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सेहत टिप्स /शौर्यपथ /सिरदर्द ऐसी दिक्कत है जो कभी भी और कहीं भी हो सकती है. कभी नींद की कमी से तो कभी बुखार आने पर, ज्यादा शोर में बैठने से, आंखें किसी लाइट से चौंधियाने पर या फिर उल्टी जैसा महसूस होने पर भी सिर का दर्द होने लगता है. बहुत से लोग माइग्रेन की दिक्कत से भी परेशान रहते हैं. अक्सर लोग सिर के दर्द में दवाइयां खाने से परहेज करते हैं. वहीं, अगर हर दूसरे-तीसरे दिन सिर में दर्द होने लगे तो जायजतौर पर इतनी दवाई तो नहीं खाई जा सकती है. ऐसे में काम आते हैं घरेलू नुस्खे और कुछ कारगर ट्रिक्स. सिर के दर्द से राहत पाने के लिए कुछ घरेलू उपाय आजमाकर देखे जा सकते हैं. ये उपाय अपना असर तेजी से दिखाते हैं और इनसे सिरदर्द की दिक्कत दूर होने में तेजी से असर महसूस होता है सो अलग. जानिए किस एक चीज से खासतौर से सिर का दर्द तुरंत कम हो सकता है.
सिरदर्द के घरेलू उपाय |
खाकर देखें ये चीज
सिर में होने वाले तेज दर्द को कम करने के लिए अदरक का सेवन करके देखा जा सकता है. अदरक के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण दर्द को खींचने का काम करते हैं और तकलीफ कम करने में असर दिखाते हैं. जब सिर में दर्द हो तो आप अदरक का छोटा टुकड़ा खा सकते हैं, अदरक की चाय बनाकर पी जा सकती है या फिर अदरक को खाने की किसी और चीज के साथ मिलाकर खा सकते हैं.
कैफीन
चाय या कॉफी को पीने पर भी सिर के दर्द से छुटकारा मिलता है. कैफीनेटेड बेवरेज दर्द कम करने में असर दिखाते हैं. बहुत से लोगों को सिर का दर्द होने पर चाय पीकर आराम महसूस होता है. वहीं, कॉफी का सेवन कुछ के लिए फायदेमंद होता है. बस इस बात का ध्यान रखें कि आप जरूरत से ज्यादा कैफीन का सेवन ना करें.
पिएं पानी
कुछ स्टडीज में देखा गया है कि पानी की कमी यानी डिहाड्रेशन सिर दर्द को ट्रिगर कर सकता है. अगर शरीर में पानी की कमी हो तो सिर का दर्द बढ़ सकता है. ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से सिर के दर्द से राहत मिल सकती है. हालांकि, एकसाथ ढेर सारा पानी पीने के बजाए घूंट भरते हुए थोड़ा-थोड़ा पानी पिएं जिससे सिरदर्द से राहत मिल सके.
एसेंशियल ऑयल्स
कुछ ऐसेंशियल ऑयल स्ट्रेस कम करने और सिर के दर्द से राहत दिलाने में कारगर साबित होते हैं. लैवेंडर, कैमोमाइल, पेपरमिंट और बेजिल एसेंशिल ऑयल सिर का दर्द दूर कर सकते हैं. इन ऑयल्स को सूंघने या माथे पर मलने से राहत मिल सकती है.
व्रत त्योहर /शौर्यपथ / हिंदू महीनों में सावन भगवान शिव की पूजा अराधना के लिए समर्पित है. सावन माह में सोमवार के दिन का विशेष महत्व होता है और इस दिन शिव भक्त सावन सोमवार का व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं. इस साल यह पवित्र माह 22 जुलाई से शुरू हो रहा है, जो 19 अगस्त को समाप्त होगा. इस बार खास बात यह है कि सावन की शुरूआत सोमवार से हो रही है. इसके साथ ही सावन में कुल पांच सोमवार के व्रत रखे जाएंगे. ऐसे में आइए जानते हैं कैसे रखना चाहिए सावन सोमवार का व्रत और किन चीजों से करना चाहिए शिवलिंग का अभिषेक.
सावन सोमवार व्रत कैसे करें ?
सावन में सोमवार का व्रत रखने के लिए प्रात: जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
इसके बाद घर के पूजा घर या मंदिर की साफ सफाई करें.
