August 05, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    By – नरेश देवांगन

    जगदलपुर, शौर्यपथ। आड़ावाल से कुरंदी जाने वाले मुख्य मार्ग पर शासकीय विद्युत लाइट खंभों पर पेंट के माध्यम से निजी प्रचार लिखे जाने का मामला सामने आया है। सड़क के दोनों ओर लगे कई सरकारी पोलों पर वाइल्ड वादी का नाम स्थायी रूप से अंकित देखा गया, जिससे शासकीय संपत्ति के उपयोग को लेकर नियमों के पालन पर प्रश्न उठ रहे हैं।

    यह प्रचार किसी अस्थायी बैनर या पोस्टर के रूप में नहीं, बल्कि सीधे पेंट के माध्यम से किया गया है। जानकारों के अनुसार शासकीय परिसंपत्तियों पर बिना सक्षम अनुमति किसी भी प्रकार का लेखन या विज्ञापन नियमों के अनुरूप नहीं माना जाता। पेंट से लिखे गए ऐसे प्रचार को हटाने में समय और संसाधन दोनों की आवश्यकता पड़ सकती है।

    उक्त मार्ग यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में विद्युत खंभों की मूल पहचान प्रभावित होने से संधारण, तकनीकी कार्यों अथवा आपात स्थिति में कठिनाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मामला सार्वजनिक मार्ग से जुड़ा होने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है।

    इस संबंध में सहायक अभियंता, जगदलपुर ग्रामीण, श्री खोबरागड़े ने बताया कि विद्युत खंभों पर किसी भी प्रकार के निजी प्रचार-प्रसार की अनुमति नहीं दी जाती, क्योंकि यह सुरक्षा की दृष्टि से जोखिमपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जा रही है तथा नियमानुसार नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    नागरिकों ने अपेक्षा जताई है कि संबंधित विभाग जांच कर आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि शासकीय संपत्ति का उपयोग निर्धारित उद्देश्य तक ही सीमित रहे और भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो।

    'मोर गांव मोर पानीÓ महाअभियान के तहत मनरेगा में ऐतिहासिक पहल

    बारिश से पहले 10 हजार से अधिक आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य

    निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियां, पंचायत-समुदाय की सहभागिता से विकसित हो रहा मॉडल

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सतत आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 'मोर गांव मोर पानीÓ महाअभियान के अंतर्गत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत आजीविका डबरी (फार्म पोंड) निर्माण का विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के अंतर्गत प्रदेशभर में 10,000 से अधिक आजीविका डबरी का निर्माण कार्य प्रगति पर है। यह कार्य समाज के सबसे कमजोर वर्ग के हितग्राहियों की निजी भूमि पर किया जा रहा है, जिससे एक ओर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर दीर्घकालीन एवं टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं।

    अभियान के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राहियों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि जल संसाधन और आवास आधारित आजीविका को एकीकृत रूप में मजबूत किया जा सके।
    इस योजना के माध्यम से जहां मनरेगा के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो रहा है, वहीं वर्षा जल संचयन को संस्थागत रूप से बढ़ावा मिल रहा है। आजीविका डबरी के माध्यम से अंतर्विभागीय अभिसरण के तहत कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य जल आधारित गतिविधियों की योजनाबद्ध रूप से रूपरेखा तैयार कर उनका क्रियान्वयन किया जाएगा।

    प्रत्येक आजीविका डबरी का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप 20 मीटर म 20 मीटर म 3 मीटर आकार में किया जा रहा है। जल की गुणवत्ता और दीर्घकालीन टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए इनलेट-आउटलेट व्यवस्था तथा सिल्ट अरेस्टिंग चैंबर की अनिवार्य व्यवस्था की गई है।इस अभियान में पंचायतों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। डबरी निर्माण कार्य का शुभारंभ पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर विषय पर विस्तृत चर्चा कर हितग्राहियों की जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही हितग्राहियों से आवश्यक अंशदान भी लिया जा रहा है, ताकि स्वामित्व और सहभागिता की भावना मजबूत हो।

    आजीविका डबरी का निर्माण सैटेलाइट आधारित क्लार्ट ऐप के माध्यम से वैज्ञानिक ढंग से 'रिज-टू-वैली एप्रोचÓ पर किया जा रहा है। यह कार्य विभिन्न विभागों के अभिसरण के साथ कन्वर्जेन्स पैकेज के रूप में लागू किया जा रहा है। पंचायतों के साथ-साथ प्रदान, ट्राइफ, एफईएस सहित अन्य सिविल सोसायटी संगठनों का भी सक्रिय सहयोग प्राप्त हो रहा है।

