October 01, 2026
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    भारत

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    रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश के गृह और लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान द्वारका में बन रहे नवा छत्तीसगढ़ सदन के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
    गृहमंत्री साहू ने निर्माण कार्यों का जायजा लेते हुये तय समय सीमा के अंदर कार्य निष्पादन के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। उन्होंने गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए कार्य में ओर तेज़ी लाने की बात भी कही । निरीक्षण के दौरान गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के साथ नई दिल्ली के लोक निर्माण विभाग के अधिकारी आर पी यादव भी उपस्थित थे।

    रायपुर / शौर्यपथ / राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलोदेवी नेताम ने संसद में विशेष उल्लेख नियम के माध्यम से छत्तीसगढ राज्य को उर्वरक आपूर्ति कम किए जाने का मुद्दा उठाया। श्रीमती नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ एक कृषि प्रधान प्रदेश है जहां की 80 प्रतिशत आबादी खेती से जुडी है। खरीफ के अन्तर्गत धान एवं अन्य अनाज लगभग 40.5 लाख हेक्टेयर, दलहन 3.76 लाख हेक्टेयर, तिलहन 2.55 लाख हेक्टेयर और अन्य फसल 1.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की जाती है।
    श्रीमती नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ सरकार ने केन्द्र सरकार से 11.75 लाख मे.टन रसायनिक उर्वरक की मांग की थी जिसे स्वीकृति भी दे दी गई थी लेकिन फिर भी केन्द्र सरकार ने जून महीने में सप्लाई प्लान के अनुसार उर्वरक आपूर्ति केवल 51 प्रतिशत ही की है। श्रीमती नेताम ने बताया कि छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से रसायन एवं उर्वरक मंत्री, भारत सरकार को मांग अनुसार उर्वरक प्रदान करने और जुलाई महीने में नीम कोटेड यूरिया न्यूनतम 1.50 लाख मे.टन, डीएपी 1.50 लाख मे.टन अतिरिक्त आवंटन करने के लिए पत्र भी लिखा गया है।
    श्रीमती नेताम ने मांग की है कि किसानों के हित में खरीफ 2021 में छत्तीसगढ राज्य की मांग एवं सप्लाई प्लान के अनुसार उर्वरक की आपूर्ति शीघ्र की जाए जिससे खरीफ फसल प्रभावित ना हो और छत्तीसगढ के किसानों को राहत मिल सके।

    नई दिल्ली। शौर्य पथ । मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दो वर्ष बाद आखिरकार मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया और एक जंबो टीम तैयार हो गई । 78 मंत्रियों के इस जंबो टीम में दलबदलु नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को आखिरकार केंद्रीय मंत्री मंडल में शामिल किया गया । केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मोदी कैबिनेट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय का प्रभार देने के बाद विपक्षी दलों की तरफ से उन्हें लगातार निशाने पर लेकर तंज किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को उन्हें बिकाऊ करार दिया. भूपेश बघेल ने कहा- सरकार एयर इंडिया को बेचने जा रही है और उस मंत्रालय की कमान ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथों में दी गई है. एयर इंडिया का लोगो महाराजा है. ज्योतिरादित्य सिंधिया और एयर इंडिया दोनों ही बिकाऊ हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा- एक की बोली लगने जा रही है और दूसरे को इसके बेचने का भार दिया गया है. गौरतलब है कि हाल में मोदी कैबिनेट का विस्तार किया गया है. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह पहला कैबिनेट विस्तार था. इसमें मध्य प्रदेश से बीजेपी के राज्यसभा सांसद सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया को पहली बार मंत्री बनाकर उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी दी गई है. इस कैबिनेट में 36 नए चेहरों के साथ कुल 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई है, जबकि 7 मंत्रियों का प्रमोशन किया गया. इसके बाद अब मोदी कैबिनेट में मंत्रियों की कुल संख्या 78 हो गई है. इससे पहले, ज्योतिरादित्य सिंधिया इससे पहले कांग्रेस का हाथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. उनके बीजेपी में शामिल होने और मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायकों को तोड़ने के बाद राज्य की कमलनाथ सरकार गिर गई थी. उसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में राज्य में नई सरकार बनी थी. उस वक्त ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी में अपनी अनदेखी का आरोप लगाया था.

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के ग्राम रामपुर पहुंचकर हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्री वीरभद्र सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री बघेल स्वर्गीय श्री सिंह के परिवारजनों से मिल कर शोक संवेदनाएं प्रकट की।
    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वर्गीय श्री वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि केन्द्रीय मंत्री और 6 बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रुप में उन्होंने देश और प्रदेश के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका निधन हिमाचल प्रदेश सहित कांग्रेस पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके निधन से हमने अपने एक वरिष्ठ नेता को हमेशा के लिए खो दिया। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि स्वर्गीय श्री वीरभद्र सिंह का छत्तीसगढ़ से भी निकट का संबंध था। वे केन्द्रीय इस्पात मंत्री के रुप में भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यक्रम में आए थे। उन्हें हम सब बहुत ही मिलनसार व्यक्ति के रुप में जानते हैं। श्री बघेल ने इस अवसर पर स्वर्गीय श्री वीरभद्र सिंह से जुड़े संस्मरणों को भी याद किया।

    // नरेंद्र मोदी सरकार के 43 मंत्रियों ने शपथ ले ली है. ये किसी सरकार का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार है.
    // शपथ ग्रहण से कुछ घंटे पहले ही देश के स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और सूचना एवं प्राद्योगिकी मंत्रियों ने इस्तीफ़े दे दिए. मोदी सरकार के कुल 12 मंत्रियों को पद से हटाया गया है.
    // 'मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस' का नारा देने वाले नरेंद्र मोदी की सरकार में 36 नए मंत्री शामिल किए गए हैं.
    // राजनीतिक विश्लेषक इसके पीछे दो बड़े कारण मानते हैं- एक तो व्यावहारिक राजनीतिक मजबूरियाँ और दूसरा महामारी के बाद जनता को ज़मीनी काम दिखाने की ज़रूरत.

