August 18, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    भौम प्रदोष व्रत, इस कथा को पढ़ने या सुनने से कष्टों से मुक्ति मिलने की है मान्यता, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    • doing of business

    धर्म संसार /शौर्यपथ / पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत है। यह प्रदोष व्रत 26 जनवरी 2021 (मंगलवार) को है। मंगलवार को होने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। प्रदोष व्रत हर महीने एक बार शुक्ल पक्ष और एक बार कृष्ण पक्ष में आते हैं। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से कलह, आर्थिक संकट और विवाह संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

    प्रदोष 2021 शुभ मुहूर्त-
    त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ- 25 जनवरी दिन सोमवार को देर रात 12 बजकर 24 मिनट पर।
    त्रयोदशी तिथि समाप्त- 26 जनवरी को देर रात 01 बजकर 11 मिनट पर।
    ऐसे में प्रदोष व्रत 26 जनवरी को रखा जाएगा।
    पूजा का समय- शाम 05:56 से रात्रि 08:35 तक रहेगा
    भौम प्रदोष व्रत के दिन चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर कर रहा है। त्रयोदशी तिथि पर वैधृति योग का निर्माण हो रहा है। अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:12:22 से 12:55:12 तक रहेगा। राहुकाल का समय- 15:14:27 से 16:34:47। शास्त्रों के अनुसार, राहुकाल के दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं।

    प्रदोष व्रत का महत्व-
    मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है। कहते हैं कि जिन कन्याओं के विवाह में दिक्कत आ रही है, इससे यह भी दूर होती है। साथ ही अशुभ ग्रहों की अशुभता भी दूर होती है।
    प्रदोष व्रत पूजा विधि-
    इस दिन ब्रह्म मूहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।
    पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद गंगाजल छिड़कर जगह को पवित्र करें।
    अब सफेद रंग का कपड़ा बिछाकर चौकी के चारों ओर कलावा बांधें।
    अब भगवान शिव की प्रतिमा को विराजित करें।
    शिवजी के चरणों पर गंगाजल अर्पित करें और भगवान को फूल-माला अर्पित करें।
    भगवान शिव को चंदन लगाएं।
    शिव प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग का अभिषेक करें। शिवलिंग पर धतूरा और भांग चढ़ाएं। भांग-धतूरा न मिलने मौसमी फल भी चढ़ा सकते हैं।
    भगवान शिव को धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं।
    इसके बाद शिवजी की आरती करें।
    अब भगवान शिव को भोग लगाएं।
    प्रदोष व्रत कथा-
    एक नगर में तीन मित्र राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र रहते थे। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे, धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना होना बाकी था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्‍नी को लाने का फैसला ले लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं, ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता, लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया।
    ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो नहीं माना। कन्या के माता-पिता को अपनी बेटी की विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद पति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर डाकू उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहुंचे. वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया। धीरे-धीरे उसकी हालात ठीक हो गई और धन-सपंदा में कोई कमी नहीं रही।

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision