July 30, 2026
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      व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पावन त्योहार मनाया जाता है, कहते हैं कि माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को वर स्वरूप प्राप्त करने के लिए इस व्रत को किया था, तब जाकर उन्हें भोलेनाथ वर स्वरूप प्राप्त हुए थे. ऐसे में कहा जाता है कि अगर अविवाहित कन्याएं ये व्रत करती हैं, तो उन्हें भोलेनाथ की तरह वर की प्राप्ति होती हैं, वहीं सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए ये व्रत रखती हैं. ऐसे में अगर आप भी हरतालिका तीज का व्रत रखना चाहती हैं, तो उससे पहले इस व्रत के ये 10 नियम जरूर जान लें.
    इस दिन किया जाएगा हरतालिका तीज 2024 का व्रत
    हरतालिका तीज 2024 का व्रत 6 सितंबर 2024, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा, लेकिन इसकी तिथि की शुरुआत 5 सितंबर 2024 को दोपहर 12:21 पर हो जाएगी. वहीं, इसका समापन 6 सितंबर को दोपहर 3:01 पर होगा, ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 6 सितंबर को ही निर्जला व्रत किया जाएगा. वहीं, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 6:01 से लेकर 8:32 तक रहेगा.
    हरतालिका तीज व्रत के 10 नियम  |
    1. अगर आप एक बार हरतालिका तीज का व्रत रखना शुरू कर दें, तो इसे जिंदगी भर रखना होता है. चाहे आप बीमार हो या माहवारी से हो, लेकिन ये व्रत कभी भी छोड़ते नहीं है.
    2. हरतालिका तीज का व्रत निर्जला व्रत होता है, यानी कि इस व्रत में आप अन्न, जल का सेवन नहीं कर सकते हैं. अगले दिन सुबह माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाने के बाद ही खीरा या ककड़ी खाकर व्रत का पारण किया जाता है.
    3. हरतालिका तीज की पूजा में मां पार्वती को खीरा भोग स्वरूप चढ़ाया जाता है या फिर सूजी का हलवा भोग लगाया जाता है.
    4. हरतालिका तीज की पहली पूजा प्रदोष काल यानी कि शाम के समय की जाती है ये वो समय होता है जब सूरज डूबता है और रात होने से पहले का समय होता है.
    5. हरतालिका तीज व्रत करने के दौरान महिलाओं को रात भर जागरण करना चाहिए, इस दौरान भजन कीर्तन और नृत्य आदि किया जा सकता है.
    6. हरतालिका तीज व्रत करने के दौरान हरतालिका तीज व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए, नहीं तो इस व्रत को अधूरा माना जाता है.
    7. हरतालिका तीज व्रत के दौरान महिलाओं को 16 श्रृंगार जरूर करना चाहिए, कहते हैं कि 16 श्रृंगार करने से मां पार्वती अति प्रसन्न होती हैं.
    8. हरतालिका तीज पूजा के दौरान मां पार्वती, शिवजी और भगवान गणेश की मिट्टी से प्रतिमा बनाकर पूजा करनी चाहिए और अगले दिन सुबह उसका विसर्जन करना चाहिए.
    9. हरतालिका तीज पर मां पार्वती को सुहाग अर्पित करने का भी विशेष महत्व होता है, आप सुहाग की पिटारी में 16 श्रृंगार की चीजें रखकर मां पार्वती को अर्पित करें और शिव जी को धोती और अंगोछा भी चढ़ाएं.
    10. हरतालिका तीज व्रत के दौरान अगले दिन सूर्योदय पर स्नान करने के बाद मां पार्वती को सिंदूर चढ़ाने का विशेष महत्व होता है. इसके बाद ही व्रत का पारण किया जाता है, हरतालिका तीज व्रत के बाद किसी ब्राह्मण या गरीब महिला को सुहाग का सामान दान करना चाहिए.

