August 05, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    राज्य स्तरीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी लगातार तीन वर्षों से प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर रहे हैं

    कोंडागांव / शौर्यपथ /
    शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़े बेंदरी के विद्यार्थियों ने एक बार फिर अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए राज्य स्तर की प्रतियोगिता में शानदार सफलता प्राप्त की है। जशपुर में आयोजित चार दिवसीय राज्य स्तरीय पश्चिम भारत विज्ञान मेला एवं बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में विद्यालय के बाल वैज्ञानिकों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय एवं जिले का नाम गौरवान्वित किया।
    विद्यालय के प्राचार्य श्री संजय ठाकुर के संरक्षण तथा व्याख्याता श्री अंकित गुप्ता एवं श्री दिलीप कश्यप के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में विभिन्न विषयों पर नवाचार आधारित मॉडल प्रस्तुत किए।"स्वच्छता एवं स्वास्थ्य" उप-विषय में जिज्ञासा मानिकपुरी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
    वहीं "अपशिष्ट प्रबंधन एवं प्लास्टिक के विकल्प" विषय में गीतांजलि कोर्राम ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति के दम पर प्रथम स्थानअर्जित किया।
    विशेष उल्लेखनीय है कि विद्यालय ने अपशिष्ट प्रबंधन विषय में लगातार तीसरी बार राज्य स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त कर हैट्रिक बनाई है, जो पर्यावरण संरक्षण एवं कचरा प्रबंधन के प्रति विद्यार्थियों की समझ, रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
    विद्यालय विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर शानदार प्रदर्शन करता आया है। यहां के विद्यार्थी अपनी तकनीकी दक्षता, नवाचार और परिश्रम के दम पर हर वर्ष राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के विज्ञान मेलों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित करते हैं।
    इस उल्लेखनीय सफलता पर प्राचार्य श्री संजय ठाकुर, शिव कुमार तिवारी, नरेंद्र लोंहरे, अली बक्श शेख, राजकुमार तिग्गा, सरिता मांझी, तनुजा देवांगन, मदन सोनेवारा, निर्मल सिन्हा, धनपत नेताम, किरण पोया, दिगपाल दास मानिकपुरी, कमलेश साहू, कल्पना पैकरा, रुपाली शुक्ला, वंदना भोय, अमर मरकाम, भूनश्वर सूर्यवंशी, अनंत चौरे, अमजद पोयाम, दीपक ध्रुव सहित समस्त स्टाफ ने विजयी विद्यार्थियों एवं मार्गदर्शक शिक्षकों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
    विद्यालय परिवार को पूर्ण विश्वास है कि विद्यार्थी आगामी प्रतियोगिताओं में भी अपनी उत्कृष्टता जारी रखते हुए जिले और संस्था का नाम ऊँचाइयों पर पहुँचाएँगे।

       रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस 16 नवंबर के अवसर पर मीडिया जगत से जुड़े सभी लोगों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे लोकतंत्र की विशेषता और आधारशिला है। निष्पक्ष प्रेस और निर्भीक पत्रकारिता स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। मीडिया नागरिकों को उनके अधिकार और दायित्व के प्रति सचेत कर देशहित व लोकहित के प्रति जागरूक करता  है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय प्रेस दिवस भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रेस के महत्व और योगदान को याद करने का दिन है।  
    मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर आशा व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया अपनी प्रखरता, संवेदनशीलता और सत्यनिष्ठा के साथ लोकतंत्र के पथ को और अधिक प्रकाशमान करता रहेगा।

    रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का आगामी 20 नवंबर को सरगुजा जिला आगमन कार्यक्रम प्रस्तावित है।राष्ट्रपति के प्रवास की तैयारियों के सम्बंध में आज प्रदेश के वित्त मंत्री एवं सरगुजा जिले के प्रभारी मंत्री ओ. पी. चौधरी ने संभागस्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में सरगुजा संभाग के समस्त जिलों के कलेक्टर, एसपी सहित सम्बंधित अधिकारी वर्चुअल रूप से जुड़े।
    बैठक में वित्तमंत्री चौधरी ने जिलेवार चर्चा करते हुए स्टॉल निर्माण, आवागमन, पार्किंग सहित अन्य तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल सहित हेलीपैड एवं आवागमन मार्ग में भी सुरक्षा के कड़े इंतेजाम हों। स्वास्थ्य विभाग की टीम कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे। फायरब्रिगेड, एसडीआरएफ की टीम की कार्यक्रम स्थल पर तैनाती करें। उन्होंने कार्यक्रम हेतु मजिस्ट्रियल ड्यूटी के सम्बन्ध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन आपसी समन्वय से कार्यक्रम को सफल बनाएं। सभी विभाग अपने दायित्वों का गम्भीरता से निर्वहन करें। बैठक के पश्चात उन्होंने कार्यक्रम स्थल पीजी कॉलेज ग्राउंड का निरीक्षण किया। उन्होंने टेंट पंडाल की व्यवस्था, बैठक व्यवस्था, स्टॉल आवागमन, यातायात, पार्किंग, रूट चार्ट , हेलिपैड, सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
    इस अवसर पर लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, सरगुजा संभागायुक्त नरेन्द्र दुग्गा, पुलिस महानिरीक्षक दीपक झा, कलेक्टर विलास भोसकर, पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, सम्बंधित अधिकारी उपस्थित थे।

    रायपुर / शौर्यपथ /

    राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर आज जनसंपर्क संचालनालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विचार गोष्ठी में संपादकों, वरिष्ठ पत्रकारों और जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
    वरिष्ठ संपादक जयप्रकाश मिश्रा ने कहा कि कुछ लोग अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए भ्रामक सूचनाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ एक ही तरह की भ्रामक सामग्री को भेजते हैं, जिससे उसका एल्गोरिदम बढ़ जाता है और पाठक भ्रमित होकर उसे सच मान बैठता है। उन्होंने दिल्ली मेट्रो का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीधरन जी जब भी मेट्रो में किसी तरह की रूकावट आती थी तब तुरंत ही सूचना प्रचार माध्यमों में समाचार जारी कर तकनीकी त्रुटि को ठीक करने में लगने वाला संभावित समय भी बता देते थे। जब सही और गुणवत्तापूर्ण सूचनाएं आगे बढ़ती हैं तो भ्रामक सूचनाएं ठहर नहीं पाती।
    संपादक रवि भोई ने कहा कि खबरों की सच्चाई अहम है इससे समझौता नहीं करना चाहिए। भले ही समय लगता हो लेकिन पुष्टि के पश्चात ही खबरे प्रसारित करना चाहिए। संपादक श्री एएन द्विवेदी ने कहा कि सूचनाओं की गुणवत्ता और उनके प्रसारण से पडऩे वाले प्रभाव के आधार पर बेहद गंभीरता बरतते हुए इन्हें जनसामान्य को प्रेषित किया जाना चाहिए। इसमें छोटी चूक भी बड़ी दुर्घटना का रूप ले लेती है। वरिष्ठ पत्रकार अशोक साहू ने कहा कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता के मानदंडों पर यदि काम किया जाए तो किसी तरह की भ्रामक सूचना जाने की आशंका नहीं रहती।
    अपर संचालक उमेश मिश्रा ने कहा कि मीडिया की विश्वसनीयता लोकतंत्र का आधार स्तंभ है, इसे किसी भी कीमत पर बनाए रखना जरूरी है। मीडिया को तकनीकी बदलाव के चलते तेजी से फैलती गलत सूचनाओं पर अपनी जिम्मेदारी के साथ-साथ सतर्कता बरतनी होगी।
    अपर संचालक आलोक देव ने कहा कि मीडिया की सबसे बड़ी ताकत है उसकी विश्वसनीयता। मीडिया सिर्फ खबरे नहीं देता, प्रेस मार्गदर्शन करता है, संदेह दूर करता है और विश्वास का निर्माण करता है। उप संचालक श्री सौरभ शर्मा ने कहा कि आज का दौर एआई का है ऐसे समय में गलत सूचनाओं का एल्गोरिथम बढऩे से व्यापक रूप से हमारे बीच पहुंचता है। हमें ऐसी सूचनाओं को जांच-परख कर ही प्रसारित करना चाहिए। कार्यक्रम में अरविन्द मिश्रा सहित अनेक लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनसंपर्क विभाग के अधिकारी और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    रायपुर / शौर्यपथ /

    छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रारम्भ होने के पूर्व से ही प्रदेश में अवैध परिवहन से आने वाले धान की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पिछले एक नवंबर से 16 नवंबर तक लगभग 19 हजार 320 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इस बार मार्कफेड द्वारा राज्य में अवैध परिवहन के जरिए अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले धान को रोकने के लिए राज्य के सीमावर्ती जिलों में चेकपोस्ट और कलेक्टर की अध्यक्षता में टॉस्कफोर्स भी बनाए गए हैं। इसके साथ ही मार्कफेड में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था की सतत् निगरानी की जा रही है।
    मार्कफेड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले एक नवंबर से 16 नवंबर के अवधि में सीमावर्ती विभिन्न जिलों से छत्तीसगढ़ राज्य में अवैध परिवहन के माध्यम से आने वाले धान में सर्वाधिक महासमुंद जिले में 4266 क्विंटल धान जब्त किया गया है। इसी प्रकार बलरामपुर जिले में 4139 क्विंटल, सूरजपुर जिले में 1750 क्विंटल, रायगढ़ जिले में 1201 क्विंटल, जशपुर जिले में 1157 क्विंटल, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 967 क्विंटल, कोण्डागांव जिले में 869 क्विंटल, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 687 क्विंटल, राजनांदगांव 607 क्विंटल, मुंगेली में 490 क्विंटल, बलौदाबाजार में 386 क्विंटल, बिलासपुर में 273 क्विंटल, कोरिया में 253 क्विंटल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 250 क्विंटल, सरगुजा में 240 क्विंटल, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 228 क्विंटल, दंतेवाड़ा में 220 क्विंटल, बस्तर जिले में 218 क्विंटल, सक्ती में 137 क्विंटल, सुकमा में 130 क्विंटल, बालोद में 123 क्विंटल, गरियाबंद में 122 क्विंटल, जांजगीर-चांपा में 119 क्विंटल, कवर्धा में 90 क्विंटल, कोरबा में 85 क्विंटल, रायपुर में 84 क्विंटल, धमतरी में 72 क्विंटल, नारायणपुर में 53 क्विंटल, दुर्ग में 38 क्विंटल, बेमेतरा में 32 क्विंटल, मोहला-मानपुर-चौकी में 27 क्विंटल धान जब्त किए गए हैं।
    उल्लेखनीय है कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के पूर्व प्रदेश में अवैध धान परिवहन और संग्रहण पर सख्त निगरानी जारी रखते हुए आज दो महत्वपूर्ण कार्रवाईयाँ की गईं। मार्कफेड के इंटीग्रेटेड कंट्रोल सिस्टम से प्राप्त 600 बैग (231.5 क्विंटल) अवैध धान संबंधी अलर्ट पर तत्काल कार्रवाई करते हुए कोंडागांव जिले की टीम ने मौके पर पहुंचकर धान जप्त किया। सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाए जाने और त्वरित अलर्ट-रिस्पॉन्स सिस्टम की बदौलत अन्य राज्यों से धान की अवैध आमद को रोकने में प्रभावी सफलता मिल रही है।
    इसी क्रम में, रात्री गश्त के दौरान ग्राम त्रिशूली, थाना सनवाल क्षेत्र में अशोक सिंह पिता रामचरित्र के घर के बाहर बने शेड में दो अलग-अलग स्थानों पर कुल 222 कट्टा धान पाया गया। विवाद की स्थिति को देखते हुए दिन में पुन: तहसीलदार रामचंद्रपुरपुर, थाना प्रभारी सनवाल, महिला पुलिस, तथा मंडी कर्मचारियों की मौजूदगी में विस्तृत जांच की गई और धान की विधिवत जप्ती की कार्रवाई पूरी की गई। शासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता और अवैध गतिविधि को हर स्तर पर जीरो टॉलरेंस के साथ रोका जाएगा।
    खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मार्कफेड द्वारा धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए एकीकृत कंट्रोल सेंटर के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी की जा रही है। साथ ही अवैध परिवहन के माध्यम से राज्य में आने वाले धान को रोकने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा सतत् निगरानी रखी जा रही है।

