August 05, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    बीजेपी ने कैसे जीता बिहार विधान सभा 2025 का चुनाव ? तरीका जानकर अन्य राजनैतिक पार्टिया भी रह जाएंगी हैरान! Featured

    • rounak group

    भाजपा की 'वोट चोरी" का चौंकाने वाला रहस्य ?

    शौर्यपथ विश्लेषण /

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे घोषित हो चुके हैं, और एक बार फिर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत ने 20 साल से चली आ रही 'एंटी-इनकम्बेंसीÓ की लक्ष्मण रेखा को भी पार कर दिया। एक समय बिहार में कमज़ोर मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी आज राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
    चुनाव परिणामों के बाद, हमेशा की तरह, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल फिर से एनडीए की जीत पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग का सहयोग ,Óईवीएम धांधलीÓ और 'वोट चोरीÓ जैसे पुराने आरोप फिर से लगाए जा रहे हैं, साथ ही चुनावी समय में महिलाओं के खाते में राशि हस्तांतरण जैसी बातों का जि़क्र किया जा रहा है।
    लेकिन, इस शोरगुल में विपक्ष एक सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक कारण को नजऱअंदाज़ कर रहा है: वह है भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं की ज़मीनी मेहनत, जिसे कांग्रेस ने 'खुलेआम वोट की चोरीÓ कहा है।

    संगठन की ताक़त: वह चोरी जो खुलेआम होती है!
    विपक्ष यह समझने में विफल रहा कि जहां वे केवल कुछ बड़े चेहरों और भाषणों के भरोसे 20 साल पुरानी सरकार को उखाड़ फेंकने का दावा कर रहे थे, वहीं बीजेपी का संगठन चुनाव से महीनों पहले ही अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर चुका था।
    बूथ -स्तरीय डेटा संग्रह: बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ज़मीनी स्तर पर, बूथ स्तर तक, सभी मतदाताओं की विस्तृत जानकारी एकत्रित की।
    डीप वॉटर रिसचर्: उन्होंने गहन छानबीन की कि 'कच्चे वोटÓ कौन से हैं, यानी वे मतदाता जो भाजपा के कोर वोटर नहीं हैं, लेकिन उन्हें पार्टी के पक्ष में लाया जा सकता है।
    नतीजा: बीजेपी ने कांग्रेस की आंखों के सामने ही, उनके संभावित मतदाताओं को अपनी संगठनात्मक शक्ति और प्रभावी संवाद के माध्यम से 'चुराÓ लिया—यह 'चोरीÓ आरोप नहीं, बल्कि लोकतंत्र में कार्यकर्ताओं की मेहनत और कुशल रणनीति का दूसरा नाम है।

    बड़े पदों पर, मगर काम ज़मीन पर: 'ऑफ द कैमराÓ मेहनत
    यह जीत सिर्फ बड़े वक्ताओं या सोशल मीडिया की दमदारी का परिणाम नहीं है, बल्कि उस कार्यशैली का नतीजा है जहां बड़े से बड़ा नेता भी एक साधारण कार्यकर्ता की तरह व्यवहार करता है। उक्त दिए गए उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि संगठन की जि़म्मेदारी क्या होती है:
    जिम्मेदारी सर्वोपरि: दुर्ग जिले से बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पांडे ने राष्ट्रीय स्तर के बड़े पद पर रहते हुए भी, महीनों तक बिहार में डेरा डाला और ज़मीनी स्तर पर काम किया।
    पूरी फ़ौज का समर्पण: मंत्री गजेंद्र यादव और विधायक रिकेश सेन जैसे जनप्रतिनिधि भी लगातार बिहार के दौरे पर रहे और संगठन के निर्देशों का पालन किया।
    व्यक्तिगत सुख से ऊपर संगठन: विधायक ललित चंद्राकर जैसे साधन-संपन्न नेता हफ्तों तक अपने गृह क्षेत्र से दूर रहे, यहां तक कि अपने जन्मदिन के अवसर पर भी अपने विधानसभा क्षेत्र में मौजूद नहीं रहे। उन्होंने संगठन द्वारा दी गई जि़म्मेदारी को व्यक्तिगत महत्त्वकांक्षाओं पर वरीयता दी।
    इससे पता चलता है कि केवल एक जिले से बड़े पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि, बिना किसी कैमरे के आकर्षण के, एक साधारण कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे थे।

    निर्णायक रणनीति: परिणाम को अपने पक्ष में मोडऩा
    पूरे प्रदेश और देश से आए भाजपा के जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने जो मेहनत की, उसने उन 'अन्यÓ वोटों को भी अपनी तरफ मोड़ा जो पारंपरिक रूप से किसी और दल को जाते थे।
    बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव में 101 सीटों पर चुनाव लड़ा और अपनी पूरी ताकत झोंक दी। यह ताकत कोई जादुई तिकड़म नहीं थी, बल्कि संगठनात्मक शक्ति की वह कार्यकुशलता थी जिसने परिवर्तन की लहर (्रठ्ठह्लद्ब-ढ्ढठ्ठष्ह्वद्वड्ढद्गठ्ठष्4) के बावजूद भी परिणाम को अपने पक्ष में करने का माद्दा दिखाया। महीनो की म्हणत का परिणाम यह रहा की आज भाजपा बिहार की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने है अब सहयोगियों को उनकी ज़रूरत है
    निष्कषर्: लोकतंत्र में 'वोट की चोरीÓ का मतलब तब बदल जाता है जब कोई पार्टी आरोप-प्रत्यारोप से परे जाकर, ज़मीनी स्तर पर, बूथ मैनेजमेंट की बारीकियाँ समझकर, और अपने बड़े नेताओं को भी 'साधारण कार्यकर्ताÓ बनाकर अपने प्रतिद्वंद्वी के मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करती है।
    इस 'चोरीÓ को रोकने के लिए, अन्य दलों को भी सिर्फ आरोप लगाने के बजाय, अपने संगठन को मजबूत बनाना होगा, क्योंकि यह जीत बीजेपी के कार्यकर्ताओं के समर्पण और संगठन के निर्देशों के प्रति उनकी तत्परता का प्रमाण है।
    संपादक 6शरद पंसारी 8- शौर्यपथ दैनिक समाचार

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision