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नई दिल्ली / एजेंसी / भारत और इटली ने पर्यटन क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। पर्यटन संबंधी दूसरे भारत-इटली संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) की बैठक में फिल्म-पर्यटन, पर्यटन गंतव्यों के युग्मीकरण, कौशल विकास, पर्यटन आंकड़ों के आदान-प्रदान तथा कारोबार-से-कारोबार (बी2बी) सहभागिता बढ़ाने सहित कई विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार और इटली के पर्यटन मंत्रालय की महासचिव इमानुएला ट्रिपी ने की। दोनों देशों के पर्यटन, संस्कृति और विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों के साथ भारत स्थित पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया।
बैठक में दोनों देशों के बीच कम ज्ञात पर्यटन गंतव्यों को बढ़ावा देने, फिल्म निर्माण के माध्यम से पर्यटन को प्रोत्साहित करने तथा पर्यटन क्षेत्र में कौशल एवं क्षमता निर्माण पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सहयोग को जमीन पर आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों ने चिन्हित क्षेत्रों में लक्षित तकनीकी समूह गठित करने और संपर्क बिंदु नामित करने पर सहमति व्यक्त की। इसका उद्देश्य संबंधित सरकारी एवं उद्योग हितधारकों के बीच निरंतर संपर्क और सहयोग को सुगम बनाना है।
2027 में संस्कृति एवं पर्यटन वर्ष
दोनों पक्षों ने प्रस्तावित भारत-इटली संस्कृति एवं पर्यटन वर्ष 2027 के संदर्भ में भी पर्यटन सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं पर्यटन संबंधी आदान-प्रदान को और मजबूत करना है।
संयुक्त कार्य समूह की बैठक से पर्यटन क्षेत्र में भारत और इटली के बीच संस्थागत तथा उद्योगगत संपर्क को बढ़ावा देने की दिशा में सहयोग का नया आधार तैयार हुआ है।
स्रोत : प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), दिल्ली
मुल्ला अफरोज की हिरासत रद्द, यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत; कैंसर दवा की खरीद कीमत और MRP में भारी अंतर पर केंद्र से मांगा जवाब
नई दिल्ली / सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान नागरिक अधिकारों और आम मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। एक ओर अदालत ने संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज की हिरासत रद्द करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत लगाई, वहीं दूसरी ओर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर गंभीर सवाल उठाए।
संभल मामले में हिरासत रद्द, यूपी सरकार पर 10 लाख की लागत
संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की हिरासत को रद्द कर दिया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत भी लगाई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष हुई।
अदालत के इस आदेश का सीधा संबंध मुल्ला अफरोज की हिरासत की वैधानिकता से था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हिरासत रद्द किए जाने और सरकार पर लागत लगाए जाने से संबंधित आदेश को मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कैंसर दवाओं की कीमतों पर अदालत की गंभीर चिंता
इसी दौरान कैंसर और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दवा के खरीद मूल्य और MRP के बीच भारी अंतर पर सवाल उठाए। द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई में एक उदाहरण सामने आया, जिसमें किसी कैंसर दवा की निर्माता से खुदरा स्तर तक कीमत करीब 2,700 रुपये बताई गई, जबकि उसकी MRP करीब 27,000 रुपये थी।
कीमत में इस बड़े अंतर पर अदालत ने गंभीर टिप्पणी की और इसे “carnage” शब्द से संबोधित किया। अदालत ने केंद्र सरकार से दवाओं की कीमतों और इस तरह के मूल्य अंतर से जुड़े मुद्दे पर जवाब मांगा।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों पर महंगी दवाओं के आर्थिक प्रभाव और दवाओं के मूल्य निर्धारण की व्यवस्था से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण रूप से सामने आए। अदालत द्वारा केंद्र से जवाब मांगे जाने के बाद अब सरकार का पक्ष और आगे की न्यायिक कार्यवाही इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
नई दिल्ली / एजेंसी (PIB)/ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में ‘प्रहार-CT (आतंकवाद-रोधी) नीति और रणनीति’ सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ अगले 10 वर्षों के लिए मजबूत और प्रभावी तंत्र विकसित करने, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय तथा आतंकवाद-रोधी कार्रवाई को थाना स्तर तक मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।
सम्मेलन में ‘प्रहार’ रणनीति के सात प्रमुख स्तंभों—रोकथाम, प्रतिक्रिया, आंतरिक क्षमताओं का एकीकरण, मानवाधिकारों का संरक्षण, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों में कमी, अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में समन्वय तथा Whole-of-Society दृष्टिकोण के साथ रिकवरी और लचीलापन—पर विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव, CAPFs और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख, 15 राज्यों के पुलिस महानिदेशक तथा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ATS प्रमुख सम्मेलन में शामिल हुए।
थाना स्तर तक पहुंचे ‘प्रहार’ की रणनीति
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। उन्होंने आतंकवादी घटनाओं का लगातार विश्लेषण कर अगले दशक के लिए मजबूत ‘प्रहार’ तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद-रोधी उपायों को थाना स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और प्रहार के प्रत्येक बिंदु पर सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने हर स्तर पर आतंकवाद-रोधी स्वचालित प्रतिक्रिया प्रणाली को संस्थागत बनाने तथा कार्रवाई में देरी रोकने के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
36 देशों से 288 भगोड़ों की वापसी का दावा
अमित शाह ने कहा कि सरकार के अनुसार 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। उन्होंने एजेंसियों के बेहतर समन्वय से सीमापार हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े शहज़ाद भट्टी नेटवर्क के 40 से अधिक मॉड्यूल ध्वस्त किए जाने, 15 राज्यों में 100 से अधिक FIR दर्ज होने और 350 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया गया है।
नया प्रत्यर्पण पोर्टल लॉन्च
सम्मेलन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने नया प्रत्यर्पण पोर्टल भी लॉन्च किया। इसके माध्यम से विदेशों में मौजूद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया में संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर और कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है। उन्होंने राज्य पुलिस बलों से केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर विदेश से भगोड़ों को वापस लाने के लिए विशेष टीम गठित करने का भी आग्रह किया।
सम्मेलन में आतंकवाद के बदलते स्वरूप के अनुरूप रणनीति को लगातार अपडेट करने, त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था मजबूत करने और केंद्र व राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / एशियाई खेल 2026 में भारतीय निशानेबाज ईशा सिंह ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उनके शानदार प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए भविष्य की सफलताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ईशा सिंह ने बेहतरीन स्कोर के साथ प्रतियोगिता में सटीकता और आत्मसंयम का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईशा आने वाले समय में भी देश के लिए कई और सफलताएं हासिल करेंगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा, “एशियाई खेल 2026 में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल की व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर ईशा सिंह को बधाई। बेहतरीन स्कोर के साथ, ईशा ने बेहद सटीकता और आत्मसंयम का प्रदर्शन किया। भविष्य में और भी सफलताएं अर्जित करने के लिए उन्हें शुभकामनाएं।”
ईशा सिंह की इस उपलब्धि ने एशियाई खेलों में भारतीय निशानेबाजी की मौजूदगी को एक बार फिर मजबूत किया है।
नई दिल्ली / एजेंसी / भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और इसके लिए इस्तेमाल किए जा रहे ECINet तकनीकी प्लेटफॉर्म को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। 2,000 से अधिक समाजसेवियों, एक्टिविस्टों, पूर्व नौकरशाहों, वकीलों और शिक्षाविदों ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को खुला पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
खुले पत्र पर समाजसेवी प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, अंजलि भारद्वाज, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, मद्रास हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डी. हरिपरंथामन, अर्थशास्त्री जयती घोष और पूर्व नौकरशाह जवाहर सरकार समेत कई लोगों के हस्ताक्षर बताए गए हैं।
ECINet और मतदाता डेटा के केंद्रीकरण पर आपत्ति
हस्ताक्षरकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के माध्यम से मतदाता डेटाबेस का केंद्रीकरण किया जा रहा है और Form-6 में कथित तौर पर अनधिकृत बदलाव किए गए हैं। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि ECINet के इस्तेमाल से स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
पत्र में करीब 13 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका या ऐसे मामलों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, ये दावे पत्र भेजने वाले समूह के आरोप हैं और इनके संबंध में चुनाव आयोग का पक्ष अलग है।
SIR पर रोक और न्यायिक जांच की मांग
