August 03, 2026
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    “नए चेहरों की उम्मीद पर ‘पुराने बोझ’ भारी! दक्षिण ब्लॉक कांग्रेस की सूची ने फिर उठाए सवाल”

    • rounak group

    बाकलीवाल की ‘नई कांग्रेस’ की मुहिम को झटका? निष्क्रिय और विवादित चेहरों की एंट्री से कार्यकर्ताओं में असंतोष

    दुर्ग / शौर्यपथ / विशेष रिपोर्ट

    दुर्ग शहर कांग्रेस में चार दशक तक वोरा परिवार के वर्चस्व के बाद जब प्रदेश नेतृत्व ने बड़ा फैसला लेते हुए संगठन की कमान धीरज बाकलीवाल को सौंपी, तब कार्यकर्ताओं के बीच एक नई ऊर्जा और बदलाव की उम्मीद जगी थी। लंबे समय से उठ रहे “परिवारवाद और अवसरवाद” के आरोपों के बीच यह बदलाव कांग्रेस के लिए एक नई शुरुआत माना गया।

    धीरज बाकलीवाल ने अध्यक्ष पद संभालते ही जिस तरह जमीनी और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिला कांग्रेस कमेटी में जगह दी, उसने न केवल संगठन में नई जान फूंकी, बल्कि वर्षों से उपेक्षित कार्यकर्ताओं को भी एक मंच दिया। इस फैसले की शहरभर में सराहना हुई और इसे कांग्रेस के पुनरुत्थान की दिशा में अहम कदम माना गया।

    लेकिन…

    यह “नई सोच” ब्लॉक स्तर तक पहुंचते-पहुंचते कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

    ? दक्षिण ब्लॉक की सूची: बदलाव या पुनरावृत्ति?

    हाल ही में घोषित दुर्ग शहर दक्षिणी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी सूची ने एक बार फिर संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूची सामने आते ही कांग्रेसी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।

    आरोप है कि—

    कई ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जो लंबे समय से निष्क्रिय रहे हैं

    कुछ पदाधिकारी विवादित छवि के माने जाते हैं

    और कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जिनकी जनाधार क्षमता पर ही सवाल खड़े हैं

    यहां तक कि संगठन के भीतर ही यह चर्चा है कि कुछ नाम ऐसे हैं जो “अपने घर या मोहल्ले के चार वोट तक कांग्रेस के पक्ष में नहीं ला सकते।”

    ? कार्यकर्ताओं में निराशा, सवालों की भरमार

    जिस जोश और उम्मीद के साथ जिला स्तर पर नई टीम का गठन हुआ था, वह ब्लॉक स्तर पर आते-आते फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर ब्लॉक स्तर पर ही “पुरानी और निष्क्रिय सोच” हावी रही, तो संगठन की मजबूती केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।

    कई कार्यकर्ता इसे “अवसरवाद की वापसी” भी बता रहे हैं, जहां सक्रियता और संघर्ष की बजाय समीकरण और व्यक्तिगत हित हावी हो रहे हैं।

    ? क्या बाकलीवाल की रणनीति को लगेगा झटका?

    राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो धीरज बाकलीवाल ने जिस साहस के साथ संगठन में नई शुरुआत की थी, उसे जमीनी स्तर पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती है।

    अगर ब्लॉक इकाइयों में पुराने और निष्क्रिय चेहरों को ही तवज्जो मिलती रही, तो यह न केवल संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि आगामी चुनावों में कांग्रेस की स्थिति को भी कमजोर कर सकता है।

    ? आगे क्या?

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

    ? क्या दक्षिण ब्लॉक के पदाधिकारी संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे?

    ? या फिर यह नियुक्तियां केवल “पद और प्रभाव” तक सीमित रह जाएंगी?

    दुर्ग कांग्रेस के भीतर उठती यह असंतोष की लहर आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक रूप ले सकती है। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संगठन इन आलोचनाओं को गंभीरता से लेगा या फिर “पुरानी राह” पर ही आगे बढ़ेगा।

    (विशेष टिप्पणी):

    दुर्ग कांग्रेस के लिए यह समय आत्ममंथन का है—क्योंकि बदलाव केवल चेहरे बदलने से नहीं, सोच बदलने से आता है।

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