    स्वाभिमानी और स्वावलंबी युवाओं से भारत बनेगा ग्लोबल पावर: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी
      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री  ओ. पी. चौधरी ने आज यहां नवा रायपुर स्थित आईटीएम यूनिवर्सिटी में एरीज एग्रो लिमिटेड के सहयोग से स्थापित आईटीएम ड्रोन ट्रेनिंग एकादमी का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि स्वाभिमानी और स्वावलंबी युवाओं से भारत ग्लोबल पावर बनेगा।
       वित्त मंत्री चौधरी ने ड्रोन एकादमी के पहले बैच में प्रशिक्षण ले रहे ड्रोन दीदी और ड्रोन पायलट को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार के हाल के बजट में इंटर्नशिप के लिए विशेष प्रावधान किये गए हैं ताकि देश के एक करोड़ से ज्यादा यूथ इंटर्नशिप लेकर देश में मैनपावर की कमी दूर कर सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया का 20 प्रतिशत युवा भारत में हैं और दुनिया को काम करने वालों की जरुरत है। यहाँ सात दिन की ड्रोन ट्रेनिंग कैरियर के लिए ज्यादा कारगर हो सकता है। उन्होंने जनकल्याणकारी योजनाओं के दीर्घकालीन सफलता में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी पर जोर दिया।
      आईटीएम ड्रोन ट्रेनिंग एकादमी को छत्तीसगढ़ प्रदेश का पहले ड्रोन ट्रेनिंग एकादमी बनने का गौरव प्राप्त हुआ है जो महज सात दिनों के प्रशिक्षण में ड्रोन दीदी और ड्रोन पायलट तैयार करेगा जो डीजीसीए सर्टिफाइड पायलट कहलाएंगे। आईटीएम यूनिवर्सिटी कैंपस में उद्घाटन समारोह में डायरेक्टर जनरल सुश्री लक्ष्मी मूर्ति ने मुख्य अतिथि वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी और विशेष अतिथि के रूप में मौजूद एरीज एग्रो लिमिटेड के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. राहुल मीरचंदानी का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया।
     डायरेक्टर जनरल सुश्री लक्ष्मी मूर्ति ने कहा कि आईटीएम यूनिवर्सिटी सर्टिफिकेशन के अलावा ड्रोन टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता लाने बहुत जल्द डिग्री एवं मास्टर प्रोग्राम भी प्रारंभ करेगा ताकि प्रदेश के युवाओं को इसका हरसंभव लाभ मिल सकें। एरीज एग्रो लिमिटेड के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. राहुल मीरचंदानी ने कहाकि ड्रोन तकनीकों का कृषि में इस्तेमाल करने से किसानों की कई समस्याएं दूर होंगी। समय और मजदूर काम लगने के साथ ड्रोन से पानी की भी बचत होगी और फसलों की पैदावार दोगुनी होगी।  
      इसके पश्चात ड्रोन अकादमी में ड्रोन अकादमी के डायरेक्टर निलेश कोकाटे ने वित्त मंत्री सहित सभी अतिथियों को अत्याधुनिक ड्रोन से जुड़ी तकनीकी जानकारी दीं। इस कार्यक्रम में एरीज एग्रो लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट डी. के. तिवारी, कार्यक्रम संयोजक मितुल कोठारी, छत्तीसगढ़ स्टेट इंचार्ज रवि मिश्रा, कामर्शियल मैनेजर अनुपम पांडेय, मार्केटिंग मैनेजर उमेश कुमार मिश्रा, दिवेश कुमार यादव, रजिस्ट्रार सौरव चटर्जी सहित अन्य मौजूद थे।

    रायपुर / शौर्यपथ / जनसमुदाय तक स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता संबंधित व्यापक प्रचार प्रसार एवं प्रभावी व्यवहार परिवर्तन हेतु जनआंदोलन के रूप में प्रतिवर्ष के भाँति इस वर्ष भी ‘‘राष्ट्रीय पोषण माह‘‘ का अयोजन 01 से 30 सितम्बर 2024 तक किया जाना है। महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक सुश्री तुलिका प्रजापति ने समस्त कलेक्टर एवं जिला कार्यक्रम अधिकारियों को पत्र लिखकर ‘‘राष्ट्रीय पोषण माह 2024‘‘ के सफल आयोजन के लिए निर्देशित किया है।
      राज्य द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह 2024 के दौरान मुख्य रूप से एनीमिया, वृद्धि निगरानी, पूरक आहार, पोषण भी पढ़ाई भी, बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और कुशल सेवा वितरण के लिए प्रौद्योगिकी, समग्र पोषण के थीम पर विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जानी है। सुश्री प्रजापति ने पोषण माह के प्रभावी सुचारू एवं परिणाम मूलक आयोजन एवं गतिविधियों के आयोजन में सम्मानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि, सहयोगी विभागों, स्वयं सेवी संस्थाओं, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी, महिला स्व-सहायता समूहों, महिला मण्डली, नेहरू युवा केन्द्रों, नेशनल कैडिट कोर, राष्ट्रीय सेवा योजना आदि की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। पूर्व वर्षों में राज्य में आयोजित पोषण माह, पोषण पखवाड़ा में विभिन्न सहयोगी विभागों एवं डेव्हलेपमेंट संस्थाओं का सक्रिय एवं परिणाममूलक सहयोग प्राप्त होता रहा है। इस वर्ष भी विभिन्न सहयोगी विभागों के मैदानी अमले के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए जिला, विकासखण्ड, ग्राम स्तर एवं प्रत्येक केन्द्र स्तर पर पोषण माह का आयोजन किया जाना है। पोषण माह 2024 का मुख्य उद्देश्य पोषण पंचायतों को सक्रिय करना है, इस हेतु ग्राम स्तर पर सरपंच एवं ग्राम पंचायतों को गतिविधियों का आधार बनाते हुए जनआंदोलन को जनभागीदारी के रूप में परिवर्तित करना है।
      राष्ट्रीय पोषण माह 2024 अंतर्गत 01 सितम्बर से 30 सितम्बर 2024 तक प्रतिदिन आयोजित किए जाने वाले गतिविधि कैलेण्डर एवं सहयोगी विभागों की कार्य दायित्व की कार्ययोजना तैयार की गयी है। पोषण माह के दौरान की जाने वाली समस्त गतिविधियों को जन आंदोलन के डैशबोर्ड पोर्टल पर अनिवार्यतः प्रतिदिन प्रविष्ठी किया जायेगा।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में 1360 करोड़ रूपए की लागत के भालुमुड़ा-सारडेगा रेल परियोजना की स्वीकृति मिलने पर प्रदेशवासियों को दी बधाई

       रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज केन्द्रीय कैबिनेट की बैठक में 1360 करोड़ रूपए लागत की भालुमुड़ा-सारडेगा रेल परियोजना की मंजूरी मिलने पर छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित भालुमुड़ा से ओड़िसा के सारडेगा तक 37 किलोमीटर नई दोहरी रेल लाइन की मंजूरी दिए जाने से छत्तीसगढ़ में मौजूदा रेल नेटवर्क का विस्तार होने के साथ ही बड़ी संख्या में प्रदेशवासियों की देश के अन्य क्षेत्रों से कनेक्टिविटी बढ़ेगी और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र का विकास होगा।  
         मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के भालुमुड़ा से ओडिसा के सारडेगा तक 37 किलोमीटर नई दोहरी रेल लाइन परियोजना से 25 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजन होगा और 84 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी जो 3.4 करोड़ वृक्षों के रोपण के तुल्य है।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह मार्ग कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट, चूना पत्थर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। उन्होंने कहा कि नई रेल लाइन की स्वीकृति से छत्तीसगढ की देश के अन्य राज्यों से सीधी कनेक्टिविटी बनेगी, आवागमन में सुधार होगा तथा भारतीय रेलवे की दक्षता और सेवा संबंधी विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
       उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 6,456 करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे 4 राज्यों के 7 जिलों में लागू की जाने वाली तीन परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 300 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी। इन परियोजनाओं से दूर-दराज़ के इलाकों को आपस में जोड़कर लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार लाने, मौजूदा लाइन क्षमता बढ़ाने और परिवहन नेटवर्क का विस्तार करने के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा जिससे तेजी से आर्थिक विकास होगा। मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को आसान बनाएगा और भीड़भाड़ को कम करेगा, जिससे भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त खंडों पर बेहद जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास होगा।

    व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /हर माह के दोनों पक्षों की एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होती है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं. मान्यता है कि इस व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं. एकादशी व्रत से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं और इस दिन शोभन योग का निर्माण हो रहा है. इस योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और योग के बारे में.
    परिवर्तिनी एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त |
    भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 13 सितंबर, शुक्रवार को रात 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू होकर 14 सितंबर, शनिवार को रात 8 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में 14 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा.
    परिवर्तिनी एकादशी पर शोभन योग
    ज्योतिषियों के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी पर दुर्लभ शोभन योग  बन रहा है. यह योग 13 सितंबर को रात 8 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 14 सितंबर को संध्या 6 बजकर 18 मिनट पर तक रहेगा. अति शुभ शोभन योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा की प्राप्ति होती है और सभी मनोकमनाएं पूरी हो जाती हैं. इसके साथ ही इस दिन दिनभर रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है.