    सभी निर्माण कार्यों को बारिश से पूर्व पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रति आजीविका डबरी अधिकतम लागत तीन लाख रुपये तय की गई है। जल संरक्षण के साथ-साथ निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण के माध्यम से यह पहल ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण, अभिनव और अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभर रही है।

    गरीब की गुमठी पर बुलडोजर, रसूखदार के पक्के निर्माण पर प्रशासन मौन—दुर्ग में सवालों के घेरे में सुशासन दुर्ग / शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट दुर्ग शहर में अवैध कब्जों का…
    कांग्रेस नेतृत्व वाले ढ्ढहृष्ठढ्ढ्र गठबंधन ने सौंपा नोटिस, 118 सांसदों के हस्ताक्षर — लेकिन आज तक कोई स्पीकर पद से नहीं हटाया जा सका नई दिल्ली / एजेंसी / भारतीय…

    जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ बस्तर को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 7 से 9 फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में आयोजित बस्तर पंडुम को बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत का भव्य उत्सव बताते हुए इससे जुड़े सभी सहभागियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि एक समय बस्तर का नाम आते ही माओवाद, हिंसा और विकास में पिछड़ेपन की छवि उभरती थी, लेकिन आज परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल चुकी हैं। अब बस्तर शांति, विकास और स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जा रहा है। उन्होंने कामना की कि बस्तर का आने वाला समय शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव से परिपूर्ण हो।
    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर मार्गदर्शन से बस्तर आज सांस्कृतिक गौरव और समावेशी विकास के सशक्त प्रतीक के रूप में अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। 'बस्तर पंडुमÓ जैसे आयोजन जनजातीय परंपराओं, लोक-संस्कृति और विरासत को सहेजने के साथ-साथ शांति, विश्वास और समावेशी प्रगति का प्रभावी संदेश देते हैं।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और आजीविका के अवसरों के विस्तार से क्षेत्र में भरोसे और सहभागिता का नया वातावरण बना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में जनजातीय समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ बस्तर को शांति, समृद्धि और विकास की नई ऊँचाइयों तक निरंतर अग्रसर करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    राज्य में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (ष्टशश्व) और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट सेंटर की होगी स्थापना

    प्रदेश में नवाचार, स्टार्ट-अप और कौशल आधारित रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    आईटी, आईटीईएस एवं इमरजिंग टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के भरोसेमंद और आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है छत्तीसगढ़

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य को ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।आधुनिक अधोसंरचना, प्रभावी ई-गवर्नेंस प्रणाली और निवेश-अनुकूल नीतियों के चलते छत्तीसगढ़ आज आईटी, आईटीईएस एवं इमरजिंग टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के लिए एक भरोसेमंद और आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पाक्र्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के मध्य हुए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) उपरांत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवाओं में उद्यमिता विकसित करने और उन्हें आईटी एवं आईटीईएस जैसे क्षेत्रों में विश्वस्तरीय अवसर राज्य के भीतर ही उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल की गई है। इस एमओयू के तहत राज्य में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (ष्टशश्व) एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (श्वस्ष्ठष्ठ) सेंटर की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वन एवं औषधीय उत्पाद आधारित मेडटेक, स्मार्ट सिटी समाधान तथा स्मार्ट कृषि जैसे चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (श्वस्ष्ठष्ठ) सेंटर की स्थापना की जाएगी, जो प्रति वर्ष लगभग 30 से 40 हार्डवेयर स्टार्ट-अप और एमएसएमई को प्रोडक्ट डिजाइन, प्रोटोटाइपिंग, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण की सुविधाएं प्रदान करेगा।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस पहल से प्रदेश के युवाओं को राज्य के भीतर ही इनक्यूबेशन, मेंटरशिप, फंडिंग और आधुनिक प्रयोगशालाओं की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे उच्च कौशल वाले युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन रुकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने एसटीपीआई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्था के सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देशभर में 68 केंद्रों और 24 सेक्टर-विशेष सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से एसटीपीआई का व्यापक अनुभव छत्तीसगढ़ के स्टार्ट-अप और नवाचार इकोसिस्टम को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह एमओयू राज्य के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा और छत्तीसगढ़ को डिजिटल नवाचार, तकनीकी उद्यमिता और स्टार्ट-अप के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, इलेक्ट्रॉनिक और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, निदेशक एसटीपीआई श्री रवि वर्मा, चिप्स के सीईओ श्री प्रभात मलिक सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