    बिहार में सत्ता बदलाव के संकेत तेज! हृष्ठ्र की बंपर जीत के बाद किसके हाथ जाएगा ताज? शपथ से पहले सियासी सरगर्मी चरम

    पटना / शौर्यपथ /

    बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है। दो चरणों की मतदान प्रक्रिया और शुक्रवार को हुई मतगणना के बाद तस्वीर साफ हो गई है— हृष्ठ्र ने 202 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है , जिसमें 89 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। महागठबंधन मात्र 34 सीटों पर सिमट गया।
    हालाँकि हृष्ठ्र ने अभी तक औपचारिक रूप से सरकार गठन का दावा नहीं पेश किया है, लेकिन अंदरखाने मंथन जारी है। इसी बीच तेज प्रताप यादव की नई राजनीतिक सक्रियता ने समीकरणों में नया मोड़ ला दिया है।

    तेज प्रताप के 'समर्थन संकेतÓ से बढ़ी हलचल -सरकार में आएंगे साथ?
    तेज प्रताप यादव की जनशक्ति जनता दल की बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता प्रेम कुमार यादव ने बड़ा बयान दिया— बिहार के विकास के लिए जो भी उचित होगा, तेज प्रताप उसे करेंगेज् सरकार में सकारात्मक भूमिका निभाने को तैयार हैं। इसे राजनीतिक गलियारों में हृष्ठ्र सरकार को बाहरी या अंदरूनी समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
    तेज प्रताप ने अपनी बहन रोहिणी आचार्य को पार्टी में मुख्य संरक्षक बनाने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा—"हम उनके चरणों में गिरकर भी उन्हें पार्टी में लाएँगे, क्योंकि जनशक्ति जनता दल ही असली लालू प्रसाद यादव की पार्टी है।"

    नीतीश कुमार सरकार आज देगी इस्तीफा; कल होगी कार्यवाहक व्यवस्था की शुरुआत
    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 17 नवंबर को अंतिम कैबिनेट बैठक बुलाई है, जिसमें विधानसभा भंग करने की अनुशंसा , नई विधानसभा के गठन , पर मुहर लगेगी। उसके बाद नीतीश कुमार राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे, और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। नई सरकार के गठन तक नीतीश कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे।

    19 या 20 नवंबर को नए मुख्यमंत्री का शपथ समारोह, क्करू मोदी हो सकते हैं शामिल
    गांधी मैदान में भव्य समारोह की तैयारी शुरू हो चुकी है।17 से 20 नवंबर गांधी मैदान आम लोगों के लिए बंद , 19 या 20 नवंबर शपथ ग्रहण की संभावित तारीख बताई जा रही है शपथ ग्रहण में क्करू मोदी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री हो सकते हैं शामिल

    सरकार गठन फ ॉर्मूला तय-6 विधायकों पर 1 मंत्री!
    बीजेपी-जेडीयू के बीच पहला दौर की बातचीत पूरी जिसमे मंत्रियों की संख्या और हिस्सेदारी पर सहमति बनाने की बात कही जा रही है सूत्रों के अनुसार 6 विधायकों पर 1 मंत्री का फार्मूला लागू किया जाएगा।इससे साफ है कि नई सरकार में चेहरों की संख्या सीमित और चयन बेहद रणनीतिक होगा।

    हृष्ठ्र की जीत पर मुकेश सहनी का कटाक्ष - पैसे के दम पर जीते!
    वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने हार को स्वीकारते हुए भी एनडीए पर तीखा हमला बोला—महिलाओं को पैसे देकर वोट खरीदा गयाज् लोकतंत्र की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने लालू परिवार की कलह को "पारिवारिक मामला" बताते हुए दोषारोपण की राजनीति को गलत ठहराया।

