August 03, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    क्या 5 जजों की संविधान पीठ को सौंपा जाएगा मामला? केंद्र के हलफनामे पर भी होगी तीखी बहस

    नई दिल्ली। देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में अब 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति से जुड़े नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच — Justice Dipankar Datta और Justice Satish Chandra Sharma — मामले की अगली सुनवाई करेगी।

    यह मामला केवल नियुक्ति प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था Election Commission of India की निष्पक्षता, स्वायत्तता और लोकतंत्र की पारदर्शिता से भी सीधे जुड़ा माना जा रहा है।

    संविधान पीठ को भेजे जाने पर बड़ा फैसला संभव

    14 मई की सुनवाई के दौरान अदालत में तीखी बहस देखने को मिली थी। अब 19 मई को यह तय हो सकता है कि क्या इस मामले को 5 जजों की संविधान पीठ (Constitutional Bench) के पास भेजा जाएगा।

    यदि मामला संविधान पीठ को सौंपा जाता है, तो यह आने वाले समय में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर ऐतिहासिक संवैधानिक व्याख्या तय कर सकता है।

    केंद्र सरकार के हलफनामे पर उठेंगे सवाल

    केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करना कोई संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है।

    इसी बिंदु को लेकर याचिकाकर्ताओं की ओर से कड़ी आपत्ति जताई जा रही है। विपक्षी पक्ष का तर्क है कि यदि चयन प्रक्रिया में न्यायपालिका की भूमिका कम होती है, तो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

    अतिरिक्त दस्तावेज और दलीलें पेश होंगी

    सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे 19 मई को अपने अतिरिक्त दस्तावेज, लिखित तर्क और बची हुई दलीलें अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता से जुड़े व्यापक सवालों को भी प्रभावित कर सकती है।

    लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा

    देशभर की निगाहें अब 19 मई की सुनवाई पर टिकी हैं। यह मामला केवल एक कानून की वैधता का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और जनता के भरोसे का भी प्रतीक बन चुका है।

    यदि सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर संविधान पीठ गठित करता है, तो यह भारतीय संवैधानिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में शामिल हो सकता है।

     

    दुर्ग/शौर्यपथ।
    दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी की मासिक बैठक शुक्रवार को राजीव भवन में आयोजित हुई, जिसमें संगठनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ आगामी 18 मई को प्रस्तावित दुर्ग नगर पालिका निगम घेराव को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। बैठक में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नगर निगम की कार्यप्रणाली, कथित भ्रष्टाचार, जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और प्रशासनिक मनमानी को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया।

    बैठक में यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया गया कि कांग्रेस अब “सड़क से सदन तक” नगर निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ संघर्ष छेड़ने के मूड में है। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि दुर्ग की शहरी सरकार के कार्यकाल में विकास के दावे जितने बड़े दिखाई देते हैं, जमीनी स्तर पर उतनी ही गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं।

    “भ्रष्टाचार चरम पर, जनता त्रस्त”

    बैठक में मौजूद नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है और आम नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं। पेयजल, सफाई, सड़क, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, ठेकेदारी व्यवस्था और योजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने निगम प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया।

    कांग्रेस पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि शहर में विकास कार्यों का संतुलन बिगड़ चुका है तथा कई क्षेत्रों में राजनीतिक भेदभाव के आधार पर काम किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।

    महापौर अलका बागमार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    बैठक में कई वक्ताओं ने महापौर अलका बागमार की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लगाए। कांग्रेस नेताओं का आरोप रहा कि निगम में निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी नहीं दिखाई देती और कई मामलों में जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया जाता।

    कांग्रेस का दावा है कि निगम की वर्तमान व्यवस्था में जनहित से अधिक “प्रशासनिक दबाव और राजनीतिक संरक्षण” प्रभावी नजर आ रहा है। पूर्व में भी नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न विवाद और आरोप सामने आते रहे हैं, जिनका उल्लेख करते हुए नेताओं ने कहा कि जनता अब जवाब चाहती है।

