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राष्ट्रपति ने जनजातीय संस्कृति व शिल्प को दर्शाते स्टॉलों का अवलोकन किया
पारंपरिक अखरा एवं देवगुड़ी के मॉडल में देवताओं की आराधना भी की
कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा किया भेंट
रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जनजातीय गौरव दिवस 2025 के उपलक्ष्य में सरगुजा जिले में 20 नवम्बर को पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, राज्यमंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार श्री दुर्गा दास उईके, राज्यमंत्री आवास एवं शहरी मंत्रालय भारत सरकार श्री तोखन साहू, आदिम जाति विकास विभाग कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री श्री रामविचार नेताम, प्रभारी मंत्री जिला सरगुजा एवं वित्त वाणिज्यिक कर विभाग मंत्री श्री ओमप्रकाश चौधरी, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, वन एवं जलवायु परिवर्तन परिवहन सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास समाज कल्याण विभाग मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा सांसद श्री चिंतामणी महाराज, उत्तर रायपुर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, महापौर अम्बिकापुर श्रीमती मंजुषा भगत भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम स्थल में जनजातीय संस्कृति, लोक कला एवं शिल्प, आभूषण एवं वस्त्र, पूजा-पाठ, संस्कार, व्यंजन, वाद्ययंत्रों, जड़ी-बूटियों आदि को प्रदर्शित करने हेतु प्रदर्शनियां लगाई गई। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।
पारम्परिक अखरा स्थल एवं जनजातियों के धार्मिक आस्था के केंद्र देवगुड़ी में देवताओं की आराधना की
कार्यक्रम में सांकेतिक रूप से बनाए गए जनजातियों के पारंपरिक अखरा स्थल एवं जनजाति निवासरत ग्रामों के प्रमुख धार्मिक आस्था के केन्द्र देवगुड़ी के मॉडल का अवलोकन कर यहां देवताओं की आराधना की।
अखरा छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा अंचल में निवासरत जनजातियों का सांस्कृतिक स्थल है, जो गाँवों के मध्य या चौराहे में स्थित होते हैं, जहाँ छायादार पेड़ों के झुण्ड भी होते हैं। ग्रामीणजन विभिन्न लोक पर्वों जैसे करमा, महादेव बायर, तीजा आठे, जीवतिया, सोहराई, दसई, फगवा के अवसरों में महिला एवं पुरूष सामुहिक रूप से इकट्ठा होकर लोकगीत गाकर पारम्परिक वाद्ययंत्रों की थाप में लोकनृत्य करके उत्साह मनाते हैं। प्रदर्शनी में जनजातीय समुदाय के लोगों ने पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन किया। जनजाति निवासरत ग्रामों के प्रमुख धार्मिक आस्था के केन्द्र देवगुड़ी को राज्य में क्षेत्रवार विभिन्न नामों जैसे देवाला देववल्ला, मन्दर, शीतला, सरना आदि नामों से भी जानते हैं। देवगुड़ी में ग्रामीण देवी-देवता जैसे बुढ़ादेव, बुढ़ीदाई, शीतला, सरनादेव, डीहवारीन, महादेव आदि विराजमान होते हैं। जनजातीय विभिन्न लोकपर्वों के अवसरों में सामूहिक रूप से इकट्ठा होकर ग्रामीण बैगा की अगुवाई में पूजा-पाठ कर ग्राम की सुख, शांति, समृद्धि हेतु कामना करते हैं।
मिट्टी, लकड़ी से बने आवास मॉडल का किया अवलोकन
कार्यक्रम स्थल में छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों के पारंपरिक आवास का मॉडल बनाया गया था। राष्ट्रपति ने आवास मॉडल का भी अवलोकन किया। जनजातियों का आवास मिट्टी, लकड़ी से निर्मित होते हैं, जिसमें एक या दो कमरे व मुख्य कमरे के सामने की ओर परछी (बराम्दा) बने होते हैं। घर के छप्पर में ढालनुमा खपरैल लगे होते हैं। एक कमरे को रसोई कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं, जिसमें रसोई उपकरण व घरेलू सामान रखते हैं, दूसरे कक्ष को शयन कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं। परछी (बराम्दा) में अन्य घरेलू सामान जैसे ढ़ेकी, मूसल, सील-बट्टा, जांता आदि उपकरण होते हैं।
जनजातियों द्वारा विभिन्न लोकपर्वों एवं आयोजनों में पहने जाने वाले आभूषणों की लगी प्रदर्शनी, कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा किया भेंट
