
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
22 लाख छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बचाने का दावा, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और संसद में जल्द नया विधेयक लाने का भरोसा
नई दिल्ली। देशभर में पेपर लीक के मुद्दे पर बढ़ते जनाक्रोश और छात्रों की चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी एक वीडियो संदेश में इसे "बेहद गंभीर और पीड़ादायक" बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार अब केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और नए सख्त कानून की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, "पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। इससे लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को गहरी पीड़ा होती है। उनकी मेहनत, सपने और भविष्य दांव पर लग जाते हैं।"
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई महीनों के दौरान जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पेपर लीक से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। सरकार का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा दिलाना ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा भी बहाल करना है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लगभग 22 लाख छात्रों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार ने कम समय में दोबारा परीक्षाएं आयोजित कराईं और 19 जुलाई को परिणाम घोषित किए, ताकि विद्यार्थियों का एक वर्ष बर्बाद न हो।
उन्होंने जानकारी दी कि संबंधित विभागों ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन तथा पेपर लीक के मामलों में कठोर सजा का प्रावधान करने वाले नए कानून का मसौदा तैयार कर लिया है। इस प्रस्ताव पर जल्द होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा कर अंतिम रूप दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि संसद के वर्तमान सत्र के दूसरे सप्ताह से इस संबंध में विधेयक लाने और उसे जल्द से जल्द पारित कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
देशभर में पेपर लीक के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग के बीच प्रधानमंत्री का यह संदेश सरकार की आगामी रणनीति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। अब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की निगाहें कैबिनेट के फैसले और संसद में आने वाले नए कानून पर टिकी हैं।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
