
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
नई दिल्ली। अभी तक भारत की जनता यही मानती थी कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय काही आदेश अंतिम आदेश माना जाता है किंतु जिस तरह दिल्ली सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लगभग शून्य सा कर दिया उसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की बहस होने लगी की क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी मानने से केंद्र सरकार परहेज कर रहा है.
बता दें कि दिल्ली में दिल्ली सरकार और एलजी के बीच ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है मामले को लेकर दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देकर ट्रांसफर और पोस्टिंग के अधिकार दिल्ली सरकार को दिए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के 8 दिनों बाद ही केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ही पलट दिया जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्र सरकार के अध्यादेश पर राजनीतिक बहस छीढ गई. सोशल मीडिया में काफी लंबी चौड़ी बहस चलने लगी कई सोशल मीडिया की किस ने तो यहां तक लिख दिया कि अगर इसी तरह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी करने लगे तो फिर लोकतंत्र में यहां पालिका का क्या अस्तित्व रह जाएगा इस अध्यादेश के पहले तक भारत की जनता यही सोचती रहती थी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ही अंतिम आदेश माना जाता है और इसके बाद किसी भी तरह की कोई सुनवाई कहीं नहीं हो सकती सिर्फ भारत के राष्ट्रपति ही मामले में नियमानुसार कोई कदम उठा सकते हैं किंतु जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाया उससे जनता हैरान भी है और आश्चर्यचकित भी.
शुक्रवार यानी 19 मई की देर शाम केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने वाला अध्यादेश जारी कर दिया. केंद्र सरकार 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) अध्यादेश, 2023' लेकर आई है.
राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाने के केंद्र के अध्यादेश को लेकर दिल्ली में सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लाया गया ये अध्यादेश ग़ैरकानूनी, ग़ैर संवैधानिक और जनतंत्र के ख़िलाफ़ है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल कहते हैं ''हमने सुना है कि केंद्र सरकार ने आज एससी के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है, लेकिन अध्यादेश लाने के बाद इस याचिका का क्या औचित्य है. इस याचिका की सुनवाई तो तभी हो सकती है जब वो अपना अध्यादेश वापस ले लें. ''
सीएम ने आगे कहा कि इस अध्यादेश को लाकर केंद्र सरकार ने जनता और देश के साथ एक भद्दा मजाक किया है. जैसे केंद्र सरकार एससी को सीधी चुनौती दे रही है कि आप जो भी आदेश दें हम उसे पलट देंगे.
शुक्रवार यानी 19 मई की देर शाम केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने वाला अध्यादेश जारी कर दिया. केंद्र सरकार 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) अध्यादेश, 2023' लेकर आई है. इस अध्यादेश के तहत किसी भी अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़ा अंतिम निर्णय लेने का हक उपराज्यपाल को वापस दे दिया गया है. यानी अब उपराज्यपाल अधिकारियों की पोस्टिंग या ट्रांसफर करवाएंगे.
इसी अध्यादेश के तहत दिल्ली में सेवा दे रहे 'दानिक्स' कैडर के ग्रुप A अधिकारियों के ट्रांसफर और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए 'राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण' गठित किया गया है. 'दानिक्स' का मतलब है दिल्ली, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, दमन एंड दीव, दादरा एंड नागर हवेली सिविल सर्विसेज.
गठन किए जाने वाले राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण में तीन सदस्य होंगे. पहला दिल्ली के मुख्यमंत्री, दूसरा दिल्ली के मुख्य सचिव और तीसरे सदस्य होंगे दिल्ली के गृह प्रधान सचिव. इस प्राधिकरण का अध्यक्ष मुख्यमंत्री को बनाया जाएगा.
राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण को दानिक्स और 'ग्रुप ए' के अधिकारियों के ट्रांसफर और नियुक्ति के सभी फैसले लेने का अधिकार तो होगा लेकिन इस फैसले पर अमल उपराज्यपाल की हामी के बाद की जा सकेगी.
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
