October 11, 2026
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    योजनाओं का हिसाब अब आंकड़ों से होगा! छत्तीसगढ़ के मॉनिटरिंग मॉडल की नीति आयोग ने की सराहना

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    DMEO की महानिदेशक निधि छिब्बर ने दिया सहयोग का भरोसा, अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की निगरानी के लिए डेटा आधारित व्यवस्था पर जोर

    रायपुर । छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और उनके वास्तविक परिणामों को परखने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) की महानिदेशक निधि छिब्बर ने छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के कार्यों की प्रशंसा करते हुए राज्य में निगरानी एवं मूल्यांकन का मजबूत और स्थायी तंत्र विकसित करने के लिए हरसंभव तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग देने का आश्वासन दिया।

    राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टेट सपोर्ट मिशन के तहत चल रही गतिविधियों और प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में सरकारी योजनाओं के प्रभाव का आकलन, डेटा आधारित नीति निर्माण और अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर सचिव, योजना भुवनेश यादव सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

    अंजोर विजन-2047 के लिए परिणामों पर होगी नजर

    राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल उनके क्रियान्वयन से नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचने और वास्तविक परिणाम सामने आने से तय होनी चाहिए।

    उन्होंने नीति निर्माण, योजनाओं के मूल्यांकन और विभागीय समन्वय में ठोस आंकड़ों तथा वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग को जरूरी बताया। आयोग एक परामर्शदात्री और ज्ञान आधारित संस्था के रूप में प्रदेश के समग्र विकास के लिए काम कर रहा है।

    IIM रायपुर और IIT भिलाई की विशेषज्ञता का होगा उपयोग

    सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी भुवनेश यादव ने बताया कि योजनाओं के मूल्यांकन की व्यवस्था मजबूत करने के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का सहयोग लिया जा रहा है। इससे शोध आधारित अध्ययन, आधुनिक तकनीक और शैक्षणिक विशेषज्ञता के माध्यम से योजनाओं के प्रभाव का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

    बैठक में राज्य नीति आयोग की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन इकाई तथा परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न शासकीय योजनाओं के पायलट मूल्यांकन के लिए DMEO के निर्धारित मूल्यांकन ढांचे के आधार पर अध्ययन किए जा रहे हैं।

    नौ प्राथमिक क्षेत्रों में अध्ययन, अंजोर विजन पोर्टल पर काम

    राज्य में नीति आयोग के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) और डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स (DGQI) को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया गया है। इसके अतिरिक्त नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन किए जा रहे हैं।

    अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्रगति को नियमित रूप से परखने के लिए अंजोर विजन पोर्टल विकसित करने की दिशा में भी काम जारी है। इसका उद्देश्य विकास लक्ष्यों की निगरानी और समीक्षा को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

    बच्चों के कल्याण का आकलन करेगा नया सूचकांक

    राज्य नीति आयोग यूनिसेफ के सहयोग से बाल कल्याण सूचकांक विकसित कर रहा है। इसके माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और समग्र कल्याण से जुड़ी सेवाओं की उपलब्धता के साथ उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जाएगा।

    यह सूचकांक उन जिलों और क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद करेगा, जहां बच्चों के विकास के लिए अधिक ध्यान और निवेश की आवश्यकता है। इससे बाल कल्याण से संबंधित योजनाओं को जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।

    SDG डैशबोर्ड से विकास की प्रगति पर नजर

    बैठक में सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तरीय व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों के अनुसार, इन लक्ष्यों की प्रगति पर आधारित वार्षिक प्रतिवेदन जारी किए जा रहे हैं और जिलों में नियमित निगरानी के लिए विशेष डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है।

    इसके साथ ही SDG आधारित बजट विश्लेषण पर काम किया जा रहा है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि सरकारी खर्च विभिन्न सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में कितना योगदान दे रहा है। भविष्य में बजट निर्माण में इन लक्ष्यों को चरणबद्ध तरीके से शामिल कर परिणाम आधारित बजट व्यवस्था को बढ़ावा देने की योजना है।

    योजनाओं की कमियां समय पर पहचानने पर जोर

    DMEO की महानिदेशक निधि छिब्बर ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने कम समय में निगरानी एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल की है। उन्होंने जोर दिया कि योजनाओं की सफलता का आकलन केवल खर्च या कार्य पूरा होने के आधार पर नहीं, बल्कि लक्षित हितग्राहियों को मिले वास्तविक लाभ और प्राप्त परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थागत निगरानी व्यवस्था से योजनाओं की कमियों की समय पर पहचान, सुधारात्मक कदम उठाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। छिब्बर ने इस दिशा में DMEO, नीति आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
    बैठक में संचालक, आर्थिक एवं सांख्यिकी तीर्थराज अग्रवाल सहित राज्य नीति आयोग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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