August 03, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

    • rounak group

    नजरिया /शौर्यपथ / इस साल दसवीं में बागपत की रिया जैन ने दसवीं की बोर्ड परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया है। रिया ने 96.67 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। बागपत की रहने वाली रिया श्रीराम एस एम इंटर कॉलेज की छात्रा है। इस परीक्षा में आठ लाख से अधिक विद्यार्थी बैठे थे। रिया के पिता भारत भूषण की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वह पटरी पर चुन्नियां बेचने का काम करते हैं। घर का गुजारा मुश्किल से चलता है। रिया की फीस देने को भी पैसे नहीं थे। तब स्कूल मैनेजमेंट ने रिया की फीस चुकाई। पिता अपनी बच्ची की सफलता से बहुत खुश हैं। उन्हें शहर के बड़े-बड़े अधिकारी फोन करके बधाई दे रहे हैं। वह कहते हैं कि उनकी बेटी के कारण ही यह सब हो सका। रिया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मेहनत से बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। पैसे की तंगी भी उसमें बाधा नहीं बनती। अगर कोई बाधा है, तो मदद के हाथ भी उठते हैं। जैसे, उसकी परेशानी जानकर स्कूल प्रबंधन आगे आया। रिया ने बताया कि वह हर रोज चौदह-पंद्रह घंटे पढ़ाई करती थी। मुश्किलों का हल उसने परिश्रम में ढूंढ़ा। परेशानी से हार न मानने का उसका फैसला अनुकरणीय है।
    दूसरे स्थान पर बाराबंकी के अभिमन्यु वर्मा रहे, उन्हें 95.83 प्रतिशत अंक मिले। तीसरा स्थान भी बाराबंकी के योगेश प्रताप सिंह को मिला। छोटे शहरों के इन बच्चों की कहानियां अभूतपूर्व हैं। ऐसी ही एक बच्ची के पिता मजदूर हैं। लॉकडाउन के दौरान उनका काम भी छूट गया था, मगर उसने भी बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए हैं।
    बच्चे आफत में भी सफलता हासिल कर सकते हैं। गरीबी उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोक पाती। इससे मध्यवर्ग के उन माता-पिता को जरूर सबक लेना चाहिए, जिन्हें लगता है कि जब तक बच्चे किसी नामी-गिरामी स्कूल में नहीं पढ़ेंगे, तब तक वे कुछ कर ही नहीं सकते। इसके लिए उनकी गुंजाइश हो न हो, वे बड़े-बड़े स्कूलों की तरफ भागते हैं। कर्ज भी लेना पड़े, तो बच्चों की ऊंची फीस भरते हैं। दिल्ली में यह मारामारी बहुत दिखाई देती है। आज के दिन में, जब बहुत से लोगों की नौकरियां चली गई हैं, वे बातचीत में पहली चिंता यही प्रकट करते हैं कि अब बच्चों की हजारों की फीस और ऊपरी खर्चे कहां से देंगे? बच्चे को किसी सरकारी स्कूल में भेजना नहीं चाहते। समाज और जान-पहचान वालों में हंसी उड़ेगी, सो अलग। इसके अलावा माता-पिता सोचते हैं कि जिन कठिनाइयों का सामना उन्होंने अपने बचपन में किया था, वे अपने बच्चों को उनसे बचाएं। इसीलिए वे बच्चे की हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं, जबकि अनेक विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को मुश्किलों का सामना करना सिखाना चाहिए, क्योंकि माता-पिता उनकी मदद करने के लिए हमेशा नहीं रहेंगे। इस दुनिया का सामना उन्हें अपने दम पर ही करना होगा। यह भी कहा जाता है कि जिन बच्चों ने कभी कठिनाइयां नहीं देखीं, यदि उनके सामने अचानक मुश्किलें आएं, तो वे उनका सामना नहीं कर पाते हैं। वे उनसे दूर भागते हैं। कई बार अवसाद का शिकार हो जाते हैं। और आत्महत्या जैसे घातक कदम भी उठा लेते हैं।
    रिया जैन के बारे में जानकर अपने पुराने नेता याद आते हैं। कितनों की कहानियां हमने पढ़ी हैं। गांधीजी अपनी पुस्तक सत्य के प्रयोग में अनेक परेशानियों का जिक्र करते हैं, पर कभी घुटने नहीं टेकते हैं। परेशानियों का सामना करने का हौसला उनमें हमेशा दिखाई देता है। किसी भी बड़ी हस्ती को बनाने में चुनौतियों का बड़ा हाथ होता है। इसी तरह से भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण है। बताया जाता है कि नदी पार करके उन्हें स्कूल जाना पड़ता था। वह तैरकर नदी पार करते थे। जाहिर है, मल्लाह को देने के लिए पैसे नहीं रहे होंगे। जब वह प्रधानमंत्री बने, तब भी उनके पास बहुत मामूली कपड़े थे। उन्हें फटे कपड़े पहनने से भी परहेज नहीं था। उन्होंने पद के कारण अपने रहन-सहन और सादगी से कोई समझौता नहीं किया। इस तरह की कथाओं से हमारा इतिहास भरा पड़ा है। सादगी एक बड़ा जीवन मूल्य है। पंक्ति के अंतिम आदमी की चिंता ने भी इसे हमेशा बनाए रखा है। अपने बड़े नेताओं के संघर्ष और उनकी सफलता से भी तो बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
    सोहनलाल द्विवेदी की मशहूर पंक्तियां हैं, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
    (ये लेखिका के अपने विचार हैं)क्षमा शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार

     

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision