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मौसम विभाग ने दिल्ली में शीतलहर और अत्यंत कम दृश्यता के चलते रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई है। लोगों को केवल आवश्यक होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से घने कोहरे की चादर में ढके हुए हैं। कोहरे के कारण रेल, सड़क और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं, जबकि अनेक उड़ानें रद्द या विलंबित की गई हैं।
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी का अनुमान जताया गया है।
शीतलहर के चलते कई शहरों में न्यूनतम तापमान गिरकर 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
मौसम विभाग ने लोगों से वाहन चलाते समय फॉग लाइट के इस्तेमाल, धीमी गति बनाए रखने और ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने की अपील की है। यात्रियों को उड़ान और ट्रेन की स्थिति जानने के लिए मौसम विभाग व संबंधित विभागों की आधिकारिक सूचनाएं देखने की सलाह दी गई है।
नई दिल्ली।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026 का मूल उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक ठोस, अनुशासित और परिणामोन्मुख आर्थिक रोडमैप तैयार करना है। बजट में जहां एक ओर राजकोषीय अनुशासन को प्राथमिकता दी गई है, वहीं दूसरी ओर दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक क्षेत्रों में संसाधनों के कुशल आवंटन पर विशेष जोर दिखाई देता है।
राजकोषीय सुदृढ़ीकरण: मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद
वित्त मंत्री और उनकी टीम ने बजट 2026 में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने की स्पष्ट प्रतिबद्धता दोहराई है। सरकार का मानना है कि संतुलित घाटा ही निवेशकों का भरोसा बनाए रखता है और महंगाई पर नियंत्रण में सहायक होता है। बजट से जुड़े आधिकारिक आंकड़े और नीति विवरण पीआईबी (PIB) के माध्यम से सार्वजनिक किए जा रहे हैं, जिससे नीतिगत पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
पूंजीगत व्यय पर जोर: इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा ग्रोथ इंजन
बजट 2026 में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन माना गया है। सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश को प्राथमिकता देकर सरकार रोजगार सृजन, निजी निवेश को प्रोत्साहन और उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह दृष्टिकोण मध्यम और दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को स्थायी गति देने में सहायक होगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही: हर रुपये का डिजिटल हिसाब
डिजिटल गवर्नेंस को और मजबूत करते हुए बजट में ‘हर रुपये का हिसाब’ सुनिश्चित करने की नीति अपनाई गई है। सरकारी योजनाओं और खर्चों की विस्तृत जानकारी बजट इंडिया पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे नागरिकों को यह पता चल सके कि करदाताओं का पैसा कहां और कैसे खर्च हो रहा है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि योजनाओं का लाभ सीधे लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचेगा।
समावेशी विकास: मानव पूंजी पर निवेश
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बजट 2026 में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास को केंद्र में रखा गया है। सरकार का फोकस ऐसी मानव पूंजी तैयार करने पर है जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को अग्रणी बना सके। ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करने और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की मंशा भी बजट की प्राथमिकताओं में स्पष्ट झलकती है।
2047 का रोडमैप
वित्त मंत्रालय की टीम का मानना है कि राजकोषीय अनुशासन + पूंजी निवेश + पारदर्शी शासन + समावेशी विकास—इन चार स्तंभों पर आधारित यह बजट भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 केवल एक साल का आय-व्यय विवरण नहीं, बल्कि आने वाले दो दशकों के लिए भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज़ बनकर सामने आया है।
कोलकाता।
कोलकाता में 8 जनवरी 2026 को राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ठिकानों पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी ने अब गंभीर कानूनी और राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है। यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट से होते हुए सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुँच चुका है, जहाँ केंद्र की जांच एजेंसी और पश्चिम बंगाल सरकार आमने-सामने खड़ी नजर आ रही हैं।
क्या है पूरा मामला
ED ने वर्ष 2020 के कोयला तस्करी प्रकरण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। ED का दावा है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुँचीं और जांच में हस्तक्षेप करते हुए कुछ डिजिटल उपकरण व दस्तावेज अपने साथ ले गईं।
वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ED आगामी 2026 विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गोपनीय राजनीतिक डेटा हासिल करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया।
हाई कोर्ट में हंगामा, सुनवाई टली
ED ने मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज कराने और मामले की CBI जांच की मांग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया।
9 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान वकीलों के बीच तीखी नोक-झोंक और हंगामे के चलते कार्यवाही बाधित हो गई। इसके बाद जस्टिस सुभ्रा घोष ने मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी 2026 तक के लिए स्थगित कर दी।
सुप्रीम कोर्ट में सीधी दस्तक
हाई कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद ED ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। एजेंसी का तर्क है कि जब राज्य की शीर्ष राजनीतिक कार्यपालिका पर ही हस्तक्षेप के आरोप हों, तब निष्पक्ष जांच केवल CBI से ही संभव है।
इधर, संभावित याचिका को भांपते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कैविएट दाखिल कर दी थी। इसका सीधा अर्थ है कि राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना शीर्ष अदालत कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं कर सकती।
ताज़ा घटनाक्रम: पुलिस बनाम ED
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब कोलकाता पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने प्रतीक जैन के आवास से CCTV फुटेज जब्त किए हैं, जिन्हें छापेमारी के दौरान की घटनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह स्थिति अभूतपूर्व मानी जा रही है, जहाँ एक केंद्रीय जांच एजेंसी और राज्य पुलिस आमने-सामने आ गई हैं।
राजनीतिक तापमान चरम पर
तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को चुनावी साजिश करार देते हुए इसे अपने राजनीतिक अभियान का हिस्सा बना लिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर राज्य की राजनीति को प्रभावित करना चाहती है। वहीं, विपक्ष इसे कानून के राज का मामला बताकर मुख्यमंत्री से जवाबदेही की मांग कर रहा है।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला केवल एक छापेमारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह केंद्र-राज्य संबंध, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता, और संवैधानिक सीमाओं की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
शीर्ष अदालत का फैसला न सिर्फ इस प्रकरण की दिशा तय करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे टकरावों के लिए भी एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल साबित हो सकता है।
कोलकाता | विशेष रिपोर्ट
भाजपा के दबाव और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहाँ हर बीतता दिन उनकी राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ाता दिख रहा है। कोयला घोटाले की आँच अब सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुँचती नज़र आ रही है—और इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताज़ा कार्रवाई ने सियासी भूचाल ला दिया है।
I-PAC पर ED की रेड, सत्ता में खलबली
गुरुवार (8 जनवरी 2026) की सुबह दिल्ली से आई ED की टीम ने TMC की चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के कोलकाता स्थित साल्टलेक और लाउडन स्ट्रीट कार्यालयों पर छापेमारी शुरू की। जाँच की भनक लगते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुँचीं—वह भी उस वक्त, जब कानूनी प्रक्रिया जारी थी।
छापे के बीच फाइल-लैपटॉप लेकर बाहर निकलीं ममता
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ममता बनर्जी I-PAC कार्यालय से गोपनीय दस्तावेजों से भरी हरी फाइल और लैपटॉप लेकर बाहर निकलती दिखीं। उनके साथ चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना दिया। सूत्रों का दावा है कि ED इसी फाइल की तलाश में थी—अब एजेंसी उस दस्तावेज़ के लिए हाईकोर्ट का रुख कर चुकी है।
‘घटिया गृहमंत्री’—मीडिया के सामने फूटा गुस्सा
कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री का आक्रोश खुलकर सामने आया। सबूत हाथ से निकलने की आशंका के बीच ममता बनर्जी ने मीडिया के सामने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें ‘घटिया गृहमंत्री’ तक कह डाला।
ममता का आरोप है कि ED उनके उम्मीदवारों की सूची और चुनावी रणनीतियाँ “चुराने” आई है। उन्होंने छापेमारी को राजनीतिक साजिश बताते हुए केंद्र सरकार पर डेटा कब्जाने का आरोप लगाया।
राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले I-PAC जैसे रणनीतिक केंद्र पर हुई कार्रवाई TMC की तैयारियों के लिए बड़ा झटका है। यही वजह है कि ममता बनर्जी अब सीधे तौर पर केंद्रीय एजेंसियों और भाजपा नेतृत्व पर हमलावर हैं। सवाल यह है—क्या यह आक्रामकता उनकी मजबूरी का संकेत है, या आने वाले दिनों में सियासत और तीखी होने वाली है?
