July 26, 2026
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    लॉक-डाउन में आर्थिक मंदी की चाबी बनी मनरेगा से हुए आजीविका संवर्धन के कार्य

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      रायपुर / शौर्यपथ /  कोरोना महामारी के चलते देशव्यापी लॉक-डाउन के कारण जहाँ एक तरफ आर्थिक गतिविधियाँ ठप्प हैं, वहीं बीजापुर के गाँवों में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) से बनी हितग्राहीमूलक परिसम्पत्तियाँ कुएँ, डबरी, निजी तालाब, पशु शेड और कम्पोस्ट पिट ग्रामीणों की आजीविका उपार्जन का महत्वपूर्ण जरिया बने हुए हैं। लॉक-डाउन के इस कठिन दौर में भी उनकी कमाई अप्रभावित है और वे निर्बाध रूप से जीविकोपार्जन कर रहे हैं।

      बीजापुर जिले में मनरेगा के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल 1067 हितग्राहीमूलक कार्य स्वीकृत किये गये थे। इनमें से 588 कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं और 479 प्रगतिरत हैं। पूर्ण हुए हितग्राहीमूलक कार्यों में सबसे अधिक कार्य डबरी (खेत तालाब) निर्माण के हैं, जिनकी संख्या 551 हैं। इनके अलावा कुएँ के नौ, फलदार पौधरोपण के तीन, अजोला टैंक, गाय शेड और बकरी शेड के दो-दो तथा मुर्गी शेड के 19 कार्य पूर्ण हुए हैं। इन कार्यों के पूर्ण होने से निर्मित परिसम्पत्तियों से हितग्राहियों को मिल रही राहत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लॉक-डाउन में जहाँ एक ओर सभी कार्य ठप्प हैं, वहीं दूसरी ओर मनरेगा हितग्राही इनसे नियमित आय प्राप्त कर रहे हैं। वे निर्बाध रूप से अपनी आजीविका संचालित कर रहे हैं। मनरेगा के अंतर्गत बनी हितग्राहीमूलक परिसम्पत्तियाँ आर्थिक तालाबंदी की चाबी बन गई हैं।

       बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम विकासखण्ड के मिनकापल्ली पंचायत के श्री गडडेम बोरैया के खेत में मनरेगा से निर्मित कुएं से अब साल भर सिंचाई हो रही है। वे अभी अपने खेतों में सब्जियां उगा रहे हैं। खेत में लगे भिंडी, बैगन, लौकी, टमाटर और मिर्ची वे आसपास के गांवों में बेचते हैं और रोज 300-400 रूपए कमा रहे हैं। बीजापुर विकासखंड के ग्राम बोरजे के श्री नारायण रमेश भी मनेरगा के तहत निर्मित कुएं की बदौलत गर्मियों में सब्जियों की खेती कर रहे हैं। सब्जी बेचकर लाक-डाउन के मौजूदा दौर में भी वे हर दिन 200 रूपए कमा रहे हैं।
           मनरेगा के अंतर्गत पिछले साल हुए आजीविका संवर्धन के कार्यों के साथ ही वर्तमान में संचालित मनरेगा कार्य भी लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं। उसूर विकासखण्ड के हीरापुर ग्राम पंचायत के आश्रित गाँव पुसकोंटा के श्री मडकम गनपत अभी गांव में खोदे जा रहे नवीन तालाब में काम करने जाते हैं। वहां उन्हें अभी तक 11 दिनों का रोजगार मिल चुका है। वे कहते हैं कि यह काम हमें बहुत जरूरत के वक्त मिला है। लॉक-डाउन के कारण अभी दूसरी जगह काम पर जाना मुश्किल है। मनरेगा के तहत भैरमगढ़ विकासखंड के ग्राम हितुलवाडा की श्रीमती कुसुमलता वट्टी की निजी भूमि पर डबरी की खुदाई चल रही है। वे बताती हैं कि इस कार्य में उन्हें 30 दिनों का रोजगार मिल चुका है। उन्हें अभी हाल ही में पुराने काम की मजदूरी के रूप में 5280 रुपये भी मिले हैं। डबरी का काम पूरा हो जाने के बाद वह इसमें मछली पालन करना चाहती है।

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