             नई दिल्ली / शौर्यपथ / वैश्विक महामारी कोरोना आपदा के समय भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की भले ही शोशल मिडिया में मोदी समर्थको द्वरा वाह वाही की जा रही थी किन्तु व्यस्था में कहा कहा चुक हुई ये अब मोदी सरकार भी मानती है . मोदी सरकार ने अपने दुसरे कार्यकाल में जो सबसे बड़ा फेर बदल किया वो स्वास्थ्य मंत्रालय के बदलाव का किया . मोदी सरकार के दुसरे कार्यकाल के कुछ महीनो बाद ही देश वैश्विक महामारी की चपेट में अ गया था ऐसे में सबसे महत्तवपूर्ण जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की थी किन्तु मंत्रालय में हुए बदलाव ये साफ़ इशारा करते है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जो कार्य होना था वो नहीं हो पाया . भले ही इस फेरबदल के बाद मोदी सरकार पर विपक्ष हमला बोलेगा किन्तु प्रधानमंत्री मोदी के कार्यशैली के अनुसार उन्हें विपक्ष के हमले की पूर्व में भी परवाह नहीं रही और वर्तमान में भी किसी की परवाह ना करते हुए ये अहम् फैसला लेना एक साहसिक कदम है जो मोदी सरकार ने उठाया .
    मंत्रिमंडल विस्तार में बड़ी संख्या में मंत्रियों को शामिल करने के सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं, "ये पॉलिटिकल प्रैगमेटिज्म यानी राजनीतिक व्यवहारिकता है. सरकार की राजनीतिक मजबूरियाँ भी होती हैं. ये बात सही है कि पहले प्रधानमंत्री ने कई मंत्रालयों को समेटा था, कई मंत्रालय को एक किया था, इस बार भी लगता है ऐसी कोशिश होगी कि एक तरह के मंत्रालय एक जगह रहें."
    प्रदीप सिंह कहते हैं, "आपने क्या नारा दिया, क्या सिद्धांत बनाए या फिर आपकी नीयत क्या थी, ये मायने नहीं रखता है, अंत में नतीजे ही देखे जाते हैं. जनता वोट इसी बात पर देगी कि आपने प्रदर्शन कैसा किया है. सरकार ने ये प्राथमिकता ज़ाहिर की है कि ज़मीनी स्तर पर काम दिखना चाहिए. और मंत्रिमंडल विस्तार का मक़सद भी यही है."
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का यह पहला मंत्रिमंडल विस्तार है. इसमें कुल 43 मंत्री शामिल किए गए हैं, जिनमें से 15 को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है.
    दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने जून में सभी मंत्रालयों की समीक्षा की थी. सभी के कामकाज़ का 360 डिग्री रिव्यू किया गया था. जानकार बताते हैं कि इस दौरान पीएम मोदी ने तय किया कि किस-किस मंत्री को हटाना है. सबसे पहले जानते हैं उन पाँच बड़े मंत्रियों के बारे में, जिन्हें पद से हटाया गया है.
    कोविड महामारी के दौरान भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे हर्षवर्धन को इस्तीफ़ा देना पड़ा है. राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं, "ज़ाहिर है प्रधानमंत्री उनके काम से ख़ुश नहीं थे." प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून में सभी मंत्रालयों के कामकाज़ की समीक्षा की थी.
    वरिष्ठ पत्रकार अदिति फडनीस कहती हैं, "स्वास्थ्य मंत्रालय को पूरी तरह बदल दिया गया है. सरकार दिखाना चाहती है कि कोविड महामारी के दौरान लोगों को जो भी दिक़्क़तें आई हैं, या नुक़सान हुआ है, अब नहीं होने दिया जाएगा."
    स्वास्थ्य मंत्री को हटाने से सरकार पर ये सवाल भी उठेगा कि उसने महामारी के दौरान ठीक से प्रबंधन नहीं किया और लोगों की जान बचाने में नाकाम रही. विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को विपक्ष की आलोचना की बहुत परवाह नहीं है.
           प्रदीप सिंह कहते हैं, "स्वास्थ्य मंत्री को हटाने का मतलब है कि सरकार ने विपक्ष को आलोचना करने का मौक़ा दे दिया है. उनको हटाते ही ये सवाल उठेगा कि सरकार कोरोना महामारी के प्रबंधन में विफल रही है. ये बात प्रधानमंत्री भी जानते हैं, लेकिन उनके काम करने का तरीक़ा यही है, वो विपक्ष की आलोचना की बहुत परवाह नहीं करते हैं."
    वहीं अदिति फडनीस कहती हैं, "कोविड प्रबंधन का एक दौर ये था कि लोगों से ताली-थाली बजाने के लिए कहा गया, फिर एक दौर वो आया कि मोदी जी टीवी चैनल पर आकर रोने लगे और अब एक दौर ये है जब ये संकेत दिया जा रहा है कि अब रोना-धोना बंद, अब काम करने का समय है."

    छिंदवाड़ा / शौर्यपथ / राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके आज छिंदवाड़ा के जिला सत्र न्यायालय में पहुंची और वहां परिसर में वृक्षारोपण किया। साथ ही राज्यपाल ने जिला न्यायालय को एयर प्यूरीफायर प्रदान किया। 

    उत्तर प्रदेश । शौर्य पथ । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से कत्ल की हैरान करने वाली वारदात सामने आई है. अवैध संबंधों के चलते पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से कत्ल की हैरान करने वाली वारदात सामने आई है. अवैध संबंधों के चलते पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी. यहां सबसे चौंका देने वाली बात यह है कि पत्नी ने इस वारदात के बाद हत्या को हादसे में तब्दील करने के लिए उसके शरीर को बिजली का करंट लगा दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने जब सख्ती के साथ पत्नी से पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया. इसके बाद पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

    आकांक्षी जिलों में संचालित सबसे बेहतर अभियानों में से एक, मलेरिया खत्म करने देश के अन्य आकांक्षी जिलों में इसे अपनाना चाहिए

