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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
दुर्ग । शौर्यपथ ।
जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग के महामंत्री राहुल शर्मा ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने वादों से मुंह मोड़कर शिक्षकों, छात्रों और पूरे शिक्षा तंत्र के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीतियां लगातार यह साबित कर रही हैं कि सरकार शिक्षा और शिक्षक—दोनों के प्रति संवेदनहीन है।
राहुल शर्मा ने कहा कि नियमितीकरण एवं अन्य जायज मांगों को लेकर अतिथि शिक्षक संघ पिछले 23 दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहा था, लेकिन छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने उनकी समस्याओं की ओर ध्यान देना भी उचित नहीं समझा। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर अतिथि शिक्षकों की मांगों का समाधान करने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आते ही वह अपना वादा भूल गई। यह भाजपा की पुरानी कार्यशैली बन चुकी है कि चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और सरकार बनने के बाद उन्हें भुला दिया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मांगों के समाधान के बजाय सरकार ने आंदोलनरत शिक्षकों के साथ दमनकारी रवैया अपनाया। पुलिस प्रशासन द्वारा धरनास्थल से टेंट हटाए गए और शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार को दमन की जगह संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए था और अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण, सम्मानजनक मानदेय तथा स्थायी नीति पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
राहुल शर्मा ने कहा कि "शिक्षा के मंदिर को बचाने वाले गुरुजनों पर तानाशाही और अत्याचार की जितनी भी निंदा की जाए, कम है।" उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का भविष्य गढ़ते हैं और उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी संवेदनशील सरकार को शोभा नहीं देता।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। उनके अनुसार इस मामले में लगभग 20 लाख छात्र-छात्राओं की मेहनत प्रभावित हुई, लेकिन दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से छात्रों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर कथित लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई छात्र घायल हुए और एक छात्र की मृत्यु होने का भी दावा किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करती तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे स्पष्ट है कि भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।
राहुल शर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य—दोनों स्तरों पर भाजपा सरकारों की नीतियां शिक्षा, शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित नहीं होगी, तब तक देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था को न्याय नहीं मिल सकेगा।
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों का आंदोलन नए मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बने सोनम वांगचुक ने 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन प्रदर्शन अब भी जारी है। दूसरी ओर, आंदोलन की प्रमुख मांगों को लेकर सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच आज संविधान क्लब में उच्चस्तरीय वार्ता शुरू हो गई है।
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में दोपहर 12:30 बजे दूसरे दौर की औपचारिक बैठक शुरू हुई। इस बैठक में छात्रों की मांगों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने, NEET पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने तथा अन्य प्रमुख मांगों पर विचार करने का लिखित आश्वासन दिया है। इसी आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने मेदांता अस्पताल में अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया।
हालांकि, CJP ने स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। संगठन के कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अडिग हैं। जंतर-मंतर पर धरना जारी है और देशभर में समर्थन प्रदर्शन आयोजित करने का भी ऐलान किया गया है।
उधर, राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। जंतर-मंतर, संविधान क्लब और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कई प्रमुख मार्गों और मेट्रो स्टेशनों पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
अब देशभर की निगाहें सरकार और CJP के बीच चल रही वार्ता पर टिकी हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो आंदोलन के समाधान की संभावना बन सकती है, लेकिन फिलहाल "अनशन खत्म, प्रदर्शन जारी" की स्थिति बनी हुई है।