      दुर्ग / शौर्यपथ / श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ संस्था द्वारा समाज के बुजुर्ग माता-पिताओं के प्रति सम्मान, संवेदना और सेवा-भाव को समर्पित एक भावनात्मक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत संस्था द्वारा पुलगांव स्थित वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्ग माता-पिताओं को देशभक्ति से ओत-प्रोत फिल्म “बॉर्डर 2” दिखाने के लिए ले जाया गया।
    इस कार्यक्रम में बुजुर्गों एवं श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ के सभी सदस्यों की फिल्म टिकट संस्था की ओर से पूर्णतः निःशुल्क रखी गई थी। फिल्म के दौरान बुजुर्गों के चेहरों पर दिखी मुस्कान और भावनाएं इस पहल की सार्थकता को दर्शा रही थीं।
    इस अवसर पर संस्था की संस्थापिका एवं अध्यक्ष नीतू श्रीवास्तव जी ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ को स्थापित हुए 8 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और इन आठ वर्षों में संस्था द्वारा कई आयोजन किया गए पर यह संस्था का पहला ऐसा भावनात्मक कार्यक्रम रहा जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता सिर्फ महसूस किया जा सकता है।नीतू जी ने कहा कि
    इस पहल से संस्था को एक नया अनुभव प्राप्त हुआ है और बुजुर्ग माता-पिताओं के साथ इस प्रकार का कार्यक्रम कर अत्यंत खुशी महसूस हुई।
    नीतू श्रीवास्तव जी ने आगे कहा कि वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों को आप के प्रेम,साथ ओर सब से कीमती थोड़ा सा आप के समय की आवश्यकता है हमारा प्रयास रहेगा कि ऐसे सेवा और प्रेम से जुड़े कार्यों से प्रेरणा लेकर समाज के अन्य लोग भी आगे आएँ और बुजुर्गों, जरूरतमंदों एवं संवेदनशील विषयों पर कार्य करें, ताकि समाज को एक सकारात्मक, मानवीय और प्रेरक संदेश मिल सके।
    कार्यक्रम में श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ संस्था के सदस्य साधना चौधरी, रूपलता साहू, श्रुति श्रीवास्तव, मनीषा सोनी,सीमा गुप्ता, मनीषा सोनी, निष्ठा सोनी,सुरभि ठाकुर,रानी साहू,कविता विश्वास की सक्रिय उपस्थिति रही।नीतू जी ने कहा कि संस्था के सभी सदस्यों का पूर्ण रूप से साथ होने के कारण कोई भी कार्य संस्था के लिए आसान हो जाता है।
    बुजुर्गों ने संस्था के इस स्नेहपूर्ण प्रयास के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे उनके जीवन का सुखद और भावुक क्षण बताया। श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ संस्था भविष्य में भी इसी प्रकार समाजसेवा, मानवीय संवेदना और सकारात्मक सोच से जुड़े कार्यक्रम निरंतर आयोजित करती रहेगी।

      रायपुर/ शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नक्सलवाद खात्मे की तिथि 31 दिसम्बर 2026 बताये जाने पर सवाल खड़ा करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा नक्सलवाद खात्मे को लेकर क्या केंद्रीय गृहमंत्री एवं मुख्यमंत्री के बीच मतभेद है? केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह नक्सलवाद खात्मे की डेड लाईन 31 मार्च 2026 बताते है, वही गृहमंत्री के साथ बैठक के पश्चात मुख्यमंत्री मीडिया के सवालो का जवाब देते हुए कहते है, 31 दिसम्बर 2026 तक नक्सलवाद खत्म होगा। आखिर क्या चल रहा है? इन दोनों प्रमुखों के बयान से जनता भ्रमित है।सच क्या है? जनता जाना चाहती है। जनता केंद्रीय गृहमंत्री के बयान पर भरोसा करें या राज्य के मुखिया पर?

    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा पूरा प्रदेश चाहता है कि नक्सलवाद खत्म हो।इसकी ठोस रणनीति बने ताकि भविष्य में इस प्रकार से हिंसात्मक गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगे। फोर्स और सुरक्षा के जवान लगातार नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक कार्यवाही कर रहे है। लेकिन गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के बयान का विरोधभास संसय पैदा कर रहा है। क्या केंद्रीय गृहमंत्री हड़बड़ी में है, इसलिये 31 मार्च की बात कर रहे है और मुख्यमंत्री वास्तविकता को जान रहे है, इसलिये 31 दिसम्बर 2026 तक कि डेड लाईन बता रहे है।
    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा नक्सलवाद खात्मे को लेकर मुख्यमंत्री को स्पस्ट जवाब जनता को देना चाहिए। नक्सलवाद के खिलाफ चलाये जा रहे मुहिम में पूरा प्रदेश एक साथ खड़ा हुआ है, लेकिन गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच समन्वय की कमी नजर आ रही जो दोनों के अलग-अलग बयान से झलक रहा है। ये प्रदेश के हित में नही है।

