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10 दिन से ब्रेन डेड जैसी हालत में बच्चा; परिजनों ने लगाया अमानवीय व्यवहार का आरोप, जांच के लिए बनी टीम
दुर्ग। जिला अस्पताल के मदर-चाइल्ड यूनिट में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद नवजात की हालत बेहद गंभीर हो गई और उसके शरीर की हड्डियां टूटने की बात सामने आई। बीते 10 दिनों से बच्चा ब्रेन डेड जैसी स्थिति में बताया जा रहा है। इस घटना ने अस्पताल में प्रसव व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों के मुताबिक, 3.8 किलोग्राम के नवजात का जन्म कराने के दौरान लापरवाही बरती गई। बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वेंटिलेटर सहित अन्य जीवनरक्षक सुविधाओं के बीच उसका उपचार जारी है। परिवार ने प्रसव के दौरान अमानवीय व्यवहार किए जाने का आरोप भी लगाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने सिविल सर्जन डॉ. मनोज बनी से शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है। समाचार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, सिविल सर्जन ने दो सदस्यीय जांच टीम गठित की है। टीम में मदर-चाइल्ड यूनिट के चिकित्सकों को शामिल किए जाने की बात कही गई है।
जांच से सामने आएगा सच
यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रसव के दौरान बरती जाने वाली चिकित्सकीय सावधानियों और अस्पताल की जवाबदेही से भी जुड़ा है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रसव के दौरान निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं, नवजात को चोट कैसे लगी और समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराया गया या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल: यदि प्रसव के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदारों की पहचान कर कार्रवाई कब होगी? वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं हैं, तो निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए।
नवजात की जिंदगी और परिवार के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मामले में जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
