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छत्तीसगढ़ की पहली हॉकी लीग में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी के रूप में दर्ज कराई उपस्थिति, गोलकीपर की चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाकर चैंपियन टीम का बने हिस्सा — खेल के साथ पढ़ाई में भी अव्वल हैं दक्ष
बराजनांदगांव। प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, जरूरत होती है तो सिर्फ अवसर, समर्पण और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट जुनून की। इस कहावत को छत्तीसगढ़ की पहली हॉकी लीग के मैदान में राजनांदगांव के नन्हे खिलाड़ी दक्ष चौबे ने अपने खेल और जज्बे से चरितार्थ कर दिखाया। प्रदेश की इस ऐतिहासिक हॉकी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली छह टीमों के खिलाड़ियों के बीच दक्ष सबसे कम उम्र के खिलाड़ी रहे। लेकिन कम उम्र उनके आत्मविश्वास और खेल कौशल के आड़े नहीं आई। मैनपाट टाइटंस की ओर से गोलकीपर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने अपनी टीम के चैंपियन बनने के सफर में अहम योगदान दिया।
छत्तीसगढ़ खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा 21 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक आयोजित प्रथम छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में मैनपाट टाइटंस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा बने दक्ष चौबे ने गोलपोस्ट के सामने अपनी जिम्मेदारी निभाकर यह संदेश दिया कि हॉकी में जीत केवल गोल करने वाले खिलाड़ियों के दम पर नहीं मिलती, बल्कि गोलपोस्ट की रक्षा करने वाले खिलाड़ी का साहस, सतर्कता और निर्णय क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
गोलपोस्ट पर अकेला प्रहरी, लेकिन पूरी टीम की उम्मीदों का जिम्मेदार
हॉकी के मैदान में जहां 10 खिलाड़ी विपक्षी टीम के गोलपोस्ट तक पहुंचकर गोल करने की रणनीति बनाते हैं, वहीं गोलकीपर अपनी टीम के गोलपोस्ट की रक्षा करते हुए विरोधी टीम के हर आक्रमण को रोकने की चुनौती का सामना करता है। गोलकीपर की एकाग्रता, फुर्ती और सही समय पर लिया गया निर्णय पूरे मुकाबले का रुख बदल सकता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण दायित्व को दक्ष चौबे ने बेहद कम उम्र में आत्मविश्वास के साथ निभाया। विपक्षी खिलाड़ियों के आक्रामक हमलों के सामने गोलपोस्ट पर डटे रहना और अपनी टीम की उम्मीदों को जीवित रखना उनकी भूमिका को विशेष बनाता है। मैनपाट टाइटंस की खिताबी सफलता में दक्ष की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि टीम के प्रत्येक खिलाड़ी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और गोलकीपर टीम की जीत का एक मजबूत आधार होता है।
परिवार से मिली हॉकी की विरासत, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खिलाड़ियों से सीखी बारीकियां
दक्ष चौबे को हॉकी की प्रेरणा अपने परिवार से मिली है। उन्होंने छोटी उम्र से ही अपने बड़े पिताजी अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मृणाल चौबे के मार्गदर्शन में हॉकी खेलना प्रारंभ किया। शुरुआत से ही गोलकीपर बनने का जुनून रखने वाले दक्ष ने इसी दिशा में अपनी प्रतिभा को निखारने पर विशेष ध्यान दिया। उनके चाचा दीपेश चौबे भी राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी एवं गोल्ड मेडलिस्ट हैं, जो वर्तमान में पुणे कस्टम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। परिवार में मौजूद हॉकी के इस समृद्ध अनुभव ने दक्ष को खेल के प्रति प्रेरित किया और उन्हें गोलकीपिंग की बारीकियां सीखने का अवसर मिला।
वर्तमान में दक्ष रॉयल किड्स कॉन्वेंट, राजनांदगांव के छात्र हैं और खेलो इंडिया सेंटर, राजनांदगांव में हॉकी कोच शकील अहमद के मार्गदर्शन में नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि दक्ष केवल खेल के मैदान में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी अव्वल रहते हैं। खेल और शिक्षा के बीच बेहतर संतुलन बनाकर आगे बढ़ना उनकी प्रतिभा और अनुशासन को दर्शाता है।
लीग मुकाबलों से फाइनल तक मैनपाट टाइटंस का शानदार सफर
प्रथम छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में मैनपाट टाइटंस ने लीग चरण में दो मुकाबलों में जीत दर्ज की, दो मुकाबले बराबरी पर खेले और एक मुकाबले में हार का सामना किया। इसके बाद सेमीफाइनल में बैलाडीला बुल्स को 3-1 गोल से पराजित कर फाइनल में प्रवेश किया। खिताबी मुकाबले में टीम ने संस्कारधानी स्ट्राइकर्स को 4-2 गोल से हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
टीम के लीग मुकाबलों में बैलाडीला बुल्स के साथ 1-1 गोल की बराबरी, राजधानी रॉयल्स पर 5-2 की जीत, चक्रधर चैंपियंस के विरुद्ध 3-1 की जीत, न्यायधानी नाइट्स के साथ 1-1 की बराबरी तथा संस्कारधानी स्ट्राइकर्स के विरुद्ध 0-4 की हार शामिल रही। सेमीफाइनल और फाइनल में लगातार शानदार प्रदर्शन कर मैनपाट टाइटंस ने अपनी श्रेष्ठता साबित की।
यह उपलब्धि सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, भविष्य के बड़े खिलाड़ी की शुरुआत है
दक्ष चौबे की उपलब्धि को केवल एक विजेता टीम का हिस्सा बनने तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। प्रदेश की पहली हॉकी लीग में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी के रूप में उतरना और गोलकीपर जैसी जिम्मेदारीपूर्ण पोजीशन पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उनके लिए यह प्रतियोगिता अनुभव, आत्मविश्वास और भविष्य की बड़ी चुनौतियों के लिए तैयारी का महत्वपूर्ण अवसर बनी है।
दक्ष का यह सफर उन तमाम बच्चों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो कम उम्र में बड़े सपने देखते हैं, लेकिन अवसर और अनुभव की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं। दक्ष ने साबित किया कि मैदान में खिलाड़ी की पहचान उसकी उम्र से नहीं, बल्कि उसके साहस, मेहनत, अनुशासन और प्रदर्शन से होती है।
छत्तीसगढ़ की पहली हॉकी लीग जब भी याद की जाएगी, तब मैनपाट टाइटंस की ऐतिहासिक जीत के साथ इस प्रतियोगिता के सबसे कम उम्र के गोलकीपर दक्ष चौबे का जिक्र भी विशेष रूप से होगा। गोलपोस्ट पर खड़े इस नन्हे प्रहरी ने अपने खेल से यह संदेश दिया कि जीत का सपना देखने के लिए उम्र बड़ी होना जरूरी नहीं, बल्कि उस सपने की जिम्मेदारी उठाने का हौसला होना जरूरी है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