इस दौरान राज्य के पारंपरिक आभूषणों की प्रदर्शनी लगाई गई। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर आभूषणों के संबंध में जानकारी ली। श्री कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा भेंट किया, जिसे राष्ट्रपति ने आत्मीयता के साथ स्वीकार किया। श्री कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को बताया कि पारम्परिक आभूषण गिलट, तांबे, चांदी, सोना आदि धातु से निर्मित हैं, जिसे विभिन्न लोकपर्वों के अवसर में धारण करते हैं। इस दौरान गले में पहने जाने वाले हसुली, बांह में बहुटा, कलाई में ऐंठी, गले में रूपया वाला चंदवा, कमर में कमरबंध, पैर में पैरी एवं पैर की अंगुलियों में बिछिया, कान में ठोठा तथा नाक में पहने जाने वाले छुछिया (फूली) का प्रदर्शन किया गया।
वाद्ययंत्रों की लगी प्रदर्शनी
प्रदर्शनी में जनजातियों द्वारा लोकपर्वों में मनोरंजन के लिए बजाए जाने वाले वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रपति ने इन वाद्ययंत्रों को देखा। राज्य में निवासरत जनजातियां उत्साह के लिए तत, अवनद्ध, घन और सुषिर वाद्ययंत्रों का वादन करते हैं, जिनकी मधुर ध्वनियाँ उत्सव के अवसर में देखते ही बनते हैं। कई ऐसे वाद्ययंत्र है, जिनकी आवाजें मीलों दूर तक गुंजती है और लोगों को स्वतः नृत्य करने हेतु प्रेरित करती है। सरगुजा व बस्तर अंचल में तो कई महिनों तक निरंतर वाद्ययंत्र की आवाजें सुनाई पड़ती है। इन वाद्ययंत्रों के कारण ही जनजातियों के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है। सरगुजा अंचल के जनजातियों द्वारा विभिन्न लोकपर्वां में वादन किया जाने वाले वाद्ययंत्र मांदर, ढोल, झांझ, मजीरा, तम्बूरा, सरंगी, खंजरी, बांसुरी, चौरासी, एवं पैजन आदि का प्रदर्शन किया गया है।
जनजातीय समुदायों द्वारा इलाज में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियां की गई प्रदर्शित
कार्यक्रम स्थल में आयोजित प्रदर्शनी में राज्य में निवासरत जनजातियों द्वारा शारीरिक विकार के उपचार हेतु प्रयोग की जाने वाली जड़ी-बूटियां प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी में अष्वगंधा, कुलंजन, मुलेठी, सफेद मूसली, गिलोय, लाल झीमटी, अर्जून छाल, पिसीया, भुईचम्पा, गोखरू, कुटज की छाल, गुडमान की पत्ति, विरैता, रोहिने की छाल, बालमखिरा, हर्रा एवं बेहड़ा बड़ी ईमली की बीज, हड़सिंगार, अकरकरा, चिरईगोड़ी, शिलाजीत एवं बलराज आदि रखे गए हैं। वनांचल, पहाड़ी, घाटी, तराई में निवास करती हैं। इनके निवास क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के औषधियाँ पेड़-पौधे कन्दमूल बेल, आदि पाए जाते हैं। जनजाति समाज के लोग शारीरिक विकार होने पर इन्हीं जंगली-जडी बूटियों से अपना उपचार कराते हैं। जनजाति समाज के वैद्य, बैगा, गुनिया, हथजोड़ वंशानुगत रूप से लोगों का उपचार करते हैं।
पारम्परिक व्यंजन एवं कंदमूल
तीज-त्यौहारों, अन्य अवसरों में जनजातीय समुदायों द्वारा बनाए जाने वाले व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। यहां विभिन्न प्रकार के रोटी, चटनी, कोहरी (बरी), लड्डू आदि रखे गए हैं। जनजातीय महिलाएं प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं से व्यंजन तैयार करते हैं तथा जंगलों से विभिन्न प्रकार के कंदमूल, फल-फूल आदि एकत्र कर खाद्य के रूप में उपयोग करते हैं। इस दौरान कांदा-पीठारू कांदा, डांग कांदा, नकवा (चूरका) कांदा, सखईन कांदा आदि प्रदर्शित किए गए हैं।
पण्डो जनजाति के बसन्त पण्डो से मिलकर जाना कुशलक्षेम, शॉल भेंट कर किया सम्मान
रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जनजातीय गौरव दिवस 2025 के उपलक्ष्य में सरगुजा जिले में 20 नवम्बर को पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, राज्यमंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार श्री दुर्गा दास उईके, राज्यमंत्री आवास एवं शहरी मंत्रालय भारत सरकार श्री तोखन साहू, आदिम जाति विकास विभाग कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री श्री रामविचार नेताम, प्रभारी मंत्री जिला सरगुजा एवं वित्त वाणिज्यिक कर विभाग मंत्री श्री ओमप्रकाश चौधरी, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, वन एवं जलवायु परिवर्तन परिवहन सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास समाज कल्याण विभाग मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा सांसद श्री चिंतामणी महाराज, उत्तर रायपुर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, महापौर अम्बिकापुर श्रीमती मंजुषा भगत भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने जनजातीय समाज प्रमुखों, पीवीटीजी समुदाय के समाज प्रमुखों, जनजातीय समाज के उत्थान में विशेष योगदान देने वालों, जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम में सेनानियों के परिजनों से भेंट की। श्रीमती मुर्मू ने इन सभी के साथ समूह फोटो खिंचवाई।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले जनजातीय जननायकों एवं सेनानियों के परिजनों का सम्मान किया। राष्ट्रपति ने सोनाखान क्रांति के जननायक शहीद वीर नारायण सिंह एवं शहीद वीर नारायण सिंह के सेनापति, परलकोट क्रांति के जननायक शहीद गेंदसिंह, झण्डा सत्याग्रह के जननायक श्री सुकदेव पातर, भूमकाल क्रांति के जननायक श्री बन्टु धुरवा, जंगल सत्याग्रह के जननायक शहीद रामधीन गोड़, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री राजनाथ भगत एवं श्री माझी राम गोंड़ के परिजनों से भेंट की।
राष्ट्रपति ने बिरहोर जनजाति के श्री राजेश बिरहोर, अबुझमाड़िया जनजाति के श्री रामजी ध्रुव, बैगा जनजाति के श्री एतवारी राम मछिया एवं पहाड़ी कोरवा जनजाति के श्री जोगीराम से सौजन्य भेंट की और हाल-चाल पूछा। राष्ट्रपति ने इसी तरह उरांव जनजाति के श्री मंगल उरांव, नगेशिया जनजाति के श्री धनराम नागेश, खैरवार जनजाति के श्री वीर सिंह खैरवार, कंवर जनजाति के श्री संजय सिंह, नागवंशी जनजाति के श्री लक्कू राम नागवंशी, मुरिया जनजाति के श्री धनीराम शोरी, गोंड़ जनजाति के श्री मोहन सिंह, पंण्डो जनजाति के श्री विनोद कुमार पंण्डो एवं चेरवा जनजाति के श्री डी.एन. चेरवा से भी भेंट की।
पण्डो जनजाति के बसन्त पण्डो से मिलकर जाना कुशलक्षेम, शॉल भेंट कर किया सम्मान
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु कार्यक्रम के दौरान पण्डो जनजाति के बसन्त पण्डो से मिलीं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने उनका कुशल क्षेम जाना और उन्हें शॉल भेंट की। बसन्त पण्डो ने राष्ट्रपति को बताया कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद जब वर्ष 1952 में अंबिकापुर आए थे, तब वे 08 वर्ष के थे। राष्ट्रपति ने बसन्त पण्डो को गोद लिया और उनका नामकरण किया था। बसंत पण्डो को गोद लेने के बाद, पण्डो जनजाति को ’राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र’ कहलाने का दर्जा प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बसन्त पण्डो को कहा कि आप मेरे भी पुत्र की तरह हैं।
RAIPUR / SHOURYAPATH / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार 19 नवम्बर को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर, सरगुजा में आयोजित 'जनजातीय गौरव दिवस' समारोह में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों का योगदान भारत के इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय है, जो लोकतंत्र की जननी है। इसके उदाहरण प्राचीन गणराज्यों के साथ-साथ कई जनजातीय परंपराओं में भी देखे जा सकते हैं, जैसे कि बस्तर में 'मुरिया दरबार' – जो आदिम लोगों की संसद है। राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय विरासत की जड़ें छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में गहरी हैं। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 नवंबर से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव पखवाड़े को बड़े स्तर पर मनाया।
राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में, जनजातीय समुदायों के विकास और कल्याण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर योजनाएँ विकसित और कार्यान्वित की गई हैं। पिछले वर्ष, गांधी जयंती के अवसर पर ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ शुरू किया गया था। इस अभियान का लाभ देश भर के 5 करोड़ से अधिक जनजातीय भाई-बहनों तक पहुँचेगा। वर्ष 2023 में, 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन अभियान) शुरू किया गया। ये सभी योजनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार जनजातीय समुदायों को कितनी प्राथमिकता देती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों के विकास प्रयासों को नई ऊर्जा देने के लिए, भारत सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के वर्ष के दौरान ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ शुरू किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस अभियान के तहत देश भर में लगभग 20 लाख स्वयंसेवकों का एक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये स्वयंसेवक जमीनी स्तर पर काम करके जनजातीय समुदायों का विकास सुनिश्चित करेंगे।
राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि छत्तीसगढ़ सहित देश भर में लोग वामपंथी उग्रवाद का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के सुविचारित और सुसंगठित प्रयासों से निकट भविष्य में वामपंथी उग्रवाद का उन्मूलन संभव हो पाएगा। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि हाल ही में आयोजित 'बस्तर ओलंपिक्स' में 1,65,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनजातीय महापुरुषों के आदर्शों का पालन करते हुए, छत्तीसगढ़ के लोग एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।
नई दिल्ली / एजेंसी (पीआईबी)राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार और जल संचय–जनभागीदारी पुरस्कार प्रदान किए, जिसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रायपुर जिला और रायपुर नगर निगम को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ। रायपुर नगर निगम को पूरे देश में प्रथम स्थान, रायपुर जिले को ईस्टर्न जोन में तृतीय स्थान, तथा राज्यों की श्रेणी में छत्तीसगढ़ को द्वितीय स्थान हासिल हुआ।
राष्ट्रपति मुर्मु ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मानव सभ्यता की कहानी सदैव नदियों और जल स्रोतों के इर्द-गिर्द विकसित हुई है। भारतीय परंपरा में जल पूजनीय माना जाता है और हमारे राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का पहला शब्द “सुजलम्” देश में जल की सर्वोच्च प्राथमिकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जल का कुशल उपयोग केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अनिवार्यता है, विशेषकर भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में जहाँ प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन जल चक्र को प्रभावित कर रहा है, इसलिए सरकार और जनता को मिलकर जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
राष्ट्रपति ने बताया कि जल संचय–जनभागीदारी पहल के तहत देशभर में 35 लाख से अधिक भूजल पुनर्भरण संरचनाएं निर्मित की गई हैं। उन्होंने उद्योगों द्वारा चक्रीय जल अर्थव्यवस्था अपनाने, जल उपचार एवं पुनर्चक्रण बढ़ाने और कई इकाइयों द्वारा शून्य द्रव उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने की सराहना की।
रायपुर की ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में रायपुर जिले ने जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया। पुरस्कार कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह तथा नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप ने ग्रहण किया। रायपुर नगर निगम ने 33,082, रायपुर जिले ने 36,282 तथा छत्तीसगढ़ ने 4,05,563 जल संरक्षण कार्य पूर्ण किए। इनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज पिट्स, अमृत सरोवर, टॉप डैम, परकोलेशन टैंक तथा स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट के अंतर्गत डिजिटल भू-जल ट्रैकिंग सिस्टम शामिल हैं। साथ ही रायपुर में 4 एसटीपी के माध्यम से 206 MLD क्षमता विकसित की गई और 9 औद्योगिक इकाइयों को 125.849 MLD शुद्ध जल उपलब्ध कराया गया।
राष्ट्रपति ने कहा कि जल का सम्मान और संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने जल-जागरूकता को देश की जनचेतना का केंद्र बनाने का आह्वान किया।
शौर्यपथ दैनिक समाचार, 19 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) और जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को पूर्ण बहुमत मिलने के बावजूद मुख्यमंत्री पद पर अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं और सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों के बारे में चर्चा जारी है, लेकिन अभी तक गठबंधन के भीतर से कोई स्पष्ट नाम सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया इस्तीफा:
सरकार गठन की दिशा में पहला कदम
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 16 नवंबर 2025 को बिहार के राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह कदम बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन की प्रक्रिया के तहत उठाया गया है। नीतीश कुमार का इस्तीफा तकनीकी रूप से बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के बाद नई सरकार के गठन के लिए पहला कदम माना जा रहा है। इस्तीफा देने के बाद राज्यपाल ने नीतीश कुमार से कहा है कि वे तब तक मुख्यमंत्री बने रहें, जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाता।
राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान ने नीतीश कुमार को इस स्थिति में कार्य करते रहने की अनुमति दी है, ताकि राज्य में संवैधानिक संकट न उत्पन्न हो और सरकार के गठन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राज्य में स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाता, तब तक राज्य में कोई अस्थिरता नहीं आनी चाहिए।
आगामी बैठकें: नई सरकार के
गठन के लिए महत्वपूर्ण संकेत**
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद, भाजपा और जदयू सहित एनडीए के सहयोगी दल अब नए मंत्रिमंडल और मुख्यमंत्री पद के लिए बातचीत में जुटे हुए हैं। दोनों पार्टियाँ और उनके सहयोगी दलों के नेताओं के बीच रणनीतिक बैठकें चल रही हैं, जिनमें राज्य की नई सरकार की रूपरेखा और मुख्यमंत्री का नाम तय किया जाएगा।
इस सिलसिले में, 19 नवंबर 2025 को विधायकों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इस बैठक में एनडीए के सभी विधायकों और पार्टी नेताओं को शामिल किया जाएगा, और यह बैठक राज्य के आगामी नेतृत्व के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है।
इसके बाद, 20 नवंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जा सकता है। इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित एनडीए के शीर्ष नेता और अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तियाँ भी उपस्थित हो सकती हैं। समारोह में मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सभी सदस्य शपथ लेंगे, और नए नेतृत्व का आधिकारिक रूप से उद्घाटन होगा।
मुख्यमंत्री पद के लिए नामों की चचार्:
नीतीश कुमार का नाम सबसे प्रमुख
मुख्यमंत्री पद पर संभावनाओं को लेकर बिहार के राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। जदयू और भाजपा दोनों ही पार्टी के भीतर से मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम पर हो रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार का नाम मुख्यमंत्री के लिए सबसे प्रबल माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में ही एनडीए ने विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल की है और उनकी राजनीतिक स्थिरता के कारण ही गठबंधन की सहमति भी उन्हीं के पक्ष में देखी जा रही है।
इसके अलावा, सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों में मुख्यमंत्री पद के लिए अन्य नेताओं के नामों की भी चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार के नाम पर अपनी सहमति दी है। हालांकि, फिलहाल तक इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
गठबंधन सहयोगियों की सहमति और
विधायकों की बैठक के बाद अंतिम निर्णय
मुख्यमंत्री पद के लिए अंतिम निर्णय विधायकों की बैठक और गठबंधन सहयोगियों की सहमति के बाद लिया जाएगा। जदयू और भाजपा के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसमें दोनों दलों के शीर्ष नेता इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार ही अगले मुख्यमंत्री के रूप में गठबंधन की सहमति प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि उनके नेतृत्व में बिहार में विकास के कई महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाया गया है।
यह बैठक इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि इसमें मुख्यमंत्री के साथ-साथ मंत्रिमंडल के गठन पर भी चर्चा की जाएगी। जिन मंत्रियों को नई सरकार में जगह दी जाएगी, उनका चयन गठबंधन के नेताओं के बीच हो सकता है, जो राज्य की राजनीति और विकास योजनाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