*तालाबों की धरती पर खुलेगी समृद्धि की नई राह, किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का बन सकता है बड़ा माध्यम*
रायपुर / छत्तीसगढ़ को वर्षों से "धान का कटोरा" कहा जाता है, लेकिन अब यह राज्य मखाना उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बनाने की क्षमता रखता है। प्रदेश में हजारों तालाब, सिंचाई जलाशय, अनुकूल जलवायु और मेहनतकश मछुआरा समुदाय मखाना खेती के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख मखाना उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है।
मखाना आज केवल एक पारंपरिक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि देश-विदेश में लोकप्रिय "सुपरफूड" बन चुका है। उच्च पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ और बढ़ती बाजार मांग के कारण इसकी खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनती जा रही है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 में मखाना विकास के लिए 476.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय क्षेत्र योजना शुरू की है, जिसमें छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया गया है।
*छत्तीसगढ़ के लिए क्यों है सुनहरा अवसर?*
प्रदेश के अधिकांश जिलों में बड़े और छोटे तालाबों का विशाल नेटवर्क मौजूद है। इनमें से अनेक जलाशयों का अभी भी पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है। यदि मछली पालन के साथ मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए, तो एक ही जलाशय से दोहरी आय प्राप्त की जा सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की कन्हार मिट्टी, पर्याप्त जल उपलब्धता और जलवायु मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त हैं। वैज्ञानिक खेती तकनीकों को अपनाकर यहां बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव है।
मखाना मिशन से बदल सकती है तस्वीर
केंद्र सरकार की मखाना विकास योजना के प्रमुख उद्देश्य गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, मखाना क्षेत्र का विस्तार, किसानों का प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, वैज्ञानिक खेती तकनीकों का प्रसार, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा, निर्यात को प्रोत्साहन तथा अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना है।
यदि इन उद्देश्यों के अनुरूप प्रदेश में कार्य किया जाए, तो मखाना खेती किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और मछुआरा सहकारी समितियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर खोल सकती है।
*नवाचार से मिली नई दिशा*
छत्तीसगढ़ में मखाना खेती को बढ़ावा देने में कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर के प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रदेश की परिस्थितियां मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। उनके तकनीकी मार्गदर्शन में बालोद जिले में सफल मखाना खेती का प्रयोग किया गया है।
केवल खेती ही नहीं, बल्कि लगभग 1.35 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला मखाना प्रोसेसिंग सेंटर भी स्थापित किया गया, जिससे उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की सुविधाएं उपलब्ध हो सकीं। "दाऊजी मखाना" ब्रांड ने भी बाजार में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है।
*मछली और मखाना: दोहरी कमाई का मॉडल*
फिश-कम-मखाना फार्मिंग मॉडल छत्तीसगढ़ के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। मछली पालन के साथ मखाना उत्पादन करने से एक ही जलाशय से दोहरी आय, मछुआरा समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव, महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार मिलेगा।ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योग विकसित हो सकेंगे।
*महिला समूहों के लिए रोजगार के अवसर*
मखाना खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके साथ जुड़े कई कार्य रोजगार सृजन के बड़े माध्यम बन सकते हैं, जैसे बीज प्रसंस्करण, मखाना भूनना और फोड़ना, ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग
*मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्माण*
मखाना आधारित लघु उद्योग स्थापित कर स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में एक समर्पित "छत्तीसगढ़ मखाना मिशन" शुरू किया जाना चाहिए। इसके तहत कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, सिंचाई और पंचायत विभागों को मिलकर कार्य करना होगा। साथ ही किसानों, युवाओं, महिला समूहों और मछुआरा समितियों को प्राथमिकता देकर उन्हें प्रशिक्षण, अनुदान और बाजार से जोड़ना होगा।