     

    धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में आंदोलन

    शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में 18 मई को प्रस्तावित निगम घेराव को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया। बैठक में बड़ी संख्या में उपस्थित कांग्रेसजनों को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि आज की उपस्थिति यह संकेत दे रही है कि कांग्रेस संगठन लगातार मजबूत हो रहा है और जनता का समर्थन भी पार्टी को मिल रहा है।

    “जनता की आवाज बुलंद करती रहेगी कांग्रेस”

    बैठक के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी जनहित के मुद्दों पर लगातार संघर्ष करती रहेगी और यदि नगर निगम प्रशासन ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया तो आंदोलन और व्यापक होगा।

    अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि 18 मई का प्रस्तावित निगम घेराव दुर्ग की राजनीति में बड़ा शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकता है। वहीं, नगर निगम और महापौर पक्ष की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

       दुर्ग। शौर्यपथ । दुर्ग नगर पालिक निगम के इतिहास में 'शहर सरकार' का ऐसा रंग-ढंग शायद ही कभी देखा गया हो। जिस कुर्सी पर कभी समन्वय और विकास की राजनीति हुआ करती थी, आज वहां केवल विवादों का 'हाई-वोल्टेज ड्रामा' चल रहा है। निगम गलियारों से लेकर चाय के ठेलों तक अब बस एक ही सुगबुगाहट है—क्या महापौर अलका बाघमार के खिलाफ 'महाभियोग/ अविश्वास प्रस्ताव ' आएगा?
    नाराजगी सिर्फ विपक्ष (कांग्रेस) को नहीं है; सत्ता पक्ष के अपने ही पार्षद सामान्य सभा में भेदभाव और वार्डों की उपेक्षा का आरोप लगाकर अपनी ही मुखिया को आईना दिखा चुके हैं। लेकिन हाल ही में जो वाकया हुआ, उसने तो नगर निगम को किसी 'थ्रिलर फिल्म' का सेट बना दिया।

    जब बिना किसी विरोध-प्रदर्शन के निगम पहुंच गई 'पुलिस की फौज'
    निगम परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बिना किसी धरने, प्रदर्शन या हंगामे के अचानक दो थानों के प्रभारी और सीएसपी दुर्ग लाव-लश्कर के साथ धमक पड़े। चर्चा है कि महापौर ने अन्य विभागों के कार्यपालन अभियंताओं को प्रोटोकॉल का पाठ पढ़ाने के लिए अपने केबिन में बुलाया था।
    अधिकारी शांति से चर्चा कर ही रहे थे कि पुलिस की इस 'सरप्राइज एंट्री' ने कई सवाल खड़े कर दिए:
    आखिर बिना किसी विवाद के पुलिस प्रशासन को किसने और क्यों फोन घुमाया?
    क्या अब शहर सरकार को अपने ही अधिकारियों से संवाद करने के लिए 'खाकी' के साए की जरूरत पड़ रही है?या फिर अधिकारियो को महापौर के व्यवहार पर विश्वास नहीं है ?
    सोशल मीडिया पर महापौर का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह भरे मंच से अधिकारियों को तल्ख अंदाज में 'प्रोटोकॉल' की नसीहत देती नजर आ रही हैं। राजनीति के जानकार चुटकी ले रहे हैं कि जनता के बुनियादी मुद्दों पर इतनी सख्ती दिखाई जाती, तो आज शहर की सूरत कुछ और होती।

    विकास का 'वन-मैन शो': मंत्री गजेंद्र यादव की सक्रियता से बढ़ीं दूरियां?
    एक तरफ जहां महापौर अपनी घटती लोकप्रियता और अंतर्कलह से जूझ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के शिक्षा मंत्री और दुर्ग शहर के विधायक गजेंद्र यादव के जमीनी प्रयासों ने विकास कार्यों की झड़ी लगा दी है। शहर में जो भी बड़े और ऐतिहासिक काम दिख रहे हैं, वे सीधे मंत्री जी के खाते में जा रहे हैं:

    स्टेडियम परिसर                               भव्य बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण
    पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर                अत्याधुनिक स्विमिंग पूल की सौगात
    शहरी कनेक्टिविटी केनाल रोड का निर्माण और जेल चौक से पुलगांव चौक तक फोर लेन सड़क की शुरुआत
    सौंदर्यीकरण एवं जन-सुविधा राजेंद्र पार्क चौक का कायाकल्प,

    गया नगर में सांस्कृतिक भवन, और समृद्धि बाजार में सब्जी मंडी का संधारण

    इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स का क्रेडिट (श्रेय) सीधे मंत्री गजेंद्र यादव और उनके समर्थकों को मिल रहा है। इस 'क्रेडिट वॉर' ने महापौर की बेचैनी को और बढ़ा दिया है। लेकिन सवाल यह है कि जनता महापौर को क्रेडिट दे भी तो क्यों?
    बदहाली का शिकार दुर्ग: बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती जनता
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन के संकल्प और उपमुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव द्वारा राशि की कोई कमी न रखने के बावजूद, दुर्ग नगर निगम बदहाली के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है।

    निगम की नाकामियों की लंबी फेहरिस्त:
    इंदिरा मार्केट की दुर्दशा: व्यापार का मुख्य केंद्र आज पूरी तरह बदहाल है।
    सुराना कॉलेज के सामने नरक: गंदगी और बदबूदार वातावरण से छात्र और राहगीर हलाकान हैं।
    गुमठी आवंटन में भ्रष्टाचार: आरोप हैं कि इस पूरे खेल में शहरी सरकार की मौन सहमति है।
    अवैध कब्जों को संरक्षण: चतुर्भुज राठी जैसे अवैध कब्जाधारियों के साथ मंच साझा करने से भाजपा के 'जीरो टॉलरेंस' के दावे पर सवाल उठ रहे हैं।
    सड़क पर अवैध बाजार: शनिवार को चर्चगेट पर लगने वाला अवैध बाजार यातायात और व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहा है।

    क्या 'साय सरकार' के सुशासन को आईना दिखा रही हैं महापौर?
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जहां एक ओर प्रदेश को पारदर्शिता और विकास की पटरी पर दौड़ा रहे हैं, वहीं दुर्ग निगम की यह कार्यप्रणाली सरकार की छवि को बट्टा लगा रही है। हालात ये हैं कि अपनी ही पार्टी के पार्षद अब वार्डों में जनता का सामना करने से कतराने लगे हैं।
    राजनीतिक गलियारों में यह तीखा कटाक्ष भी चल रहा है कि महापौर अलका बाघमार के ऐसे आचरण को देखकर लगता है मानो वह खुद कांग्रेस के साथ मिलकर आगामी चुनावों में भाजपा प्रत्याशी की विदाई की स्क्रिप्ट लिख रही हों।
    निगम के भीतर कल हुई 'पुलिसिया ड्रामे' की गूंज अब दुर्ग से निकलकर रायपुर में संगठन के बड़े नेताओं के कानों तक पहुंच चुकी है। देखना दिलचस्प होगा कि सुशासन का दम भरने वाला भाजपा संगठन इस 'स्वघोषित प्रोटोकॉल सरकार' पर कब और क्या एक्शन लेता है, या फिर पार्षदों का बढ़ता असंतोष सीधे 'महाभियोग/ अविश्वास प्रस्ताव ' का रास्ता साफ करेगा!
    दुर्ग निगम की इस प्रशासनिक खींचतान और संगठन के भीतर चल रहे इस शीतयुद्ध को लेकर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि समन्वय की कमी विकास कार्यों को पूरी तरह प्रभावित कर रही है?