    रोहिणी आचार्य का भावनात्मक विस्फोट— "पिता को बचाने के लिए दी गई किडनी को गंदा बताया जा रहा"
    लालू यादव की बेटी रोहिणी ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक पोस्ट किया—"मेरे पति या बच्चों से अनुमति न लेकर पिता को बचाया, पर आज उसी बलिदान को गंदा कहा जा रहाज् किसी घर में 'रोहिणीÓ जैसी बेटी न हो।"उनके इस पोस्ट ने परिवार की अंदरूनी खटास को और उजागर कर दिया है।
    मुख्यमंत्री आवास पर बैठकें तेज - बीजेपी अध्यक्ष, डिप्टी सीएम समेत जेडीयू के कई नेता पहुंचे लगातार सीएम हाउस में बैठकें कर रहे हैं। हृष्ठ्र विधायक दल की बैठक में नए नेता का चयन भी संभव है।

    बिहार की सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा?
    शपथ ग्रहण की तारीख तय है, स्थल तैयार है, मैदान बंद है। अब बस सवाल एक— हृष्ठ्र का मुख्यमंत्री कौन होगा? बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, मगर नीतीश की भूमिका भी निर्णायक बनी हुई है। तेज प्रताप की सक्रियता ने राजनीतिक समीकरण और रोचक बना दिए हैं।अगले 48 घंटे बिहार की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

    दुर्ग। शौर्यपथ।

    दुर्ग जिला पंचायत में चाय–नाश्ते के नाम पर भ्रष्टाचार का बड़ा खेल उजागर हुआ है। जनदर्शन में पहुंचे युवा कांग्रेस नेता यशवंत देशमुख ने एक गंभीर मामले की शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि जिला पंचायत कार्यालय द्वारा 50 रुपये के नाश्ता–चाय के लिए 230 रुपये की अवैध भुगतान किया गया है।

    दो साधारण बिल… और उनमें छिपी सैकड़ों नहीं, हजारों रुपये की लूट—यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है।

    50 रुपये की चाय–नाश्ता ‘जादुई’ रूप से बना 230 रुपये!

     

    शिकायत में बताया गया है कि

    चाय — ₹10,नाश्ता — ₹30,पानी — ₹10

    कुल वास्तविक लागत : ₹50 प्रति व्यक्ति

    लेकिन जिला पंचायत कार्यालय ने इन साधारण वस्तुओं की प्रति प्लेट ₹230 का भुगतान कर दिया।यानी प्रति प्लेट ₹180 रुपये की सीधी लूट, जो एक मनरेगा मजदूर की एक दिन की मजदूरी से भी ज्यादा है।

    सबसे चौंकाने वाली बात—यह भुगतान बिना GST बिल के किया गया, जो नियमों के पूर्ण विरुद्ध है।ग्राम पंचायतों में जहाँ बिना GST बिल के भुगतान नहीं किया जाता, वहीं जिला पंचायत जैसे उच्च कार्यालय में ही नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किया गया… वो भी कई बार!

    महिला स्व-सहायता समूह को छोड़ा गया, सड़क किनारे की छोटी दुकान को मिल गया हजारों का भुगतान!

    जिला पंचायत ने गढ़ कलेवा का टेंडर महिला समूह को दिया है जहाँ सिर्फ ₹130 में पूरी स्पेशल थाली उपलब्ध है।इसके बावजूद चाय–नाश्ता के नाम पर 230 रुपये की खरीद कर दी गई!

    सवाल उठता है—

    ? महिला समूह के उत्थान की बात सिर्फ कागजों पर ही क्यों?

    ? जब बेहतर विकल्प उपलब्ध था, तो फिर छोटी सी चाय दुकान को इतना बड़ा बिल किसकी सिफारिश पर?

    खाली बिल का ‘चमत्कार’ — दुकानदार ने खोली पोल

     

    चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि चौहान चाय–नाश्ता सेंटर के मालिक ने स्वयं कहा कि उन्होंने सिर्फ खाली बिल दिया था, उसमें लिखावट जिला पंचायत के द्वारा की गई या किसी और के द्वारा इसकी जानकारी नहीं है इस बिल मे उनके हस्ताक्षर भी नहीं है!