छत्तीसगढ़ के पास वह सब कुछ है, जो मखाना उत्पादन के लिए आवश्यक है जल, भूमि, श्रमशक्ति और संभावनाएं। यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर योजनाबद्ध तरीके से काम करें, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ केवल "धान का कटोरा" ही नहीं, बल्कि "देश का उभरता हुआ मखाना राज्य" भी कहलाएगा।
मखाना खेती किसानों की आय बढ़ाने, महिला सशक्तिकरण, मछुआरा समुदाय के आर्थिक उत्थान और ग्रामीण उद्योगों के विकास का प्रभावी माध्यम बन सकती है। अब आवश्यकता है दूरदर्शी सोच और ठोस पहल की।
एसपी भावना पांडेय के निर्देश पर आपातकालीन सेवा का आकस्मिक परीक्षण, काल्पनिक सड़क दुर्घटना की सूचना पर तुरंत सक्रिय हुई पुलिस टीम
धमतरी। आमजन को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी पुलिस सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में धमतरी पुलिस लगातार सक्रिय है। इसी कड़ी में पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना पांडेय के निर्देश पर डायल-112 सेवा की कार्यक्षमता और रिस्पांस टाइम का आकस्मिक परीक्षण किया गया, जिसमें पुलिस टीम ने मात्र 5 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचकर अपनी तत्परता और दक्षता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
एएसपी ने खुद परखी डायल-112 की तैयारियां
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री शैलेन्द्र कुमार पांडेय ने डायल-112 सेवा की सरप्राइज चेकिंग करते हुए सड़क दुर्घटना की एक काल्पनिक सूचना कंट्रोल रूम को भेजी। सूचना मिलते ही डायल-112 टीम तत्काल सक्रिय हुई और महज पांच मिनट के भीतर निर्धारित स्थान पर पहुंच गई।
रिस्पांस टाइम और कार्यप्रणाली का किया निरीक्षण
घटनास्थल पर पहुंचे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पांडेय ने स्वयं डायल-112 की रिस्पांस टाइम, टीम के समन्वय, कार्यप्रणाली और तत्परता का निरीक्षण किया। उन्होंने त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना की तथा भविष्य में भी इसी संवेदनशीलता और मुस्तैदी के साथ आमजन को पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
आपात स्थिति में तुरंत करें डायल-112 पर कॉल
धमतरी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सड़क दुर्घटना, अपराध, विवाद, चिकित्सा सहायता अथवा किसी भी अन्य आपातकालीन स्थिति में बिना देर किए डायल-112 पर संपर्क करें। पुलिस की यह सेवा 24×7 आमजन की सुरक्षा और सहायता के लिए निरंतर उपलब्ध है।
शौर्यपथ विशेष
धमतरी पुलिस द्वारा किया गया यह सरप्राइज रिस्पांस टेस्ट दर्शाता है कि आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस महकमा नियमित रूप से अपनी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है। ऐसी पहलें न केवल पुलिस की कार्यकुशलता बढ़ाती हैं, बल्कि आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत करती हैं।
गुंडरदेही
भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल गुण्डरदेही द्वारा आज धमतरी चौक में प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के विरुद्ध कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा की गई कथित अभद्र, अपमानजनक एवं आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में राहुल गांधी का पुतला दहन कर जोरदार प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन ने कहा कि "विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाना, संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करना और राजनीतिक नौटंकी करना कांग्रेस की पुरानी प्रवृत्ति रही है। भारतीय जनता पार्टी सदैव लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक परंपराओं एवं राष्ट्रहित की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़ी रहेगी। प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा के विरुद्ध की गई अभद्र टिप्पणियां किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।"
कार्यक्रम के दौरान भाजपा एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कांग्रेस के विरोध में नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन जिला महामंत्री अनूप देशमुख, भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष नीतीश राजा सोनकर, सुभाष चंद्राकर, सौरभ चोपड़ा, गोकुल निषाद, संतोष नेताम , लालवीर सिंह, नमन जैन, सूरज यादव, मोपेंद्र साहू, कुणाल कुर्रे,पोषण सहित भाजपा एवं भाजयुमो के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