    भिलाई। जमीन फर्जीवाड़ा मामले में न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने उद्योगपति दंपति के खिलाफ अपराध दर्ज होने के बाद सिमप्लेक्स कास्टिंग लिमिटेड की डायरेक्टर ए 5 सूर्यविहार कालोनी जुनवानी भिलाई निवासी संगीता केतन शाह ने कहा कि ग्राम कोहका में पटवारी हल्का नंबर 14/19 खसरा को होटल को किराए पर दिया गया था। एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी किराएदार उसे खाली नहीं कर रहा था। इस दौरान हुडको निवासी सुनील कुमार सोमन ने संगीता शाह को होटल खाली कराकर देने के लिए एग्रीमेंट करने को कहा था। तब उसके साथ 10 लाख रुपए का एग्रीमेंट किया गया। लेकिन साल भर होने के बाद सुनील सोमन ने होटल को खाली नहीं कराया। उसके रकम को भी वापस लौटा दिया गया था। उसके बाद सुनील सोमन ने षडयंत्र और साजिश करके पुराने एग्रीमेंट का फायदा उठाकर मुझे कहा आपने मेरे साथ जमीन बेचने का सौदा किया है। बचे हुए चालीस लाख रुपए लेकर इस जमीन का रजिस्ट्री करिए। तब संगीता शाह ने कहा करोड़ों की जमीन को पचास लाख में कैसे दु। ये एग्रीमेंट आपने मुझसे जमीन खाली कराने के लिए बनाया था। संगीता शाह ने कहा कि उक्त जमीन करोड़ो रुपए की है उसे कैसे औने-पौने दाम पर बेच सकती हूं। सुनील सोमन पूरी तरह से प्लान तैयार कर सिमप्लेक्स कास्टिंग लिमिटेड और हम पति-पत्नी को बदनाम करने के लिए ऐसा षड्यंत्र रचा गया है। षड्यंत्र कर न्यायालय के माध्यम से अपराध दर्ज करवा दिया। मै तीस वर्षो से कंपनी को संभाल रही हूं भिलाई-दुर्ग के लोग सभी जानते पहचाने है। कभी इस तरह की कोई बात सामने नहीं आई लेकिन सुनील सोमन ने साजिश कर शाह परिवार के ऊपर गलत आरोप लगाकर बदनाम करने का साजिश रचा है। सुनील सोमन ने भरोसे को तोड़कर इस तरह से प्लान तैयार कर हम लोगों को फंसाया है। सुपेला पुलिस से सांठगांठ कर इस तरह का साजिश रचकर बदनाम किया। 

    करोड़ो की जमीन को लाखों में कैसे बेचू

    सिमप्लेक्स कास्टिंग लिमिटेड डॉयरेक्टर संगीता केतन शाह ने जारी विज्ञप्ति में बताया है कि स्मृति नगर कोहका की मेरी कंपनी जमीन करोड़ो रुपए की है कैसे उसे लाखों में बेच देती। कभी भी सुनील सोमन के साथ जमीन बेचने का कोई भी एग्रीमेंट नहीं हुआ था। जबकी होटल को खाली कराने के लिए यह किया गया था। खाली नहीं कराने की स्थिति में सुनील सोमन सारा रकम भी उसे डबल दिया गया है। मेरी छवि को जिस तरह से धूमिल किया गया है। जल्द उनके चेहरों को भी बेनकाब करुंगी। इस फर्जीवाड़े में कोई सच्चाई नहीं है। इसमें दोनों पति और पत्नी का कोई रोल नहीं है। सिर्फ बदनाम करने के लिए इस तरह का सोमन ने साजिश रचा है। इसकी निषष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    नई दिल्ली/शौर्यपथ। देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 14 मई 2026 को केंद्र सरकार से बेहद कड़े सवाल पूछे। मुख्य चुनाव…