अब बड़ा सवाल
क्या ED की तलाश में रही फाइल क्या सचमुच सत्ता के सबसे करीब किसी बड़े राज़ की चाबी है? और क्या ममता बनर्जी की यह प्रतिक्रिया उनकी राजनीति को और संकट में धकेल देगी?
आने वाले दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
कोलकाता / शौर्यपथ / 8-9 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल में I-PAC (प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित राजनीतिक परामर्श फर्म) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद राज्य में भारी राजनीतिक उथल-पुथल मच गई है।
इस घटना के बाद की मुख्य घटनाएँ और राजनीतिक हालात निम्नलिखित हैं:
ममता बनर्जी का हस्तक्षेप: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छापेमारी के दौरान स्वयं साल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर पहुँच गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि ED उनकी पार्टी के चुनावी दस्तावेजों, उम्मीदवार सूचियों और डेटा को "चुराने" की कोशिश कर रही है।
फाइलों की बरामदगी: मुख्यमंत्री को छापेमारी वाली जगह से हाथ में कुछ हरे रंग की फाइलें और हार्ड डिस्क लेकर निकलते देखा गया, जिसे उन्होंने अपनी पार्टी की संपत्ति बताया।
सड़कों पर विरोध प्रदर्शन: ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को "राजनीतिक प्रतिशोध" बताया और 9 जनवरी 2026 को कोलकाता में एक विशाल विरोध मार्च का नेतृत्व किया। इसके साथ ही TMC सांसदों ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर धरना दिया।
कानूनी कार्रवाई और FIR: पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुख्यमंत्री की शिकायतों के आधार पर ED के खिलाफ दो FIR दर्ज की हैं। वहीं, ED ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है और मुख्यमंत्री पर जाँच में बाधा डालने और साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाते हुए CBI जाँच की मांग की है।
अदालती रुख: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ED की तत्काल सुनवाई की याचिका को खारिज कर दिया और मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी 2026 के लिए तय की है।
BJP की प्रतिक्रिया: भाजपा ने ममता बनर्जी के आचरण को "असंवैधानिक" बताया और आरोप लगाया कि वे भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए कानून की प्रक्रिया में बाधा डाल रही हैं। भाजपा नेताओं ने राज्य में 'जंगलराज' होने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे या राष्ट्रपति शासन की मांग की है।
यह पूरा विवाद 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले एक बड़े राजनीतिक युद्ध में बदल गया है, जहाँ TMC इसे "बंगाल की अस्मिता पर हमला" बता रही है और BJP इसे "भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई" कह रही है।
रायपुर ।
छत्तीसगढ़ के परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित सभी राज्यों के परिवहन मंत्रियों की राष्ट्रीय बैठक में सहभागिता की। बैठक का प्रमुख उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा।
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अधिकांश मौतें हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा उपायों की अनदेखी के कारण होती हैं। उन्होंने सभी राज्यों को निर्देश दिए कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट तथा चारपहिया वाहनों में सीट बेल्ट के उपयोग को सख्ती से लागू किया जाए।
परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप ने बैठक में छत्तीसगढ़ में संचालित परिवहन विभाग की योजनाओं, परियोजनाओं एवं प्रमुख उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी केंद्रीय मंत्री को दी। इस अवसर पर परिवहन विभाग के सचिव श्री एस. प्रकाश भी उपस्थित रहे।
श्री कश्यप ने ओवरलोडिंग को सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण बताते हुए इसके विरुद्ध नियमित जांच, तकनीकी निगरानी, सख्त प्रवर्तन कार्रवाई और कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिस पर बैठक में सर्वसम्मति बनी।
बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियानों, सड़क सुरक्षा मित्रों की सक्रिय भागीदारी, तथा स्कूल और कॉलेज स्तर पर ट्रैफिक नियमों के प्रचार-प्रसार पर भी चर्चा की गई। इसके साथ ही दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों के कैशलेस उपचार, हिट एंड रन मामलों में मुआवजा व्यवस्था, वाहन सुरक्षा के नए मानक और मोटर व्हीकल अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों पर विचार-विमर्श हुआ।
मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप राज्य में स्वीकृत क्षेत्रीय चालक प्रशिक्षण केंद्र (RDTC) एवं जिला परिवहन केंद्र (DTC) भवनों का निर्माण तय समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
परिवहन मंत्री ने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 8 ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, कोरबा, राजनांदगांव और रायगढ़) संचालित हैं। मशीनों के माध्यम से होने वाली फिटनेस जांच पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सटीक है। इस क्षेत्र में गुजरात के बाद छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर है।
उन्होंने बताया कि शीघ्र ही जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद, कांकेर, दंतेवाड़ा, सारंगढ़ और सूरजपुर में भी नए फिटनेस सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार की पहल पर सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस उपचार योजना का राज्यभर में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। बैठक में ‘शून्य प्राणहानि जिला’ अभियान के तहत रायपुर के चयन, हिट एंड रन मामलों में मुआवजा और सड़क सुरक्षा अभियानों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में मोटर व्हीकल अधिनियम के नए प्रस्तावित संशोधनों पर भी विचार किया गया। केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी ने हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, ओवरलोडिंग रोकने और ट्रैफिक नियमों के पालन को सड़क सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया।
बैठक में प्रस्तुत योजनाओं से स्पष्ट है कि केंद्र एवं राज्य सरकारें मिलकर सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
रायपुर/नई दिल्ली। वेदांता समूह के चेयरमैन एवं प्रख्यात उद्योगपति श्री अनिल अग्रवाल के पुत्र अग्निवेश अग्रवाल का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उनका निधन अचानक आए कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ। इस दुखद घटना से न केवल अग्रवाल परिवार बल्कि उद्योग जगत में भी शोक की लहर दौड़ गई है।
परिजनों के अनुसार अग्निवेश पूरी तरह स्वस्थ थे और जीवन को लेकर उत्साह एवं सपनों से भरे हुए थे। उनके अचानक चले जाने से परिवार गहरे सदमे में है। वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका प्रिय पुत्र उन्हें बहुत जल्दी छोड़कर चला गया।
अग्निवेश अग्रवाल को एक सौम्य, संवेदनशील और सरल व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता था। वे सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों के प्रति भी सजग थे। उनके असामयिक निधन को एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
इस दुखद समाचार के बाद देश-विदेश से उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों द्वारा शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंगलवार को कई अहम गतिविधियाँ और बयान चर्चा में रहे। उन्होंने आंध्र प्रदेश स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की विशाख रिफाइनरी में ‘रेसिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी’ (RUF) के सफल कमीशनिंग की सराहना करते हुए इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी आधुनिक परियोजनाएँ देश की ईंधन जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में सहायक होंगी।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक जीवन में संवाद की मर्यादा पर बल देते हुए एक सुभाषितम साझा किया और ‘मधुर वाणी’ यानी सौम्य एवं संयमित भाषा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने संकेत दिया कि सकारात्मक और शालीन संवाद न केवल व्यक्तिगत संबंधों को सुदृढ़ करता है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी मजबूती प्रदान करता है।
इस बीच सरकारी गलियारों में आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर भी हलचल तेज रही। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे संबंधित फाइलों पर चर्चा आगे बढ़ी है, जिससे केंद्र सरकार के एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भविष्य में लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
प्रधानमंत्री के आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री जनवरी के अंत में पश्चिम बंगाल का दौरा कर सकते हैं, वहीं इसी माह असम में काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर की आधारशिला रखने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