धमतरी। कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में धमतरी जिले ने प्रदेश में नई मिसाल कायम की है। धमतरी छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन गया है, जहां प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से किसानों को ड्रोन आधारित कृषि सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। गुरुवार को ग्राम लोहरसी स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने जिले की 10 समितियों में ड्रोन स्प्रेयर सुविधा का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं ड्रोन उड़ाकर इसकी कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में चयनित सभी समितियों के प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों ने ड्रोन स्प्रेयर का प्रदर्शन किया। ड्रोन के माध्यम से उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव, कम समय में अधिक क्षेत्र का उपचार, श्रम और लागत में कमी तथा सुरक्षित कृषि प्रबंधन की विशेषताओं से किसानों को अवगत कराया गया। किसानों ने भी इस नई तकनीक को खेती के लिए उपयोगी और समय की आवश्यकता बताया।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने के लिए लगातार तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दे रही है। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक ड्रोन तकनीक पहुंचाने की यह पहल कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगी। इससे किसानों का समय बचेगा, श्रमिकों पर निर्भरता कम होगी, कम लागत में अधिक प्रभावी छिड़काव संभव होगा और उत्पादन क्षमता के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि धमतरी को कृषि नवाचारों का मॉडल जिला बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में इस सुविधा का विस्तार अन्य सहकारी समितियों तक भी किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने समिति परिसर में कृषि एवं कीटनाशक विक्रय केंद्र का शुभारंभ किया। उन्होंने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधरोपण किया तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के हितग्राहियों को ऋण स्वीकृति पत्र भी वितरित किए।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि जिले की बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंडेल, गाड़ाडीह, जुगदेही और करेली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को ड्रोन स्प्रेयर सुविधा से जोड़ा गया है। इन समितियों के माध्यम से किसान नाममात्र के सेवा शुल्क पर ड्रोन से उर्वरक एवं कीटनाशकों का छिड़काव करा सकेंगे। इससे कृषि यंत्रीकरण को गति मिलेगी और आधुनिक तकनीक गांव-गांव तक पहुंचेगी।
उन्होंने बताया कि CSC e-Governance Services India Limited के सहयोग से इन समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, जिससे किसानों को ड्रोन सेवाओं के साथ विभिन्न डिजिटल और शासकीय सेवाएं भी एक ही स्थान पर मिल सकेंगी। इससे सहकारी समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित होंगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक से रसायनों का संतुलित एवं लक्षित छिड़काव होगा, पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा, फसलों की गुणवत्ता में सुधार आएगा तथा खेतों में सीधे प्रवेश की आवश्यकता कम होने से फसलों को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा। वहीं प्रशिक्षित युवाओं के लिए ड्रोन संचालन के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष निरंजन सिन्हा, औषधि बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा, डीएफओ कृष्ण जाधव, सहकारिता एवं कृषि विभाग के अधिकारी, CSC प्रतिनिधि, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे।
रायपुर । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली से मानवाधिकार शिक्षा एवं लैंगिक समानता के विशेष पर्यवेक्षक प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने बुधवार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर का दौरा किया। उन्होंने कुलपति प्रोफेसर डॉ. मनोज दयाल से भेंट कर मानवाधिकार संरक्षण, पत्रकारों के हितों, उनके उत्थान एवं कल्याण तथा मानवाधिकार शिक्षा को सुदृढ़ करने अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ है। इसलिए पत्रकारिता का मानवाधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और जनहित के प्रति प्रतिबद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। जिससे वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।
कांफ्रेंस रुम में प्राध्यापक, अधिकारी एवं कर्मचारियों से बैठक में मानवाधिकार, लैंगिक समानता और पत्रकारिता के विभिन्न आयामों पर प्रो. त्रिपाठी ने विस्तार से बात की। उन्होंने विश्वविद्यालय में पत्रकारिता और मानवाधिकार विषय पर नवीन पाठ्यक्रम, मानवाधिकार प्रकोष्ठ के गठन, विद्यार्थियों के लिए ह्यूमन राइट्स क्लब की स्थापना और जनसंचार एवं मानवाधिकार विषयक द्विभाषी शोध पत्रिका के प्रकाशन का प्रस्ताव दिया तथा केटीयू को मानवाधिकार जागरूकता, शोध एवं प्रशिक्षण गतिविधियों का केंद्र बनाने सुझाव दिए।
