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नई दिल्ली में आयोजित इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में शामिल हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर दिया जोर
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने पर ही देश और राज्य में आर्थिक सुधार और बुनियादी बदलाव हो सकते हैं। इस दौरान उन्हांेने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री बघेल आज नई दिल्ली में आयोजित 7 वें इंडियन इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में शामिल हुये, जहां उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए आम लोगों को आर्थिक रूप से सक्षम करने की बात कही। कॉन्क्लेव में देश भर से आए अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।
इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि ग्रामीण विकास पर आधारित योजनाओं से छत्तीसगढ़ के गांवों में सवा दो सालों में ही बड़ा बदलाव दिख रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के गठन के साथ ही हमने छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास के लिए एक रोड मैप तैयार किया। जिसके तहत सबसे पहले किसानों का ऋण माफ किया, 25 सौ रूपए प्रति क्विंटल में धान खरीदी की, आदान सहायता के रूप में किसानों को 5 हजार करोड़ रूपए की राशि दी, समर्थन मूल्य पर वनोपज की खरीदी की गयी, मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराए, जिससे किसानों, गरीब और मजदूरों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
मुख्यमंत्री बघेल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फोकस कर विकास के मार्ग पर अग्रसर है।
राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गावों में रोजगार के अवसर बढ़ा रही है। कोर सेक्टर के अलावा ग्रामोद्योग को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ सरकार रोजगार के साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना से उत्पन्न आर्थिक संकट के काल में भी छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था गतिशील बनी रही। इस दौरान आटोमोबाइल सेक्टर में तेजी, जीएसटी संग्रहण में बढ़ोतरी और सर्वाधिक वनोपज की खरीदी की गयी।
विशेष बीमारियों वाले 45 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को चिकित्सक के प्रमाण पत्र के साथ लगेगा टीका , पंजीकरण कोविन 2 एप में और आन साइट भी होगा
रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रव्यापी कोविड-19 टीकाकरण अभियान अभियान में 1 मार्च, 2021 से अब इसमें 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिक तथा विशेष बीमारियों के साथ 45 से 59 वर्ष के आयु वर्ग में आने वाले व्यक्ति शामिल होंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन (को-विन) पर अधिकार प्राप्त समूह के अध्यक्ष तथा कोविड-19 वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह (एनईजीवीएसी) के सदस्य डॉ. आर.एस. शर्मा के साथ राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों और एमडी (एनएचएम) के साथ टीकाकरण पर वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। कल आयोजित इस कान्फ्रेन्स में राज्य की अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्रीमती रेणु जी पिल्ले,संचालक स्वास्थ्य सेवाएं नीरज बंसोड,राज्य टीकाकरण अधिकारी डाॅ अमर सिंह शामिल हुए।
बैठक में राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को डिजीटल प्लेटफॉर्म को-विन के वर्सन 2.0 की मूल विशेषताओं की जानकारी दी गई। यह जनसंख्या आकार का सॉफ्टवेयर है और हजारों प्रोसेसिंग क्षमता रखता है। आयु उचित समूहों के टीकाकरण का नया चरण देश में कोविड टीकाकरण को कई गुणा बढ़ा देगा। इस चरण में चिन्हित आयु समूहों के नागरिकों और टीकाकरण के वर्तमान चरण से वंचित और छूटे हुए स्वास्थ्य सेवाकर्मियों तथा फ्रंटलाइनकर्मी अपनी पसंद के टीकाकरण केंद्र चुन सकते हैं। निजी क्षेत्र के अस्पताल कोविड टीकाकरण केंद्र के रूप में शामिल किए जाएंगे ताकि टीकाकरण की गति बढ़ाई जा सके।
यह बताया गया कि सभी टीकाकरण केंद्र (सीवीसी) के पास निम्नलिखित अलग-अलग स्वास्थ्य सुविधाएं होंगीः- एसएचसी पीएचसी सीएचसी जैसी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और वेलनेस केंद्र सब-डिविजन अस्पताल, जिला अस्पताल तथा मेडिकल कॉलेज अस्पताल शामिल होंगे। केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवा (सीजीएचएस) आयुष्मान , प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएम जेएवाई) तथा इसी तरह की राज्य स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के अंतर्गत पेनल में शामिल सभी निजी अस्पताल शामिल किए जाएंगे।
राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि निजी स्वास्थ्य सुविधाओं को कोविड टीकाकरण केंद्र के रूप में काम करने के लिए उनके पास टीकारण प्रक्रिया के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए। टीके की शीशी के भंडारण के लिए मूल कोल्ड चेन उपकरण होने चाहिए। टीका लगाने वाले लोगों तथा स्टाफ की अपनी टीम होनी चाहिए। किसी एईएफआई मामले के प्रबंधन के लिए पर्याप्त सुविधा होनी चाहिए।
टीका लगाने के इच्छुक व्यक्तियों को अपने साथ निम्नलिखित फोटो, आईडी दस्तावेज लाने होंगे आधार कार्ड,निर्वाचक फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी), ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के मामले में पंजीकरण के समय निर्दिष्ट फोटो आईडी कार्ड (यदि आधार या ईपीआईसी नहीं है) 45 वर्ष से 59 वर्ष के आयु समूह के नागरिकों के लिए बीमारी का प्रमाण पत्र (पंजीकृत डॉक्टर से हस्ताक्षरित) हेल्थ केयर वर्कर और फं्रटलाइन वर्कर एफएल डब्लयू के लिए रोजगार प्रमाण-पत्र अधिकारिक पहचान पत्र (दोनों में से एक फोटो और जन्म तिथि के साथ)
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पंजीकरण की सरल प्रक्रिया बताई गई। पंजीकरण तीन प्रकार से होगा । पहला एडवांस सेल्फ रजिस्ट्रेशन लाभार्थी अग्रिम रूप से को-विन 2.0 पोर्टल डाउनलॉड करके तथा आरोग्य सेतू आदि जैसे आईटी एप्लीकेशनों के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण कराने पर कोविड टीकाकरण के रूप में काम करने वाले सरकारी तथा निजी अस्पतालों की जानकारी और तिथि तथा समय की उपलब्धता की जानकारी मिलेगी। लाभार्थी अपनी पसंद का सीवीसी चुन सकेगा और टीकाकरण के लिए अप्वाइंटमेंट बुक कर सकेगा। दूसरा विकल्प ऑनसाइट रजिस्ट्रेशन का होगा जो साइट पर अपने को रजिस्टर कराने की अनुमति देता है जो स्वयं रजिस्टर नहीं कर पाए थे। तीसरा विकल्प सुविधाजनक कोहोर्ट पंजीकरण का होगा जिसके तहत राज्य एवं केंद्रशासित सरकार अपनी ओर से हितग्राहियों के समूह का चयन कर उन्हे टीका लगवाएगी। इसके लिए आशा, मितानीन,पंचायत राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों और स्वसहायता समूहों की मदद ली जा सकती है। सभी का कोविन प्लेटफार्म में पंजीयन होगा। सरकारी अस्पतालों में यह निःशुल्क होगा और निजी अस्पतालों में पूर्व निर्धारित शुल्क देना होगा।
वर्ष 2021-22 के केन्द्रीय बजट में एक्साइज ड्यूटी में कमी कर की गई है ‘कृषि अधोसंरचना विकास सेस‘ लगाने की घोषणा
एक्साइज ड्यूटी कम करने से राज्य को होगा 900 से 1000 करोड़ रूपए का नुकसान
लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों पर होगा विपरीत असर
कोविड महामारी के दुष्प्रभावों के कारण आर्थिक गतिविधियों में पड़ा है विपरीत असर: राज्य के राजस्व में 30 प्रतिशत की कमी संभावित
केन्द्र से नहीं मिली है जी.एस.टी. की 3700 करोड़ रूपए की राशि
राज्य के चावल के कोटे में कटौती से भी बड़ी हानि होना संभावित
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर उनसे छत्तीसगढ़ राज्य को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलने वाली राशि पूर्ववत् देने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि- वर्ष 2020-21 कोविड महामारी के दुष्प्रभावों के कारण वित्तीय दृष्टि से अत्यंत कठिन वर्ष रहा है। इस वर्ष राज्य में सभी आर्थिक गतिविधियों पर विपरीत प्रभाव पड़ने के कारण राज्य के स्वयं के वित्तीय स्रोतों में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आना संभावित है। हाल ही में वर्ष 2021-22 के केन्द्रीय बजट में पेट्रोलियम पदार्थों, सोने-चांदी एवं अन्य अनेक वस्तुओं पर एक्साइज ड्यूटी में कमी कर उसके स्थान पर ‘कृषि अधोसंरचना विकास सेस‘ आरोपित करने की घोषणा आपके द्वारा की गई है। इससे राज्य को आगामी वित्तीय वर्ष में 900 से 1000 करोड़ रूपए की अतिरिक्त क्षति होना संभावित है।
मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य की जी.एस.टी. क्षतिपूर्ति मद में केन्द्र सरकार से अभी भी 3700 करोड़ रूपए की राशि प्राप्त होना शेष है। केन्द्र सरकार द्वारा पूर्व में राज्य से 60 लाख टन चावल लेने की घोषणा के बाद राज्य के चावल के कोटे में 16 लाख टन की कटौती कर दी गई है, जिसके कारण भी राज्य द्वारा संग्रहित अतिरिक्त धान के निराकरण में राज्य को बड़ी हानि होना संभावित है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि ‘कृषि अधोसंरचना विकास कोष‘ स्थापना का निर्णय स्वागत योग्य है, किन्तु एक्साइज ड्यूटी कम करने के निर्णय से राज्य के संसाधनों पर विपरीत असर पड़ना निश्चित है। पूर्व से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे राज्य को एक्साइज ड्यूटी कटौती से होने वाली अतिरिक्त क्षति से राज्य के नागरिकों के हितों के लिए चलाए जा रहे लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों पर विपरीत असर होगा। उन्होंने केन्द्रीय वित्त मंत्री से अनुरोध किया है कि केन्द्र की तुलना में राज्यों के पास उपलब्ध सीमित संसाधनों को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलने वाली राशि पूर्ववत् प्राप्त होने का निर्णय लेने का कष्ट करें, ताकि राज्य को किसी अतिरिक्त वित्तीय क्षति का सामना न करना पड़े।
रायपुर / शौर्यपथ / केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से आज नई दिल्ली में राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने सौजन्य मुलाकात की। राज्यपाल ने केन्द्रीय गृहमंत्री श्री शाह का शाल एवं श्रीफल से सम्मान किया। गृह मंत्री शाह ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी-ग्रामीण क्षेत्रों का अधिक से अधिक दौरा करें। सरकार ने इनके लिए अच्छी योजनाएं बनाई हैं जिनका क्रियान्वयन किया जा रहा है। आपके इन इलाकों में दौरे से यह क्रियान्वयन और भी प्रभावी हो सकेगा। यह भी देखें कि उन योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो। राज्यपाल ने श्री शाह को छत्तीसगढ़ आने का निमंत्रण दिया और प्रदेश के नक्सलवाद सहित अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की और जानकारी प्रदान की।
राज्यपाल ने गृहमंत्री शाह के कोरोना काल में लिए गए निर्णयों और पहल के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि जब पूरा देश कोरोना संकट से प्रभावित था तब आपके द्वारा समय-समय पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए और नागरिकों की मदद की गई। सुश्री उइके ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों, छात्रों और नागरिकों के फंसे होने की जब मैंने आपको सूचना प्रदान करते हुए सहयोग का आग्रह किया तो आपके द्वारा त्वरित कार्यवाही की गई, जिसके कारण देश के विभिन्न भागों से नागरिकगण अपने घर पहुंच सके। राज्यपाल ने इसके लिए गृह मंत्री शाह के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने गृह मंत्री शाह को कोरोना काल में उनके द्वारा किए गए कार्यों पर आधारित पुस्तिका ‘‘कोरोनाकाल में राज्यपाल की भूमिका’’ भेंट की। सुश्री उइके ने गृह मंत्री शाह को कोरोना काल में प्रदेश में किए गए विभिन्न कार्यों की जानकारी दी।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से की मुलाकात
राज्य में लगभग 20 हजार करोड़ की लागत के राजमार्ग निर्माण कार्य होंगे
राज्य के नक्सल प्रभावित और औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ेगी परिवहन सुविधा
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नई दिल्ली में आज केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य की आवश्यकताओं और समस्याओं से अवगत कराते हुये नक्सल प्रभावित और औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए सड़क परिवहन सुविधाएं बढ़ाए जाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री के आग्रह पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने आवश्यक कारवाई के लिए तत्काल अधिकारियों को निर्देशित किया। वहीं, भारतमाला योजना अंतर्गत तीन राजमार्गों को शामिल करने की अनुमति भी प्रदान की।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों और सैद्धांतिक राष्ट्रीय राजमार्गों के चौडीकरण, उन्नयन, पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित कार्यों को अनुमति देने का आग्रह किया। श्री बघेल ने भारत माला योजना के अंतर्गत तीन राजमार्गों को शामिल करने की मांग भी की है।
जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुये केंद्रीय मंत्री ने राज्य में लगभग 20 हजार करोड़ के सड़क निर्माण कार्यों की सहमति देते हुये रायगढ़-धरमजयगढ़ मार्ग, अम्बिकापुर-भैसामुड़ा-वाड्रफनगर-धनगांव-बम्हनी-रेनुकुट-बनारस मार्ग और पंडरिया-बजाग-गाड़ासरई मार्ग को भारतमाला योजना में शामिल करने की अनुमति प्रदान की। इसके अलावा पूर्व में इस योजना में सम्मिलित रायपुर-दुर्ग बायपास, रायपुर-विशाखापट्टनम मार्ग और बिलासपुर-उरगा मार्ग का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारम्भ करने के अनुरोध को भी केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया है।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने वार्षिक योजना 2020-21 के अंतर्गत मुंगेली से पोंडीमार्ग और मदांगमुड़ा से देवभोग ओडिशा सीमा तक निर्माण कार्य की स्वीकृत, राष्ट्रीय राजमार्ग चांपा-कोरबा-कटघोरा मार्ग के अत्यंत खराब स्थिति और राष्ट्रीय राजमार्गों पर विद्यमान लेवल क्रॉसिंग पर आरओबी निर्माण की ओर भी केंद्रीय मंत्री का ध्यान आकर्षित कराया। वहीं, मुख्यमंत्री ने रायपुर से धमतरी मार्ग के चौड़ीकरण एवं उन्नयन कार्य की धीमी गति पर संबंधितों को कार्य की गति बढ़ाने हेतु निर्देशित करने की बात कही।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राजमार्गों के विकास संबंधी अन्य विभिन्न प्रस्तावों पर जल्द से जल्द सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी भी उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय खाद्य मंत्री श्री गोयल से की मुलाकात
राज्य के किसानों के हित में एफसीआई में 40 लाख मैट्रिक टन चावल खरीदी की मांग रखी
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल से नई दिल्ली के रेल भवन में मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के किसानों के हित में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में केन्द्रीय पूल अंतर्गत 40 लाख मैट्रिक टन उपार्जित किये जाने की अनुमति देने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि धान की खेती छत्तीसगढ़वासियों की आजीविका का प्रमुख साधन है। प्रदेश में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन विकेन्द्रीकृत उपार्जन योजना के अंतर्गत खाद्य विभाग भारत सरकार के साथ हुए एमओयू के तहत की जाती है। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से चावल उपार्जन पर पूर्व की 60 लाख मैट्रिक टन चावल केन्द्रीय पूल में लिये जाने की सैद्धांतिक सहमति पर अमल करते हुये एफसीआई में 40 लाख मैट्रिक टन चावल खरीदी करने की मांग की।
मुख्यमंत्री बघेल ने केन्द्रीय मंत्री गोयल को बताया कि प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर 20.53 लाख किसानों से 92 लाख मैट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया है। श्री बघेल ने कहा है कि एमओयू की कंडिका 18 के तहत उपार्जित धान में से राज्य की पीडीएस की आवश्यकता के अतिरिक्त चावल का स्टॉक भारतीय खाद्य निगम को प्रदाय किये जाने के निर्देश हैं, अतः उक्त प्रावधानों के तहत भारत सरकार द्वारा राज्य की आवश्यकता के अतिरिक्त शेष समस्त सरप्लस धान का अनुपातिक चावल 40 लाख मैट्रिक टन को भारतीय खाद्य निगम में केन्द्रीय पूल अंतर्गत लिया जाए।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के लिए भारत सरकार की खाद्य सचिवों की बैठक में छत्तीसगढ़ के लिए 60 लाख मैट्रिक टन चावल केन्द्रीय पूल में लिये जाने की सैद्धांतिक सहमति दी गई है, किंतु खाद्य विभाग भारत सरकार द्वारा भारतीय खाद्य निगम में केन्द्रीय पूल अंतर्गत 24 लाख मैट्रिक टन चावल (16 लाख मैट्रिक टन उसना एवं 8 लाख मैट्रिक टन अरवा) ही लिये जाने की अनुमति प्रदान की गई है। उन्होने कहा कि केंद्र सरकार अपने पूर्व की दी गई सहमति पर अमल करते हुये एफसीआई में 40 लाख मैट्रिक टन चावल की खरीदी करे। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने पुराने जूट बारदाने में चावल उपार्जन की अनुमति, भारत सरकार द्वारा लंबित खाद्य सब्सिडी की प्रतिपूर्ति की मांग भी रखी। इस मौके पर मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी और खाद्य विभाग के सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह उपस्थित रहे।