नई सरकार का गठन और राजनीति में आगे का रुझान
19 और 20 नवंबर 2025 को होने वाली बैठकों और शपथ ग्रहण समारोह के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। बिहार की राजनीति में अब कई सवालों के जवाब मिलने वाले हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए इस राजनीतिक स्थिति को किस तरह से संभालता है। नई सरकार के गठन के बाद राज्य में विकास के कार्यों और राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने की चुनौती मुख्य रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी टीम के सामने होगी।
नई दिल्ली(पीआईबी)/ शौर्यपथ / किसानों से सीधे संवाद स्थापित करने और केंद्र सरकार की कृषि संबंधी पहलों की जमीनी प्रगति का आकलन करने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 19 नवम्बर को छत्तीसगढ़ के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। उनके दौरे का मुख्य आकर्षण धमतरी में आयोजित होने वाला कृषक सम्मेलन एवं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त वितरण कार्यक्रम से जुड़ना है।
दौरे की शुरुआत में श्री चौहान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोटिक स्ट्रेस मैनेजमेंट (ICAR–NIBSM), रायपुर पहुंचेंगे, जहां वे संस्थान की गतिविधियों का अवलोकन करेंगे, पौधारोपण करेंगे और वैज्ञानिकों एवं किसानों से चर्चा करेंगे। इसके पश्चात वे डॉ. शोभाराम देवांगन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संस्कृति मंत्रालय एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त लाभार्थी सम्मेलन में भाग लेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान वे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशभर के करोड़ों किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त का वर्चुअल अंतरण देखेंगे। वर्ष 2019 में प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से तीन समान किश्तों में प्रदान की जाती है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है।
धमतरी के मुख्य समारोह के बाद, श्री चौहान का फोकस राज्य के किसान समुदाय से प्रत्यक्ष संवाद पर रहेगा। इस उद्देश्य से रायपुर के अग्रवाल बगीचा, भटगांव में व्यापक कृषक संवाद एवं किसान चौपाल का आयोजन किया गया है। इन सत्रों का उद्देश्य औपचारिकता से आगे बढ़कर किसानों की वास्तविक समस्याओं, चुनौतियों और सुझावों को प्रत्यक्ष रूप से सुनना तथा कृषि क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों का गहन आकलन करना है। इन संवादों से केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित अन्य कृषि योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने तथा भविष्य की नीतियों के निर्माण के लिए व्यवहारिक फीडबैक प्राप्त होगा। यह दौरा छत्तीसगढ़ सहित देशभर के किसानों के कल्याण, समृद्धि और सशक्तिकरण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करता है।
"पूर्व चुनाव आयुक्त कुरैशी ने पूछा—क्या आयोग ऐसे घर में ले जाएगा जिसका पता '00000' है?
पटना। शौर्यपथ।
बिहार चुनाव के बाद मतदाता सूची में मकान नंबर '00000' या '0' दर्ज होने की समस्या ने आयोग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी मुद्दे पर पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने तीखे शब्दों में चुनाव आयोग को घेरा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “क्या चुनाव आयोग हमें या आपको उस घर में ले चलेगा जिसका पता 00000 लिखा है? मजाक बना रखा है क्या!”
कुरैशी का कहना है कि आयोग को ऐसे वोटर डेटा की जिम्मेदारी संभालते समय पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए, नहीं तो शून्य मकान नंबर वाले ‘काल्पनिक पते’ पर पहुंचना सिर्फ लोकतंत्र का मजाक बन सकता है। उनका यह तंज सोशल मीडिया पर छाया हुआ है; बहुतों ने इसे चुनावी सिस्टम के प्रति जागरूकता और जवाबदेही बढ़ाने वाला बयान बताया।
हालांकि आयोग ने सफाई दी है कि कई बार स्थानीय प्रशासन द्वारा घर का नंबर नहीं दिया जाता, ऐसे में '00000' जैसे नंबर दर्ज करना केवल एक अनौपचारिक विकल्प या सिस्टम की मजबूरी है। लेकिन सवाल वही है—क्या लोकतंत्र में मतदाता का आसरा केवल शून्य में ही रहेगा?