भगवान की पूजा मंदिर या घर में की जा सकती है.
भगवान शिव की पूजा के लिए बेलपत्र, धतुरा, दूध, जल, फल जैसी चीजों की जरूरत होती है.
मंदिर या घर में विधि विधान से शिवलिंग की पूजा करने के बाद अभिषेक करना चाहिए.
व्रत रखने वालों को फलहार करना चाहिए. अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए.
शिवलिंग अभिषेक सामग्री
सावन सोमवार व्रत रखने वालों को इस दिन शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए. शिवलिंग का अभिषेक दूध, दही या जल से किया जा सकता है. शिव पुराण के अनुसार, अभिषेक से महादेव अति प्रसन्न होते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के बाद निकले विष का पान करने से शिव भगवान का कंठ नीला पड़ गया था. तब विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें जल चढ़ाया था. इसलिए भगवान शिव को अभिषेक अत्यंत प्रिय है.
शिवलिंग अभिषेक विधि
शिव जी के अभिषेक के लिए जल, दूध या दही का उपयोग करना चाहिए. सामग्री में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हुए इस मंत्र का जाप करें-
ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धि पुष्टिवध्र्नम्उर्वारुकमिव बंन्धनान् मृत्युमरुक्षीयम मामृतात
व्रत त्यौहार/शौर्यपथ /श्रावण मास कैलाश निवासी भगवान शिव की पूजा आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. इस माह में सोमवार का काफी महत्व होता है और विशेष संयोग के चलते इस बार श्रावण मास की शुरुआत सोमवार से ही होगी. श्रवण नक्षत्र में सर्वार्थ सिद्धि योग से श्रावण के पावन माह की शुरुआत होगी. इससे भी खास बात यह है कि भगवान शिव की पूजा-आराधना के लिए समर्पित श्रावण मास में इस बार कई श्रेष्ठ और फलदायी शुभ मुहूर्त बन रहे हैं. इस वर्ष श्रावण मास 22 जुलाई से शुरू होकर 19 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग पर पूर्णिमा के दिन समाप्त हो जाएगा.
सावन के श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त
इस बार श्रावण मास में 10 विशेष शुभ मुहूर्त वाले दिन बन रहे हैं. पांच सोमवार के अलावा 1 और 17 अगस्त को प्रदोष व्रत और 4 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग व रवि पुष्य योग के साथ अमावस्या. शुभ मुहूर्त वाले विशेष दिनों पर पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक जैसे विशेष उपाय कर दोष दूर किया जा सकता है, ऐसी मान्यता है. ऐसा माना जाता है कि श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त में विशेष पूजा-अर्चना और उपाय कर आप मनवांछित फल पा सकते हैं.
तीन खास उपाय से बनेंगे सभी काम
वैसे तो संपूर्ण श्रावण मास ही शुभ और फलकारी होता है लेकिन माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में विशेष उपाय की मदद से आप दोषमुक्त होकर मनोवांछित फल पा सकते हैं. सभी तीन उपायों से अलग-अलग फल प्राप्त होंगे. माना जाता है कि राहु-केतु का अशुभ प्रभाव कम करने, कर्ज और कई तरह के कष्टों से छुटकारा पाने के लिए और गृह शांति के लिए सोमवार को विशेष पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना शुभ है. रोग निवारण, पितृ दोष और कर्ज मुक्ति के लिए अमावस्या के दिन रवि पुष्य योग में विशेष पूजा-अर्चना करना अच्छा है. मान्यतानुसार सावन शिवरात्रि और प्रदोष में पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से संतान फल प्राप्त होता है.
