July 27, 2026
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    फास्टफूड रेस्तरां में दोस्तों के साथ मस्ती करना फायदेमंद, अच्छी सेहत के लिए जानें क्या करने से बचें

    • rounak group

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / एक कहावत सुनी होगी कि मिल-बांटकर खाने से प्यार बढ़ता है। यह बात सच है। वैज्ञानिकों की मानें तो मिलजुलकर खाने से सिर्फ प्यार ही नहीं बढ़ता, बल्कि खुशियां भी बढ़ती हैं और तनाव घटता है। और अगर खाने की टेबल पर साथ देने वाली दोस्तों की टोली है तब तो कहने ही क्या।

    खासतौर से बढ़ती उम्र में दोस्तों के साथ फास्टफूड रेस्तरां में वक्त बिताने के ढेरों फायदे हैं। एक हालिया अध्ययन कुछ यही इशारा करता है। अध्ययन करने वाले मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का दावा है कि समय-समय पर फास्टफूड रेस्तरां में जाने से तनाव संबंधी हार्मोन का स्त्राव घटता है और फील गुड हार्मोन का उत्पादन बढ़ता है। इससे ढलती उम्र में याददाश्त-तर्क शक्ति में कमी की समस्या नहीं होती।

    125 लोगों पर हुआ अध्ययन-
    शोधकर्ताओं ने मध्यम आयु वर्ग से लेकर बुजुर्ग वयस्कों समेत 125 लोगों का अध्ययन किया और उनके साथ उनके स्थानीय भोजनालय गए। अध्ययन में पाया कि बुजुर्ग वयस्कों के लिए इन जगहों पर मिलने से उनका सामाजिक दायरा बढ़ता है। अध्ययन के मुताबिक फास्टफूड रेस्तरां में मिलने-जुलने से बुजुर्ग लोगों के मस्तिष्क को कई फायदे हैं।

    पिछले कई अध्ययन भी यह साबित कर चुके हैं कि सामाजिक मेल-मिलाप बुजुर्गों में सांज्ञानात्मक विकार से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मगर नए अध्ययन के मुताबिक फास्टफूड कॉर्नर और रेस्तरां आदि जगहों पर बुजुर्गों के उठने-बैठने से उनमें संबंधी मस्तिष्क रोग, डिमेंशिया, सांज्ञानात्क विकार आदि से बचाव होगा। अध्ययन में पाया गया कि रिटेल फूड प्रतिष्ठानों वाले क्षेत्र में रहने वाले प्रतिभागियों का संज्ञानात्मक स्कोर उन लोगों के मुकाबले अधिक था, जो कम फूड रिटेल प्रतिष्ठानों वाले इलाके में रहते हैं।

    फास्टफूड का सेवन नुकसानदेह-
    हालांकि, शोधकर्ताओं ने आगाह किया कि बुजुर्गावस्था में फास्टफूड रेस्तरां में बैठना जितना लाभकारी है, वहां फास्टफूड का सेवन करना उतना ही घातक है। फास्ट फूड जैसे कि चीजबर्गर फ्रेंच फ्राईज आदि खाने से संज्ञानात्मक गिरावट में इजाफा ही होगा। इसलिए वहां जाकर बैठना सही है, लेकिन वहां फास्टफूड का सेवन न करने की सलाह भी वैज्ञानिकों ने दी है।

    प्रमुख शोधकर्ता डॉ जेसिका फिनले के मुताबिक पारंपरिक तौर पर फास्ट फूड का संज्ञानात्मकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। फैट कैलेस्ट्रॉल मस्तिष्क विकारों में इजाफा करते हैं। यह अध्ययन सिर्फ यह दर्शाता है कि फास्टफूड प्रतिष्ठान बुजुर्गों के लिए बैठने की अच्छी जगह साबित हो सकते हैं, जहां वह अपने दोस्तों के साथ वक्त बिताएं। लेकिन वहां फास्टफूड का सेवन न करें।

     

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