बिहार में सत्ता बदलाव के संकेत तेज! हृष्ठ्र की बंपर जीत के बाद किसके हाथ जाएगा ताज? शपथ से पहले सियासी सरगर्मी चरम
पटना / शौर्यपथ /
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है। दो चरणों की मतदान प्रक्रिया और शुक्रवार को हुई मतगणना के बाद तस्वीर साफ हो गई है— हृष्ठ्र ने 202 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है , जिसमें 89 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। महागठबंधन मात्र 34 सीटों पर सिमट गया।
हालाँकि हृष्ठ्र ने अभी तक औपचारिक रूप से सरकार गठन का दावा नहीं पेश किया है, लेकिन अंदरखाने मंथन जारी है। इसी बीच तेज प्रताप यादव की नई राजनीतिक सक्रियता ने समीकरणों में नया मोड़ ला दिया है।
तेज प्रताप के 'समर्थन संकेतÓ से बढ़ी हलचल -सरकार में आएंगे साथ?
तेज प्रताप यादव की जनशक्ति जनता दल की बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता प्रेम कुमार यादव ने बड़ा बयान दिया— बिहार के विकास के लिए जो भी उचित होगा, तेज प्रताप उसे करेंगेज् सरकार में सकारात्मक भूमिका निभाने को तैयार हैं। इसे राजनीतिक गलियारों में हृष्ठ्र सरकार को बाहरी या अंदरूनी समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
तेज प्रताप ने अपनी बहन रोहिणी आचार्य को पार्टी में मुख्य संरक्षक बनाने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा—"हम उनके चरणों में गिरकर भी उन्हें पार्टी में लाएँगे, क्योंकि जनशक्ति जनता दल ही असली लालू प्रसाद यादव की पार्टी है।"
नीतीश कुमार सरकार आज देगी इस्तीफा; कल होगी कार्यवाहक व्यवस्था की शुरुआत
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 17 नवंबर को अंतिम कैबिनेट बैठक बुलाई है, जिसमें विधानसभा भंग करने की अनुशंसा , नई विधानसभा के गठन , पर मुहर लगेगी। उसके बाद नीतीश कुमार राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे, और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। नई सरकार के गठन तक नीतीश कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
19 या 20 नवंबर को नए मुख्यमंत्री का शपथ समारोह, क्करू मोदी हो सकते हैं शामिल
गांधी मैदान में भव्य समारोह की तैयारी शुरू हो चुकी है।17 से 20 नवंबर गांधी मैदान आम लोगों के लिए बंद , 19 या 20 नवंबर शपथ ग्रहण की संभावित तारीख बताई जा रही है शपथ ग्रहण में क्करू मोदी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री हो सकते हैं शामिल
सरकार गठन फ ॉर्मूला तय-6 विधायकों पर 1 मंत्री!
बीजेपी-जेडीयू के बीच पहला दौर की बातचीत पूरी जिसमे मंत्रियों की संख्या और हिस्सेदारी पर सहमति बनाने की बात कही जा रही है सूत्रों के अनुसार 6 विधायकों पर 1 मंत्री का फार्मूला लागू किया जाएगा।इससे साफ है कि नई सरकार में चेहरों की संख्या सीमित और चयन बेहद रणनीतिक होगा।
हृष्ठ्र की जीत पर मुकेश सहनी का कटाक्ष - पैसे के दम पर जीते!
वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने हार को स्वीकारते हुए भी एनडीए पर तीखा हमला बोला—महिलाओं को पैसे देकर वोट खरीदा गयाज् लोकतंत्र की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने लालू परिवार की कलह को "पारिवारिक मामला" बताते हुए दोषारोपण की राजनीति को गलत ठहराया।
रोहिणी आचार्य का भावनात्मक विस्फोट— "पिता को बचाने के लिए दी गई किडनी को गंदा बताया जा रहा"
लालू यादव की बेटी रोहिणी ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक पोस्ट किया—"मेरे पति या बच्चों से अनुमति न लेकर पिता को बचाया, पर आज उसी बलिदान को गंदा कहा जा रहाज् किसी घर में 'रोहिणीÓ जैसी बेटी न हो।"उनके इस पोस्ट ने परिवार की अंदरूनी खटास को और उजागर कर दिया है।
मुख्यमंत्री आवास पर बैठकें तेज - बीजेपी अध्यक्ष, डिप्टी सीएम समेत जेडीयू के कई नेता पहुंचे लगातार सीएम हाउस में बैठकें कर रहे हैं। हृष्ठ्र विधायक दल की बैठक में नए नेता का चयन भी संभव है।
बिहार की सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा?