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 13 जुलाई को श्री रामलला का दर्शन करने अयोध्या धाम जाएंगे। जारी कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री 13 जुलाई शनिवार को प्रातः 9.30 बजे स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से प्रस्थान कर पूर्वान्ह 11 बजे महर्षि वाल्मिकी इंटरनेशनल एयरपोर्ट अयोध्या धाम पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री पूर्वान्ह 11.15 बजे से शाम 5 बजे तक श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या धाम में श्री रामलला का दर्शन और मंदिर भ्रमण करेंगे। मुख्यमंत्री शाम 5.15 बजे अयोध्या धाम एयरपोर्ट से प्रस्थान कर संध्या 6.45 बजे स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर लौट आएंगे।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की महिलाओं में महतारी वंदन योजना को लेकर अपार उत्साह देखा जा रहा है। खास कर गरीब, मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग की महिलाओं को इस योजना से मिलने वाली राशि से काफी राहत मिली है। महिलाओं का कहना है कि इस योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ गया है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का ही प्रतिफल है कि उन्हें समय पर महतारी वंदन योजना की राशि माह दर माह मिल रही है। महतारी वंदन योजना में इस माह 5वीं किश्त के रूप में एक-एक हजार रूपए की राशि मिली है। राशि के उपयोग से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। यह राशि महिलाओं के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से पहुंच रही है। महिलाओं के खाते में राशि आने से परिवार में भी उनकी पूछ परख बढ़ गई है।
धमतरी के कलेक्टोरेट परिसर में कैंटिन का संचालन करने वाली सहेली संघ स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती हेमा साहू ने बताया कि महतारी वंदन योजना से स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को काफी फायदा हो रहा है। समूह की महिलाओं द्वारा अब नियमित रूप से आर्थिक गतिविधियों के लिए अपना योगदान दे पा रही हैं।
श्रीमती हेमा ने यह भी कहा कि महतारी वंदन योजना से मिल रही राशि से महिलाएं अपने बच्चों के लिए आवश्यकतानुसार बेहतर प्रबंध कर पा रही हैं। महिलाएं निजी जरूरतों, घरेलू आवश्यकताओं व दैनिक उपयोग की चीजों की खरीदी एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम हुई है। साथ ही भविष्य के लिए बचत भी कर रही है। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता एवं आत्मविश्वास का संचार हुआ है।
ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /गर्मी के मौसम में स्किन से जुड़ी समस्याएं होना आम हैं. पसीना, धूल-मिट्टी की वजह से स्किन बहुत डल भी लगने लगती है. साथ ही सूरज की रोशनी की वजह से स्किन को बहुत नुकसान भी पहुंचते हैं. स्किन की समस्या को दूर करने के लिए लोग केमिकल वाली क्रीम या लोशन का इस्तेमाल करने लगते हैं. इससे उस समय तो फायदा मिलने लगता है लेकिन एक टाइम के बाद केमिकल आपकी स्किन को खराब भी करने लगते हैं. ऐसे में स्किन के लिए घरेलू उपाय बेस्ट हैं. घर पर ही आप एक जेल बनाकर लगा सकते हैं और इससे स्किन को कोई नुकसान नहीं होता है. ये जेल बनेगा अलसी के बीजों से. अलसी के बीज में कई पोषक तत्व होते हैं. लोग हेल्दी रहने के लिए इसका सेवन भी करते हैं. आज हम आपको बताते हैं कि कैसे बनाए अलसी के बीज से जेल और इसके क्या फायदे हैं.
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कैसे बनाएं अलसी के बीज से जैल
ग्लोइंग स्किन के लिए अलसी के बीज से जेल बनाना बहुत आसान हैं. इसे बनाने के लिए रातभर 2 बड़े चम्मच अलसी के बीज भिगोकर रख दीजिए. जब आप सुबह उठकर देखेंगे तो अपने आप अलसी के बीज से जेल बाहर आता नजर आएगा. उसके बाद एक कॉटन के कपड़े की मदद से जेल और अलसी के बीजों को अलग कर लें. इस जेल को एक कंटेनर में स्टोर करके फ्रिज में रख लें.
इस तरह करें इस्तेमाल
अलसी के बीज के जेल का इस्तेमाल करना बहुत आसान है. इसके लिए फेस वॉश का इस्तेमाल करना बंद कर दें. बस सुबह उठकर पानी से मुंह धोएं. उसके बाद चेहरे को सुखाकर ये जेल पूरे फेस पर लगाएं. 15 मिनट तक जेल को चेहरे पर लगे रहने दें. 15 मिनट बाद चेहरे को नॉर्मल पानी से धो लें. इसका फर्क आपको एक दिन में ही चेहरे पर दिखने लगेगा.