      रायपुर/ शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नक्सलवाद खात्मे की तिथि 31 दिसम्बर 2026 बताये जाने पर सवाल खड़ा करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा नक्सलवाद खात्मे को लेकर क्या केंद्रीय गृहमंत्री एवं मुख्यमंत्री के बीच मतभेद है? केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह नक्सलवाद खात्मे की डेड लाईन 31 मार्च 2026 बताते है, वही गृहमंत्री के साथ बैठक के पश्चात मुख्यमंत्री मीडिया के सवालो का जवाब देते हुए कहते है, 31 दिसम्बर 2026 तक नक्सलवाद खत्म होगा। आखिर क्या चल रहा है? इन दोनों प्रमुखों के बयान से जनता भ्रमित है।सच क्या है? जनता जाना चाहती है। जनता केंद्रीय गृहमंत्री के बयान पर भरोसा करें या राज्य के मुखिया पर?

    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा पूरा प्रदेश चाहता है कि नक्सलवाद खत्म हो।इसकी ठोस रणनीति बने ताकि भविष्य में इस प्रकार से हिंसात्मक गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगे। फोर्स और सुरक्षा के जवान लगातार नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक कार्यवाही कर रहे है। लेकिन गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के बयान का विरोधभास संसय पैदा कर रहा है। क्या केंद्रीय गृहमंत्री हड़बड़ी में है, इसलिये 31 मार्च की बात कर रहे है और मुख्यमंत्री वास्तविकता को जान रहे है, इसलिये 31 दिसम्बर 2026 तक कि डेड लाईन बता रहे है।
    प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा नक्सलवाद खात्मे को लेकर मुख्यमंत्री को स्पस्ट जवाब जनता को देना चाहिए। नक्सलवाद के खिलाफ चलाये जा रहे मुहिम में पूरा प्रदेश एक साथ खड़ा हुआ है, लेकिन गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच समन्वय की कमी नजर आ रही जो दोनों के अलग-अलग बयान से झलक रहा है। ये प्रदेश के हित में नही है।

      रायपुर/शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि 2 साल में ही भाजपा सरकार जनता की नजरों से गिर गई है, अब भाजपा के ही सांसद, विधायक अपने सरकार के क्रियाकलापों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल रहे हैं। राजिम कुंभ में करोड़ों रुपए का बजट कहां खर्च हुआ? जब वहां भारी अव्यवस्था है साधु संतों से लेकर स्थानीय कलाकारों का अपमान हो रहा है, श्रद्धालुओं को भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। कोई ढंग का इंतजाम नहीं है फिर पैसे कहां खर्च किया गया? क्या कुंभ के आयोजन के नाम से भ्रष्टाचार कर उसमें भी बंदरबांट किया जा रहा है? भाजपा विधायक रोहित साहू मेला स्थल में अधिकारियों पर भड़ास निकालकर जनता को भ्रमित कर रहे है क्योंकि कुंभ के आयोजन में वो भी कमेटी में है। ऐसे में उनकी नाराजगी बताती है कि सरकार में कितना भर्राशाही चल रही है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता ननकी राम कंवर लगातार सरकार के भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता के खिलाफ आवाज उठा रहे लेकिन उनके आवाज की अनदेखी की जा रही। ननकी राम के आरोपों पर सरकार की चुप्पी बताती है कि सभी गड़बड़ियां सरकार के इशारे पर हो रही है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जम्बूरी में करोड़ो रुपया की गड़बड़ी हुई, 33 हजार शिक्षकों की भर्ती, यातायात अव्यवस्था और कानून व्यवस्था पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया फिर चुप हो गये? सांसद विजय बघेल मोदी की गारंटी पूरा करने सरकार को पत्र लिखे, फिर चुप्पी साध ली? राजेश मूणत शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाये, फिर चुप हो गये? विधायक सुनील सोनी खराब सड़क, खराब सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़ा किये, फिर चुप हो गये? अब रोहित साहू राजिम कुंभ पर सवाल खड़ा कर रहे है। यह बताता है कि पूरी की पूरी सरकार भ्रष्ट है जो भाजपाई हिस्सा नहीं पा रहे वो तिलमिला रहे।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार के कामकाजों से नाराज सवाल उठाने वाले सांसद, विधायक यदि जनता के प्रति खुद को जिम्मेदार मानते है तो सरकार की नाकामियों के चलते इस्तीफा क्यों नहीं देते? इसी को कहते है मुंह में राम बगल में छुरी, एक ओर जनता की हितैषी बनने का स्वांग करो, दूसरी ओर सत्ता की मलाई खाओ। भाजपा नेताओं की राजनैतिक नौटंकी जनता देख और समझ रही है। ये प्रोपोगंडा चलने वाला नहीं है।

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