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- भारत शासन के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग ने की इस अभिनव पहल की प्रशंसा
- ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया इनोवेशन फॉर प्रोग्रेस अंतर्गत किया गया शामिल
- कलेक्टर के मार्गदर्शन में जनसहभागिता से प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में लगाया गया शत-प्रतिशत स्मार्ट टीवी
राजनांदगांव / शौर्यपथ / शिक्षा की सशक्त अवधारणा राजनांदगांव जिले में फलीभूत हो रही है। भारत शासन के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा जिला प्रशासन की ओर से जिले में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने की पहल को अभिनव पहल अंतर्गत लेते हुए प्रशंसा की गई है। जिसे ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया इनोवेशन फॉर प्रोग्रेस के अंतर्गत शामिल किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में शासन द्वारा शिक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद कई तरह की चुनौतियां हैं। जिला प्रशासन द्वारा जनसहभागिता से किस तरह शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है, इसकी एक मिसाल राजनांदगांव जिले ने पेश की है। स्मार्ट राजनांदगांव प्रोजेक्ट के अंतर्गत जिले के सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में शत-प्रतिशत स्मार्ट टीवी लगाकर उपलब्धि हासिल की गई है। कलेक्टर श्री डोमन सिंह के मार्गदर्शन में जिले में शिक्षा के रूपान्तरण का सामुदायिक मॉडल सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है। प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण उद्देश्य शिक्षा विभाग, शिक्षकों एवं ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता से प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराना है।
प्रोजेक्ट के सबसे प्रेरक पहलुओं में से एक समाज के सभी वर्गों के लोगों की भागीदारी का स्तर है। लोगों ने इस नेक काम के लिए 10 रूपए से लेकर हजारों रूपए तक का दान दिया और लगभग 6 हजार 145 लोगों द्वारा स्कूलों में स्मार्ट टीवी दान की गई है। शिक्षा विभाग ने लोगों को प्रेरित करने और उन्हें स्मार्ट कक्षाओं के लाभ के बारे में समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समर्पित शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समितियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मदद से, प्रोजेक्ट टीम ने जिले में शिक्षा प्रणाली को बदलने में स्मार्ट कक्षाओं के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए अथक प्रयास किया। उन्होंने स्मार्ट क्लास के लिए एक सामुदायिक मॉडल की आवश्यकता के संबंध में बताया गया कि ग्रामीण स्मार्ट टीवी प्रदान कर, अपना समय देकर और स्मार्ट कक्षाओं के कामकाज की निगरानी करके प्रोजेक्ट की सफलता की जिम्मेदारी लेंगे।
इस प्रोजेक्ट का जिले में शिक्षा पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है और बच्चे अब सीखने में अधिक रुचि रखते हैं, क्योंकि शिक्षा उनके लिए अधिक दिलचस्प हो गई है। शिक्षा विभाग द्वारा परियोजना के लिए पेन-ड्राइव के रूप में डिजिटल पाठ्यक्रम प्रदान किया है। प्रोजेक्ट टीम ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक रोस्टर पैटर्न समय सारिणी भी विकसित की है कि किसी विशेष विद्यालय में सभी कक्षाएं प्रोजेक्ट के स्थायित्व को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट कक्षाओं से लाभान्वित हो सकती हैं। स्मार्ट राजनांदगांव प्रोजेक्टर इस बात का एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे एक समुदाय संचालित पहल एक जिले में शिक्षा प्रणाली को बदल सकती है। इससे पता चलता है कि जब लोग एक साथ आते हैं तो वे व्यापक परिवर्तन ला सकते हैं। प्रोजेक्ट की सफलता परियोजना टीम के समर्पण और कड़ी मेहनत, समाज के सभी वर्गों के लोगों की भागीदारी और शिक्षा विभाग के प्रयासों के कारण है। प्रोजेक्ट के लिए आगे का रास्ता इसका स्थायित्व सुनिश्चित करना है। राजनांदगांव जिले के प्राथमिक और उच्च-प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना जारी रखना है।
उल्लेखनीय योगदान -
स्मार्ट टीवी की उपलब्धता की जब शुरूआत बात हुई वहां बहुत से सकारात्मक परिणाम भी देखने मिला जहां पर छोटे-छोटे बसाहटों में भी ग्रामवासी, पालक, शिक्षक, सरपंच, सेवानिवृत्त शिक्षकों ने अपना योगदान इस कार्य के लिए दिया। साथ ही ग्रामीण स्तर पर भी लोगों ने इसमें अपनी सहभागिता दी तथा इस कार्य को बेहतर कार्य बताया जिससे बच्चों को डिजिटल तरीके से अपनी शिक्षा को समझ बनाने में सीखने में आसानी होने की बात उनके द्वारा कही गई। कलेक्टर श्री डोमन सिंह के निर्देशन तथा जिला पंचायत सीईओ श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में यह कार्य किया गया। इस कार्य को करने में जिला प्रशासन के साथ जिला शिक्षा अधिकारी श्री राजेश सिंह, जिला परियोजना अधिकारी श्रीमती रश्मि सिंह, जिला मिशन समन्वयक श्री सतीश ब्यौहारे, एपीसी श्री एमआर अंसारी, एपीसी श्री मनोज मरकाम एवं सभी विकासखंड के विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड स्त्रोत समन्वयक तथा सभी संकुल समन्वयकों ने अपने पूरे स्कूलों के शिक्षकों के साथ मिलकर यह कार्य किया।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
