October 01, 2026
Hindi Hindi▼

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

      रायपुर / शौर्यपथ / केंद्रीय कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में मंगलवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं, प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और केंद्रीय टास्क फोर्स से जुड़े विषयों की प्रगति की समीक्षा की गई।
    छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील ने नया रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से बैठक में भाग लिया। उन्होंने राज्य में संचालित प्रमुख केंद्रीय परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया।

    सड़क, रेलवे और बिजली परियोजनाओं की समीक्षा
    बैठक में राजमार्ग, रेलवे लाइनों, पावर ट्रांसमिशन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। संबंधित विभागों के अधिकारियों से परियोजनाओं की स्थिति, प्रगति और क्रियान्वयन से जुड़े विषयों की जानकारी ली गई।

    केंद्रीय योजनाओं की राशि के समयबद्ध उपयोग पर जोर
    समीक्षा के दौरान राज्यों को केंद्रीय योजनाओं के तहत प्राप्त राशि का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने तथा उपयोगिता प्रमाण-पत्र शीघ्र केंद्र सरकार को भेजने पर जोर दिया गया। साथ ही प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में योजनाओं की प्रगति की विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा करने के संबंध में भी चर्चा हुई।
    केंद्रीय टास्क फोर्स की बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी विभागीय योजनाओं की राज्यों में प्रगति की जानकारी मुख्य सचिवों के साथ साझा की और संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

    आश्रम-छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण, गांवों में सीधा संवाद; महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण पर भी होगी चर्चा

        रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में समुदायों की समस्याओं और उनसे जुड़े प्रकरणों की जमीनी स्थिति जानने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम चार जिलों के दौरे पर है। 20 से 25 सितंबर तक चल रहे इस दौरे में आयोग की टीम रायपुर, सक्ती, जशपुर और कांकेर में आश्रम-छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर जनजातीय समुदायों से सीधे संवाद कर रही है।
    दौरे के दौरान आयोग की टीम नागवंशी, संसारी उरांव, पहाड़ी कोरवा और दिहाड़ी कोरवा समुदायों से जुड़े क्षेत्रों में पहुंचेगी। टीम समुदाय के लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनेगी तथा संबंधित मामलों में अभ्यावेदन भी प्राप्त करेगी। जशपुर में 22 और 23 सितंबर को विशेष रूप से जनजातीय गांवों का भ्रमण निर्धारित किया गया है।
    महिला जनप्रतिनिधियों से संवाद
    कांकेर में 24 सितंबर को जनजातीय महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण को लेकर विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें पंचायत से लेकर जिला स्तर तक की महिला जनप्रतिनिधियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में जनजातीय क्षेत्रों में महिला नेतृत्व, उनकी भागीदारी और सामने आने वाली चुनौतियों से जुड़े विषयों पर संवाद किया जाएगा।

    लंबित प्रकरणों पर अधिकारियों के साथ बैठक
    दौरे के अंतिम दिन 25 सितंबर को रायपुर में आयोग में लंबित प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों और प्राधिकारियों के साथ बैठक होगी। आयोग ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को जांच दल को आवश्यक सहयोग देने, मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने और मौके पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
    आयोग के इस दौरे को जनजातीय समुदायों से जुड़े मामलों की मौके पर पड़ताल, शिकायतों की प्रत्यक्ष सुनवाई और प्रशासनिक स्तर पर उनकी स्थिति की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

     छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर में ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन’ पर प्रशिक्षण आयोजित

       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में मंगलवार को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन’ विषय पर शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गतिविधि आधारित और रचनात्मक शिक्षण विधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए गणित को सरल, रोचक और आनंददायक बनाना रहा।

    प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण में गणित को केवल सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन, अनुभव और गतिविधियों से जोड़कर पढ़ाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसी पद्धतियां विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि और जिज्ञासा बढ़ाने के साथ तार्किक सोच विकसित करने में भी सहायक हो सकती हैं।

    कार्यक्रम के विशेषज्ञ इंजीनियर, ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन, बेंगलुरु के मैथ्स कोच बी. एन. राव ने शिक्षकों को विभिन्न गतिविधि आधारित एवं नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों और गतिविधियों के जरिए कठिन गणितीय अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के तरीकों का प्रदर्शन किया।