जब आप रोजाना अलसी के बीज के जेल का इस्तेमाल करते हैं तो इसके कई फायदे होते हैं. ये चेहरे की नसों को एक्टिव करने में मदद करता है साथ ही ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है. इससे आपकी स्किन हेल्दी होती है. इसके अलावा ये जेल झुर्रियां कम करता है, स्किन को टाइट करता है, काले धब्बों को हटाने में मदद करता है. साथ ही इससे चेहरे की डलनेस भी कम होती है और स्किन ग्लो करने लगती है.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ / जब भी बात अच्छी सेहत की होती है तो हेल्थ एक्सपर्ट्स ड्राई फ्रूट्स खाने की सलाह जरूर देते हैं. क्योंकि इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व आपकी ओवरऑल हेल्थ का ख्याल रखते हैं. वैसे तो सभी सूखे मेवे आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन आज हम यहां पर पिस्ता कैसे आपकी सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है, इसके बारे में बात करेंगे. शुरूआत हम इसके पोषक तत्वों से करते हैं. पिस्ता में कैलोरी, कार्ब्स, प्रोटीन, वसा, पोटैशियम, फॉस्फोरस, विटामिन बी6, थायमिन, कॉपर, मैंगनीज पाया जाता है. आपको बता दें कि पिस्ता विटामिन बी 6 रिच ड्राई फ्रूट्स में से एक है.
28 ग्राम पिस्ता में
कैलोरी: 159
कार्ब्स: 8 ग्राम
फाइबर: 3 ग्राम
प्रोटीन: 6 ग्राम
वसा: 13 ग्राम
पोटैशियम: DV का 6%
फॉस्फोरस: DV का 11%
विटामिन B6: DV का 28%
थायमिन: DV का 21%
कॉपर: DV का 41%
मैंगनीज: DV का 15%
अब आते हैं इसके फायदों पर -
1- पिस्ता खाने से आपके चेहरे पर समय से पहले नजर आने वाली झुर्रियों का असर कम होता है. यह आपकी स्किन में कसाव बनाए रखती हैं. इससे डैमेज स्किन सेल्स की मरम्मत में भी मदद मिलती है.
2- जिन लोगों के शरीर में प्रोटीन की कमी हो गई है उन्हें तो इस सूखे मेवे का सेवन जरूर करना चाहिए. यह आपके प्रोटीन डिफिशिएंसी दूर करने में मदद कर सकता है.
3- पिस्ता में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण आपके पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं. ऐसे में यह वजन घटाने में मदद कर सकता है.
4- थोड़ी मात्रा में पिस्ता खाने से पाचन क्रिया को दुरुस्त रखकर आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है. वहीं, आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. जो लोग हार्ट पेशेंट हैं उन्हें इसका सेवन करना चाहिए.
5- शोध से पता चलता है कि पिस्ता आपकी आंखों की रोशनी को भी मजबूत करती है. जिन लोगों की आई साइट वीक है अपनी डाइट में शामिल कर लेना चाहिए.
हमने पिस्ता के पोषक तत्वों और फायदों के बारे में बात कर ली अब आते हैं बाजार में मिलने वाले नकली पोषक तत्वों की पहचान कैसे करें-
जब भी आप पिस्ता खरीदने जाएं तो चखकर जरूर देखें. अगर आपको मूंगफली का स्वाद आता है पिस्ता से तो समझ जाइए ये नकली है.
वहीं, पिस्ता अगर चबाने में हार्ड लगता है तो समझिए वो बहुत पुराना हो गया है तो ऐसे मेवे को ना खरीदिए.
आपको बता दें कि पिस्ता बनाने के लिए मूंगफली का इस्तेमाल किया जाता है. इसको पिस्ते की तरह दिखाने के लिए कैमिकल कोटिंग की जाती है.
खाना खजाना /शौर्यपथ /रोज-रोज एक ही तरह की चीजें खाकर बोर होना लाजमी है. अगर आप भी कुछ स्पाइसी खाना चाहते हैं लेकिन किचन में ज्यादा समय भी नहीं बिताना चाहते तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं. आज हम आपके लिए एक ऐसी चाट रेसिपी लेकर आए हैं जो आपके टेस्ट को बदल देगी. असल में चाट का नाम लेते ही हमारे मुंह में पानी आ जाता है. भारत में चाट की आपको कई वैराइटी मिल जाएंगी. चाट एक स्ट्रीट फूड है जिसे आप हर कली के कॉर्नर में आसानी से पा सकते हैं. बात जब तंदूर की आती है तो तंदूरी स्वाद! चाहे वह तंदूरी चिकन हो, तंदूरी पनीर, या यहां तक कि तंदूरी मशरूम- स्मोकी, बर्न हुए और चारकोल जैसा स्वाद हममें से ज्यादातर लोगों को पसंद होता है! तो चलिए जानते हैं तंदूरी चाट बनाने की रेसिपी.
