्ति की व्यवस्था की गई। एमएसडीएस-1 से ब्लास्ट फर्नेस-8 के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखा गया। 14 अगस्त, 2020 को प्रात: 06 बजे भिलाई इस्पात संयंत्र के पॉवर सप्लाई विभाग (पीएसडी) और ईटीएल की टीम ने सीजीएल के विशेषज्ञों के साथ मिलकर 132 किलोवॉट जीआईएस बस-2 के रिपेयर कार्य को प्रारंभ किया और 16 अगस्त, 2020 को प्रात: 12.30 बजे सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया।
    विदित हो कि पीएसडी और ईटीएल की टीम ने संयुक्त रूप से 40 घंटे कार्य किया और निर्धारित समय सीमा से छ: घंटे पूर्व सिस्टम को सामान्य करने में सफलता हासिल की। इस टीम ने मौजूदा महामारी कोविड-19 के दौरान किसी भी संकट से निपटने का साहस दिखाते हुए इस महत्वपूर्ण कार्य को संपादित करने में अपने उत्कृष्ट कार्य कुशलता, उत्साह व ऊर्जा का परिचय दिया।

    दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश में 8 हजार प्राईवेट स्कूलों में 15 लाख बच्चे अध्ययनरत है जिसमें से शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत प्रदेश के 6500 प्राईवेट स्कूलों में 2.85 लाख बच्चे अध्ययनरत् है। इन बच्चों को एक समान शिक्षा और सुविधा प्रदान किया जा रहा है, लेकिन फीस में भारी भिन्नता है, जिसको लेकर छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन विगत छह माह से लगातार सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से यह मांग कर रही है कि फीस मे एकरूपता लाया जाना चाहिए।

    निर्धारित शुल्क
    नर्सरी से लेकर कक्षा पांचवी तक 7000 रूपये प्रति छात्र प्रति वर्ष
    कक्षा छटवीं से लेकर आठवीं तक 11,400 रूपये प्रति छात्र प्रति वर्ष
    कक्षा नवमीं से लेकर बारहवीं तक 15,000 रूपये प्रति छात्र प्रति वर्ष
    राज्य सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित 2.85 लाख बच्चों के लिए क्षण शुल्क, प्रतिपूर्ति राशि प्रदेश के 6500 प्राईवेट स्कूलों को दिया जाता है।
    पैरेट्स एसोसियेशन का कहना है कि राज्य सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा सभी प्राईवेट स्कूलों चाहे छोटे हो या बड़े सभी स्कूलों के लिए एक समान शिक्षण शुल्क निर्धारित किया गया, इससे यह प्रमाणित होता है कि राज्य सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग यह स्वीकार कर रही है कि जो शिक्षण शुल्क राज्य सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग ने निर्धारित किया है वह जस्टिफाईड है।
    छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से यह मांग किया गया है कि जो शिक्षण शुल्क राज्य सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग ने आरटीई के बच्चों के लिए प्राईवेट स्कूलों में निर्धारित किया है और जो जस्टिफाईड है, वही शिक्षण शुल्क प्राईवेट स्कूलों में अन्य बच्चों से भी लिया जाना चाहिए।

