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भिलाई / शौर्यपथ / आचार्य नरेंद्र देव स्मृति जन अधिकार अभियान समिति रूआबांधा भिलाई ने एचएससीएल भिलाई के वर्तमान जनरल मैनेजर एसके सिन्हा पर भिलाई स्टील प्लांट के टेंडर में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया है। समिति के संयोजक आर पी शर्मा ने इस संबंध में पीके गुप्ता अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड नई दिल्ली और राजेंद्र चौधरी प्रबंध निदेशक एचएससीएल को विस्तृत पत्र लिखकर शिकायत की है और दोनों टेंडर की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आर पी शर्मा ने अपने पत्र में कहा है कि एनबीसीसी इंडिया लिमिटेड में विलय के बाद ऐसा लगा कि एचएससीएल का भविष्य उज्ज्वल होने वाला है, जिसमें कंपनी के ठेका मजदूर का भला हो सकता है। लेकिन यहां के मौजूदा मैनेजमेंट की कारगुजारियों से ऐसा प्रतीत होता ही नहीं है। यहां पदस्थ जनरल मैनेजर एसके सिन्हा अपने चाहने वाले लोगों का आर्थिक हित येनकेन प्रकारेण साधने में लगे हैं।
ऐसे ही दो मामले हैं, जिन पर एनबीसीसी मैनेजमेंट को तत्काल संज्ञान लेने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र की यूनिवर्सल रेल मिल से जुड़ा टेंडर (एनआईटी नंबर 873) जानबूझ कर एचएससीएल ने अपने चहेते ठेकेदार के लिए न सिर्फ छोड़ा बल्कि गंभीर मामला यह है कि इसके लिए एचएससीएल के लेटरहेड, जीएम के सील व साइन को भी कथित तौर पर बेच दिया है। टेंडर छोडऩे की इस प्रवृत्ति से साफ जाहिर होता है कि भिलाई स्टील प्लांट के ठेका माफियाओं के साथ मिल कर यह आर्थिक हित साधने यह कृत्य किया गया है। इसमें कितना आर्थिक लेनदेन हुआ है, यह जांच का विषय है।
इसी तरह भिलाई स्टील प्लांट की रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल से जुड़ा टेंडर (एनआईटी नंबर-745) टेंडर एचएससीएल ने लिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस टेंडर में भी आर्थिक उपार्जन के लिए अपने ठेकेदार को ठेका दिलाने जीएम व्याकुल है। जबकि बीएसपी टेंडर लेने के बाद एचएससीएल को ओपन टेंडर करना है। उन्होंने कहा कि एचएससीएल में रजिस्टर्ड कांट्रेक्टर हैं, तो इनको ओपन टेंडर करना चाहिए लेकिन यहां भी अपने मनमाफिक चहेते ठेकेदार को देने की योजना बनाई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो यह गंभीर रूप से भ्रष्टाचार की श्रेणी में आएगा।
आर पी शर्मा ने अपने पत्र में कहा है कि मौजूदा मैनेजमेंट को एचएससीएल और इस कंपनी में काम करने वाले लोगों की परवाह नहीं है, वो अपना आर्थिक उपार्जन करने की फिराक में लगे हुए हैं। उन्होंने मांग की है कि रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल का टेंडर ओपन पद्धति से किया जाए और यूनिवर्सल रेल मिल का जो टेंडर छोड़ा गया है, उसे किस ठेकेदार को दिया गया है उसकी पूरी जांच हो। यह इसलिए आवश्यक है क्योंकि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टालरेंस की बात करते हैं और उनके अधीन यह सारी अनियमितताएं हो रही है। इसलिए इस पर एनबीसीसी मैनेजमेंट को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
