July 27, 2026
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    अच्छी आदतें अच्छे मन से डालें तो डल जाएंगी, जानें ख़ुद को हर दिन प्रेरित कैसे रखें

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    सकारात्मक आदतें /शौर्यपथ/ 

    दिनचर्या में जितने अधिक काम आदतों के रूप में होंगे, ज़िंदगी उतनी ही सुचारु, व्यवस्थित और सेहत भरी होगी।

    इस सच को हम सब जानते हैं, इसलिए अच्छी आदतें बनाने की कोशिश भी करते हैं।

    दिक़्क़त यह होती है कि अच्छी आदत जल्दी पड़ती नहीं है। रोज़-रोज़ वही काम करके मन ऊब जाता है।

    घड़ी में सुबह के दस बजे हैं। इतने में बेटी अपनी मां से कहती है कि वह परिसर में स्थित पार्क में 15 मिनट टहलकर आए। मां आनाकानी करती है, बताती है कि अभी रोज़मर्रा के बहुत से काम बाक़ी हैं। दो घड़ी दम लेने की भी फ़ुरसत नहीं है। कल चली जाऊंगी। बेटी कुछ सुनना नहीं चाहती। वह ज़िद पकड़ लेती है। ‘तुम्हें जाना ही होगा, यही नियम है। भले ही पांच मिनट के लिए जाओ, लेकिन जाओ!’ अंतत: मां को सारे काम छोड़कर टहलने जाना ही पड़ता है।

    किसी भी घर की अत्यंत साधारण लगने वाली इस घटना में एक महत्वपूर्ण सूत्र छिपा है : कोई भी नई गतिविधि शुरू करने और उसे अपनी आदत बनाने के लिए किसी साथी या रिमाइंडर की मदद लेना उपयोगी होता है।

    महिलाओं के जि़म्मे बहुत सारे काम होते हैं, इसलिए उन्हें रुटीन में ख़ुद के लिए कोई गतिविधि जोड़ना मुश्किल लगता है। यदि वे कुछ नया शुरू करना भी चाहती हैं- सैर, वर्जिश, शौक़ या कुछ सीखना- तो नियमितता क़ायम नहीं रख पातीं और उसे बीच में ही छोड़ देती हैं। लेकिन अपनी सेहत के लिए, अपनी ख़ुशी के लिए और संतुष्टि व रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जीवन में कुछ नया, कुछ अच्छा जुड़ते रहना चाहिए।

    हम ऐसी कोशिश करते भी हैं, किंतु कुछ समय बाद ही सबकुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है। दैनंदिनी में कोई नई गतिविधि जुड़े और जुड़कर आदत में बदल जाए, इसके लिए पहले कुछ बातें जान लेना ज़रूरी है।

    शुरुआत छोटी...

    ब्लॉगर लिओ बबूटा कहते हैं— ‘इसे इतना आसान बनाइए कि आप न कह ही न सकें!’ नई गतिविधि या कार्य को छोटा रखिए। आधे घंटे की सैर के बजाय आरंभ में दस मिनट तय कीजिए। रोज़ दस पन्ने लिखने की जगह एक पैराग्राफ़ का लक्ष्य बनाइए। पूरे खानपान को बदल डालने के बजाय सुबह स्वास्थ्यवर्धक नाश्ते का नियम बनाइए। हमेशा ध्यान रहे कि आपको संख्या या मात्रा नहीं, उस काम की आदत डालनी है।

    कभी कोई अतिरिक्त ज़िम्मेदारी आ जाएगी, कभी स्वास्थ्य ठीक नहीं लगेगा, कभी मूड। लेकिन जब लक्ष्य छोटा होगा, कम समय में पूरा हो जाने वाला होगा तो आप ख़ुद से कोई बहाना नहीं बना पाएंगी। कभी सफ़र में होंगी तो पांच पन्ने लिखना मुश्किल होगा, पर पांच-दस लाइनें तो चलती गाड़ी में भी लिख लेंगी। पार्क न मिले तो दस मिनट फुटपाथ पर ही टहल लेंगी।

    — आपका फोकस काम शुरू करने पर रहे, न कि ख़त्म करने पर।

    रफ़्तार धीमी...

