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बर्खास्तगी के साथ ही फिर गरमाया गुमठी घोटाला; पत्रकार और तथाकथित 'सिंडिकेट' के बीच सांठगांठ की खुलेगी परतें
दुर्ग | शौर्यपथ दुर्ग नगर निगम में धार्मिक आस्था पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला अब एक बड़े प्रशासनिक और भ्रष्टाचार के खुलासे की ओर मुड़ गया है। निगम आयुक्त के निजी सहायक (PA) गौतम साहू द्वारा हिंदू देवी-देवताओं पर की गई अश्लील टिप्पणी के बाद शनिवार को निगम परिसर तनाव और भारी आक्रोश का केंद्र बना रहा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त सुमित अग्रवाल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गौतम साहू को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
निगम परिसर में भड़का आक्रोश, पुलिस की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
कथित व्हाट्सएप चैट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। भीड़ इतनी उग्र थी कि निगम परिसर में मौजूद कर्मचारी भी बीच-बचाव करने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माहौल किसी बड़ी अनहोनी की ओर बढ़ रहा था, लेकिन पद्मनाभपुर और मोहन नगर पुलिस की सक्रियता और रणनीतिक हस्तक्षेप ने स्थिति को संभाल लिया। पुलिस ने सुरक्षा घेरे में लेकर आरोपी को थाने पहुंचाया।
सत्ता का दुरुपयोग और ‘सेकंड बॉस’ का अहंकार
निगम गलियारों में चर्चा है कि गौतम साहू लंबे समय से आयुक्त के पद और प्रभाव का सहारा लेकर स्वयं को ‘सेकंड बॉस’ के रूप में स्थापित कर चुका था। कर्मचारियों और आम जनता के बीच उसकी छवि एक ऐसे व्यक्ति की बन गई थी जो प्रशासनिक गरिमा को ताक पर रखकर अपनी सत्ता चलाता था। विहिप नेता राकेश रामलोचन ने कहा कि, "ऐसे लोग शांत समाज के लिए अभिशाप हैं, प्रशासन को इनके खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।"
गुमठी घोटाला: ठंडे बस्ते से फिर बाहर आएगी फाइल
गौतम साहू की बर्खास्तगी के साथ ही अब गुमठी आवंटन घोटाले की चर्चा फिर से तेज हो गई है।
पुराना मामला: पूर्व में NULM के एक कर्मचारी और एक तथाकथित पत्रकार के खिलाफ गुमठी आवंटन में अनियमितता को लेकर बजरंग दल ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी। हालांकि, सत्ता परिवर्तन और नए आयुक्त की नियुक्ति के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
गहराता त्रिकोण: ताजा तथ्यों के अनुसार, विवादित गुमठी आवंटन मामले में उक्त कथित पत्रकार और बर्खास्त पीए गौतम साहू के बीच बेहद करीबी संबंधों की बात सामने आ रही है। यह जांच का विषय है कि कैसे इन लोगों ने मिलकर नियमों को ताक पर रखा।
दस्तावेजों की हेराफेरी: यह भी आरोप है कि इसी गुट ने पूर्व में दस्तावेजों की कथित हेराफेरी कर शासन से लाभ लेने की कोशिश की थी और इंदिरा मार्केट के व्यापारियों से अभद्र व्यवहार के मामले में इस पत्रकार को माफी तक मांगनी पड़ी थी।
आयुक्त के भरोसे पर बार-बार चोट
आयुक्त सुमित अग्रवाल की साफ-सुथरी कार्यप्रणाली के बीच कुछ लोग उनके नाम का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत प्रभाव जमाने का प्रयास कर रहे थे। पूर्व में भी एक कथित पत्रकार द्वारा आयुक्त के नाम का उपयोग कर विवादित मामलों में हस्तक्षेप की खबरें आई थीं। गौतम साहू की बर्खास्तगी ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रशासनिक विश्वास तोड़ने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष: क्या अब होगी निष्पक्ष जांच?
आयुक्त द्वारा लिए गए इस कठोर निर्णय की जनता सराहना कर रही है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल 'गुमठी घोटाले' को लेकर है। चर्चा है कि अब एक बार फिर इस घोटाले की फाइल खुल सकती है, जिससे कई प्रभावशाली चेहरों की मुश्किलें बढ़ना तय है।
शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