    चरोदा / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम भिलाई-चरौदा के मेयर इन काऊंसिल की बैठक महापौर कक्ष में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता श्रीमति चन्द्रकान्ता माण्डले ने की। बैठक में प्रभारी सदस्य चन्द्रप्रकाश पाण्डेय, आशा यादव, तुलसी मरकाम, अपर्णा दास सुब्रोतो, नन्दिनी जांगड़े, किशोर साहू सहित आयुक्त किर्तीमान सिंह राठौर, कार्यपालन अभियंता, आरके चन्द्राकर, सहा स्वास्थ्य अधिकारी अश्वनी चन्द्राकर, सहा अभियंता विमल कुमार शर्मा, प्रभारी सहा अभियंता डीके पाण्डेय, जनसंपर्क प्रभारी राजू वर्मा, लिंगेश्वर राव, मुकेश यादव उपस्थित थे। निकाय क्षेत्रान्तर्गत अधोसंरचना मद अन्तर्गत ग्राम देवबलौदा करसा तालाब विकास कार्यए वार्ड क्र 40 गनियारी में सीमेन्टीकरण कार्यए वार्ड क्र? 14 सिरसा रेल्वे गेट से गैलेक्सी चैक तक बीटी रोड निर्माण कार्य सप्लाई ऑफ मैन पॉवर ;कम्प्यूटर ऑपरेटर, भृत्य, सफाई कर्मी, कार्य की स्वीकृति, टीके देव सहाकय अभियंता का स्वैच्छित सेवानिवृत्त की स्वीकृति शासन को पुष्टि हेतु प्रेषित किए जाने का अनुमोदन किया गया।
    विश्व बैंक आवासीय योजना अन्तर्गत अद्र्धनिर्मित भवनों की आम नीलामी से प्राप्त उच्चतम राशि को शासन को भेजे जाने की स्वीकृति, प्लेसमेन्ट एजेन्सी के माध्यम से सफाई व्यवस्था एवं मूलभूत सुविधाओं के सम्पादन हेतु सफाई कामगार तथा श्रमिक की आपूर्ति हेतु स्वीकृति, छग गृह निर्माण मण्डल आवासीय कॉलोनी चरौदा, पदुमनगर एवं उमदा के हस्तान्तरण की स्वीकृति, मुख्यमंत्री सुगम योजनान्तर्गत शासकीय भवनों तक पहुँच मार्गों का प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की स्वीकृति एवं वार्ड 31-32 में आरसीसी नाली निर्माण, कान्क्रीट सीमेन्टीकरणए बीटी रोड निर्माण कार्य, कान्क्रीट कॉपिंग कार्य व सीसी रोड निर्माण कार्य की स्वीकृति सर्वसम्मति से दी गई है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / नया रायपुर मंत्रालय में सोमवार को हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में समिति के सदस्य दुर्ग विधायक व भंडारगृह निगम के चेयर मैन अरुण वोरा ने राज्य में ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार एवं दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु अपने सुझाव रखे। उन्होंने मुख्य मार्गों में बिना मार्किंग के ब्रेकर से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने समय समय पर लगातार रोड मार्किंग करवाने, ब्लैक स्पॉट का चिन्हांकन करने के बाद तुरंत कार्यवाही कर कैट आई, मार्किंग, बेरिकेटिंग एवं रेडियम पेंट करवाने । रोड मार्किंग, पेड़ों में पुताई व आकस्मिक रोड सेफ्टी कार्यों के लिए प्रति वर्ष जिलेवार राशि का प्रावधान रखने।
    स्कूल कॉलेज के बसों की नियमित फिटनेस जांच एवं शहरी क्षेत्र के प्रमुख चौक चौराहों में सीसी टीवी कैमरा लगाने का सुझाव देने के साथ ही अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए अलग से 3.5 करोड़ का फण्ड जारी करने की भी मांग की। जिनमें सभी चौराहों पर हाईमास्ट लाइट हेतु राशि 80 लाख रु। रोड मार्किंग एवं पेड़ों की पुताई हेतु राशि 50 लाख रु। ट्रैफिक सिग्नल अपग्रेडेशन एवं इंस्टालेशन हेतु राशि 50 लाख। प्रमुख चौराहों में सीसी कैमरा लगाने व कंट्रोल रूम स्थापित करने हेतु राशि 1 करोड़ रु एवं मार्ग विभाजक मरम्मत एवं संधारण हेतु राशि 50 लाख शामिल हैं।

