August 02, 2026
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    सरकार, अधिकारी और कॉरपोरेट की सांठगांठ से छत्तीसगढ़ में लूट: संजीत विश्वकर्मा प्रदेश संगठन मंत्री आप

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    *पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी की कॉरपोरेट भूमिका क्यों,रायगढ़-तमनार के संदर्भ में यह नियुक्ति और भी अधिक संदिग्ध और चिंताजनक- संजीत विश्वकर्मा प्रदेश संगठन मंत्री आप*

    रायपुर। जिंदल समूह द्वारा पूर्व भारतीय वन सेवा वरिष्ठ अधिकारी एस.एस. बाजाज को कॉरपोरेट लाइजनिंग का छत्तीसगढ़ राज्य प्रमुख नियुक्त किया गया है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री संजीत विश्वकर्मा ने कहा है कि यह नियुक्त बहुत साधारण सी लगती है लेकिन यह केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि राज्य में कॉरपोरेट प्रभाव, प्रशासनिक पहुंच और सत्ता-संबंधों के खतरनाक गठजोड़ का संकेत है। सरकार, प्रशासन और पर्यावरणीय नियम-कानूनों की पूरी समझ रखने वाले ऐसे अधिकारी के पास पद, पहुँच और संवेदनशील जानकारियों का जो प्रभाव है, उसका दुरुपयोग होने की पूरी आशंका है। यह स्थिति जनहित और पारदर्शिता, दोनों के लिए गंभीर खतरा है। यह सांठगांठ, छत्तीसगढ़ में सरकार, अफसरशाही और कॉरपोरेट गठजोड़ के उस काले चेहरे को उजागर करता है, जिसके कारण जल, जंगल, जमीन और जनता के अधिकारों की खुलेआम नीलामी की बड़ी तैयारी की जा रही है।

    लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती गीतेश्वरी बघेल कि यह बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला है। जिन अधिकारियों पर जनता के संसाधनों की रक्षा करने, कानून का पालन कराने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, वही लोग अब कॉरपोरेट घरानों के लिए रास्ता साफ करने के काम में लग जाएं, तो यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता और पूंजी के गठबंधन से चलने वाली लूट की व्यवस्था है।आखिर छत्तीसगढ़ की जनता यह कैसे माने कि जिन लोगों ने शासन तंत्र, नीतियों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और संवेदनशील निर्णयों के बीच वर्षों तक काम किया, वे अब उन्हीं जानकारियों और संबंधों का इस्तेमाल कॉरपोरेट हित साधने के लिए नहीं करेंगे? यह सीधा-सीधा हितों का टकराव है। यह नैतिक पतन है। यह छत्तीसगढ़ की जनता के सार्वजनिक विश्वास के साथ विश्वासघात है। रायगढ़, तमनार और आसपास के क्षेत्रों में पहले से ही जनता जमीन, पर्यावरण, प्रदूषण, विस्थापन और जल संकट को लेकर त्रस्त है। वहां यदि कॉरपोरेट कंपनियां पूर्व अधिकारियों को लाइजनिंग के लिए आगे कर रही हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि वे जनता की आवाज को दबाकर, प्रशासन पर प्रभाव डालकर और नियम-कानून को मोड़कर अपने हित सुरक्षित करना चाहती हैं।उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि छत्तीसगढ़ कोई कॉरपोरेट कंपनियों की जागीर नहीं है। यह राज्य यहां की जनता का है, आदिवासियों का है, किसानों का है, युवाओं का है, श्रमिकों का है। लेकिन भाजपा की सरकार ने इसे दलालों, पूंजीपतियों और सत्ता संरक्षित अफसरशाही के हवाले कर दिया है।

    हम मांग करते हैं कि इस तरह की नियुक्तियों की स्वतंत्र जांच हो। पूर्व अधिकारियों के कॉरपोरेट रोल पर सख्त नियम बनें। और रायगढ़-तमनार सहित संवेदनशील क्षेत्रों में चल रही सभी कॉरपोरेट गतिविधियों की पारदर्शी समीक्षा की जाए। यदि सरकार ने इस मामले को हल्के में लिया, तो आम आदमी पार्टी सड़क में जाकर इस मुद्दे को उठाएगी। छत्तीसगढ़ महतारी को लूटने वालों, जनता के अधिकारों का सौदा करने वालों और अफसरशाही को कॉरपोरेट दलाली में बदलने वालों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।

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