रायपुर / शौर्यपथ / कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर लोगों के मन में झिझक को काम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि वैक्सीन सुरक्षा एवं असर के तमाम आंकड़ों पर खरी उतरी है जिसके बाद ही सरकार द्वारा इसके प्रयोग की अनुमति प्रदान की गयी है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने वैक्सीन के सुरक्षित होने एवं इसकी प्रभावशीलता से सम्बंधित आंकड़ों की जांच के उत्कृष्ट नतीजों के आधार पर ही वैक्सीन को मंजूरी दी है उसके बाद ही विभाग द्वारा वैक्सीनेशन आरम्भ किया गया है। कोरोना की वैक्सीन लगवाना स्वैच्छिक है हालांकि स्वयं की सुरक्षा और बीमारी के प्रसार को सीमित करने के लिए कोरोना वैक्सीन की दो डोज आवश्यक है ।
ड्रग नियामक द्वारा कठिन जांच के बाद ही मिलता है वैक्सीन प्रयोग का लाइसेंस
आम लोगों पर किसी भी वैक्सीन के प्रयोग से पहले वैक्सीन कंपनी द्वारा किये गए समस्त परीक्षणों की जांच ड्रग नियामक द्वारा की जाती है जांच के परिणाम उत्साहवर्धक होने के पश्चात ही दवा कंपनी को वैक्सीन के प्रयोग का लाइसेंस प्रदान किया जाता है इसलिए सभी लाइसेंस प्राप्त कोरोना वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावकारी है।
देश में शुरू की गई कोरोना वैक्सीन उतनी ही प्रभावी है जितनी अन्य देशों द्वारा विकसित वैक्सीन वैक्सीन का परीक्षण के विभिन्न चरणों से इसकी सुरक्षा और प्रभाव कार्य सुनिश्चित किया है , स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है । स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बताया गया है वैक्सीन की प्रभावशीलता और कोरोना के प्रति एंटीबाडी विकसित होने के लिए वैक्सीन के दो डोज लेना अति आवश्यक है। वैक्सीन का प्रथम डोज लेने के 4 हफ्ते या 28 दिन बाद ही इसका दूसरा डोज दिया जाएगा। आमतौर पर कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज लेने के 2 सप्ताह बाद कोरोना के प्रति एंटीबॉडी का निर्माण शुरू हो जाता है। इसलिए वैक्सीन लगवाने के बाद भी मास्क लगाना, शारीरिक दूरी रखना एवं नियमित अंतराल के बाद हाथ धोना आवश्यक है।
सरकार ने इसके लिए सबसे पहले उच्च जोखिम वाले समूह को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन के लिए चयनित किया है। इसमें हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन वर्कर शामिल है। वहीँ दूसरे समूह में 50 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति तथा वह लोग जो पहले से ही किसी रोग से ग्रसित है को यह वैक्सीन उपलब्ध करायी जायेगी। इसके बाद अन्य सभी जरूरतमंद को भी वैक्सीन उपलब्ध करायी जाएगी।
कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति को भी वैक्सीन लगवाना है आवश्यक
अगर कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने के बाद सही हो चुका है इसके बाद भी उसको वैक्सीन की दोनों डोज लेना आवश्यक है क्योंकि वैक्सीन उसके शरीर में एक मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र को विकसित करने में मदद करेगा। वहीँ संक्रमित व्यक्तियों को लक्षण खत्म होने के 14 दिन बाद तक वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए क्योंकि वह वैक्सीनेशन स्थल पर दूसरों में वायरस फैला सकता है।
अगर टीकाकरण के बाद कोई असुविधा या बेचैनी महसूस होती है तो निकटतम स्वास्थ्य अधिकारी एएनएम या मितानिन को सूचित करें । करोना अनुरूप व्यवहारों का पालन याद रखें जैसे कि मस्क पहनना, हाथ की सफाई और शारीरिक दूरी को बनाए रखना जो कम से कम 6 फीट या दो गज की हो, भी जरूरी है । जैसा अन्य वैक्सीन के साथ होता है कुछ व्यक्तियों में सामान्य प्रभाव हल्का बुखार हो सकता है राज्यों को कोरोना वैक्सीनेशन से संबंधित किसी भी दुष्प्रचार से निपटने के लिए कठोर व्यवस्था करना के लिए कहा गया है ।
कोई व्यक्ति कैंसर मधुमेह उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की दवा ले रहा है या ऐसे एक या एक से अधिक स्वास्थ्य परिस्थितियों वाले व्यक्ति को उच्च जोखिम वाली श्रेणी माना जाता है।उन्हें कोरोना वैक्सीनेशन कराने की आवश्यकता है । वैक्सीन की सीमित आपूर्ति के कारण हेल्थ केयर प्रोवाइडर एवंफ्रंटलाइन श्रमिकों के परिवारों कोप्रारंभिक चरणमें कवर न करते हुए उनको अन्य चरणों में कवर किया जायेगा।
नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन कड़ाके की सर्दी और बारिश के बीच भी जारी है. किसान इन कानूनों का 'काला कानून' करार देते हुए एक महीने से ज्यादा समय से दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं ताकि इन्हें रद्द करवाया जा सके. चार जनवरी (सोमवार) को किसान संगठनों और सरकार के बीच बैठक होनी है. इससे पहले, 30 दिसंबर को बातचीत हुई थी, जिसमें दो मुद्दों पर बात बनी है.
टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और चिल्ला बॉर्डर समेत अन्य जगहों पर किसान धरने पर बैठे हैं. बारिश और सर्दी के बीच गाजीपुर (दिल्ली-यूपी बॉर्डर) में चल रहा किसानों का धरना प्रदर्शन आज 37वें दिन में पहुंच गया. गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन में बैठे एक प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "हम ऐसे खराब मौसम में अपने परिवार से दूर सड़कों पर बैठे हैं. हम उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार कल हमारी मांगों को स्वीकार करेगी."
बता दें कि दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने दिल्ली में गणतंत्र दिवस (Republic Day) के दिन ट्रैक्टर रैली आयोजित करने की धमकी दी है. किसानों ने कहा है कि 23 जनवरी को, यानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर सभी राज्यपालों के आवास पर विरोध प्रदर्शन करेंगे. किसान आंदोलन का समन्वय कर रही 7 सदस्यीय समन्वय समिति ने शनिवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को यह अल्टीमेटम दिया.
सरकार और किसान संगठनों के बीच बुधवार को हुई छठे दौर की वार्ता में बिजली संशोधन विधेयक 2020 और एनसीआर एवं इससे सटे इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के संबंध में जारी अध्यादेश संबंधी आशंकाओं को दूर करने को लेकर सहमति बनी थी.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / GST विभाग ने दिल्ली के बुद्ध विहार में अवैध तरीके से चल रही गुटखा फैक्ट्री का भंडाफोड़ करते हुए 831 करोड़ की जीएसटी की चोरी का मामला पकड़ा है. इस मामले में फैक्ट्री मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है. दिल्ली के जीएसटी कमिश्रर शुभागता कुमार के मुताबिक, उनकी टीम को जानकारी मिली थी कि दिल्ली के बुद्ध विहार में एक अवैध गुटखा फैक्ट्री चल रही है, जिसमें बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जा रही है. सूचना के आधार पर फैक्ट्री पर छापा मारा गया.
फैक्ट्री के गोदाम से बड़े पैमाने पर गुटखा, तम्बाकू, इन्हें बनाने का सामान और मशीनें बरामद हुईं, जिनकी कीमत करीब सवा 4 करोड़ रुपये है. इस फैक्ट्री में 65 मजदूर काम करते थे. फैक्ट्री से गुटखा कई राज्यों में सप्लाई हो रहा था. जांच, बयान और दस्तावेज देखने से पता चला कि फैक्ट्री मालिक ने 831 करोड़ से ज्यादा का जीएसटी नहीं भरा है, यानि फैक्ट्री मालिक बिना टैक्स दिए लगातार गुटखा सप्लाई कर रहा था.
फैक्ट्री कहीं से भी रजिस्टर्ड नहीं थी और न ही इसमें काम करने वाले मजदूरों की जानकारी कहीं दी गई थी. फैक्ट्री मालिक को जीएसटी एक्ट के तहत गिरफ्तार कर 2 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. दिल्ली जीएसटी विभाग ने इस वित्त वर्ष में अब तक 4327 करोड़ की जीएसटी चोरी का भंडाफोड़ किया है.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