विशेष पर्यवेक्षक प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने अध्ययन संकाय, प्रशासनिक प्रभाग सहित परिसर का निरीक्षण किया। प्रो. त्रिपाठी ने सुझाव दिया कि पुस्तकालय के आधुनिकीकरण हो एवं ऑनलाइन डिजिटल लाइब्रेरी विकसित हो। टेलीविजन स्टूडियो और सामुदायिक रेडियो स्टेशन- रेडियों संवाद 90.8 एफएम में प्रो. त्रिपाठी ने विशेष भेंटवार्ता प्रोग्राम रिकार्डिंग की।
लैंगिक समानता एवं संवेदनशीलता के लिए नियमित प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और संवाद तथा निःशुल्क चिकित्सकीय एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए विशेषज्ञ पैनल के गठन की अनुशंसा की गई। कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने उनके सुझावों पर शासन से समन्वय कर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
(सुनील कुमार शर्मा)
कुलसचिव
ईमली पेड़ (दुलसिंह पेट्रोल पंप) के पास पानी निकासी नहीं होने से दुर्घटना का खतरा, स्थायी समाधान की मांग तेज
बरसात में सड़क बनी तालाब, आवागमन हुआ मुश्किल
कांकेर। जिले के सरोना से दुधावा राज्य सड़क मार्ग पर स्थित दुलसिंह पेट्रोल पंप के समीप ईमली पेड़ के पास ढलान वाली सड़क इन दिनों जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रही है। लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क पर लगभग एक से दो फीट तक पानी जमा हो गया है। पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्थान किसी तालाब जैसा दिखाई देने लगा है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों की संख्या में ग्रामीण, किसान, विद्यार्थी, कर्मचारी एवं छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं, लेकिन जलभराव के कारण सभी को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर भरे पानी के कारण वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है।
पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों पर सबसे अधिक संकट
सड़क पर भरे पानी का सबसे अधिक असर पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों और मोटरसाइकिल चालकों पर पड़ रहा है। तेज रफ्तार से गुजरने वाले बड़े वाहनों के कारण पानी के छींटे दूर तक उड़ते हैं, जिससे राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार जल्दी निकलने की कोशिश में दोपहिया वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर आए दिन वाहन चालकों के बीच पानी उछालने को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती है। कई बार कहासुनी हाथापाई तक पहुंच जाती है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना या जनहानि भी हो सकती है।
पानी निकासी मार्ग अवरुद्ध होने से बढ़ी समस्या, स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों और आसपास के लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर जलभराव हो रहा है, उसके आसपास इन दिनों नए भवनों का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी डालकर प्राकृतिक पानी निकासी मार्ग को बंद कर दिया गया है, जिससे बारिश का पानी सड़क पर ही जमा हो रहा है। यदि पानी के बहाव के लिए पर्याप्त नाली या निकासी मार्ग बनाया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लोगों का आरोप है कि इस समस्या की जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभाग को कई बार दी गई, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, रखरखाव की कमी बनी चिंता
यह राज्य सड़क मार्ग लोक निर्माण विभाग के अधीन आता है, लेकिन सड़क के रखरखाव और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग द्वारा ऐसे संवेदनशील स्थानों का सर्वेक्षण नहीं किया जाता, जहां हर वर्ष जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। सूत्रों के अनुसार विभाग में नियमित रूप से सड़क मरम्मत और रखरखाव करने वाले कर्मचारियों एवं मजदूरों की कमी है। यदि पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध होते तो समय-समय पर नालियों की सफाई, पानी निकासी की व्यवस्था और सड़क की मरम्मत कर समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता था। वर्तमान में कई स्थानों पर सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और अनेक जगह जलभराव से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग, विभाग और पंचायत से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा
सरोना क्षेत्र के नागरिकों ने लोक निर्माण विभाग तथा ग्राम पंचायत सरोना से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी रूप से पानी निकाल देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इस स्थान पर वैज्ञानिक ढंग से जल निकासी की स्थायी व्यवस्था, आवश्यकतानुसार नाली अथवा पुलिया का निर्माण तथा सड़क के ढलान का सुधार किया जाना चाहिए। साथ ही जिन निर्माण कार्यों के कारण प्राकृतिक जलनिकासी बाधित हुई है, उनकी भी जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में बरसात के दौरान यह समस्या और गंभीर रूप धारण कर सकती है तथा कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से जनहित को ध्यान में रखते हुए तत्काल निरीक्षण कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।
कांकेर जिले के प्रगतिशील किसान परशुराम साहू प्राकृतिक खेती की बन रहे मिसाल
उत्तर बस्तर कांकेर, / खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वराशक्ति आज किसानों के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में कृषि विभाग के मार्गदर्शन में विकासखंड चारामा के ग्राम गोलकुमड़ा के प्रगतिशील किसान श्री परशुराम साहू ने हरी खाद (ढैंचा) को अपनाकर यह साबित किया है कि प्राकृतिक तरीकों से भी कम लागत में बेहतर खेती की जा सकती है। उनका यह अनुभव क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। कृषक श्री साहू ने करीब तीन वर्ष पहले कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव पर धान की खेती में ढैंचा का उपयोग शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने प्रयोग के तौर पर इसे अपनाया, लेकिन सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब वे नियमित रूप से अपनी लगभग 03 एकड़ कृषि भूमि में धान की रोपाई से 40 से 45 दिन पहले ढैंचा की बुवाई करते हैं।
श्री साहू बताते हैं कि ढैंचा की फसल लगभग 35 से 40 दिन में तैयार हो जाती है। इसके बाद ट्रैक्टर या हल की सहायता से इसे खेत में पलटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। कुछ दिनों में यह पूरी तरह विघटित होकर उत्कृष्ट हरी खाद का रूप ले लेती है, जिससे भूमि को प्राकृतिक रूप से आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। वे बताते हैं कि ढैंचा अपनाने के बाद उनके खेत में रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गई है। पहले जहां अधिक मात्रा में यूरिया एवं अन्य उर्वरकों का उपयोग करना पड़ता था, वहीं अब कम उर्वरक में भी अच्छी फसल मिल रही है। साथ ही उनकी भूमि पहले की तुलना में अधिक भुरभुरी, उपजाऊ और नमी बनाए रखने में सक्षम हो गई है।
विकासखंड चारामा के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री महेश कुमार सोनकर ने बताया कि ढैंचा दलहनी वर्ग की महत्वपूर्ण हरी खाद फसल है। इसकी जड़ों में विकसित होने वाली राइजोबियम जीवाणु ग्रंथियां वायुमंडल से नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी में उपलब्ध कराती हैं। एक हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार ढैंचा की हरी खाद से भूमि को लगभग 40 से 60 किलोग्राम नाइट्रोजन प्राकृतिक रूप से प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही यह मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाती है, सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को प्रोत्साहित करती है, जलधारण क्षमता में सुधार लाती है तथा मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाती है। लगातार उपयोग से भूमि की उर्वराशक्ति लंबे समय तक बनी रहती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को ढैंचा बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती की इस वैज्ञानिक तकनीक को अपनाकर लाभान्वित हो सकें। खरीफ मौसम में धान की रोपाई से पहले ढैंचा की बुवाई कर उसे खेत में पलटने से मिट्टी में पर्याप्त जैविक पदार्थ एवं पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं, जिससे धान की प्रारंभिक वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन क्षमता में भी सकारात्मक वृद्धि होती है। श्री परशुराम साहू का कहना है कि यदि किसान धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर हरी खाद, जैविक खाद तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाएं, तो खेती अधिक लाभकारी बनने के साथ-साथ मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रखा जा सकता है। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती केवल लागत कम करने का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि सुरक्षित रखने का भी प्रभावी उपाय है।
कांकेर/ प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की समीक्षा करने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में दुर्गूकोंदल, भानुप्रतापपुर एवं कांकेर विकासखंड के जनपद पंचायत सीईओ, नोडल अधिकारी, ब्लॉक समन्वय एवं अल्प प्रगति वाली ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिव शामिल हुए।