    आरंभ में काफ़ी उत्साह रहता है, हम जल्दी-जल्दी छलांगें लगाना चाहते हैं। गतिविधि नई होती है तो मन भी लगता है। हालांकि समय के साथ उत्साह कम होने लगता है और एकरसता भी आने लगती है। कोई आश्चर्य नहीं कि इस वक़्त नई गतिविधि छूट जाती है। इससे बचने के लिए आवश्यक है कि संख्या, समय या मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जाए। आख़िरकार आप पूरी ज़िंदगी के लिए आदत बना रही हैं, इसलिए हड़बड़ाहट की ज़रूरत ही नहीं है।

    अगर संभव हो तो उस काम को कई हिस्सों में करें। मसलन, सैर का समय 15 से बढ़ाकर 30 मिनट करना है तो सुबह ही आधा घंटा निकालने के बजाय सुबह और शाम 15-15 मिनट टहलने जाएं। इससे बाक़ी काम प्रभावित नहीं होंगे।

    — निरंतरता और धैर्य से चमत्कारिक परिवर्तन होते हैं।

    बदलाव..

    आपके जीवन में तब तक अनुशासन नहीं आ पाएगा, जब तक आप स्वयं को लापरवाह मानती रहेंगी। आप जब तक मानती रहेंगी कि मेरा तो खाने पर कंट्रोल नहीं है, तब तक वज़न कम नहीं कर पाएंगी। निश्चित है कि शुरुआती सफलता के बाद सबकुछ फिर पहले जैसा हो जाएगा। विशेषज्ञ कहते हैं कि अक्सर यह आदत बदलने के बजाय व्यक्तित्व और सोच बदलने का मामला होता है।

    इसलिए पहले अपने मन में अपनी छवि बदलें। फिर क़रीबी लोगों की सकारात्मक टिप्पणियों पर ग़ौर करें। पड़ोसन कहे कि आजकल आप नियमित रूप से सैर के लिए आती हैं तो इसे तारीफ़ के रूप में लें। यह न कहें कि देखें, ऐसा कब तक चल पाता है! छोटी-छोटी जीत से स्वयं का आत्मविश्वास बढ़ने दें।

    — आप फल-सब्ज़ियां ज़्यादा खाने की आदत नहीं बनातीं, दरअसल आप सेहत के प्रति जागरूक व्यक्ति बनती हैं।

    अच्छी होती हैं...बाधाएं...

    जर्नल ऑफ़ एप्लाइड बिहेवियर एनालिसिस में एक दिलचस्प रिसर्च प्रकाशित हुई। एक प्रयोग के तहत शोधकर्ताओं ने लिफ्ट का दरवाज़ा बंद होने में लगने वाला समय 10 सेकंड से बढ़ाकर 30 सेकंड कर दिया। इससे बहुतों को लगा कि इतने इंतज़ार से बेहतर है सीढ़ियां ही चढ़ ली जाएं। ख़ास बात यह कि दरवाज़ा बंद होने का समय पूर्ववत हो जाने के बाद भी वे सीढ़ियों का प्रयोग करते रहे। इस अवलोकन से सूत्र मिलता है कि बुरी आदत छोड़ने के लिए उस तक पहुंचना थोड़ा मुश्किल बना दिया जाए। उदाहरण के लिए, अगर आप सोशल मीडिया का समय कम करना चाहती हैं तो बस एक काम करें। मोबाइल में सोशल मीडिया ऐप्स डिलीट कर दें और हर बार वेबसाइट पर पासवर्ड डालकर लॉग-इन करें। कुछ दिनों में फ़र्क़ महसूस हो जाएगा। जब सोशल मीडिया से वक़्त बचेगा तो वह किसी रचनात्मक कार्य में ही लगेगा।

    टूटने न पाए लय...

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि सुबह ऊर्जा सर्वाधिक रहती है, अत: नए कार्य को सुबह के रुटीन में जोड़ें। बाद में दिन के अन्य वक़्त में उसे बढ़ा सकती हैं।
    परिवेश में कुछ ऐसा हो जाे आपको काम की याद दिलाए। यह अलार्म हो सकता है या मंदिर में आरती के दौरान बजने वाली घंटी भी। शुरुआत के उदाहरण में बेटी है जो अपनी मां को सैर के लिए याद दिलाती है।
    नए काम को किसी वर्तमान काम या गतिविधि से जोड़ लें। जैसे- अख़बार पढ़ने के साथ अंकुरित अन्न खाना या चाय पीते हुए कामों की सूची (टू डू लिस्ट) बनाना।
    कभी-कभार की छुट्‌टी चलती है, लेकिन कोशिश करें कि नई आदत में लगातार दो दिन का गैप न हो। अंतराल जितना अधिक होगा, आपके लिए फिर से शुरू करना उतना ही मुश्किल होता जाएगा।
    गतिविधि के साथ पुरस्कार जोड़ें। मसलन, सैर के बाद पसंदीदा नाश्ता लें, कुछ लिखने-पढ़ने के बाद एक सीरियल देख लें या काॅफी पिएं।
    नई आदतें बनाने के लिए कभी भी एक से ज़्यादा काम एक साथ शुरू न करें। एक बार में एक आदत।

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