    रायपुर / शौर्यपथ / संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और नीति आयोग ने प्रदेश के बस्तर संभाग में मलेरिया उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की सराहना की है। यूएनडीपी ने नीति आयोग को सौंपे अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आकांक्षी जिलों बीजापुर और दंतेवाड़ा में इस अभियान के बहुत अच्छे नतीजे आए हैं। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के असर से बीजापुर जिले में मलेरिया के मामलों में 71 प्रतिशत और दंतेवाड़ा में 54 प्रतिशत की कमी आई है। यूएनडीपी ने इस अभियान को आकांक्षी जिलों में संचालित सबसे बेहतर अभियानों में से एक बताया है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मलेरिया को खत्म करने देश के अन्य आकांक्षी जिलों में भी इस तरह का अभियान संचालित किया जाना चाहिए।
    उल्लेखनीय है कि बस्तर संभाग को मलेरिया से मुक्त करने राज्य शासन द्वारा शुरु किए गए मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का व्यापक असर देखने को मिला है। बस्तर क्षेत्र में इसके बेहतरीन परिणाम देखे जाने के बाद इस अभियान का मलेरिया मुक्त छतीसगढ़ अभियान के रूप में पिछले वर्ष के अंत में सरगुजा संभाग में भी क्रियान्वयन किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ द्वारा चलाए गए दोनो संभागों में इन विशेष अभियानों से मलेरिया के प्रकरणों में लगातार कमी आ रही है। अप्रैल-2020 की तुलना में अप्रैल-2021 में सरगुजा संभाग में मलेरिया के मामलों में 60 प्रतिशत और बस्तर संभाग में 45 प्रतिशत की कमी आई है।

    बीजापुर अस्पताल को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन एवं नारायणपुर व कवर्धा जिला अस्पतालों को लक्ष्य सर्टिफिकेशन

    रायपुर / शौर्यपथ / कोरोना महामारी के संकट काल में भी छत्तीसगढ़ राज्य के 03 शासकीय जिला अस्पतालों बीजापुर, नारायणपुर,कवर्धा को भारत सरकार द्वारा उत्कृष्टता स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रमाण पत्र दिया गया है | मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित जिलों के मैदानी अधिकारियों को बधाई दी है। स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने भरोसा जताया है कि ये अस्पताल आगे भी अपनी उत्कृष्टता बरकरार रखते हुए मरीजों की सेवा करेंगे ।उन्होंने समर्पित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उत्कृष्टता प्रमाण-पत्र हासिल करने वाले सभी अस्पतालों के अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई दी है।
    केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा बीजापुर के जिला अस्पताल को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रमाण-पत्र (NQAS – National Quality Assurance Standard) दिया गया है |
    इसी प्रकार जिला अस्पताल नारायणपुर और जिला अस्पताल कवर्धा को प्रसव सम्बन्धी उत्कृष्ट सेवाएं देने के लिए लक्ष्य सर्टिफिकेशन प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया है। जिला अस्पताल नारायणपुर के मेटरनिटी ऑपरेशन थियेटर व लेबर रूम को 89-89 प्रतिशत एवं जिला अस्पताल कवर्धा के मेटरनिटी ऑपरेशन थियेटर को 89 प्रतिशत व लेबर रूम को 87 प्रतिशत अंक मिले हैं। प्रमाण-पत्र प्रदान करने के पूर्व भारत सरकार की विशेषज्ञों की टीम द्वारा इस वर्ष फरवरी में अस्पतालों की ओपीडी, आई.पी.डी, प्रसव कक्ष, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और जनरल एडमिन व्यवस्था का मूल्यांकन किया गया। मूल्यांकन में खरा उतरने वाले अस्पतालों को ही केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रमाण-पत्र जारी किए जाते हैं।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि इन तीनों सरकारी अस्पतालों द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रमाण-पत्र व लक्ष्य सर्टिफिकेशन प्रमाण-पत्र हासिल करने से प्रदेश के दूसरे अस्पताल भी लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने को प्रेरित होंगे।

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