August 02, 2026
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    मुख्यमंत्र बघेल ने फिर शुरू करवाई एक पुरानी परंपरा रोकाछेका के माध्यम से फसल को बचाने की हो रही है पहल, कलेक्टर ने इस दिन विशेष ग्राम सभा के लिए निर्देश

    • rounak group

    दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढी संस्कृति में हर अनुष्ठान और परंपरा का उत्सवधर्मी पक्ष तो है ही, इससे भी बढकर यह अर्थतंत्र को सहेजने और बढाने के लिए प्रेरित है। ऐसे ही सबसे महत्वपूर्ण परंपरा जो ग्रामीण क्षेत्र में मनाई जाती थी, वो रोकाछेका की परंपरा है। खरीफ फसल लगाने से पूर्व सभी गौपालकों की बैठक गांव में ली जाती थी, उन्हें शपथ दिलाई जाती थी कि अपने मवेशी न छोडे, अपने गौठान में ही रखें ताकि फसल सुरक्षित रखे। यह सुंदर परंपरा धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही थी। इस परंपरा के गहरे महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजें जिससे हमारे लिए आर्थिक समृद्धि का भी रास्ता खुल सके।
    इस संबंध में मुख्यमंत्री की मंशानुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में रोकाछेका की परंपरा को सहेजने एवं इसे आगे बढाने सभी सरपंचों को कहा गया है। कलेक्टर ने इस संबंध में रोकाछेका की परंपरा का जिक्र करते हुए लिखा है कि नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाडी योजना के अंतर्गत हम लोगों ने पशुधन संवर्धन के लिए गौठान बनाये हैं। चारागाह बनाये हैं। इसका उद्देश्य यह है कि मवेशी फसल खराब न करें। इस तरह सामूहिक गौठान के माध्यम से हमने ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा सिस्टम विकसित कर लिया है ताकि मवेशियों को एक ही जगह पर रखा जा सके, उनके चारे की व्यवस्था की जा सके और पशुधन संवर्धन भी हो सके। रोकाछेका इस प्रयास को दृर करने का एक अवसर हमें प्रदान करता है। कलेक्टर ने कहा कि रोकाछेका रस्म के माध्यम से सभी ग्रामीणों से शपथ दिलाएं कि वे अपने मवेशी गौठान में रखेंगे। रोकाछेका के माध्यम से अतीत में फसल की रक्षा मवेशियों से की जाती थी।
    कलेक्टर का पत्र मिलने के पश्चात सभी सरपंचों ने 19 जून को आयोजित होने वाले रोकाछेका कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी हैं। ग्राम पतोरा की सरपंच श्रीमती अजिता साहू ने बताया कि रोकाछेका को बढावा देना बहुत अच्छा कार्य है। अगर हम ध्यान नहीं देंगे तो इस तरह की परंपराएं समाप्त हो जाएंगी और फसलों की सामूहिक सुरक्षा के लिए बनाया गया तंत्र भी खत्म हो जाएगा। अब एक बार सबके सामने शपथ लेने के बाद कोई भी अपने मवेशी को नहीं छोड़ पायेगा।
    इसलिए दिया जा रहा है इसे बढावा
    अगर एनजीजीबी योजना का सार देखें तो यह पशुधन संवर्धन और इसके माध्यम से कृषि के विकास से जुड़ा है। गौठानों में पशुओं को रखकर उनका संवर्धन तो कर ही पाते हैं इससे खडी फसल की रक्षा भी होती है। अगर रोकाछेका की बात करें तो यह एनजीजीबी के विचार को आगे बढाने का सबसे प्रमुख जरिया है। पशुधन को गौठान में सहेज लें, तो वो खडी फसल को नष्ट नहीं करेगा। पशुधन के लिए यदि चारागाह में चारा मिल जाए तो वो खडी फसल की ओर नहीं जाएगा। रोकाछेका में जो सामूहिक शपथ ली जाती है उससे सामुदायिक भावना भी दृर होती है और गांव के लोग मिलकर यह निर्णय करते हैं कि हमारे लिए फसल की सुरक्षा सबसे अहम है।

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