August 03, 2026
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    स्तनपान मौलिक अधिकार और सर्वोत्तम आहार है शिशु के लिए

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    रायपुर / शौर्यपथ / प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अगस्त माह का प्रथम सप्ताह विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है। यह सर्वविदित है कि शिशु के लिए स्तनपान सर्वोत्तम आहार तथा शिशु का मौलिक अधिकार है।
    विश्व स्तनपान सप्ताह 2020 विश्व स्तनपान सप्ताह विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी 1 से 7 अगस्त 2020 के बीच मनाया जाएगा । इस वर्ष का स्तनपान सप्ताह का थीम “सपोर्ट ब्रेस्टफीडिंग फॉर ए हेल्थीअर प्लानेट” है जो इस बात पर जोर देती है कि स्वस्थ और सेहतमंद विश्व के लिए स्तनपान का समर्थन करना बहुत जरूरी है ।
    मां का दूध शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए महत्त्वपूर्ण है । माँ का दूध जिसे पहला टीका भी कहा जाता है और यह खुद में पूर्ण आहार है छः माह तक यह शिशु को डायरिया, निमोनिया और कुपोषण से बचाने और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। समस्त गतिविधियों का संचालन शासन द्वारा निर्धारित कोविड-19 के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए मनाया जाएगा जैसे साबुन से बार बार हाथ धोना, मास्क का उपयोग,और दूरी बनाए रखना।
    राज्य बाल रोग एवं टीकाकरण अधिकारी डॉ.अमर सिंह ठाकुर ने बताया शिशु के लिए स्तनपान मौलिक अधिकार तथा सर्वोत्तम आहार है । जिन शिशुओं को 1 घंटे के अंदर स्तनपान नहीं कराया जाता उन में नवजात मृत्यु दर की संभावनाएं 33% बढ़ जाती है। छः माह तककी आयु तक शिशु को केवल स्तनपान कराने पर आम रोग जैसे दस्त एवं निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11% एवं 15% कमी लाई जा सकती है । अधिक समय तक स्तनपान करने वाले बच्चों की मानसिक और शारीरिक वृद्धि उन बच्चों की अपेक्षा अधिक होती है जिन्हें मां का दूध थोड़े समय के लिए प्राप्त होता है ।
    स्तनपान स्तन कैंसर से होने वाली मृत्यु को भी कम करता है । विभिन्न शोधों से यह स्पष्ट हो चुका है कि स्तनपान से न केवल शिशुओं और माताओं को बल्कि समाज और देश को भी कई प्रकार के लाभ होते हैं । स्तनपान की महत्वता तथा शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी के लिए उनके प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए आवश्यक है कि जन्म के 1 घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान प्रारंभ कराया जाए और 6 माह तक केवल स्तनपान कराया जाए । शिशु के 6 माह पूरे होने पर संपूरक आहार देना प्रारंभ किया जाए और शिशु के 2 वर्ष पूरे होने तक स्तनपान जारी रखा जाए इसलिए स्तनपान कराने में माताओं का सहयोग एवं स्तनपान को बढ़ावा दिया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण गतिविधि में से एक है ।
    भारत सरकार द्वारा वर्ष 2016 में स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए (MAA--- Mother’s Absolute Affection) यानि मां कार्यक्रम की शुरुआत की थी । डॉ. ठाकुर ने कहा ‘’मां’’ कार्यक्रम के अंतर्गत सभी चिकित्सा इकाइयों को बेबी फ्रेंडली बनाने की आवश्यकता है सफल स्तनपान के साथ प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी नियमित रूप से मां और समुदाय के साथ संपर्क में रहे जिसे गर्भवती महिला और जन्म के समय से 2 साल तक के बच्चों को नियमित रूप से सहयोग मिलता रहे। चिकित्सा स्वास्थ्य केंद्र में होने वाले प्रसव में चिकित्सक स्टाफ नर्स एलएचवी और एएनएम सभी को स्तनपान के लिए परामर्श दें । आवश्यकता हो वहां मां की सहायता भी करें । ध्यान रखें कि किसी भी अवस्था में व्यवसायिक एक शिशु आहार को बढ़ावा ना दें । एक लिखित स्तनपान नीति की उपलब्धता सुनिश्चित करें ।
    इस नीति को लागू करने के लिए सभी स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों का आवश्यक क्षमता वर्धन स्वास्थ्य कर्मी द्वारा सभी गर्भवती महिलाओं को स्तनपान के लाभ और प्रबंधन के बारे में सूचना प्रदान की जायेगी और स्वास्थ्य कर्मी द्वारा माताओं को जन्म के घंटे के भीतर स्तनपान कराने में मदद करते हैं।
    छत्तीसगढ़ में 1 घंटे के अंदर स्तनपान की दर मात्र 47.1% है (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 4) जिसको चिकित्सक, स्वास्थयकर्मी और समुदाय स्तर पर स्तनपान के व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए अत्याधिक प्रयास करने किये जा रहे है ।

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