तंदूरी चाट कई चीजों और ढेर सारे मसालों से बनाया जाता है. अनानास, पनीर, सेब और शिमला मिर्च, आलू और सेब से बना यह तंदूरी चाट निस्संदेह आपके रेगुलर चाट डिश में एक नया ट्विस्ट एड कर सकता है. इसे आप घर पर पार्टी में स्टार्टर के रूप में भी सर्व कर सकते हैं.
कैसे बनाएं तंदूरी चाट-
इस चाट को बनाने के लिए सबसे पहले अनानास के चार टुकड़े, पनीर, सेब और शिमला मिर्च, उबले आलू और उबले हुए सेब लें. इसके बाद, अनानास, लाल मिर्च, पीली शिमला मिर्च, शकरकंद और पनीर. सुविधाजनक बैचों में क्रम को दोहराएं. उन्हें मीडियम गर्म तंदूर या चारकोल ग्रिल में, या पहले से गरम ओवन में 3 मिनट के लिए रोस्ट करें. फिर निकाल कर एक तरफ रख दें. इसे बाउल में निकाल लें, और नमक, सिरका, लाल मिर्च पाउडर, अनारदाना पाउडर, चाट मसाला डालकर अच्छी तरह मिक्स करें और सर्व करें.
सेहत टिप्स /शौर्यपथ /अलसी के बीज सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं. अलसी के बीजों का तेल और साबुत अलसी को खाने में इस्तेमाल किया जाता है. अलसी में औषधीय गुण पाए जाते हैं. अलसी के बीज में विटामिन बी-1, प्रोटीन, कॉपर, मैंगनीज, ओमेगा-3 एसिड, लिगनन समेत कई माइक्रो न्यूट्रिएंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. भुनी अलसी को डाइट में शामिल कर शरीर को कई लाभ पहुंचा सकते हैं. तो चलिए जानते हैं किन लोगों को करना चाहिए भुनी अलसी का सेवन.
भुनी अलसी खाने के फायदे-
1. मोटापा-
अगर आप अपने वजन को कम करना चाहते हैं तो भुनी अलसी को ब्रेकफास्ट में शामिल कर सकते हैं. इसे आप ओट्स, दलिया और सलाद में डालकर खा सकते हैं.
2. पेट के लिए-
भुनी अलसी को डाइट में शामिल कर कब्ज, पाचन, पेट गैस जैसी समस्याओं में राहत पा सकते हैं. पेट के लिए भुनी अलसी का सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है.
3. कोलेस्ट्रॉल-
शरीर में बढ़ा कोलेस्ट्रॉल कई समस्याओं की वजह बन सकता है. रोजाना सुबह भुनी अलसी खाने से हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
4. स्किन-
अलसी के बीज में ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो स्किन को हेल्दी रखने में मददगार है.
5. एनर्जी-
अगर आपको भी थकन और कमजोरी महसूस होती है तो आप भुनी अलसी को डाइट में शामिल कर सकते हैं. भुनी हुई अलसी का सेवन करने से शरीर को एनर्जेटिक रखने में मदद मिल सकती है.
आस्था /शौर्यपथ /आज से जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू हो गई है. यह यात्रा हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित की जाती है. इसका आयोजन ओडिशा के पुरी में किया जाता है जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं. आपको बता दें कि भगवान जगन्नाथ के साथ दो और रथ निकलते हैं जिसमें उनके भाई और बहन होते हैं. इस रथ यात्रा की शुरूआत से पहले तीनों रथों की पूजा की जाती है. इसके बाद सोने की झाड़ू के साथ मंडप और रथ के रास्ते की सफाई का जाती है. इसके अलावा और क्या कुछ खास है इस पवित्र रथ यात्रा से जुड़ा हम आपको आगे आर्टिकल में बताने वाले हैं.