    पंचांग
        सूर्योदय का समय सुबह 6 बजकर 6 मिनट पर
        सूर्यास्त का समय शाम 6 बजकर 27 मिनट पर
        चन्द्रोदय का समय  शाम 4 बजकर 3 मिनट पर
        चंद्रास्त का समय देर रात 2 बजकर 37 मिनट पर
        ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक
        विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 39 मिनट तक
        गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 50 मिनट तक
        निशिता मुहूर्त रात्रि 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तक

       व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /बिहार के नालंदा में गुरु पद्मसंभव के जीवन और उनकी जीवंत विरासत पर आज यानी 28 अगस्त से दो दिवसीय अंतराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा. संस्कृति मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी. गुरु रिनपोछे नाम से भी प्रसिद्ध गुरु पद्मसंभव आठवीं शताब्दी में प्राचीन भारत में रहते थे. बुद्ध धम्म की सबसे सम्मानित हस्तियों में से एक गुरु पद्मसंभव को हिमालय क्षेत्र में बुद्ध धम्म के प्रसार का श्रेय दिया जाता है.
    यह कार्यक्रम नव नालंदा महाविहार के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ की ओर से आयोजित किया जा रहा है.
    मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे. नेपाल में ‘लुंबिनी डेवलपमेंट ट्रस्ट' के उपाध्यक्ष खेनपो चिमेद और रॉयल भूटान मंदिर में ‘सेंट्रल मोनास्टिक बॉडी' भूटान के सचिव खेनपो उगयेन नामग्याल सम्मेलन में सम्मानित अतिथि होंगे.''
    बयान में कहा गया कि गुरु रिनपोछे को ‘‘दूसरा बुद्ध'' माना जाता है.

    रायपुर / शौर्यपथ / बलौदाबाजार जिले के सुदूर अंचल में स्थित ग्राम बल्दाकछार में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति कमार महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना बड़ी खुशी लेकर आई है। महतारी वंदन योजना ने यहाँ के बांस शिल्प कला में नई जान डाल दी है। महतारी वंदन योजना से मिले पैसों से यहां की महिलाओं को बांस शिल्प कला को नई पहचान दिलाने का मौका मिल रहा है और उन्हें स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त होने में भी मदद मिल रही है।
      बल्दाकछार के कमारपारा में निवासरत श्रीमती चांदनी बाई कमार ने बताया कि वह परंपरागत रूप से बांस शिल्प की कला कृति बनाकर एवं कृषि के समय   कृषक मजदूरी का कार्य करके जीवकोपार्जन करती है। पहले वह आर्थिक तंगी के कारण बांस शिल्प बनाने के लिए बांस नहीं खरीद पाती थी पर अब उन्हें महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह 1 हजार रूपये मिलते है, जिसका उपयोग वह बांस खरीदने में करती है। वह झेंझरी, सुपा, पर्रा, टुकनी सहित अन्य सजावटी वस्तुएं अधिक संख्या में बना पाती है, जिसे बेचकर उन्हें अच्छी खासी आमदनी मिल रही है। श्रीमती चांदनी ने महतारी वंदन योजना के लिए राज्य सरकार को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए इसकी राशि बढ़ाने के लिए आग्रह की है। उसी गांव कि श्रीमती ममता कमार भी महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग बांस शिल्प एवं अपनी बच्ची 1 वर्षीय लवली कमार के शिक्षा के लिए बचत कर रही है। महतारी वंदन योजना से हर माह मिलने वाली राशि उनके लिए बहुत बड़ा सहारा है। छत्तीसगढ़ की परंपरा रही है कि यहां बेटियों को अगाध स्नेह और सम्मान दिया जाता है। बेटियों का हर घर में विशेष स्थान होता है। तीज- त्यौहारों में बेटियों और बहनों को स्नेह से भेंट और राशि दी जाती है। इसी के तहत संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने माताओं-बहनों को त्यौहार पर यह उपहार भेंट की है।

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ / आंखें नियामत कही जाती हैं क्योंकि इनके बिना जीवन जीना मुश्किल हो जाता है. मोबाइल युग में लोगों की आंखें जल्द कमजोर हो  रही हैं और भारत में करीब 80 फीसदी आबादी को आंखों से जुड़ी परेशानियों की वजह से चश्मा चढ़ जाता है. आंखों की रोशनी के लिए कुछ लोग दवा खाते हैं तो कुछ लोग ऑपरेशन का सहारा लेते हैं लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि कुछ खास व्यायाम आंखों का चश्मा उतार सकते हैं. योग गुरु सतीश कुमार सिन्हा ने आंखों से पावर का चश्मा उतारने के लिए त्राटक और सूक्ष्म व्यायाम को काफी कारगर बताया है.
    क्या है त्राटक योग  |
    दरअसल इन योगासनों की मदद से आंखों की रोशनी बढ़ जाती है और आंखों से जुड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं. इनको रोज लगभग तीन महीने करने से आंखों की रोशनी पर असर दिखना शुरू हो जाता है. सबसे पहले बात करते हैं त्राटक व्यायाम की. इस व्यायाम के तहत व्यक्ति को अंधेरे कमरे में दीपक की रोशनी को एकटक देखना है. सिर को हिलाए डुलाए बिना एकाग्रता से दीपक की रोशनी को लगातार देखने से आंखों की रोशनी तेज हो जाती है. अगर इसे नियमित तौर पर करीब दस मिनट तक किया जाए तो चश्मा तक हट सकता है.
    सूक्ष्म प्राणायाम   |
    त्राटक योग के साथ साथ आंखों के सूक्ष्म प्राणायाम को भी काफी मददगार कहा गया है. इस योग में अपने हाथ के अंगूठे को देखते रहना है. फिर हाथ को दाईं से बाईं तरफ और बाईं से दाईं तरफ घुमाना है और आंखों को भी अंगूठे पर केंद्रित रखना है. यानी जहां जहां अंगूठा जाएगा, आंखों को वहीं ध्यान केंद्रित करना है. इस व्यायाम को रोज करीब 15 मिनट तक करने पर आंखों की रोशनी तेज होती है और साथ साथ आंखों से जुड़ी कई परेशानियां दूर होती हैं. कहा गया है कि इन दोनों योग को लगातार कुछ माह तक किया जाए तो बिना दवाई और ऑपरेशन के आपकी आंखों से पावर का चश्मा उतर सकता है. इन दोनों व्यायाम को सुबह के समय करना चाहिए. इसके साथ साथ आंखों को आराम देना, मोबाइल कम देखना और आई एक्सपोजर कम करने से भी मदद मिलती है.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ / बदलते समय में नींद न आना बड़ी समस्या बन गई है. बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें रात को नींद नहीं आती. कुछ लोगों को टेंशन की वजह से नींद नहीं आती, कुछ लोगों को नींद न आने के अन्य कई कारण हैं. नींद न आने की वजह से कई लोग दवाई का सेवन करते हैं और दवा खाकर सोते हैं, फिर उन्हें नींद आती है. दिनचर्या में बदलाव या फिर बहुत ज्यादा थक जाना भी कई बार नींद ना आने का एक कारण हो सकता है. अनिद्रा का एक कारण देर रात तक फोन चलाना, लैपटॉप चलाना, टीवी देखना या फिर सोते-सोते बिस्तर पर कुछ सोचते रहना भी है. डॉक्टर कहते हैं कि हमें रात को 9:00 से लेकर 10:00 तक सो जाना चाहिए, ताकि हमारी बॉडी को कंप्लीट रेस्ट मिल सके और हमारी नींद पूरी हो सके. अगर हम रात में अपनी नींद पूरी कर लेंगे तो दिन भर फिट, तरोताजा और एनर्जेटिक रहेंगे.
    लेकिन मौजूदा समय में रात को सोने का समय बिल्कुल बदल गया है. लोग आजकल रात को 2:00 बजे 3:00 बजे तक जागते हैं. ऐसे में अनिद्रा की समस्या आ सकती है. अगर आपने एक प्रॉपर रूटीन बना लिया कि आपको कितने बजे सोना है कितने बजे उठना है तो कुछ दिन बाद ठीक उसी समय आपको नींद आने लगेगी. अगर आप अनिद्रा की समस्या झेल रहे हैं, आपको भी रात को नींद नहीं आती है तो आप कुछ योगासन की मदद ले सकते हैं. इससे आपको रात को सुकून भरी नींद आएगी.
