August 03, 2026
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    “बंगाल में ‘सुशासन’ की बात, दुर्ग में मुरूम-मिट्टी का खेल: विधायक ललित चंद्राकर की चुप्पी पर गहराए सवाल” Featured

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    दुर्ग (छत्तीसगढ़)।

    दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों अवैध मुरूम और मिट्टी खनन का मामला तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। खेत समतलीकरण और विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर जमीनों को गहरे गड्ढों में तब्दील किया जा रहा है, जहां से मुरूम और मिट्टी का अवैध उत्खनन कर ट्रैक्टर-ट्रकों के जरिए खुलेआम परिवहन किया जा रहा है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहा है और राजस्व व खनिज नियमों की खुली अनदेखी की जा रही है। खेत सुधार के नाम पर हो रही खुदाई कई स्थानों पर खनन का रूप ले चुकी है, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता और पर्यावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

    “खेत सुधार” या खनन का बहाना?

    ग्रामीणों का कहना है कि जिन जमीनों पर समतलीकरण होना चाहिए, वहां गहराई तक खुदाई कर मुरूम और मिट्टी निकाली जा रही है। इसके बाद इन्हें निर्माण कार्यों में खपाया जा रहा है। इस प्रक्रिया में न तो रॉयल्टी का भुगतान हो रहा है और न ही किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली जा रही है।

    अंजोरा, चंगोरी, बिरेंझर और आसपास के क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं। सरपंच इंद्रजीत साहू द्वारा कलेक्टर को लिखे गए पत्र ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, जिसमें अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

    प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल

    हालांकि समय-समय पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर यह कार्रवाई केवल औपचारिक नजर आती है। अवैध परिवहन लगातार जारी है, जिससे यह संदेह और गहराता है कि कहीं न कहीं निगरानी और नियंत्रण में बड़ी चूक हो रही है।

    विधायक की भूमिका पर उठते प्रश्न

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच दुर्ग ग्रामीण के विधायक ललित चंद्राकर की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर वे पश्चिम बंगाल में चुनावी मंचों से ‘सुशासन’ का संदेश दे रहे हैं, वहीं उनके अपने क्षेत्र में अवैध मुरूम और मिट्टी खनन चरम पर है।

    स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि आखिर इस गंभीर मुद्दे पर विधायक की स्पष्ट और सख्त प्रतिक्रिया क्यों सामने नहीं आ रही है। क्या यह केवल प्रशासनिक ढिलाई है, या फिर इसके पीछे किसी प्रकार का संरक्षण भी मौजूद है—यह सवाल अब आम जनता के बीच उठने लगा है।

    चुनावी माहौल में बढ़ी संवेदनशीलता

    आगामी रिसाली नगर निगम चुनाव के मद्देनजर यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। ग्रामीण क्षेत्र का प्रभाव इस चुनाव में अहम माना जाता है, और ऐसे में अवैध खनन का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए बड़ा हथियार बन सकता है।

    जनता को जवाब का इंतजार

    फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या विधायक ललित चंद्राकर इस मामले में सख्त रुख अपनाकर प्रशासन को ठोस निर्देश देंगे, या फिर यह अवैध खनन यूं ही जारी रहेगा?

    दुर्ग ग्रामीण की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई देखना चाहती है—ताकि “सुशासन” केवल मंचों की बात न रहकर हकीकत भी बन सके।

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