August 03, 2026
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    महापौर अलका बाघमार के कार्यकाल में ‘प्रवीण इंजीनियरिंग’ का कब्जा राज? बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की चुप्पी पर उठे भ्रष्टाचार के सवाल ? Featured

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    दुर्ग // शौर्यपथ समाचार

    दुर्ग नगर निगम के सबसे व्यस्ततम बस स्टैंड क्षेत्र में अवैध कब्जों का खेल अब खुलकर सामने आने लगा है। आरोप है कि निगम के बाजार विभाग के संरक्षण में प्रवीण ऑटो इंजीनियरिंग द्वारा लगातार नियमों को ताक पर रखकर कब्जा बढ़ाया जा रहा है। पहले बरामदे में स्टेट (ढांचा) खड़ा किया गया, फिर बिना अनुमति के जनरेटर स्थापित कर लिया गया और अब पूरे घरनुमा हिस्से पर कब्जा कर लेने का मामला चर्चा का विषय बन गया है।

    इस पूरे प्रकरण ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर महापौर श्रीमती अलका बाघमार और बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की भूमिका को लेकर शहर में तीखी चर्चाएं हैं।

    बाजार विभाग की कार्यशैली पर सवाल

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र में अवैध कब्जों का विस्तार बिना विभागीय संरक्षण के संभव नहीं है। बाजार विभाग की अनुमति से विस्थापन की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है, जहां व्यवस्थित पुनर्वास के बजाय मनमाने ढंग से स्थान आवंटन किए जाने की बातें सामने आ रही हैं।

    निगम परिसर के बरामदों से लेकर सड़कों तक अतिक्रमण फैलता जा रहा है, जिससे यातायात व्यवस्था और आम नागरिकों की सुविधा दोनों प्रभावित हो रही हैं।

    ‘टालमटोल’ या ‘संरक्षण’?

    बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा पर आरोप है कि वे लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई करने के बजाय टालमटोल की नीति अपना रहे हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं न कहीं यह मामला केवल लापरवाही नहीं बल्कि आर्थिक अनियमितताओं से भी जुड़ा हो सकता है।

    फ्लेक्स-बैनर घोटाले, राम रसोई अनुबंध विवाद और अन्य अतिक्रमण मामलों के बाद यह नया प्रकरण विभागीय पारदर्शिता पर और बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

    शहर में बढ़ती अव्यवस्था, जिम्मेदारी किसकी?

    बस स्टैंड, जो जिले का प्रमुख परिवहन केंद्र है, वहां अवैध कब्जों के कारण अव्यवस्था चरम पर पहुंचती जा रही है। ऐसे में शहरी सरकार की मुखिया होने के नाते महापौर अलका बाघमार और संबंधित विभागीय अधिकारी की जवाबदेही तय होना स्वाभाविक है।

    आयुक्त की भूमिका पर नजर

    वर्तमान में निगम की प्रशासनिक कमान आईएएस अधिकारी सुमित अग्रवाल के हाथों में है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि वे इस पूरे मामले में क्या सख्त कदम उठाते हैं और बाजार विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार ला पाते हैं या नहीं।

    राजनीतिक गलियारों में भी गर्माहट

    इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। शहर में यह चर्चा जोरों पर है कि अव्यवस्था और अवैध कब्जों का असर आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। जहां एक ओर महापौर के भविष्य को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, वहीं क्षेत्रीय विधायक और मंत्री गजेंद्र यादव की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    निष्कर्ष:

    दुर्ग बस स्टैंड में बढ़ते अवैध कब्जे केवल अतिक्रमण का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह नगर निगम की प्रशासनिक क्षमता, पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुका है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

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    Last modified on Thursday, 09 April 2026 09:44

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