August 06, 2026
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    विपक्ष को कमजोर समझने की भूल भारी पड़ सकती है बाकलीवाल की शहरी सरकार को .. Featured

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    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम की सामान्य सभा नई सरकार के सत्ता सँभालने के 10 माह बाद हो रही है . इन दस महीनो में अगर देखा जाए तो निगम के कार्यो में ऐसे कई फैसले निगम महापौर ने लिए उसके लिए वो स्वयं तो प्रशंसा के हकदार है किन्तु इन दस माह में ऐसे कई कार्य हुए जो विपक्ष के लिए मुद्दा बन सकते है . ऐसे कई मामले इन दस माह में आये जिसमे शहर के विधायक निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नजर आये ऐसे कई मामले सामने आये जब शहर के विधायक ने प्रशासनिक कार्यो पर ऊँगली उठाई . इन दस माह में शंकर नाला सफाई का मामला उसमे वर्तमान शहरी सरकार से ज्यादा इच्छा शक्ति आयुक्त बर्मन की रही जिस सिरे से निगम आयुक्त ने कड़ी दर कड़ी नालो की सफाई करवाई वो भाजपा के शासन काल से शुरू होकर कांग्रेस के शासन काल तक चली इस लिए शहर के नालो की सफाई का श्रेय दोनों ही दल को नहीं जाता . रही बात व्यवस्था की तो निगम की शहरी सरकार के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाला सवाल सत्ता आने के बाद 10 महीने के समय बीत जाने पर भी प्रदेश के मुख्यमंत्री की महती योजना गौठान को अभी तक पटरी पर नहीं लाया गया , कोरोना काल के बाद शहर एक सामान्य रफ़्तार पर चल रहा है किन्तु कोरोना काल के समय शहर के सडको पर जो अतिक्रमण सब्जी वालो ने किया आज वो बरकऱार है और इस पर निगम सरकार का स्वास्थ्य विभाग कार्यवाही के नाम पर मौन है आज शहर के सबसे सुंदर गौरव पथ पर अतिक्रमण कारियों का कब्जा है जिस पर विभाग मौन है , , कोरोना आपदा के समय मुफ्त राशन की योजना दुर्ग निगम महापौर की थी जिसकी सराहना प्रदेश के मुखिया ने भी की किन्तु राशन में निम्न स्तरीय सामान का वितरण सत्ता पक्ष के लिए एक फ ांस बन सकता है . ऐसा नहीं है कि निगम की शहरी सरकार के मुखिया ने सार्थक पहल नहीं की किन्तु सामन के वितरण में आये दिन जो विवाद रहे उस पर लगाम लगाने में शहरी सरकार के जिम्मेदार प्रभारी मौन रहे , अमृत मिशन की ही बात करे तो अमृत मिशन के कार्य प्रणाली पर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर शहर के विधायक आये दिन सवाल उठाते रहे जबकि विधायक भी उसी पार्टी से सम्बन्ध रखते है जिस पार्टी से दुर्ग निगम की शहरी सरकार है .
    चुने हुए जनप्रतिनिधि की बात को महत्तव नहीं देने का आरोप जनप्रतिनिधि कई बार निगम प्रशासन पर लगा चुके है जिससे आम जनता के मन में भी असमंजस की स्थिति है कि निगम की शहरी सरकार ही अगर प्रशासन से काम नहीं करवा पा रही तो आम आदमी का क्या होगा .
    सफाई व्यवस्था और स्वास्थ्य अधिकारी की कार्य प्रणाली पर सत्ता में बैठी सरकार ने ही कई बार परोक्ष अपरोक्ष आरोप लगा दिए किन्तु व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ जो एक विरोधी सन्देश के रूप में आम जनता के पास गया . कहने को तो गौठान का निर्माण हो गया किन्तु आज भी बाज़ार क्षेत्र में आवारा गाय / बैल का हुजूम है जो किसी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है इस पर भी निगम की शहरी सरकार घेरे में आ सकती है .