बैठक में आवास पूर्णता की स्थिति की विस्तृत समीक्षा करते हुए जिला पंचायत सीईओ ने सभी लंबित आवासों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बेहतर कार्ययोजना बनाकर साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित करने, सुदूर क्षेत्रों में 5 से 10 हितग्राहियों द्वारा सामूहिक रूप से निर्माण सामग्री परिवहन कर लागत कम करने तथा अप्रारंभ आवासों को शीघ्र शुरू कराने पर जोर दिया। सीईओ ने निर्देशित किया कि हितग्राहियों से राशि लेकर फरार होने वाले ठेकेदारों एवं मिस्त्रियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही पंचायत प्रतिनिधि, ग्राम के गायता, पटेल एवं समाज प्रमुखों के सहयोग से हितग्राहियों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें आवास निर्माण के लिए प्रेरित करें। अप्रारंभ पड़े आवासों को जल्दी प्रारंभ करने तथा ग्राम पंचायत स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि ऐसे हितग्राही जो आवास नहीं बना पा रहे हैं उन्हें ग्राम पंचायत स्तर पर आवश्यक मदद कर आवास पूर्ण कराए। साथ ही आवास टीमों को लगातार क्षेत्र भ्रमण करने, खराब प्रगति वाले पंचायतों में विशेष निगरानी रखने तथा लापरवाही बरतने वालों को चेतावनी देकर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में एपीओ, डीसी सहित विकासखण्ड स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे।
गुंडरदेही संवाददाता
बालोद जिला के गुंडरदेही क्षेत्र से एक खबर निकलकर सामने आ रही है यहां एक 37 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी ही 12 वर्षीय नाबालिक बेटी को हवस का शिकार बनाया है मामले में मां की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता को गिरफ्तार किया है जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला गुंडरदेही थाना क्षेत्र का है जहाँ एक माँ ने हैवान पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला गुंडरदेही थाना क्षेत्र का है एडिशनल एसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि थाना गुंडरदेही मे रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी नाबालिक पुत्रि के साथ उसके ही पिता द्वारा दुष्कर्म किया गया शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है
दुर्ग में देर रात धरना स्थल हटाने की कार्रवाई के बाद फिर जुटे शिक्षक, कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का लगाया आरोप
दुर्ग। प्रदेशभर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों और राज्य सरकार के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। एक ओर स्कूल शिक्षा संचालनालय ने सभी आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों को 27 जुलाई तक अपने-अपने विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने का अंतिम अवसर (अल्टीमेटम) दिया है, वहीं दूसरी ओर दुर्ग में देर रात प्रशासन द्वारा धरना स्थल हटाने और आंदोलनकारियों को हटाए जाने की कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया है।
देर रात प्रशासन की कार्रवाई, सुबह फिर धरने पर लौटे शिक्षक
जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात जिला प्रशासन और पुलिस ने धरना स्थल पर पहुंचकर वहां लगाए गए टेंट, बैनर और अन्य सामग्री को हटाया। इसके बाद आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों को वहां से हटाकर अस्थायी निवास स्थलों तक पहुंचाया गया। हालांकि गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक पुनः धरना स्थल पर पहुंचे और बारिश के बीच अपना आंदोलन जारी रखा।
अरुण वोरा का हमला, बोले— संवाद छोड़ दमन का रास्ता अपनाया गया
पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने प्रशासन की कार्रवाई की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वर्षों से प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने वाले अतिथि शिक्षक अपनी आजीविका और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी मांगों का समाधान बातचीत और संवेदनशीलता से होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने संवाद के बजाय पुलिस बल का सहारा लिया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी आंदोलन का समाधान दमन नहीं, बल्कि सार्थक संवाद और सहमति से निकाला जाना चाहिए।
संचालनालय का स्पष्ट आदेश— 27 जुलाई तक लौटें, अन्यथा सेवा समाप्त
स्कूल शिक्षा संचालनालय द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ से ही हड़ताल के कारण सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक हित प्रभावित हो रहा है।
आदेश के अनुसार यदि कोई अतिथि शिक्षक 27 जुलाई 2026 तक अपने विद्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है, तो वर्ष 2019 की अतिथि शिक्षक व्यवस्था के प्रावधानों के तहत उसकी सेवाएं समाप्त मानते हुए संबंधित विद्यालयों में नई नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। साथ ही सभी जिला शिक्षा अधिकारियों एवं स्कूल प्रबंधन समितियों को भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
