August 03, 2026
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    कानून को ठेंगा, मरीजों की जान दांव पर: दुर्ग का श्री साईं हॉस्पिटल बना ‘नियमविहीन साम्राज्य’ Featured

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    नोटिस पर नोटिस, फिर भी बेखौफ निर्माण: दुर्ग में ‘श्री साईं हॉस्पिटल’ पर नियमों की खुली अवहेलना के गंभीर आरोप

    दुर्ग।
    एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को जनहितकारी बनाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर दुर्ग नगर पालिक निगम क्षेत्र में स्थित निजी नर्सिंग होम ‘श्री साईं हॉस्पिटल’ पर कानून, प्रशासन और मरीजों—तीनों की अनदेखी के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।

    मिली जानकारी के अनुसार, दुर्ग नगर निगम की भवन शाखा द्वारा बीते तीन वर्षों से लगातार नोटिस दिए जाने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने भवन विस्तार की न तो विधिवत अनुमति ली और न ही कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किया। इसके उलट, निर्माण कार्य निरंतर जारी रहा, जिससे नगर निगम की भूमिका और कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।


    स्वीकृत नक्शा बदला, पर अनुमति नहीं—अवैध विस्तार के आरोप

    सूत्रों के अनुसार, जिस ब्लूप्रिंट/लेआउट के आधार पर अस्पताल को प्रारंभिक अनुमति मिली थी, वर्तमान में भवन की संरचना उससे काफी भिन्न पाई जा रही है।
    छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 और छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम एक्ट, 2010 के तहत बिना निगम अनुमति के भवन विस्तार अवैध है। ऐसे मामलों में न केवल निर्माण ध्वस्त किया जा सकता है, बल्कि नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त होने तक की कार्रवाई का प्रावधान है।


    कच्चे बिल और GST नंबर का अभाव—मरीजों से लाखों की वसूली पर सवाल

    अस्पताल पर यह भी आरोप है कि मरीजों से हजारों ही नहीं, बल्कि लाखों रुपये तक की राशि वसूल की जा रही है, लेकिन GST नंबर के बिना ‘कच्चा बिल’ थमाया जा रहा है
    जबकि छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम एक्ट एवं नियमों के अनुसार:

    • पक्का, विस्तृत और हस्ताक्षरित/कंप्यूटरीकृत बिल अनिवार्य है

    • दर सूची (Rate List) का सार्वजनिक प्रदर्शन आवश्यक है

    • दवाइयों, डॉक्टर फीस, बेड चार्ज आदि का स्पष्ट विवरण देना जरूरी है

    कच्चा बिल देना नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाता है।


    रात्रि में MBBS डॉक्टर की अनुपस्थिति?—ब्रेन हेमरेज सर्जरी पर गंभीर प्रश्न

    मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल में रात्रिकालीन समय में किसी MBBS चिकित्सक की उपलब्धता संदिग्ध बताई जा रही है।
    जबकि इसी अस्पताल में ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर सर्जरी किए जाने का दावा किया जाता है।
    चिकित्सा मानकों के अनुसार, ऐसे मामलों में एक नहीं, बल्कि 2–3 योग्य चिकित्सकों की सतत उपलब्धता आवश्यक होती है।
    यदि यह जानकारी सही है, तो यह सीधे-सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ का मामला बनता है।


    स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल

    नर्सिंग होम एक्ट के तहत CMHO द्वारा स्थायी अनुमति तभी दी जा सकती है, जब:

    • नगर निगम की वैध भवन अनुमति हो

    • फायर NOC और अन्य सुरक्षा प्रमाणपत्र उपलब्ध हों

    • भवन स्वीकृत नक्शे के अनुरूप हो

    ऐसे में सवाल उठता है कि यदि भवन विस्तार अवैध है, तो अस्पताल का संचालन किस आधार पर जारी है?


    चिकित्सा या व्यापार?

    यह पूरा मामला आज के उस कड़वे सच को उजागर करता है, जहां चिकित्सा सेवा को मुनाफे का व्यवसाय बना दिया गया है।
    नियमों को ताक पर रखकर चल रहे ऐसे नर्सिंग होम न सिर्फ कानून का मजाक उड़ा रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं


    प्रशासन से अपेक्षा

    अब जरूरत है कि:

    • नगर निगम अवैध निर्माण पर निर्णायक कार्रवाई करे

    • स्वास्थ्य विभाग लाइसेंस और चिकित्सा मानकों की पुनः जांच करे

    • कच्चे बिल और GST उल्लंघन की वित्तीय जांच हो

    ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियम सबके लिए समान हैं—या फिर निजी अस्पताल कानून से ऊपर हैं?

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