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नगांव उपचुनाव के प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं के वाहनों पर कथित हमला, शीशे टूटे; मनोज चौहान के घायल होने का दावा—कांग्रेस ने भाजपा समर्थकों पर लगाया आरोप
नगांव/गुवाहाटी। असम के नगांव लोकसभा उपचुनाव के प्रचार के बीच सोमवार को कांग्रेस के चुनावी काफिले पर कथित पथराव ने राज्य की चुनावी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया। समागुरी क्षेत्र में चुनावी सभा के लिए जा रहे काफिले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के असम प्रभारी भूपेश बघेल, असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई, AICC सचिव मनोज चौहान, कांग्रेस प्रत्याशी सिबामोनी बोरा सहित कई नेता मौजूद थे।
कांग्रेस के अनुसार, काफिले के वाहनों पर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं, जिससे कुछ वाहनों के शीशे क्षतिग्रस्त हुए। गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि हमले के पीछे भाजपा समर्थक थे। कांग्रेस की ओर से यह भी दावा किया गया कि AICC सचिव मनोज चौहान को पत्थर लगने से चोट आई।
घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस और सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। कांग्रेस की ओर से पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
सवाल सिर्फ एक काफिले का नहीं, चुनावी माहौल का है
चुनावी प्रचार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच विरोध या नारेबाजी लोकतांत्रिक राजनीति में देखी जा सकती है, लेकिन यदि किसी चुनावी काफिले पर वास्तव में पथराव हुआ है तो यह कानून-व्यवस्था और चुनावी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे अहम सवाल अब यही हैं—
काफिले पर हमला किसने किया?
हमले की शुरुआत कैसे हुई?
क्या पहले से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी प्रशासन को थी?
वाहनों को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान कब होगी?
और शिकायत के आधार पर पुलिस की कार्रवाई का अगला कदम क्या होगा?
आरोपों पर सियासी टकराव भी तेज
कांग्रेस ने घटना के लिए भाजपा समर्थकों को जिम्मेदार ठहराते हुए असम सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है और घटना को लेकर अलग दावा किया है। इसलिए हमले के वास्तविक जिम्मेदारों का निर्धारण जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
नगांव लोकसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होना है। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान हुई यह घटना प्रशासन और निर्वाचन तंत्र के सामने एक सीधी चुनौती है—चुनावी मुकाबला राजनीतिक बहस और जनसमर्थन से होगा या सड़क पर टकराव से?
अब निगाहें पुलिस की जांच और निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर हैं।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