    प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने स्वयं विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर गणितीय अवधारणाओं को समझा और इन्हें कक्षा में लागू करने के तरीकों पर चर्चा की। छोटे प्रयोग, प्रश्नोत्तर और रचनात्मक अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    कार्यक्रम में रायपुर के चार विकासखंडों के शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की, जबकि पूरे जिले के शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रसारण किया गया। इससे जिले के विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े।

    कार्यक्रम में शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। 23 सितंबर को बी.एड. विद्यार्थियों के लिए भी इसी विषय पर प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

    साभार - श्री सुधांश पंत
    यह एक दृश्य अक्सर दोहराया जाता है - लगभग हर कॉलेज के छात्रावासों में, हर कार्यालय की पार्टियों में और साथ जवान हो रहे दोस्तों के हर समूह में। कुछ नशीले पदार्थ एक-दूसरे तक पहुंचाए जाते हैं। इस क्रम में एक बात काफी सहजता के साथ, लेकिन जोर देकर कही जाती है कि बाकी सब भी तो ऐसा ही कर रहे हैं। ऐसे में, मना करना कुछ ऐसा लगता है मानो आप समूह के बाकी साथियों से अलग-थलग हो रहे हों। इसके बाद एक पल की चुप्पी छाती है। और फिर एक युवा अपने साथियों के समूह को ‘ना’ कहने से पैदा होने वाली शर्मिंदगी और अलग-थलग पड़ जाने की बेचैनी के बीच जल्दी से फैसला ले लेता है। यही एक निर्णायक पल होता है, क्योंकि लत हमेशा सोच-समझकर लिए गए फैसले से नहीं लगती। अक्सर इसकी शुरुआत पीछे छूट जाने के डर से होती है।

    नशीले पदार्थों को ना, जिंदगी को हां
    यही वह मौन लेकिन अहम पल है, जिसको ध्यान में रखकर ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ (एनएमबीए) की शुरुआत की गई थी। इस अभियान का व्यापक उद्देश्य नशीले पदार्थों की लत के बारे में जागरूकता फैलाना रहा है। लेकिन इसकी असली चुनौती सामाजिक रही है: नशे से मुक्त रहने का फैसला लेने को आसान बनाना, उस फैसले की अभिव्यक्ति को सहज बनाना और कुल मिलाकर, इस पूरी कवायद को एक सामान्य बात के तौर पर देखना आसान बनाना।

    दृढ़ संकल्प
    जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को एनएमबीए की शुरुआत की, तो इस अभियान ने एक कहीं अधिक कठिन चुनौती से जूझना तय किया। यह कठिन चुनौती थी - किसी कमजोर पल में, एक अकेले व्यक्ति द्वारा अपने साथियों के समूह के सामने ‘नहीं’कहने की हिम्मत लाने की। इस दृष्टि से, इस अभियान का सबसे असरदार शब्द शायद सबसे आसान शब्द है, ‘ना!’ यह कोई नाटकीय ‘ना!’ नहीं है। यह कोई नैतिक उपदेश नहीं है। बस जब आपके आस-पास के सभी लोग जब ‘हां’ कह रहे हों, तब बिना विचलित हुए मना करने का आत्मविश्वास है।
    माननीय प्रधानमंत्री ने कहा है, “विकसित भारत संकल्प अभियान के तहत ‘नशा मुक्त युवा’ नाम ही इस संकल्प को पूरी तरह स्पष्ट करता है। अब जबकि भारत एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, तो यह जरूरी है कि हमारे युवा शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ हों, आत्मविश्वास से भरे हों और हमेशा नशे की जानलेवा लत से मुक्त रहें। यही इस अभियान का उद्देश्य है। हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हमारे युवा नशे की लत के खतरों को समझें, जागरूक रहें और इससे दूर रहें। इस संकल्प को साकार करने में ‘राष्ट्रीय नशा मुक्त युवा अभियान’ अब एक अहम भूमिका निभा रहा है।”