    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) के निदेशक चयन को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय चयन समिति में नए निदेशक के नाम पर सहमति नहीं बन पाने के बाद केंद्र सरकार ने मौजूदा सीबीआई निदेशक Praveen Sood के कार्यकाल को एक वर्ष और बढ़ाने का फैसला लिया है। यह निर्णय अब राष्ट्रीय राजनीति और प्रशासनिक पारदर्शिता के बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।

    चयन समिति की बैठक में टकराव

    मई 2026 में आयोजित चयन समिति की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi शामिल थे। बैठक के दौरान राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने उम्मीदवारों की “सेल्फ-अप्रेजल” और “360-डिग्री असेसमेंट रिपोर्ट” समिति के सामने प्रस्तुत नहीं की।

    राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया को “महज औपचारिकता” और “पक्षपातपूर्ण” बताते हुए असहमति नोट सौंपा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद सरकार के फैसलों पर केवल “रबर स्टैंप” लगाने के लिए नहीं है। नए नामों पर सहमति न बनने के बाद उन्होंने बैठक से खुद को अलग कर लिया।

    सरकार ने क्यों बढ़ाया कार्यकाल?

    चयन प्रक्रिया में गतिरोध के बीच केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (ACC) ने प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने का हवाला देते हुए प्रवीण सूद को एक और सेवा विस्तार देने का निर्णय लिया।

    1986 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रवीण सूद को मई 2023 में पहली बार दो वर्ष के लिए सीबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था। मई 2025 में उन्हें पहला विस्तार मिला और अब उनका कार्यकाल मई 2027 तक बढ़ा दिया गया है।

    नए दावेदारों की उम्मीदों पर विराम

    सीबीआई निदेशक पद की दौड़ में शामिल GP Singh और Shatrughan Singh Kapoor जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति फिलहाल टल गई है। राजनीतिक सहमति नहीं बनने के कारण अब यह मामला और अधिक संवेदनशील माना जा रहा है।

    लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर उठे सवाल

    विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को संवैधानिक संस्थाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बता रही है। ऐसे में सीबीआई प्रमुख के चयन को लेकर उठा यह विवाद आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

    मरीजों की पीड़ा, अव्यवस्था और चिकित्सकीय कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल — स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत ने बढ़ाई चिंता दुर्ग/शौर्यपथ विशेष। दुर्ग जिला अस्पताल, जिसे जिले का सबसे बड़ा…

    भिलाई-दुर्ग में ‘जन अधिकार आंदोलन’ का ऐलान, उधारकर्ता आयोग गठन सहित कई मांगें होंगी प्रमुख

    भिलाई-दुर्ग/शौर्यपथ।
    देशभर में बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी कथित प्रताड़ना, आर्थिक उत्पीड़न और नागरिक अधिकारों के हनन के खिलाफ 14 मई 2026 को भिलाई-दुर्ग में व्यापक “जन अधिकार आंदोलन” आयोजित किया जाएगा। दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाले इस आंदोलन के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और आम नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई जाएगी।

    आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि वर्तमान समय में अनेक नागरिक बैंक रिकवरी प्रक्रिया, नोटिस प्रताड़ना, मानसिक दबाव और आर्थिक शोषण जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई मामलों में लोगों को न्याय और सुनवाई के लिए प्रभावी मंच तक उपलब्ध नहीं हो पाता। इसी मुद्दे को केंद्र में रखते हुए आंदोलन के दौरान “उधारकर्ता आयोग” (Borrower Commission) के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी, ताकि ऋण लेने वाले नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

    कार्यक्रम में भारतीय मुद्रा प्रणाली और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की जाएगी। आंदोलनकारियों के अनुसार जनता को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि डिजिटल मुद्रा प्रणाली का संचालन किस प्रकार हो रहा है और उससे जुड़ी नीतियां किस संस्था के नियंत्रण में कार्य कर रही हैं।