    दुर्ग निगम में सबसे महत्तवपूर्ण विभाग पीडब्ल्यूडी का होता है किन्तु विगत दस माह में सबसे ज्यादा विवादित विभाग कोई रहा तो वो पीडब्ल्यूडी विभाग ही रहा जबकि दुर्ग निगम में सबसे वरिष्ठ कांग्रेस पार्षद का तमगा जिस वार्ड पार्षद के पास है उसी के पास पीडब्ल्यूडी का विभाग है किन्तु इस विभाग के कार्यो में आये दिनों नए नए विवाद की स्थिति उत्पन्न होते रहती है विगत दस माह में संधारण मद का भरपूर उपयोग हुआ और किस कार्य के लिए हुआ इसकी जानकारी विभाग देने में आनाकानी करती नजर आती है . पीडब्ल्यूडी विभाग में विगत दस महीनो में ऐसे कई कार्य हुए जिसकी निविदा बाद में निकलती और कार्य पहले शुरू हो जाता जिससे यह तो स्पष्ट हो ही गया कि कार्य मनपसंद ठेकेदारों को देने की प्रथा इन दस महीनो में बड़ी तेजी से अपने विकराल रूप में बड़ी वो भी तब जबकि निगम के शहरी सरकार में सबसे अनुभवी पार्षद के हांथो में पीडब्ल्यूडी का प्रभार रहा है .
    एक तरफ अनुभवहीन महापौर द्वारा शहर की समस्याओ के हल के लिए लगातार प्रयास किया जाता रहा किन्तु मंत्रिमंडल के सदस्य कभी शौचालय ठेके में घिरते नजर आये तो कभी बिजली सामान की खरीदी मामले में ऊँगली उठी तो कभी जल व्यवस्था पर प्रभारी कटघरे में आये वही सबसे महत्तवपूर्ण विभाग पीडब्ल्यूडी में आये दिन कोई ना कोई घोटाला उजागर होने की खबर प्रकाशित होती रही .
    विगत दस महीनो में शहर की जनता को महापौर तो हर जगह दिखे किन्तु कई प्रभारी निगम से नदारद तो कई प्रभारी अनुभवहीनता के कारण महापौर के आगे पीछे या निगम कार्यालय तक सीमित दिखे . एक बारगी देखा जाए तो निगम प्रशासन और दुर्ग विधायक के आपसी तालमेल की कमी का खामियाजा शहर की जनता को लगातार उठाना पड़ रहा है . अगर भविष्य में निगम प्रशासन और शहरी सरकार का तालमेल नहीं बैठा तो एक बार फिर शहर के महापौर पर रबर स्टैम्प महापौर का तमगा लग जाएगा जैसा कि भाजपा के पिछले दो महापौर के उपर रबर स्टैम्प महापौर का तमगा लगा था
    वर्तमान की निगम सरकार को शहर के विकास के लिए निगम के पीडब्ल्यूडी विभाग और स्वास्थ्य विभाग सहित बाजार एवं जल विभाग पर खासी मेहनत करनी होगी अगर सुशासन देनी है जिसमे सबसे ज्यादा विवादित पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यो पर और इसमें चल रहे मनमानी कार्य मनचाहे ठेकेदार को देने की प्रणाली पर जिसके कारण लगातार निगम के इस विभाग पर बड़े कमीशन का आरोप लग रहा है .
    प्रथम बार पार्षद व महापौर बनने के बावजूद आम जनता के संपर्क में रहना , विपक्ष की बातो को सुनना और कोई सार्थक हल निकलने का प्रयास करने प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के बीच एक मजबूत सेतु की तरह कार्य करने के कारण विपक्ष महापौर पर तो कम किन्तु शहरी सरकार के कई विभागों की कार्य प्रणाली पर जरुर सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश करेगा अब देखना यह है कि सामान्य सभा की बैठक में मुख्य विपक्षी दल भाजपा के सवालों सहित निर्दलीय पार्षदों जिनकी भी एक लम्बी फौज है के सवालों का जवाब सत्ता पक्ष कैसे देगा और किस तरह सामान्य सभा में विकास के कार्यो को गति प्रदान करने के कार्यो पर मुहर लगेगी .
    आज होने वाली सामान्य सभा में सबकी नजर स्वास्थ्य विभाग के कार्य प्रणाली पर उठ रहे सवालों के जवाब और पीडब्ल्यूडी विभाग में हो रहे मनमानी पर सत्ता पक्ष का पक्ष क्या होगा यह जानने की हर कोई कोशिश करेगा . बरहाल जो भी हो नयी सरकार बनने के दस माह बाद होने वाली पहली सामान्य सभा की बैठक हर मायने में धमाकेदार होने की उम्मीद सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष और निर्दलीय पार्षद सभी लगा रहे है .

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