    एनएमबीए: साझा जिम्मेदारी का एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन
    छह वर्ष बाद, वह एक पहल अब एक बहुत बड़े अभियान का हिस्सा बन गई है। यह अभियान संकल्प लेने और लोगों को जोड़ने की गतिविधियों के जरिए 13.71 करोड़ से अधिक युवाओं तक पहुंचा है। साथ ही विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में 31 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। शैक्षिक परिसरों में विद्यार्थियों का स्वैच्छिक रूप से संकल्प लेना अब एक आम बात हो गई है और ग्राम सभाएं भी अब इस मुद्दे पर नियमित रूप से चर्चा करती हैं। जहां पहले लोग अपने परिवार के किसी सदस्य की लत को निजी शर्म की बात मानकर छिपाते थे, वहीं अब 10.65 करोड़ से अधिक महिलाओं, स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) और सामुदायिक नेटवर्कों के जरिए, इस बारे में खुलकर और अपनी भाषा में अपने पड़ोसियों से बात करने लगी हैं।
    19 सितंबर, 2026 तक, 1.70 लाख से अधिक ‘नशा मुक्ति मित्र (एनएमएम)’ सामुदायिक स्तर पर चैंपियन बनकर उभरे हैं और 34.57 करोड़ से अधिक लोगों तक यह संदेश पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। और, यह रुझान सकारात्मक दिशा में तेजी से आगे की ओर बढ़ रहा है।
    यहीं से सामाजिक व्यवहार को बदलने हेतु एक जन-अभियान की शुरुआत हुई है। एनएमबीए ने एकतरफा जागरूकता से आगे बढ़कर लगातार कई ऐसे रास्ते बनाए हैं, जिनसे लोग इस मुहिम से जुड़ सकें, जानकारी हासिल कर सकें और इसके संदेश को आगे बढ़ा सकें।
    एनएमबीए पोर्टल जानकारियों, शैक्षिक संसाधनों, सर्वोत्तम कार्यपद्धतियों और नागरिकों के लिए इस अभियान से जुड़ने के अवसरों को एक साथ लाता है।
    https://www.dosje.gov.in/organisation/nasha-mukt-bharat-abhiyaan

    नशा-मुक्त युवा, नशा-मुक्त भारत
    हाल ही में, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी में इस बड़े मिशन को आगे बढ़ाते हुए ‘नशा-मुक्त युवा, नशा-मुक्त भारत’ के लक्ष्य को फिर से दोहराया। उनकी यह अपील इसलिए भी खास थी क्योंकि इसमें केवल संस्थानों एवं सरकारी एजेंसियों को ही नहीं, बल्कि युवा संगीतकारों, विद्यार्थियों और थिएटर समूहों को भी शामिल किया गया। ऐसा यह मानते हुए किया गया कि संदेश सबसे अधिक असरदार तब होते हैं, जब वे उन लोगों की आवाज के जरिए पहुंचते हैं जिन पर युवाओं का भरोसा पहले से ही जमा होता है।
    असल में, एनएमबीए ने पिछले छह वर्षों के दौरान चुपचाप नशाबंदी की दीवार ही नहीं, बल्कि अपनापन महसूस कराने वाला एक वैकल्पिक दायरा भी बनाया है। यह दायरा अब बड़ा होकर हर राज्य और केन्द्र-शासित प्रदेश के स्कूलों, कॉलेजों, पंचायती राज संस्थाओं, आशा एवं आंगनवाड़ी नेटवर्कों तथा हजारों सामुदायिक संगठनों तक जा पहुंचा है और हर जगह लोग अपने-अपने शब्दों में यही संकल्प ले रहे हैं।

    जागरूकता से संकल्प तक
    इतने बड़े पैमाने का आंदोलन बहुत देर तक सिर्फ आंकड़ों तक ही सीमित नहीं रहता। यह घरों, कक्षाओं और समुदायों में बातचीत का हिस्सा बनने लगता है, जिससे नशीले पदार्थों के सेवन का मुद्दा खुलकर सामने आता है और इसकी रोकथाम महज संकट के समय की चर्चा न रहकर एक सामूहिक जिम्मेदारी बन जाती है।
    लेकिन ऐसी जागरूकता तो बस एक शुरुआत है। जो लोग अपने या अपने किसी करीबी के लिए मदद चाहते हैं, उनके मन में अगला सवाल यह आता है कि वे आखिर जाएं कहां? एनएमबीए ने इस कदम को भी आसान बनाने का प्रयास किया है।
    राष्ट्रीय नशा-मुक्ति हेल्पलाइन, 14446, जानकारी, मार्गदर्शन और उपयुक्त नशा-मुक्ति संबंधी सेवाओं के लिए संपर्क का जरिया प्रदान करती है। यह चिंता के पल को स्वस्थ होने की दिशा में उठाए जा सकने वाले पहले कदम में बदलने में मदद करती है।
    एक दोस्त के जोर देने और अपनी सही समझ के बीच फैसला करते समय कभी हिचकिचाहट भरे पल का अनुभव करने वाले एक व्यक्ति के लिए एनएमबीए की यात्रा यह भरोसा दिलाती है कि वे अकेले नहीं हैं।