जगन्नाथ रथ यात्रा की क्या है मान्यता -
इस यात्रा को लेकर मान्यता है कि इसमें शामिल होने से 100 यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि दुनिया भर से लोग इस यात्रा में प्रभु जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने के लिए शामिल होते हैं. साथ ही यह भी मान्यता है कि इस यात्रा में शामिल होने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव भी कम होता है. क्योंकि जगन्नाथ रथ यात्रा में नवग्रहों की पूजा की जाती है.
ओडिशा के पुरी से निकलने वाली प्रभु जगन्नाथ की रथ के साथ दो और रथ निकलते हैं जिसमें से एक में उनके भाई बलराम और दूसरे में बहन सुभद्रा विराजमान होती हैं. सबसे आगे भाई बलराम का रथ उसके बाद बहन सुभद्रा और फिर भगवान जगन्नाथ का रथ होता है. इस तरह कुल 3 देवताओं की यह यात्रा निकलती है.
तीनों रथों के क्या हैं नाम -
पुरी से निकलने वाली इस धार्मिक रथ यात्रा में शामिल रथों के अलग-अलग नाम हैं, जो इस प्रकार हैं
भगवान जगन्नाथ का रथ - इस रथ को नंदीघोष और गरुड़ध्वज के नाम से जाना जाता है.
- यह रथ 42.65 फीट ऊंचा होता है और इसमें 16 पहिए होते हैं,
- वहीं इस रथ का रंग लाल और पीला होता है.
- प्रभु जगन्नाथ के सारथी दारुक हैं.
भाई बलराम का रथ - इस रथ को तालध्वज नाम से जाना जाता है.
- इसकी ऊंचाई 43.30 फीट होती है, जो भगवान जगन्नाथ के रथ से बड़ा होता है.
- इसका रंग लाल और हरा होता है जिसमें 14 पहिए लगे होते हैं. इस रथ के सारथी मातलि हैं.
बहन सुभद्रा का रथ - इस रथ का नाम दर्पदलन है और इसकी ऊंचाई 42.32 फीट होती है.
- इसका रंग लाल और काला होता है जिसमें 12 पहिए लगे होते हैं और इस रथ के सारथी अर्जुन हैं.
कितने दिन रहते हैं मौसी के घर
भाई बलराम और बहन के साथ जब प्रभु यात्रा पर निकलते हैं तो रास्ते में गुंडिचा मौसी के घर भी रुकते हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां पर तीनों भाई बहन स्वादिष्ट पकवान खाते हैं जिससे उनकी तबीयत बिगड़ जाती है. ऐसे में वो अज्ञातवास में चले जाते हैं. यहां पर पूरे 7 दिन तक रुकते हैं और स्वस्थ्य होने के बाद पुरी वापस आते हैं.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /भगवान गणेश को सभी देवों में प्रथम पूजनीय कहा गया है. खुशहाली और सुख-समृद्धि का वरदान देने वाले गणपति को विनायक भी कहा जाता है. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है और गणपति के लिए व्रत रखा जाता है. इस दिन विधि-विधान से गणपति की पूजा होती है. चलिए जानते हैं कि इस साल विनायक चतुर्थी का व्रत किस दिन रखा जाएगा और साथ ही ये भी जानेंगे कि विनायक चतुर्थी पर भगवान गणपति की पूजा किस तरह करें
कब है विनायक चतुर्थी 2024
हिंदू पंचांग की बात करें तो आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विघ्नहर्ता भगवान गणेश के निमित्त व्रत रखा जाता है. इस साल यानी 2024 में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी 9 जुलाई को सुबह छह बजकर आठ मिनट पर आरंभ हो रही है और इसका समापन अगले दिन दस जुलाई को सुबह 7 बजकर 51 मिनट पर होगा. इस लिहाज से देखा जाए तो विनायक चतुर्थी का व्रत 9 जुलाई को रखा जाएगा. इस दिन गणपति पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 3 मिनट से दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक है. इस दौरान आप गणपति पूजा करेंगे तो आपको शुभ फल मिलने के योग बनेंगे. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से अगर भगवान गणपति की पूजा की जाए तो जातक के जीवन में सभी तरह के विघ्न और संकट दूर हो जाते हैं और परिवार में खुशहाली आती है.
