August 08, 2026
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    डॉक्टर से बिना पूछे ले लेते हैं कोई भी दवा, तो अब इसके साइड इफेक्ट्स भी जान लें

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    सेहत /शौर्यपथ /सिर दर्द, बदन दर्द जैसी परेशानियों से निजात पाने के लिए अगर आप भी बिना डॉक्टर को दिखाए कोई भी पेन किलर ले लेते हैं तो सतर्क हो जाएं। ऐसा करना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। क्या आप जानते हैं डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी दवाई का सेवन करने की आदत गंभीर रोगों को जन्म दे सकती है। आइए जानते हैं किस दवा का सेवन करने से शरीर को होता है क्या नुकसान।
    क्यों पड़ती है पेन किलर की जरूरत-
    -जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए
    -किसी दुर्घटना में लगी चोट के दर्द को कम करने के लिए
    -जलने या कटनी की अवस्था में
    डॉक्टर से बिना सलाह लिए पेन किलर खाने से होते हैं ये साइड इफेक्ट-
    पेन किलर दवाओं में एडिक्टिव तत्व पाए जाते हैं। लंबे समय तक इन दवाओं का सेवन करने पर शरीर को इनकी आदत हो जाती है। इसके अलावा यह दवाएं लीवर और किडनी की सेहत को भी काफी नकसान पहुंचाती हैं। इनका सेवन करने से ब्रेन हेमरेज और खून पतला होने का खतरा बढ़ जाता है। पेन किलर लेने वाले व्यक्ति में गैस की समस्या, पेट में तेजी से दर्द, लूज मोशन, जी मिचलाना आदि लक्षण साइड इफेक्ट के रूप में नजर आने शुरू हो जाते हैं।
    कफ सिरप -
    -गले में दर्द या खराश
    -छाती में जकड़न
    -खांसी के साथ कफ या सूखी खांसी
    कफ सिरप के साइड इफेक्ट-
    कफ सिरप के साइड इफेक्ट होने पर व्यक्ति में सुस्ती, याददाश्त में कमी, घबराहट, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन का अनियमित होना, नोजिया आदि जैसे लक्षण देखाई देने लगते हैं।
    सलाह-
    अगर आपको मामूली खांसी है तो आप गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे कर सकते हैं। इसके अलावा अदरक और तुलसी से बने काढ़े का सेवन भी राहत देने का काम करता है।
    लैक्जेटिव मेडिसिन-
    लैक्जेटिव मेडिसिन की जरूरत कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए पड़ती है। इसके अलावा सर्जरी या डिलीवरी से पहले भी पेट साफ करने के लिए डॉक्टर इन दवाइयों का सेवन करने की सलाह देते हैं।
    लैक्जेटिव मेडिसिन के साइड इफेक्ट-
    लंबे समय तक इन दवाओं का सेवन करने पर व्यक्ति को पेट में दर्द, लूज मोशन, किडनी में स्टोन, डिहाइड्रेशन, हार्ट मसल्स का कमजोर पड़ना आदि जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
    सलाह-
    लैक्जेटिव मेडिसिन के साइड इफेक्ट नजर आने पर डॉक्टर रोगी को खूब पानी पीने की सलाह देते हैं। ऐसे मरीज अपनी डाइट में अमरूद पपीता जैसे फाइबर युक्त फलों और हरी सब्जियों को शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा रोगी ब्रेकफास्ट में स्प्राउट, दलिया, उपमा आदि जैसी चीजें शामिल कर सकता है।
    एंटीबायोटिक्स-
    व्यक्ति को एंटीबायोटिक्स खाने की सलाह तब दी जाती है जब उसे बुखार या किसी तरह की एलर्जी की कोई शिकायत हो। इस तरह की दवाएं बैक्टीरिया और फंगस को नष्ट करने में मदद करती हैं।
    एंटीबायोटिक्स के साइड इफेक्ट-
    बिना पूछे एंटीबायोटिक्स का सेवन करने पर त्वचा में एलर्जी, लूज मोशन जैसी समस्याएं व्यक्ति को परेशान कर सकती हैं। लंबे समय तक इन दवाओं का सेवन करने पर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के साथ अच्छे बैक्टेरिया भी खत्म होने शुरू हो जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन दवाइयों से वायरस और बैक्टीरिया अपना रेंजिस्टेंस बढ़ा लेते हैं, जिससे उन पर किसी भी तरह की दवा का असर नहीं होता।

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