    भारत की उम्मीद की किरण – युवाओं - की सुरक्षा में एकजुट
    अब नागरिकों के पास ‘नशा मुक्ति मित्र’ के तौर पर इस मिशन को आगे बढ़ाने का अवसर है। वे इस बातचीत को मात्र एक अभियान तक सीमित न रखकर उन जगहों तक ले जा सकते हैं, जहां रोजमर्रा के फैसले लिए जाते हैं।
    क्योंकि कोई भी स्थायी बदलाव शायद ही कभी किसी एक अभियान, एक संस्था या एक पल के जरिए आता है। यह बदलाव तभी कायम रहता है, जब जागरूकता रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन जाती है, बातचीत एक सामूहिक संकल्प में बदलती है और वह संकल्प रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है।
    यही ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ की क्षमता और उसका नतीजा है। यह नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ एक ऐसा अभियान है, जिसके साथ पूरा देश एकजुट होकर खड़ा है।
    आइए, भारत की उम्मीद की किरण-युवाओं-की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करें।
    (लेखक भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में सचिव हैं)

    जुनवानी के सूर्या रेजिडेंसी में कार्रवाई; मुनादी के बाद तहसीलदार और पुलिस की मौजूदगी में सीलिंग

       भिलाई / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला घोटाला मामले से जुड़े कारोबारी सूर्यकांत तिवारी से संबंधित संपत्ति पर आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने मंगलवार को भिलाई के जुनवानी स्थित सूर्या रेजिडेंसी में एक मकान को सील कर दिया।
    जानकारी के मुताबिक, उक्त मकान की रजिस्ट्री मनीष उपाध्याय के नाम पर होने की बात सामने आई है। हालांकि, आयकर विभाग की कार्रवाई के पीछे संपत्ति से संबंधित वास्तविक कारण और कानूनी आधार की आधिकारिक विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने आना बाकी है।
    बताया जा रहा है कि आयकर विभाग की टीम ढोल-नगाड़े के साथ सूर्या रेजिडेंसी पहुंची और वहां मुनादी कराई गई। इसके बाद तहसीलदार एवं पुलिस की मौजूदगी में मकान को सील करने की कार्रवाई की गई।
    कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है। आयकर विभाग की ओर से संपत्ति को सील किए जाने के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कार्रवाई किस प्रकरण, आदेश अथवा संपत्ति संबंधी जांच के तहत की गई है।
    फिलहाल कार्रवाई को लेकर विभागीय स्तर पर आगे की जानकारी का इंतजार है।

       इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय की एक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा की महिला पार्षद संध्या यादव को लेकर की गई टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। विवाद बढ़ने पर विजयवर्गीय ने सफाई देते हुए अपने शब्दों पर खेद व्यक्त किया है।
    मामला इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 में नर्मदा लाइन सहित विभिन्न निर्माण कार्यों के भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रम का बताया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलते हुए विजयवर्गीय ने संध्या यादव का उल्लेख करते हुए कहा— “संध्या दीदी की भी चौड़ाई बढ़ गई है थोड़ी सी।” वायरल वीडियो में यह टिप्पणी उस समय सुनाई देती है, जब संध्या यादव मंच पर माइक की ओर बढ़ रही थीं।

    कांग्रेस ने जताई आपत्ति
    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर बहस शुरू हो गई। कांग्रेस नेताओं ने इसे महिला जनप्रतिनिधि की शारीरिक बनावट से जोड़ते हुए आपत्ति जताई और विजयवर्गीय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। कुछ कांग्रेस नेताओं ने मंत्री के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग भी उठाई।

    विजयवर्गीय ने दी सफाई, कहा— शब्दों पर खेद है
    विवाद बढ़ने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने एक वीडियो जारी कर अपनी टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत अर्थ में लिया गया और उन्होंने संध्या यादव को अपनी बेटी के समान बताया। मंत्री ने अपने शब्दों पर खेद भी व्यक्त किया।
    विजयवर्गीय के अनुसार, संध्या यादव के परिवार से उनके पुराने संबंध हैं और उन्होंने उन्हें बचपन से देखा है। इसी पारिवारिक संबंध के संदर्भ में उन्होंने संध्या यादव को बेटी जैसा बताया।