     

    इससे यह साफ हो जाता है कि—

    ✔ बिल में हेरफेर कार्यालय में बैठकर की गई

    ✔ संख्या व दरें बाद में मनमानी तरीके से भरी गईं

    ✔ पूरी प्रक्रिया पूर्वनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है

    राजस्व की डकैती या ‘चाय–नाश्ता घोटाला’?

     

    कुछ ही घंटों के दो बैठकों का बिल 20 हजार और 35 हजार रुपये तक पहुंचा देना…यह कोई साधारण त्रुटि नहीं, बल्कि राजस्व की सीधी लूट है।

     

    ऐसे में बड़ा सवाल—

    क्या जिला प्रशासन इस खुली डकैती पर कठोर कार्रवाई करेगा

    या फिर ‘अपना हिस्सा’ लेकर मौन साध लेगा?

    क्योंकि अगर सिर्फ चाय–नाश्ते के दो बिलों में यह स्थिति है,तो अन्य बिलों की जांच में लाखों रुपये का घोटाला सामने आना कोई बड़ी बात नहीं!

     

     

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    15वीं वित्त की राशि—जनहित के नाम पर भ्रष्टाचार का महाभोज

     

    15वीं वित्त आयोग की राशि गांवों के विकास, बुनियादी सुविधाओं और जनहित के लिए होती है।

    लेकिन यहां अधिकारियों ने उसे —

    चाय–पानी और नाश्ते के नाम पर फर्जी बिल बनाकर ‘कमाई का जरिया’ बना दिया।

     

    जब ग्राम पंचायत स्तर पर छोटी गलती पर भी

    सरपंच–सचिव निलंबित कर दिए जाते हैं,

    तो फिर जिला पंचायत जैसी उच्च इकाई में बैठे भ्रष्ट अधिकारी क्यों सुरक्षित हैं?

     

     

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    कलेक्टर से कठोर कार्रवाई की मांग

     

    युवा कांग्रेस नेता ने स्पष्ट मांग की है—

     

    फर्जी भुगतान की तत्काल वसूली (रिकवरी) की जाए

     

    संबंधित जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित किया जाए

     

    पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं व्यापक जांच कराई जाए

     

    जिला पंचायत के सभी बिलों का ऑडिट कराया जाए

     

     

     

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    प्रशासन की आँखें खोलने वाला प्रश्न

     

    दुर्ग जिला में जहां आम जनता एक-एक रुपये की सुविधा का इंतज़ार करती है,

    वहीं अधिकारी चाय के बिल पर ही हजारों रुपये उड़ा रहे हैं।

     

    क्या शासन अब भी चुप रहेगा?

    या फिर यह मामला उस ‘भ्रष्टाचार की चाय’ का पहला घूंट साबित होगा,

    जो पूरे तंत्र की पोल खोल देगा?

    शौर्यपथ राशिफल / आज का दिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कई राशियों के लिए सकारात्मक और उन्नति भरा रहेगा। सूर्य का राशि परिवर्तन वृश्चिक राशि में…
    भाजपा की 'वोट चोरी" का चौंकाने वाला रहस्य ? शौर्यपथ विश्लेषण / बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे घोषित हो चुके हैं, और एक बार फिर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने…

    जगदलपुर में पत्रकारों के बीच पहला शो—बस्तर की वास्तविकता, दर्द और उम्मीद का संजीव चित्रण

     

    By- नरेश देवांगन 

    जगदलपुर, शौर्यपथ। बहुप्रतीक्षित छत्तीसगढ़ी फिल्म “माटी” शुक्रवार को पूरे प्रदेश में रिलीज होते ही चर्चा का केंद्र बन गई। बस्तर में लंबे समय से प्रतीक्षित यह फिल्म अपने पहले ही दिन जगदलपुर के स्थानीय बिनाका मॉल स्थित मल्टीप्लेक्स में बस्तर जिला पत्रकार संघ के सदस्यों के लिए विशेष शो के रूप में प्रदर्शित की गई। बड़ी संख्या में पहुंचे पत्रकारों ने फिल्म देखकर बस्तर की वास्तविकताओं से रूबरू होने का अनुभव साझा किया।

