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हालांकि इस संबंध में सेल प्रबंधन की ओर से अभी आधिकारिक सर्कुलर जारी नहीं किया गया है, लेकिन सामने आई जानकारी के अनुसार नई नीति में पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर अधिक व्यावहारिक और राहतकारी प्रावधान शामिल किए गए हैं।
नई नीति के तहत मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च तथा चैरिटेबल संस्थाओं के लीज नवीनीकरण और पंजीयन के लिए मात्र ₹1 टोकन राशि निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे वर्षों से लंबित मामलों में लाखों रुपये के संभावित वित्तीय बोझ से संस्थाओं को राहत मिलेगी।
प्रस्तावित नीति के अनुसार:
भिलाई स्टील सिटी चैंबर ऑफ कॉमर्स के अनुसार नई नीति लागू होने से पुरानी लंबित फाइलों पर वर्षों से जुड़ रहे भारी ब्याज का बोझ समाप्त होगा। इससे धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं को आर्थिक राहत मिलेगी और लंबे समय से अटके नवीनीकरण मामलों का रास्ता साफ होगा।
नई व्यवस्था के तहत लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए स्थानीय प्रबंधन को अधिकृत किया जाएगा। संबंधित संस्थाओं को आवश्यक भुगतान और औपचारिकताएं पूरी करने के लिए एक से दो वर्ष का समय दिए जाने की संभावना है। साथ ही नीति में उत्पन्न होने वाली व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति भी गठित की जाएगी।
भिलाई स्टील सिटी चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन को इस निर्णय की जानकारी मिलने के बाद मामला सांसद विजय बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय के संज्ञान में लाया गया। इसके बाद आयोजित प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने नई नीति के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी साझा की।
इंडियन कॉफी हाउस में आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने फैसले का स्वागत किया। चैंबर अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने सांसद विजय बघेल, प्रेम प्रकाश पांडेय, केंद्रीय इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी तथा सेल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय भिलाई की संस्थाओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
उन्होंने कहा कि नीति लगभग 50 प्रतिशत समस्याओं का समाधान करती है, जबकि शेष मुद्दों पर भी सुधार की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन से नीति के शीघ्र क्रियान्वयन की मांग की।
करीब 14 वर्षों से लंबित लीज नवीनीकरण का मुद्दा भिलाई की सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और व्यापारिक संस्थाओं के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ था। यदि नई नीति आधिकारिक रूप से लागू होती है तो न केवल संस्थाओं को राहत मिलेगी, बल्कि भिलाई इस्पात संयंत्र को भी वर्षों से रुका हुआ राजस्व प्राप्त हो सकेगा।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