शपथ ग्रहण की तारीख तय है, स्थल तैयार है, मैदान बंद है। अब बस सवाल एक— हृष्ठ्र का मुख्यमंत्री कौन होगा? बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, मगर नीतीश की भूमिका भी निर्णायक बनी हुई है। तेज प्रताप की सक्रियता ने राजनीतिक समीकरण और रोचक बना दिए हैं।अगले 48 घंटे बिहार की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
नवा रायपुर से चीन तक — छत्तीसगढ़ में खुला लॉजिस्टिक्स का वैश्विक द्वार
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के तीव्र गति से विकसित होते लॉजिस्टिक्स सेक्टर में आज एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित हुआ है। छत्तीसगढ़ से अब तक का सबसे बड़ा, कुल 12,000 मीट्रिक टन कॉपर कॉन्सन्ट्रेट (Copper Concentrate) निर्यात कंसाइनमेंट, नवा रायपुर स्थित मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) से चीन के लिए रवाना किया गया। इस श्रृंखला की पहली खेप 2,200 मीट्रिक टन की रही, जो 11 नवम्बर को विशाखापट्टनम पोर्ट के लिए भेजी गई, जहाँ से इसे आगे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाएगा।
उद्योग विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विकसित यह अत्याधुनिक मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, मध्य भारत के औद्योगिक और व्यापारिक विकास का नया द्वार बन रहा है। अत्याधुनिक कार्गो हैंडलिंग सिस्टम, रेल कनेक्टिविटी, और मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन से सुसज्जित यह सुविधा राज्य एवं देश के अन्य हिस्सों की औद्योगिक इकाइयों को वैश्विक बाजारों तक कुशल, सुरक्षित और तीव्र पहुँच प्रदान कर रही है।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ अब खनिज और उद्योग आधारित अर्थव्यवस्था से लॉजिस्टिक्स और निर्यात केंद्रित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे, कुशल कनेक्टिविटी और सक्रिय शासन के समन्वय ने छत्तीसगढ़ को मध्य भारत का लॉजिस्टिक्स पावरहाउस बना दिया है।
इस निर्यात अभियान के साथ छत्तीसगढ़ ने अपने खनिज और औद्योगिक उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारों से जोड़ने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाया है। यह कदम भारत के लॉजिस्टिक्स मानचित्र पर छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रासंगिकता को और सुदृढ़ करता है।
राज्य सरकार ने इस प्रगति को और तीव्र करने के लिए ‘छत्तीसगढ़ राज्य लॉजिस्टिक्स नीति 2025’ लागू की है। यह नीति वर्ष 2047 तक छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लक्ष्य के साथ तैयार की गई है। नीति के अंतर्गत आधुनिक मल्टीमॉडल अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, निर्यात संवर्द्धन, और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन पर विशेष बल दिया गया है। साथ ही, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज जैसी परियोजनाओं के लिए आकर्षक प्रोत्साहन भी प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे संतुलित क्षेत्रीय विकास और स्थायित्व सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “नवा रायपुर मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क से राज्य के सबसे बड़े कॉपर कॉन्सन्ट्रेट निर्यात का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह कदम इस दिशा में हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ को हम लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक शक्ति के रूप में विकसित करेंगे।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई राज्य लॉजिस्टिक्स नीति 2025 के माध्यम से सरकार कनेक्टिविटी बढ़ाने, निजी निवेश आकर्षित करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि “नीतिगत सुधार, रणनीतिक अवसंरचना और उद्योगों के आत्मविश्वास के इस समन्वय से छत्तीसगढ़ न केवल मध्य भारत को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ रहा है, बल्कि लॉजिस्टिक्स आधारित विकास के नए युग को भी परिभाषित कर रहा है।”
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