    फिल्म माटी न सिर्फ मनोरंजन करती है, बल्कि बस्तर की मिट्टी, संस्कृति, लोकजीवन और संघर्ष को पहली बार इतने सजीव, भावनात्मक और संवेदनशील रूप में बड़े पर्दे पर सामने लाती है। घने जंगलों, घाटियों, झरनों और दूरस्थ गांवों की प्राकृतिक सुंदरता को कैमरे ने एक ऐसी दृष्टि दी है, जिसने दर्शकों को अपनी ही मिट्टी से नए सिरे से जोड़ दिया।

    फिल्म की कहानी नक्सलवाद की छाया में जी रहे बस्तरवासियों की पीड़ा, भय, प्रशासनिक तंत्र की जटिलताओं और आम लोगों के संघर्ष को बिना किसी आडंबर के पेश करती है। हिंसा और अनिश्चितता के बीच पनपती एक शांत, सच्ची और मासूम प्रेम कहानी इस फिल्म की भावनात्मक धड़कन बनकर उभरती है, जो अंधेरे परिस्थितियों में भी उम्मीद और जिंदगी की किरण दिखाती है।

    फिल्म की खासियत यह है कि इसमें बस्तर के स्थानीय कलाकारों ने बड़ी संख्या में अभिनय किया है। उनका बोली-बानी, हावभाव और जीवनशैली कहानी को वास्तविक और भरोसेमंद आयाम देती है। निर्देशक ने कलाकारों को सिर्फ अभिनय नहीं कराया, बल्कि उन्हें अपनी ही कहानी को जीने का अवसर दिया है।

    चन्द्रिका फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित फिल्म के निर्माता व कथाकार सम्पत झा ने कहा कि “माटी सिर्फ एक फिल्म नहीं, यह बस्तर की पहचान और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यहां की खुशबू, दर्द और उम्मीद को दुनिया के सामने लाना ही मकसद था।” उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में नक्सलवाद के डर के कारण स्थानीय लोग शामिल होने से हिचकिचा रहे थे, लेकिन बाद में वे खुद इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर गर्व महसूस करने लगे।

    फिल्म में 1000 से अधिक स्थानीय लोगों ने छोटी-बड़ी भूमिकाओं में काम किया है, जिससे इसका प्रत्येक दृश्य बस्तर की सच्चाई के और करीब नजर आता है।

    फिल्म के निर्देशक अविनाश प्रसाद, जिन्होंने वर्षों तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्य किया है, ने बस्तर के सामाजिक ताने-बाने को बेहद जीवंत निर्देशन के साथ परदे पर उतारा है।

    छत्तीसगढ़ी फिल्मों के लोकप्रिय संगीतकार अमित प्रधान ने बैकग्राउंड स्कोर से फिल्म को गहराई दी है, वहीं मनोज पांडेय के लिखे गीत कहानी के संवेदनशील पहलुओं को और प्रभावी बनाते हैं।

    फिल्म की संपूर्ण शूटिंग बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों, नदी-घाटियों, पहाड़ों, जंगलों और दुर्गम गांवों में की गई है। इन प्राकृतिक दृश्यों की मौलिक सुंदरता ने फिल्म को दृश्यात्मक रूप से और भी आकर्षक बना दिया है।

    मुख्य कलाकारों में महेन्द्र ठाकुर (भीमा), भूमिका साहा (उर्मिला) सहित भूमिका निषाद, राजेश मोहंती, आशुतोष तिवारी, दीपक नाथन, संतोष दानी, निर्मल सिंह राजपूत, जितेन्द्र ठाकुर, नीलिमा, लावण्या मानिकपुरी, पूर्णिमा सरोज, श्रीधर राव, बादशाह खान और कई स्थानीय कलाकारों ने दमदार अभिनय कर दर्शकों का दिल जीता है।

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