हस्ताक्षरकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से पूरे देश में चल रही SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने, मामले का स्वतः संज्ञान लेने और चुनाव आयोग के प्रशासनिक आचरण की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
पहले सुप्रीम कोर्ट ने SIR को माना था वैध
इस विवाद के बीच महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में SIR प्रक्रिया को संवैधानिक और वैध माना था। कोर्ट ने कहा था कि फर्जी मतदाताओं को हटाने के उद्देश्य से मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण करना चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में आता है।
ECI ने सर्वसम्मति से फैसले का दावा किया
चुनाव आयोग ने उठ रहे विवादों के बीच स्पष्ट किया है कि SIR से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। साथ ही, ECINet प्लेटफॉर्म को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर आयोग ने इसकी समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की घोषणा भी की है।
SIR को लेकर अब एक ओर मतदाता सूची की शुद्धता और फर्जी नामों को हटाने का संवैधानिक अधिकार महत्वपूर्ण मुद्दा है, वहीं दूसरी ओर प्रक्रिया की पारदर्शिता, तकनीकी व्यवस्था और वैध मतदाताओं के अधिकारों को लेकर उठाई गई आपत्तियां भी सुप्रीम कोर्ट के संभावित विचार का विषय बन सकती हैं।
नई दिल्ली / एजेंसी / सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को महिलाओं की सुरक्षा, चुनाव चिह्न विवाद, यूपीआई भुगतान शुल्क, पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल और सीबीएसई की भाषा नीति समेत कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। अलग-अलग पीठों ने संबंधित सरकारों और संस्थाओं से जवाब मांगा तथा कई मामलों में समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
दिल्ली-NCR में यौन अपराधों पर स्वतः संज्ञान
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली-NCR में नाबालिगों और महिलाओं के साथ बलात्कार की हालिया मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने कानून प्रवर्तन और प्रशासन की ‘सिस्टमैटिक विफलता’ पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि ढीली पेट्रोलिंग और प्रशासनिक कमियों के कारण पार्क, बसें और मेट्रो स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहें महिलाओं के लिए जोखिम वाले क्षेत्र नहीं बन सकतीं। कोर्ट ने कहा कि केवल सहानुभूति या एकजुटता पर्याप्त नहीं, बल्कि लापरवाही के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। दिल्ली पुलिस और सरकार से तत्काल जवाब मांगा गया है।
TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर ECI को तीन महीने
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला करने का निर्देश दिया। आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों और मामले की जटिलता का हवाला देते हुए 5-6 महीने का समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। सभी पक्षों को दलीलें और अतिरिक्त हलफनामे दाखिल करने के लिए चार सप्ताह दिए गए हैं। तब तक ECI का अंतरिम फ्रीज आदेश लागू रहेगा।
₹2,000 से अधिक UPI लेन-देन पर 0.4% MDR को चुनौती
15 अक्टूबर से चुनिंदा मर्चेंट P2M यूपीआई लेन-देन पर ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने फिलहाल फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार और RBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि फैसला सार्वजनिक परामर्श और पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा के बिना लिया गया।
पैकेट फूड पर वार्निंग लेबल को लेकर FSSAI से सवाल
मैगी, कुरकुरे जैसे पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा स्पष्ट रूप से दिखाने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई हुई। जस्टिस पारदीवाला ने FSSAI की प्रस्तावित लंबी समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मामले में इतना समय क्यों लगाया जा रहा है। कोर्ट ने FSSAI से ‘एडेड शुगर’ की स्पष्ट परिभाषा बताने को कहा। मामले में फैसला सुरक्षित रखा गया है।
CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी में कक्षा 6 को राहत
कक्षा 9 से लागू होने वाली CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कक्षा 6 के छात्रों को भी वह छूट देने का निर्देश दिया, जो वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को दी जा रही है। इस मामले में केंद्र सरकार के विरोध के बावजूद कोर्ट ने CBSE को निर्देश जारी किया।
गांगुली आर्बिट्रेशन मामले में ₹14.49 करोड़ का पुरस्कार बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने एक टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर सौरव गांगुली के पक्ष में दिए गए ₹14.49 करोड़ के मध्यस्थता पुरस्कार को चुनौती दी गई थी।
नेताजी के अवशेष भारत लाने की याचिका पर भी सुनवाई