शिक्षकों का रुख बरकरार
आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी लंबित मांगों—नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा, वेतनमान और मानदेय वृद्धि—पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय दबाव की नीति अपना रही है।
शिक्षा व्यवस्था और राजनीति दोनों के लिए अहम मुद्दा
सरकार विद्यार्थियों के हितों का हवाला देकर शिक्षकों से कार्य पर लौटने की अपील कर रही है, जबकि अतिथि शिक्षक अपने भविष्य और रोजगार सुरक्षा की मांग पर अडिग हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।
शौर्यपथ विश्लेषण
अतिथि शिक्षकों का आंदोलन ब केवल रोजगार का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक निर्णयों और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन की परीक्षा बनता जा रहा है। यदि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच शीघ्र संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो इसका सीधा प्रभाव प्रदेश की सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
रविशंकर स्टेडियम परिसर के दुकानदारों को मिली बड़ी राहत, चार माह तक बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक; पुनर्वास व वैकल्पिक व्यवस्था पर सुनवाई के बाद ही आगे बढ़ेगा प्रशासन
दुर्ग। अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम निर्माण की दिशा में चल रही जिला प्रशासन की कार्रवाई को उस समय बड़ा झटका लगा, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने झम्मन साहू बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए स्टेडियम परिसर के दुकानदारों को बड़ी राहत प्रदान की। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगले चार माह तक किसी भी दुकानदार के खिलाफ बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह मामला दुर्ग के रविशंकर स्टेडियम परिसर में वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों को प्रशासन द्वारा जारी किए गए बेदखली नोटिस से जुड़ा है। जिला प्रशासन ने भवन को जर्जर बताते हुए दुकानों को खाली करने का निर्देश दिया था, जिसके विरोध में झम्मन साहू सहित अन्य दुकानदारों ने हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने अपनाया संतुलित दृष्टिकोण
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि जर्जर भवन के कारण सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। वहीं न्यायालय ने यह भी स्वीकार किया कि संबंधित दुकानदार वर्षों से यहां व्यवसाय कर रहे हैं तथा उनकी आजीविका पूरी तरह इन दुकानों पर निर्भर है। ऐसे में बिना उचित पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था के बेदखली न्यायसंगत नहीं होगी।
पहले सुनवाई, फिर निर्णय
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि दुकानदारों द्वारा पुनर्वास एवं वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में प्रस्तुत आवेदनों पर विधिसम्मत विचार किया जाए। सभी प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए और उसके बाद कारणयुक्त (Speaking Order) आदेश पारित किया जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया के पूर्ण होने तक चार माह की अवधि में कोई दमनात्मक या बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई नहीं होगी।
दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी दुकानदारों की
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस अवधि के दौरान जर्जर भवन में किसी प्रकार की दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं संबंधित दुकानदारों की होगी। अर्थात न्यायालय ने राहत के साथ सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी है।
स्टेडियम परियोजना की रफ्तार पर असर संभव
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम निर्माण की दिशा में जिला प्रशासन की प्रस्तावित कार्रवाई फिलहाल धीमी पड़ सकती है। अब प्रशासन को सीधे बेदखली की बजाय न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप विधिसम्मत प्रक्रिया अपनानी होगी तथा पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के मुद्दे पर निर्णय लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
शौर्यपथ विश्लेषण
हाईकोर्ट का यह आदेश प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिकों की आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायालय ने एक ओर सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों के पुनर्वास के अधिकार को भी संरक्षण दिया है। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन की अगली रणनीति और पुनर्वास संबंधी निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