    आंदोलन के दौरान बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी कथित अवैध वसूली, मानसिक प्रताड़ना, प्रशासनिक निष्क्रियता और वित्तीय अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर भी खुलकर आवाज उठाई जाएगी। आयोजकों ने मांग की है कि संबंधित मामलों में बैंक एवं एनबीएफसी संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

    आंदोलनकारियों ने बैंकिंग व्यवस्था के आर्थिक मॉडल पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि देश में प्रचलित मुद्रा की तुलना में कई गुना अधिक ऋण वितरण किया गया है। आंदोलन में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा कि जब देश में लगभग 38 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा प्रचलन में है, तब केवल सरकारी बैंकों द्वारा ही 107 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरण कैसे किया गया। साथ ही निजी बैंकों और वित्तीय कंपनियों की ऋण व्यवस्था की भी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी।

    कार्यक्रम की रूपरेखा

    दोपहर 12 बजे से विभिन्न विषय विशेषज्ञों और वक्ताओं द्वारा पर्यावरण, स्वास्थ्य, बैंकिंग और आर्थिक विषयों पर रिसर्च आधारित जानकारी साझा की जाएगी। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे से बैंकिंग व्यवस्था, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आम जनता पर पड़ रहे प्रभावों पर विशेष संबोधन आयोजित होगा। कार्यक्रम के अंतिम चरण में शाम 4 बजे आंदोलनकारी नारेबाजी और पैदल मार्च करते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचेंगे, जहां ज्ञापन एवं शिकायत पत्र सौंपा जाएगा।

    आंदोलन के संयोजकों ने सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं, युवाओं, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों से लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम में सहभागी बनने की अपील की है।

    आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन किसी संस्था या व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि “आर्थिक अन्याय, बैंकिंग प्रताड़ना और नागरिक अधिकारों की रक्षा” के लिए जनता की लोकतांत्रिक आवाज है।

    “समस्याओं का शीघ्र समाधान करें, अन्यथा होगा उग्र आंदोलन” — भिलाई इस्पात मज़दूर संघ की प्रबंधन को चेतावनी

    भिलाई/शौर्यपथ।
    भिलाई इस्पात संयंत्र की टाउनशिप में व्याप्त अव्यवस्थाओं, भ्रष्टाचार, अवैध कब्जों और मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर भिलाई इस्पात मज़दूर संघ यूनियन ने प्रबंधन के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है। यूनियन की महत्वपूर्ण बैठक इस्पात भवन स्थित कॉफी हाउस में संघ के महामंत्री चन्ना केशवलू के नेतृत्व में आयोजित हुई, जिसमें टाउनशिप की विभिन्न समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    बैठक में यूनियन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि नगर सेवाएं विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं लगातार बढ़ रही हैं तथा लंबे समय से जमे अधिकारियों के कारण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है। यूनियन ने प्रबंधन के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो कर्मचारियों और नागरिकों के साथ मिलकर आंदोलन और प्रदर्शन किया जाएगा।

    यूनियन ने प्रबंधन का ध्यान टाउनशिप की गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि नियमित कर्मचारियों को रिक्त आवास आवंटन की प्रक्रिया सरल और तेज की जाए। पुराने क्वार्टर्स में खराब हो चुकी बिजली वायरिंग और स्विच बोर्डों को सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल बदला जाए। आवासीय क्षेत्रों में संचालित अवैध खटालों को हटाकर सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं, कुत्तों और सुअरों पर नियंत्रण किया जाए, क्योंकि इनके कारण दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ रही हैं।

    बैठक में फॉरेस्ट एवेन्यू रोड और गैरेज रोड को बढ़ते यातायात दबाव के मद्देनजर वन-वे घोषित करने, मानसून पूर्व सभी बीएसपी आवासों की छतों पर टारपेल्टिंग कार्य पूर्ण कराने और टाउनशिप में अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई गई। यूनियन ने कहा कि अवैध कब्जों के कारण असामाजिक गतिविधियों और अपराधों को बढ़ावा मिल रहा है।