विनायक चतुर्थी पर इस तरह करें गणपति की पूजा
विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें और साफ वस्त्र धारण करें. अब घर में मंदिर के सामने एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान गणपति की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. अब गंगाजल हाथ में लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें. अब गणेश भगवान को सिंदूर लगाएं. उन्हें माला पहनाकर फूल अर्पित करें. इसके बाद भगवान गणपति को दूर्वा अर्पित करें और फिर मोदक का भोग लगाएं. इसके बाद धूप और दीपक जलाकर भगवान गणपति की आरती करें. इसके बाद गणेश जी के बीज मंत्रों का जाप करें.
व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा गुप्त नवरात्रि का भी बेहद महत्व होता है और खासकर आषाढ़ माह में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि देवी दुर्गा की 10 महाविद्याओं की पूजा के लिए समर्पित होती है. इस साल आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 6 जुलाई से हो रही है जो कि 15 जुलाई 2024 तक चलेगी. कहा जाता है कि इस गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की विशेष आराधना करने के साथ ही कई लोग मंत्र भी सीखते हैं. ऐसे में इस दौरान आपको किन चीजों से बचना चाहिए, आइए हम आपको बताते हैं.
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में रखें इन चीजों का ध्यान
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है, इनमें मां दुर्गा का रौद्र रूप भी होता है. ऐसे में पूजा अर्चना करने के दौरान आपको साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान साफ सफाई का ध्यान रखने के साथ ही आपको तामसिक चीजों से दूरी बनानी चाहिए. नवरात्रि से पहले अगर आपके घर में कोई भी तामसिक चीजें मौजूद है तो उसे घर से बाहर कर दें.
- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान घर में देवी दुर्गा के रौद्र स्वरूप की स्थापना नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इनकी स्थापना केवल तंत्र विद्या के लिए की जाती है. आप घर में मां दुर्गा की कोई भी साधारण सी प्रतिमा लगा सकते हैं.
- आषाढ़ नवरात्रि के दौरान घर में केवल हवन और सात्विक पूजा का पालन ही करना चाहिए, तंत्र मंत्र का अधिकार केवल तांत्रिकों का होता है.
आषाढ़ नवरात्रि पर क्या करें
अब बात आती है कि आषाढ़ माह में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि पर आपको क्या करना चाहिए, तो कहा जाता है कि इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत फलदायी माना जाता है. इस नवरात्रि में ज्वार नहीं बोए जाते हैं, ऐसे में गुप्त नवरात्रि के दौरान आप मां दुर्गा के नामों का जाप कर सकते हैं और उनकी असीम कृपा पा सकते हैं.
शौर्यपथ / देश के कई हिस्सों में मानसून की एंट्री हो गई है. झमाझम बरसात से मौसम खुशनुमा हो गया है. हालांकि, इस सीजन में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. बरसात में इम्यूनिटी कमजोर होने से संक्रमण और बीमारियां बढ़ जाती हैं. जिसकी वजह से बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन, फूड पॉइजनिंग, डायरिया, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, स्किन इंफेक्शन और एलर्जी होने का खतरा रहता है. ऐसे में अगर आप इन बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं तो 5 आयुर्वेदिक हर्ब्स को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें. इससे पूरे सीजन बीमारियों आपको छू भी नहीं पाएंगी.
1. अदरक
अदरक एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटी-वायरल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों वाली जड़ी-बूटी है. इसके सेवन से कई तरह की बीमारियां और संक्रमण दूर ही रहते हैं. गले की खराश से लेकर पाचन की समस्या तक में अदरक फायदेमंद होता है. बारिश के दिनों में हर दिन अदरक वाली चाय पीने से बीमार होने से बच सकते हैं.
2. हल्दी
औषधीय गुणों वाली हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पहले से ही मौजूद होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर संक्रमण से लड़ने में मदद करती है. सर्दी-खांसी, गले में खराश या शरीर में सूजन है तो दूध में हल्दी मिलाकर पीने से राहत मिल सकती है.
. मुलेठी
बरसात के दिनों में खांसी, जुकाम, गले में खराश परेशान कर सकता है. इसके लिए एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों वाला मुलेठी काम आ सकता है. इसे चाय या काढ़े में इस्तेमाल कर सकते हैं.