    संध्या यादव ने भी किया मंत्री का बचाव
    विवाद के बीच भाजपा पार्षद संध्या यादव ने भी विजयवर्गीय के पक्ष में प्रतिक्रिया दी। नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, यादव ने मंत्री को पिता तुल्य बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें बचपन में गोद में खिलाया है। उन्होंने टिप्पणी को मालवा क्षेत्र की आम बोलचाल की भाषा का हिस्सा बताया और कांग्रेस पर मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।

    बयान के बाद आमने-सामने आए अलग-अलग पक्ष
    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर वायरल वीडियो में कही गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने महिला सम्मान और सार्वजनिक मंचों पर जनप्रतिनिधियों के प्रति भाषा के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, कैलाश विजयवर्गीय ने अपने शब्दों पर खेद जताते हुए अपनी मंशा स्पष्ट की है, जबकि संबंधित पार्षद संध्या यादव ने भी मंत्री का बचाव किया है।
    घटना ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक बातचीत और ऐसी टिप्पणियों के सार्वजनिक प्रभाव को लेकर बहस छेड़ दी है। इस मामले में टिप्पणी के शब्दों, वक्ता की बताई गई मंशा और संबंधित महिला पार्षद की अपनी प्रतिक्रिया—तीनों अलग-अलग पहलू चर्चा में हैं।

      नई दिल्ली / एजेंसी / वंदे मातरम् के गायन और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा। सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक मान्यता या अंतरात्मा की आवाज के कारण राष्ट्रीय गीत की कुछ या सभी पंक्तियां नहीं गाता है, तो केवल इस आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की।

    2026 के संशोधन को दी गई है चुनौती

    विवाद की प्रमुख वजह अगस्त 2026 में संसद से पारित ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ और इसके तहत जारी किए गए प्रावधान बताए जा रहे हैं। याचिका में आरोप है कि संशोधित कानून के जरिए वंदे मातरम् को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण दिया गया है।बताया गया है कि कानून में वंदे मातरम् के गायन को जानबूझकर रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका अपमान करने पर तीन वर्ष तक की सजा या जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों के गायन का प्रावधान किए जाने को भी चुनौती दी गई है।

    टी. एम. कृष्णा ने उठाए धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल

    प्रसिद्ध कर्नाटक संगीत गायक टी. एम. कृष्णा ने कानून और गृह मंत्रालय के संबंधित सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

    याचिका में दलील दी गई है कि वंदे मातरम् के शुरुआती दो अंतरों के बाद के हिस्सों में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े धार्मिक संदर्भ हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, सभी नागरिकों के लिए इसके पूर्ण गायन को अनिवार्य करना संविधान के अनुच्छेद 25 में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक सिद्धांत से संबंधित सवाल उठाता है।याचिका में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक मंचों पर वंदे मातरम् के पहले दो अंतरों के गायन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और अब सभी छह अंतरों को अनिवार्य करने का प्रयास किया जा रहा है।

    ‘राष्ट्रीय गीत क्या है, यह तय करना सरकार का काम’

    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय गीत क्या है और उससे जुड़ी भावनाओं का निर्धारण करना सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। अदालत ने इस मुद्दे को लेकर अपनी भूमिका और सीमाओं पर भी टिप्पणी की।

    पीठ ने 1986 के बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य मामले का संदर्भ लिया। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक आधार पर राष्ट्रगान नहीं गाने वाले छात्रों के मामले में कहा था कि यदि वे राष्ट्रगान के दौरान सम्मानपूर्वक खड़े रहते हैं, तो केवल राष्ट्रगान न गाने के आधार पर उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता।सुनवाई के दौरान इसी सिद्धांत की प्रासंगिकता वंदे मातरम् के मामले में भी सामने आई।