    मार्केट क्षेत्रों में अवैध ठेलों और अतिक्रमण के कारण लगातार जाम की स्थिति निर्मित होने तथा कबाड़ी दुकानों से गंदगी और बदबू फैलने पर भी चिंता जताई गई। भीषण गर्मी को देखते हुए टाउनशिप में दिन में दो बार नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।

    यूनियन ने मकानों के बैकलेन और नालियों की सफाई, गटर लाइन पर ढक्कन लगाने, झाड़ियों की कटाई और दूषित पेयजल समस्या के समाधान हेतु पाइपलाइन बदलने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। कई स्कूलों और सामाजिक भवनों द्वारा मैदानों पर किए गए कथित अवैध कब्जों को हटाने की मांग भी बैठक में की गई।

    इसके अलावा सेक्टर-4 में पेयजल आपूर्ति समय में सुधार, सेक्टर-6 ई मछली मार्केट से एमजीएम तक अवैध अतिक्रमण हटाने, सभी पोलों पर स्ट्रीट लाइट लगाने, लगातार हो रही बिजली कटौती रोकने तथा मुर्गा चौक से खुर्सीपार फाटक तक सड़क मार्ग पर खड़े ट्रकों एवं ट्रेलरों को हटाकर प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की गई।

    यूनियन ने आरोप लगाया कि टाउनशिप में नए महाप्रबंधक इंचार्ज की नियुक्ति के बाद अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है। साथ ही संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों को मोबाइल फोन एवं सिम कार्ड उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।

    यूनियन पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि बारिश से पहले इन सभी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो नागरिकों और कर्मचारियों का आक्रोश उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

    बैठक में उपाध्यक्ष सुधीर गडेवाल, संयुक्त महामंत्री प्रदीप कुमार पाल, मृगेंद्र कुमार, भूपेंद्र बंजारे, सचिव ए. वेंकट रमैया, अखिलेश उपाध्याय, संजय कुमार साकुरे, पूरन लाल साहू, संतोष सिंह, कोषाध्यक्ष रवि चौधरी, नारायण प्रसाद बाजपेयी सहित यूनियन के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    भिलाई निगम ने आकाश गंगा एवं सुपेला क्षेत्र में की 3200 रुपये की चालानी कार्रवाई

    भिलाईनगर/शौर्यपथ।
    नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा शहर में अवैध रूप से वाहन खड़े कर सड़क और आवागमन बाधित करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार जोन-1 नेहरू नगर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर सुपेला एवं आकाश गंगा परिसर में सड़क बाधा उत्पन्न करने वालों पर चालानी कार्रवाई की गई।

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वार्ड क्रमांक 17 आकाश गंगा परिसर में प्रतिष्ठानों के सामने अवैध रूप से वाहन खड़े पाए जाने पर संबंधित वाहन चालकों पर जुर्माना लगाया। कार्रवाई के दौरान गौरी शंकर, मनोज कुमार, सौरभ, प्रकाश हालधर, भोले बाबा, देवनाथ, पवन कुमार गुप्ता एवं रमेश गुप्ता सहित विभिन्न लोगों से कुल 1400 रुपये का जुर्माना वसूला गया।

    इसी प्रकार राखी फर्नीचर रोड के सामने अवैध रूप से सब्जी ट्रक पार्किंग कर सड़क एवं यातायात बाधित करने पर संबंधित वाहन संचालकों पर 1800 रुपये की चालानी कार्रवाई की गई।

    निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सड़क पर अवैध पार्किंग, अतिक्रमण एवं आवागमन बाधित करने वालों के खिलाफ आगे भी लगातार अभियान जारी रहेगा। नागरिकों से यातायात व्यवस्था बनाए रखने एवं निर्धारित स्थानों पर ही वाहन पार्क करने की अपील की गई है।

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