4. तुलसी
आयुर्वेद में तुलसी काफी गुणकारी औषधीय है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं, जो बारिश के मौसम में संक्रमण को दूर रखने में मदद कर सकते हैं. इससे कई बीमारियों से बच सकते हैं. तुलसी की पत्तियों से चाय या गाढ़ा बनाकर पीना फायदेमंद होता है.
5. गिलोय
गिलोय इम्यूनिटी को मजबूत करने वाली औषधी है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो सर्दी, बुखार और फ्लू के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है. मानसून में हर दिन गिलोय का काढ़ा बनाकर पीना फायदेमंद हो सकता है.
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ /जून में माह में जबरदस्त गर्मी और हीटवेव के कारण आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं. गर्मी इतनी भीषण हो गई थी कि सड़क पर खड़ी कार और घर में लगे AC तक में आग लगने की कई घटनाएं हो चुकी हैं. हाल ही में दिल्ली और आसपास के इलाकों नोएडा से लेकर गाजियाबाद में इस तरह की कई घटनाओं की खबरें आई हैं. कई जगह AC ब्लास्ट होने और उसमें आग लग चुके कारण परे घर में आग लगने का क खतरा होता है. AC की तरह ही घर में फ्रिज में भी आग लग सकता है. गर्मी के दिनों में फ्रिज यूज करने में सावधानी जरूरी है. आइए जानते हैं गर्मी में फ्रिज का यूज करने में क्या सावधानियां रखनी चाहिए
ओवरहीटिंग से बचना जरूरी
एसी से लेकर फ्रिज या फिर अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण उनमें आग लगने का सबसे बड़ा कारण होता है ओवरहीटिंग. फ्रिज से निकलने वाली गर्मी की वजह से उसमें आग लगने का डर रहता है. फ्रिज को ऐसी जगह रखनी चाहिए, जहां उसे ठंडा होने के लिए हवा मिल सके. कॉम्पैक्ट जगह होने की वजह से फ्रिज की बॉडी को सही तरीके से ठंडा होने के लिए हवा नहीं मिलता है, जिसकी वजह से वह ज्यादा गर्म हो सकता है और उसमें आग लगने का खतरा बढ़ सकता है.
वोल्टेज फल्क्चुएशन
गर्मी के दिनों में बिजली की डिमांड बढ़ जाती है. इस समय वॉल्टेज फल्क्चुएशन की परेशानी भी शुरू हो जाती है. फ्रिज को आग लगने से बचाने के लिए हाई वोल्टेज स्टेब्लाइजर का यूज करना चाहिए. स्टेब्लाइजर वॉल्टेज फ्लक्चुएशन को रोकने और आपके उपकरणों को खराब होने से बचाता है.
नियमित मेंटेनेंस
AC, फ्रिज समेत सभी तरह के इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की रेगुलर मेंटेनेंस करानी चाहिए. फ्रिज में भी कंप्रेसर लगा होता है, जिसमें लीकेज या फिर ओवरहीटिंग की समस्या हो सकती है. रेगुलर मेंटेनेंस से फ्रिज के कंप्रेसर या अन्य उपकरण जैसे कि फिल्टर, वेंट आदि साफ हो जाते हैं और फ्रिज के कंप्रेसर पर लोड नहीं पड़ता है और उसमें बलास्ट का खतरा कम होता है.
डिफ्रॉस्ट करें
फ्रिज में आपको एक डिफ्रॉस्ट बटन मिलता है, उसकी मदद से फ्रित को नियमित रूप से डिफ्रॉस्ट करना चाहिए. इससे फ्रिजर में जमने वाले बर्फ को साफ किया जाता है. इससे फ्रिज की लाइफ बढ़ती है.
वेंटिलेशन
फ्रिज को ऐसी जगह रखें जहां वेंटिलेशन की पर्याप्त व्यवस्था हो. ऐसा नहीं होने पर फ्रिज की बाहरी सतह ठंडी नहीं होगी और उसमें आग लगने का खतरा बढ़ जाएगा. गर्मी के दिनों में आप चाहें तो फ्रिज को पंखे से हवा करके ठंडा भी कर सकते हैं. फ्रिज के कंप्रेसर में ज्वलनशील गैस होती है, ज्यादा गर्म होने पर आग लगने का खतरा होता है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
