Google Analytics —— Meta Pixel
April 06, 2026
Hindi Hindi

आश्रय स्थल के नाम पर चल रही लूट, हर साल हो रहा 6 लाख का गबन.. Featured

  • rounak group

दुर्ग। शौर्यपथ । सरकार द्वारा बेघरों को छत देने के लिए हर शहर में आश्रय स्थल का निर्माण किया गया है जिसमें बेघरों को रहने की व्यवस्था एवं खाने की व्यवस्था की जाती है इसके लिए सरकार द्वारा प्रतिवर्ष आश्रय स्थल संचालकों को एनजीओ के माध्यम से ₹600000 की राशि एवं सुसज्जित भवन दिया जाता है ताकि जिनके पास छत ना हो एवं जिनके पास कमाई के साधन ना हो कमजोर वर्ग के लोगों के लिए यह आश्रय स्थल बनाया गया है ऐसा ही एक आश्रय स्थल दुर्ग शहर में भी है किंतु इस आश्रय स्थल की जानकारी दुर्ग शहर के नाही समाजसेवियों को है ना ही ऐसे संगठनों को जो भूखों को गरीबों को खाने की व्यवस्था एवं जरूरत की व्यवस्था मुहैया कराते हैं जबकि शासन द्वारा ऐसे बेघर लोगों के लिए रहने की व्यवस्था एवं दो वक्त के भोजन की व्यवस्था की जाती है जिसके लिए शासन अनुदान की राशि ₹600000 प्रतिवर्ष खर्च करती है किंतु आज दुर्ग शहर में कागजों में ही आश्रय स्थल नजर आता है दुर्ग शहर के इस आश्रय स्थल में बेघरों को आश्रय देने के बजाय एक होटल के रूप में संचालित किया जा रहा है वही होटल के साथ-साथ रेस्टोरेंट्स के रूप में भोजनालय भी संचालित हो रहा है किंतु इसके जिम्मेदार अधिकारी एनजीओ प्रमुख ना ही इस मामले में किसी तरह का संज्ञान ले रहे हैं ना ही ऐसे संचालकों पर किसी तरह की कार्रवाई कर रहे हैं जबकि शासन के द्वारा संचालित आश्रय स्थल का शहर भर में प्रचार प्रसार करने की जिम्मेदारी नगर पालिक निगम दुर्ग एवं एनजीओ की है किंतु दुर्ग शहर के आश्रय स्थल को व्यापार का केंद्र बनते हुए देखने के बावजूद भी दुर्ग नगर निगम की एजेंसी एनजीओ के प्रमुख मुक्तेश्वरा ना ही इस मामले में कोई कार्यवाही की जा रही है ना ही संज्ञान लिया जा रहा है बदहाली की व्यवस्था यहां तक है कि इस आश्रय स्थल की जानकारी आम जनता को ना हो इसलिए कहीं भी शासन की महत्वपूर्ण योजना का प्रचार प्रसार नहीं किया जा रहा है वही आश्रय स्थल के बोर्ड की जगह रैन बसेरा का बोर्ड लगा हुआ है राज्य शासन एवं केंद्र शासन द्वारा अनुदान तो लिया जाता है किंतु इसका पालन करवाने में जिम्मेदार एनजीओ पूरी तरह से फेल है वहीं इस मामले की संपूर्ण जानकारी होने के बाद भी नगर पालिक निगम आयुक्त हरेश मंडावी द्वारा जल्द ही मामले को संज्ञान में लेने की बात कही जाती है महीनों बाद भी ना तो आयुक्त मंडावी मामले को संज्ञान में ले रहे हैं और ना ही एनजीओ प्रमुख मुक्तेश।

क्या एनजीओ प्रमुख और आयुक्त मंडावी शासन की इस योजना को शिव कागजों में ही रहने देना चाहते हैं और अनुदान की राशि को संचालकों को देना चाहते हैं साथ ही आश्रय स्थल को होटल बनाने में निगमायुक्त मंडावी एनजीओ प्रमुख मुक्तेश द्वारा कहीं पर्दे के पीछे कोई बड़े लेन-देन की बात तो नहीं है क्योंकि आज भी दुर्ग शहर में ऐसे कई व्यक्ति है जिनके पास रहने को घर नहीं और वह बस स्टैंड में खाली दुकानों के सामने रेलवे स्टेशनों में हर मौसम में अपनी रात गुजार रहे हैं जबकि अगर दुर्ग के आश्रय स्थल की बात करें तो यहां पर 40 से 50 लोगों के रुकने की पूरी व्यवस्था है किंतु दुर्ग का यह आश्रय स्थल सिर्फ कागजों में ही संचालित नजर आ रहा है दिखावे के लिए पास 5*10 लोगों का ही यहां निवास होता है किंतु सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इनसे भी मासिक किराए के रूप में रकम ली जा रही है ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है कि आश्रय स्थल में अघोषित रूप से होटल का भी संचालन हो रहा है आम जनता भी कहीं पर आश्रय स्थल का बोर्ड ना देख कर कुछ कह नहीं पाती वहीं कई सामाजिक संस्थाओं से दुर्ग शहर में ऐसे किसी आश्रय स्थल के बारे में पूछने पर उनके द्वारा कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है जबकि दुर्ग शहर में नव दृष्टि फाउंडेशन , श्रुति फाउन्डेशन ,जन समर्पण सेवा समिति जैसी कई संस्थाएं हैं जो सालों से भूखे व्यक्तियों को भोजन की व्यवस्था करा रही है जरूरतमंदों के लिए जरूरत की सामग्री उपलब्ध करा रही है वहीं शासन की योजना का जिम्मेदार अधिकारी एवं अन्य अधिकारी द्वारा खुलकर दोहन किया जा रहा है और शासन के द्वारा प्राप्त अनुदान राशि का अपरोक्ष रूप से गबन किया जा रहा है क्योंकि आश्रय स्थल में सिर्फ दस्तावेजों में ही सभी कुछ नजर आता है परंतु जमीनी स्तर पर देखा जाए तो यहां ना तो भूखों को खाना उपलब्ध होता है और ना ही बेघरों को छत दुर्ग का स्थाई स्थल सिर्फ एक लॉज के रूप में ही काम आ रहा है जिससे संचालकों को और शायद एनजीओ को भी कुछ ना कुछ लाभ हो रहा होगा क्योंकि अनुदान राशि का उपयोग तो कहीं से होता नजर नहीं आ रहा है महीनों पहले दुर्ग निगम आयुक्त समाचार पत्र से बात करते हुए कहा था कि दुर्ग शहर में स्थित आश्रय स्थल का पूर्ण प्रचार-प्रसार होगा वही एनजीओ के अधिकारी ने भी इस बात का वादा किया था कि शहर की जनता को आश्रय स्थल का पूरा लाभ मिलेगा एवं इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया जाएगा किंतु महीनों गुजर जाने के बाद भी इस और कोई पहल नहीं की गई और ना ही सार्थक प्रयास किया गया जबकि इस आश्रय स्थल को चलाने वाली संस्था का नाम ही सार्थक है ऐसे में क्या जिला कलेक्टर डॉक्टर भूरे मामले को संज्ञान में लेकर ऐसी व्यवस्था करेंगे कि दुर्ग शहर में स्थित आश्रय स्थल का लाभ शहर के उन लोगों को मिले जिनके पास रहने को घर नहीं एवं खाने को भोजन नहीं....

Rate this item
(0 votes)

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)