
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
दुर्ग / शौर्यपथ / कहते है राजनीती में चाटुकारिता के कारण कई बार फायदा होता है तो कई बार नुक्सान भी उठाना पड़ता है ऐसा ही कुछ हाल जामुल नगर पालिका के अध्यक्ष पद के लिए हुआ . जहा एक ओर प्रदेश के निकाय चुनाव में , पंचायत चुनावों में , अन्य उप चुनावों में कांग्रेस को लगातार बढ़त और जीत मिल रही है वही जामुल नगर पालिका का चुनाव पूर्व अध्यक्ष के नाम को आगे करने के कारण कांग्रेस को नगर पालिक जामुल में हार का सामना करना पड़ा . चुनाव के समय से ही ऐसी बात जामुल कांग्रेस द्वारा चर्चा में फैला दी गयी थी कि जामुल में इस बार भी नगर पालिक अध्यक्ष के रूप में सरोजनी चंद्राकर को ही आगे किया जाएगा .
जबकि जामुल वासियों के मन की बात अगर कही जाए तो पहले से ही बना लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए जामुल में अब अध्यक्ष के रूप में सरोजनी चंद्राकर को नहीं देखा जा सकता . किन्तु जामुल वासियों के मन की बात को शायद संगठन नहीं समझ पाया और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के होते हुए भी सरोजनी चंद्राकर के नाम को आगे करने के चक्कर में कांग्रेस को मुख्यमंत्री के गृह जिले , पीएचई मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में बड़ी हार का सामना करना पड़ा .
चुनावी नतीजो के बाद जहाँ फिर खुलकर अध्यक्ष के लिए सरोजनी चंद्राकर के नाम का विरोध गली चौराहों में होने लगा किन्तु संगठन ने एक बार फिर गलती कर डी और अध्यक्ष के लिए सरोजनी चंद्राकर के नाम को आगे कर दिया जिसके कारण जामुल नगर पंचायत को भाजपा पार्टी का अध्यक्ष पद मिल गया वही उपाध्यक्ष के लिए पार्षदों ने कांग्रेस के प्रत्याशी को अपना मत दे दिया .
चर्चा है कि शुरू से ही पार्षदों के मन में यह बात रही कि स्थानीय स्तर पर लगातार निष्क्रियता का परिचायक सरोजनी चंद्राकर को किसी भी हाल में अध्यक्ष पद तक नहीं पहुँचने दिया जाए . किन्तु पार्षदों और आम जनता जिन्होंने कांग्रेस का साथ सिर्फ पूर्व की निष्क्रिय सरकार और प्रमुख के कारण छोड़ा एक बार फिर संगठन ने उसे ही आगे कर दिया . आम चर्चा है कि कांग्रेस संगत्थान किसी और के नाम को प्रमुखता से आगे करती तो कांग्रेस की जीत बड़े अंतर से होती वही जामुल पालिका में कांग्रेस के पार्षदों की संख्या में भी इजाफा होता किन्तु संगठन को शायद आम जनता की नहीं चाटुकारों की बात पर ही यकीन रहा जिसका परिणाम यह रहा कि अध्यक्ष पद में भाजपा की जीत हुई वही उपाध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस प्रत्याशी को महत्तव दिया गया .
परिणाम आगये अब कांग्रेस संगठन को सोंचना होगा कि जामुल में कोई ऐसा चेहरा सामने लाये जो आम जनता के लिए सक्रियता से कार्य करे ना कि सिर्फ पद की लालसा और परिवार वाद में घिरे रहे . आने वाले दो वर्ष के अन्दर विधान सभा चुनाव होने वाले है ऐसे में नए चेहरे के सामने आने से विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को बढ़त मिलेगी .
पूर्व अध्यक्ष सरोजनी चंद्राकर के हारने का सबसे बड़ा कारण परिवारवाद रहा ..
स्थानीय लोगो की माने तो जामुल निगम में जब से सरोजनी चंद्राकर ने पद संभाला था तब से ही सत्ता सँभालने में पूर्व अध्यक्ष से ज्यादा परिवार के लोगो का दखल रहा था . परिवार वाद की पीड़ा को जामुल क्षेत्र के निवासियों ने लगातार ५ साल झेला .चर्चा यहाँ तक भी है कि हर फैसले सिर्फ बड़े कमीशन और निजी फायदे के तहत ही लिए जाते थे एवं विकास कार्य में भी खुल लार भेदभाव की नीती अपनाई जाति थी पूरा क्षेत्र कई तरह की परेशानियों का सामना करता रहा किन्तु जिम्मेदार जनप्रतिनिधि का हर फैसला घर के अन्दर परिवार के लोगो की सहमती से ही होता था . यहाँ तक कि पार्टी के अन्य पार्षदों को भी दरकिनार किया जाता रहा कई पूर्व पार्षदों का यहाँ तक कहना है कि छोटे छोटे बातो के लिए भी घंटो प्रतीक्षा करनी पड़ती थी जब तक कही से हरी झंडी नहीं मिलती तब तक सिर्फ इंतज़ार ही इंतज़ार . इस बार शायद जामुल की जनता ने पहले से ही ठान लिया था कि अब परिवार वाद को जामुल से ख़त्म करना है और परिणाम ऐसा देना है कि सत्ता मुखिया के पद पर किसी और को बैठाया जाए . विरोध का जबरदस्त आलम यह रहा कि स्थानीय विधायक और पीएचई मंत्री के पूर्ण प्रभाव वाले क्षेत्र में भी कांग्रेस को एक प्रत्याशी के नाम को आगे करने की चर्चा के कारण निगम की सत्ता हाथ से गवानी पड़ती वरना मुख्यमंत्री आज जिले केसभी चारो निकायों में कांग्रेस की शहरी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो रहे होते .
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
