August 03, 2026
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    जेम पोर्टल और स्कूल शिक्षा विभाग - टेंडर खुलने से पहले काम शुरू! ,बालोद जंबूरी 2026 पर कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की भूमिका कटघरे में Featured

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    जेम पोर्टल की पारदर्शिता पर सवाल, तय ठेके की आशंका — कांग्रेस ने मांगी निष्पक्ष जांच

    रायपुर/शौर्यपथ।
    छत्तीसगढ़ में सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बालोद जिले में प्रस्तावित नेशनल लेवल रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 के आयोजन को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सुबोध हरितवाल ने कहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े इस आयोजन में टेंडर खुलने से पहले ही निजी कंपनी द्वारा काम शुरू कर दिया जाना, यह संकेत देता है कि ठेका पहले से ही तय कर लिया गया था।
    कांग्रेस के अनुसार जंबूरी आयोजन का टेंडर 03 जनवरी को दोपहर 12 बजे जेम पोर्टल पर खुलना था, लेकिन उससे पहले ही शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, बालोद में एक निजी कंपनी द्वारा सामग्री, ट्रक और श्रमिकों के साथ काम शुरू कर दिया गया। मौके पर भारत किराया भंडार की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना दिया।

    जब टेंडर खुला ही नहीं, तो काम किसके आदेश पर?

    कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, तब किसी कंपनी को काम शुरू करने की अनुमति किसके निर्देश पर दी गई। जेम पोर्टल जैसी ऑनलाइन प्रणाली के बावजूद यदि किसी कंपनी को पहले से भरोसा था कि काम उसी को मिलेगा, तो यह प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा प्रश्नचिह्न है।
    सुबोध हरितवाल ने कहा कि जो अन्य निविदाकर्ता नियमों का पालन करते हुए टेंडर खुलने का इंतजार कर रहे थे, उनके साथ संभावित रूप से अन्याय हुआ है। उन्होंने पूछा कि यदि टेंडर की जानकारी पहले ही लीक हो गई थी, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

    अधिकारी का फोन स्विच ऑफ, संदेह और गहराया
    मामले में संदेह तब और बढ़ गया जब टेंडर दस्तावेज में दर्ज संबंधित अधिकारी के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन तय समय पर फोन स्विच ऑफ मिला। कांग्रेस का कहना है कि यह स्थिति जवाबदेही से बचने की कोशिश को दर्शाती है।

    स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की भूमिका पर सवाल
    कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। जंबूरी का आयोजन 9 से 13 जनवरी तक प्रस्तावित है और इसकी सीधी जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग की है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या मंत्री स्तर पर जानकारी होने के बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया गया, या फिर अधिकारियों और कंपनी के बीच बनी व्यवस्था को मौन सहमति दी गई।
    कांग्रेस ने कटाक्ष करते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं से जुड़े कार्यक्रमों में पारदर्शिता और अनुशासन शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, और यदि ऐसे आयोजनों में ही नियमों की अनदेखी हो, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

    केवल एक आयोजन नहीं, पूरी टेंडर प्रणाली पर सवाल
    कांग्रेस का कहना है कि बालोद का यह मामला केवल एक जंबूरी आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में जेम पोर्टल के माध्यम से होने वाली टेंडर प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है। पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि टेंडर खुलने से पहले काम शुरू होने की अनुमति किसने दी। इस संबंध में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, सुरेंद्र वर्मा तथा अमित तिवारी उपस्थित रहे।

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