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पार्थिव अवशेष जापान से भारत लाने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई हुई। कार्यवाही के दौरान एक मध्यस्थ ने याचिकाकर्ता द्वारा किए गए दावों पर सवाल उठाए।
इस तरह 28 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने महिला सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से लेकर चुनावी प्रक्रिया, डिजिटल भुगतान और शिक्षा नीति तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संबंधित संस्थाओं से जवाब और समयबद्ध कार्रवाई की दिशा तय की।
नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के जनजातीय कल्याण विभाग को जनजातीय विरासत के संरक्षण एवं वनाधिकारों की निरंतर सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए अभिनव कार्यों के लिए प्रतिष्ठित SKOCH Award से सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि के लिए तत्कालीन टीम लीडर एवं प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, IAS को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया, जिन्होंने इस दोनों परियोजना के संबंध में SKOCH Award की तीन स्तरीय प्रस्तुतीकरण प्रक्रिया में भाग लेते हुए Jury के समक्ष प्रस्तुतीकरण किया और jury एवं पब्लिक वोटिंग से विभाग के प्रयासों का चयन हुआ। इस अवसर पर परियोजना से जुड़े अन्य विभागीय अधिकारी श्री बी के राजपूत, संयुक्त सचिव एवं श्रीकांत शुक्ला, ओएसडी उपस्थित रहे
विभाग को यह सम्मान दो महत्वपूर्ण पहलों ‘AADI VIRASAT’ और ‘मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार’ के लिए प्रदान किया गया। इन पहलों का चयन तीन स्तरों पर हुए प्रस्तुतीकरण एवं मूल्यांकन तथा Public Voting की प्रक्रिया के उपरांत किया गया।
‘AADI VIRASAT’ के तहत दो संग्रहालय यथा शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का निर्माण किया गया है, जिसका उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा नवंबर 2025 को किया गया साथ ही राज्य का पहला जनजातीय संग्रहालय का भी निर्माण किया गया है, जिसका उद्घाटन माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा मई 2025 में किया गयाl जनजातीय इतिहास, वीरता एवं जीवंत संस्कृति को डिजिटल तकनीक, AR/VR एवं immersive experiences के माध्यम से एकीकृत कर नई पीढ़ी से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया गया है।
वहीं, ‘मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार’ के माध्यम से वनाधिकार को केवल एक बार प्राप्त अधिकार न मानकर पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रहने वाली सतत व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें उत्तराधिकार, अभिलेखों के अद्यतन तथा हितग्राहियों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।
इस उपलब्धि पर माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी एवं आदिम जाति विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री रामविचार नेताम जी ने विभागीय अधिकारियों एवं पूरी टीम को शुभकामनाएं एवं बधाई दी तथा इसे छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों की विरासत एवं अधिकारों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की राष्ट्रीय पहचान बताया।
यह सम्मान छत्तीसगढ़ में जनजातीय गौरव, विरासत संरक्षण एवं अधिकार-आधारित सुशासन के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को मिली राष्ट्रीय पहचान है।
28 से 30 सितंबर तक शाखाओं में कामकाज प्रभावित; पांच दिन तक बैंकिंग सेवाओं पर असर की संभावना, डिजिटल सेवाओं का ले सकेंगे सहारा
नई दिल्ली। बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर है। आज 27 सितंबर 2026, रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) सामान्य रूप से खुले रहेंगे। यह विशेष व्यवस्था आगामी तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल के मद्देनजर की गई है, ताकि ग्राहक जरूरी बैंकिंग कार्य पहले ही निपटा सकें। वित्त मंत्रालय के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने 27 सितंबर को बैंक शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम-लिंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट को संचालित रखने की अनुमति दी है।
28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना सहित अन्य सेवा संबंधी मुद्दे शामिल हैं। सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से हड़ताल टालने की अपील की गई है, लेकिन उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार हड़ताल का आह्वान जारी है।
लगातार पांच दिन बैंक शाखाओं पर असर की स्थिति
ग्राहकों के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 26 सितंबर चौथा शनिवार था और 27 सितंबर रविवार होने के बावजूद सरकारी बैंक एवं RRB आज विशेष रूप से खुले हैं। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल प्रस्तावित है। ऐसे में सामान्य शाखा सेवाओं के लिहाज से ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर?
हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं में नकद लेन-देन, चेक संबंधी कार्य, शाखा स्तर के भुगतान, खाता संबंधी काम और अन्य प्रत्यक्ष बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। वित्त मंत्रालय ने भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से आवश्यक सेवाएं बनाए रखने और एटीएम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं।
UPI और डिजिटल बैंकिंग से मिल सकती है राहत
शाखाएं बंद रहने की स्थिति में ग्राहक UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी उपलब्ध डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि किसी विशेष सेवा की उपलब्धता बैंक और तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है। इसलिए जिन ग्राहकों को चेक जमा करने, बड़ी नकद निकासी, ड्राफ्ट, शाखा में दस्तावेज जमा करने या अन्य प्रत्यक्ष बैंकिंग कार्य की जरूरत है, उन्हें आज ही अपना काम निपटा लेना बेहतर होगा।
ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह
27 सितंबर: सरकारी बैंक और RRB खुले रहेंगे।
28–30 सितंबर: UFBU की प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल।
जरूरी शाखा संबंधी काम आज ही पूरा कर लें।
पर्याप्त नकदी की जरूरत हो तो समय रहते ATM से व्यवस्था कर लें।
UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग का विकल्प इस्तेमाल करें।
बड़े या समयबद्ध बैंकिंग लेन-देन के लिए अपने बैंक की ताजा सूचना जरूर देखें।
यानी बैंक ग्राहकों के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। सरकार ने रविवार को बैंक खोलने की व्यवस्था इसी उद्देश्य से की है कि 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल के दौरान आम लोगों को कम से कम असुविधा हो।
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज (25 सितंबर) देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ा और राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस आंदोलन को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), और विभिन्न नागरिक संगठनों (Civil Society) का समर्थन प्राप्त था।
इस पूरे घटनाक्रम और विवाद से जुड़ी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:
आंदोलन और विरोध का मुख्य कारणयह प्रदर्शन मुख्य रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर हो रहा था।
वोट चोरी के आरोप: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा की गई इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, जिससे झुग्गी-झोपड़ियों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले हजारों गरीब नागरिकों के नाम मतदाता सूची से प्रभावित हुए हैं।
मुख्य मांग: आंदोलनकारियों का नारा था "वोट चोरी इस देशद्रोह"। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
2. पुलिस की सख्त कार्रवाई और नाकेबंदीदिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए थे:
रास्ते पूरी तरह बंद: जंतर-मंतर जाने वाले सभी रास्तों पर कई परतों (Layers) की भारी बैरिकेडिंग कर दी गई थी। यहां तक कि मीडिया कर्मियों और प्रदर्शनकारियों को भी घटना स्थल पर प्रवेश करने से पूरी तरह रोक दिया गया।
अनुमति नहीं होने का दावा: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आयोजकों ने इस प्रदर्शन के लिए कोई औपचारिक आवेदन नहीं दिया था और न ही कोई अनुमति ली गई थी, इसलिए भीड़ को जमा होने से रोका गया।
3. दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासतजंतर-मंतर पर जैसे ही प्रदर्शनकारी और छात्र जुटने लगे, पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से हटाना शुरू कर दिया:
प्रमुख गिरफ्तारियां/हिरासत: प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, और प्रसिद्ध वकील व सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण सहित कई छात्र नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
प्रशांत भूषण का बयान: हिरासत में लिए जाने के बाद प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया (X) पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकना सरकार की हताशा को दिखाता है और अब ऐसे आंदोलन देश के कोने-कोने में फैलेंगे।
4. देशव्यापी असर और विपक्षी दलों का मार्चयह आंदोलन सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक राष्ट्रव्यापी आक्रोश का हिस्सा था
:यूथ कांग्रेस और दिल्ली कांग्रेस: इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) और दिल्ली कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी रायसीना रोड और राउज एवेन्यू से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग कार्यालय) की तरफ मार्च निकाला, जहां सुरक्षा बलों को भारी संख्या में तैनात रहना पड़ा।
अन्य राज्यों में प्रदर्शन: कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में चुनाव कार्यालय की तरफ मार्च निकाला गया, जहां पुलिस के साथ नोकझोंक हुई और पुतले फूंके गए। वहीं असम में भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई और कई वरिष्ठ नेताओं को इसी मुद्दे पर प्रदर्शन करने के कारण हिरासत में लिया गया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