    अच्छी नींद के लिए करें ये योगासन
        सबसे पहले आपको सूर्य नमस्कार करना है. सुबह के वक्त आप सूर्य नमस्कार करेंगे तो इसे पूरी बॉडी एक्टिव रहेगी. अगर आपको हाई बीपी की समस्या नहीं है तो आप इसे कर सकते हैं.
        दूसरा आसन नाड़ी शोधन प्राणायाम है, जिसे अनुलोम-विलोम भी कहते हैं. इसे भी किया जा सकता है. ये भी अनिद्रा भगाने में कारगर है. इसमें बायीं नाक से सांस लेनी होती है और दाएं से छोड़नी होती है. इसी तरीके से दाएं से बाएं करना होता है. इस योगासन को आप 10 से 15 बार कर सकते हैं.
        अनिद्रा को दूर करने के लिए तीसरा योगासन चंद्रभेदी है. इसमें आप बाएं नाक से सांस लेकर दाएं से छोड़ सकते हैं. इसका अभ्यास भी कम से कम 10 से 15 बार आपको करना चाहिए. चौथा उज्जायी प्राणायाम है, इससे आपको अपने गले को संकुचित करते हुए सांस भरनी है और छोड़ते वक्त गले को संकुचित ही रखना है.
        अच्छी तरह से और सुकून भरी नींद आए इसके लिए एक आसन शवासन है. इसमें आपको पीठ के बल लेटना होता है और अपनी बॉडी को रिलैक्स करते हुए आंखें बंद करके धीरे-धीरे सांस लेकर धीरे-धीरे छोड़ना होता है.
        आप सुबह में सूर्य नमस्कार भी कर सकते हैं. जबकि अन्य आसनों को सोने से 15 से 20 मिनट पहले कर सकते हैं, जिससे आपको अनिद्रा से छुटकारा मिल सकता है.

    सेहत टिप्स /शौर्यपथ / अक्सर ये कहा जाता है कि चिकन और मटन सेहत  के लिए काफी पौष्टिक होते हैं. जिन लोगों के शरीर में प्रोटीन और विटामिन्स की कमी होती है, उन्हें अक्सर नॉनवेज फूड खाने का सलाह दी जाती है. लेकिन उन लोगों का क्या जो नॉनवेज नहीं खाते हैं. यूं तो शाकाहियों के पास चिकन मटन के काफी विकल्प हैं. लेकिन एक सब्जी ऐसी है जो पोषण के नाम पर चिकन मटन को भी फेल कर देती है. जी हां इस सब्जी में इतना सारा प्रोटीनहोता है कि किसी और चीज की जरूरत ही नहीं पड़ती है. इस सब्जी को कटरुआ और धरती का फूल  कहते हैं. चलिए आज आपको इस सब्जी के फायदे बताते हैं.
    प्रोटीन की खान है कटरुआ की सब्जी   
    कटरुआ की सब्जी बारिश के मौसम में उगती है और ये सेहत के लिए काफी अच्छी मानी जाती है। कई जगहों पर इसे धरती के फूल और जंगली मशरूम भी कहा जाता है. इस सब्जी में ढेर सारे फायदे हैं और इसलिए ये बाजार में काफी महंगी मिलती है और इसकी कीमत मटन से भी ज्यादा होती है. कहा जाता है कि इस सब्जी के सेवन से शरीर फौलाद जैसा मजबूत बन जाता है. सब्जी साल के कुछ ही हफ्तों के लिए जंगल में उगती है और खासकर उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में इसे उगाया जाता है. जिन लोगों को प्रोटीन की जरूरत है, बढ़ते हुए बच्चे और जिम जाने वाले या कमजोर लोगों के लिए ये सब्जी बड़े काम की है. इसे दिल के मरीज और डायबिटीज के मरीज भी आराम से खा सकते हैं. ये सब्जी दिल के लिए भी अच्छी होती है और शुगर में भी फायदा करती है.
    किस तरह पकाई जाती है कटरुआ की सब्जी  
    अपनी खासियत और पोषण के चलते इसे वेजिटेरियन मटन भी कहा जाता है. ये दिखने में लंबी पीली डंडियों की तरह दिखती है. इसे बाजार से लाने के बाद काफी धोना पड़ता है. दरअसल ये सब्जी धरती के अंदर उगती है इसलिए इसमें काफी मिट्टी होती है. इसलिए अच्छी तरह धोने के बाद इसे काट कर आप किसी भी तरह पका सकते हैं. आप इसे प्याज लहसुन का तड़का लगाकर भी पका सकते हैं.

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