    दुर्ग / शौर्यपथ / छग युथ कांग्रेस की बैठक विडियो कान्प्रेसिंग के माध्यम से रखी गई थी जिसमें प्रमुख रुप से राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.वी. श्रीनिवास, प्रदेश अध्यक्ष पूर्णचंद कोको पाढ़ी व राष्ट्रीय व प्रदेश पदाधिकारी व जिलाध्यक्ष उपस्थित थे।
    इस बैठक में छग प्रदेश सचिव संदीप वोरा भी शामिल हुए। बैठक में 20 अगस्त को राजीव गांधी जी के 75 वीं जयंती पर युथ कांग्रेस द्वारा जिला स्तर पर मंत्री, विधायक व कांग्रेस के पदाधिकारियों की उपस्थित में पौधा रोपण के साथ पौधा का वितरण कर 3 साल तक रोपित पौधो का देखरेख करने का संकल्प भी दिलाया जाएगा। संदीप वोरा ने कहा कि राजीव गांधी जी ने कम्प्यूटर क्रांति, पंचायतीराज व्यवस्था की नींव रखी, दूरसंचार क्रांति, नवोदय विद्यालयों की नींव रखने जैसे अनेको कार्य किए है।
    छग के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरुवात की। जिसमें 19 लाख किसानों को इस वर्ष 5750 करोड़ देना। किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रुपए तथा गन्ना की खेती के लिए प्रति एकड़ 13 हजार की दर से भुगतान होगा। स्व. गांधी जी की जयंती पर युथ कांग्रेस के कार्यकर्ता व पदाधिकारी अपने- अपने वार्ड में पौधा का रोपण व वितरण कर उसे जीवित रखने का संकल्प दिलाएंगी।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों विशेष रूप से किसान भाइयों को पारंपरिक पोला तिहार की बधाई और शुभकामनाएं दी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नागरिकों के सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की है। अपने शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा है कि पोला तिहार छत्तीसगढ़ की परम्परा, संस्कृति और लोक जीवन की गहराइयों से जुड़ा है। इस त्यौहार में उत्साह से बैलों और जाता-पोरा की पूजा कर अच्छी फसल और घर को धन-धान्य से परिपूर्ण होनेे के लिए प्रार्थना की जाती है।
    यह त्यौहार हमारे जीवन में खेती-किसानी और पशुधन का महत्व बताता है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि यह पर्व बच्चों को हमारी संस्कृति और परम्पराओं से परिचय कराने का भी अच्छा माध्यम है। घरों में प्रतिमान स्वरूप मिट्टी के बैलों और बर्तनों की पूजा कर बच्चों को खेलने के लिए दिया जाता है,जिससे बच्चे अनजाने ही अपनी मिट्टी और उसके सरोकारों से जुड़ते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोविड-19 के प्रकोप को देखते हुए ग्रामीणों और किसान भाइयों से पोला तिहार के मनाने के दौरान मास्क लगाने तथा फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील की है।

    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई तीन के एक युवक ने कुम्हारी की एक लडकी को अपने प्यार में फंसाकर उसका अश£ील विडियों बनाकर ब्लैकमेलिंग करने वाले युवक को सोमवार को कुम्हारी पुलिस ने गिरफ्तार किया।
    15 अगस्त के दिन युवक ने युवती का अश्लील वीडियो एक वॉट्सएप ग्रुप में वायरल कर दिया था। लड़की के घर वालों को जब यह बात पता चली तो मामला थाने पहुंचा और अब युवक के खिलाफ पुलिस ने भी कार्रवाई की है। ल?के के परिजन से भी पूछताछ की जा रही है। जानकारी के मुताबिक आरोपी युवक भिलाई तीन का रहने वाला डाकेश्वर बंजारे है। साल 2017 में वह गांव अपनी नानी के घर गया था। पड़ोस में रहने वाली 21 साल की युवती से दोस्ती कर ली। कुछ दिन बाद युवक ने प्यार का इजहार किया।
    फोन कॉल और वीडियो कॉल पर बातें होने लगीं। कुछ दिन युवक ने वीडियो कॉल पर युवती का नहाते हुए वीडियो फोन पर सेव कर लिया। इसके बाद वो रुपयों की मांग करने लगा, वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी। महज 1 हजार रुपए युवती से पहली बार मांगे। युवती ने अपनी पॉकेट मनी से रुपए जमाकर युवक को दिए। बार-बार आरोपी रुपए की मांग करता, कभी 500 तो कभी 1 हजार रुपए वो युवती से लेता रहा। युवती ने कुछ महीने पहले रुपए देने से इंकार करते हुए युवक से बातचीत बंद कर दी। इसी बात से नाराज होकर युवक ने युवती के गांव के एक वॉट्सएप ग्रुप में वीडियो पोस्ट कर दिया। इस ग्रुप में युवती की बुआ का बेटा भी था। वीडियो देखने के बाद उसने घर पर सूचना दी। अब पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर रही है।

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