    केंद्र और याचिकाकर्ता के वकील के बीच बहस

    केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि देशभक्ति और राष्ट्रीय गीत के सम्मान के लिए कानूनी दबाव या एडवाइजरी की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए तथा धर्मनिरपेक्षता की व्याख्या अत्यधिक संकीर्ण तरीके से नहीं की जानी चाहिए।बहस के दौरान सॉलिसिटर जनरल की ओर से ‘नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर याचिकाकर्ता के वकील डॉ. एस. मुरलीधर ने आपत्ति जताई।अब केंद्र सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग ने दुर्ग जिले में विभिन्न सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए कुल 40 करोड़ 85 लाख 2 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इन कार्यों के पूर्ण होने से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा।
    स्वीकृत कार्यों में सुरपा व्यपवर्तन योजना के जीर्णोद्धार तथा नहर प्रणाली के रीमॉडलिंग एवं लाइनिंग कार्य के लिए 2 करोड़ 23 लाख 56 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कार्य पूर्ण होने के बाद 121 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
    इसी तरह मोहंदी जलाशय के जीर्णोद्धार एवं नहरों की लाइनिंग के लिए 4 करोड़ 96 लाख 55 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे 100 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। तिरगा जलाशय के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 71 लाख 26 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे 107 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
    गनियारी जलाशय के जीर्णोद्धार एवं नहर लाइनिंग कार्य के लिए भी 4 करोड़ 71 लाख 26 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कार्य पूर्ण होने पर 254 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। वहीं, रिसाली-उमरपोटी जलाशय के जीर्णोद्धार एवं नहर लाइनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 97 लाख 94 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे 162 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी।
    इसके अलावा दुर्ग जिले के निगम क्षेत्र के तालाबों में निस्तारी जल भरने के लिए चैनल निर्माण कार्य हेतु 4 करोड़ 93 लाख 56 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। शिवनाथ मंडल कार्यालय, दुर्ग के जीर्णोद्धार एवं नव निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 96 लाख 24 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है।
    कपसदा जलाशय के जीर्णोद्धार एवं नहर लाइनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 57 लाख 8 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कार्य पूर्ण होने पर 90 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। वहीं, नंदौरी जलाशय के जीर्णोद्धार एवं नहरों की लाइनिंग के लिए 4 करोड़ 77 लाख 57 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे 49 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।
    इन स्वीकृत कार्यों से दुर्ग जिले में सिंचाई अधोसंरचना के जीर्णोद्धार, नहरों की क्षमता में सुधार तथा विभिन्न क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा के विस्तार में मदद मिलेगी।

    शास्त्रीय कला के मंच पर फिल्मी गीतों की प्रस्तुति पर उठे सवाल, सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने जताई आपत्ति

    रायगढ़ / शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और कला परंपरा का प्रतिष्ठित मंच माने जाने वाले 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह में सातवें दिन हुई एक प्रस्तुति विवादों में आ गई है। इंडियन आइडल फेम गायक अमित साना की प्रस्तुति के दौरान ‘बीड़ी जलाई ले जिगर से’ और ‘जुम्मा चुम्मा दे दे’ जैसे फिल्मी गीत गाए जाने पर आपत्ति सामने आई है।

    मामले ने तब राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का रूप ले लिया, जब भाजपा के राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने इन गीतों की प्रस्तुति पर कड़ी आपत्ति जताई। सांसद का कहना है कि चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन की अपनी गरिमा और परंपरा है और मंच पर प्रस्तुत किए जाने वाले कार्यक्रमों के चयन में इसका ध्यान रखा जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री और संस्कृति मंत्री को पत्र की तैयारी

    सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और संस्कृति मंत्री को लिखित शिकायत भेजने की बात कही है। इससे आयोजन में कलाकारों और प्रस्तुतियों के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

    सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल

    कार्यक्रम में इन गीतों की प्रस्तुति के वीडियो और चर्चा के बाद सोशल मीडिया पर जिला प्रशासन और आयोजन की चयन समिति को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। लोगों का एक वर्ग समारोह की सांस्कृतिक गरिमा और कार्यक्रमों के चयन को लेकर सवाल उठा रहा है।

    चक्रधर समारोह केवल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि रायगढ़ की समृद्ध कला-संस्कृति और संगीत परंपरा की पहचान से जुड़ा आयोजन है। ऐसे में अब चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि कार्यक्रमों के चयन में समारोह की सांस्कृतिक प्रकृति और गरिमा को ध्यान में रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

    नगांव उपचुनाव के प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं के वाहनों पर कथित हमला, शीशे टूटे; मनोज चौहान के घायल होने का दावा—कांग्रेस ने भाजपा समर्थकों पर लगाया आरोप

    नगांव/गुवाहाटी। असम के नगांव लोकसभा उपचुनाव के प्रचार के बीच सोमवार को कांग्रेस के चुनावी काफिले पर कथित पथराव ने राज्य की चुनावी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया। समागुरी क्षेत्र में चुनावी सभा के लिए जा रहे काफिले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के असम प्रभारी भूपेश बघेल, असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई, AICC सचिव मनोज चौहान, कांग्रेस प्रत्याशी सिबामोनी बोरा सहित कई नेता मौजूद थे।

    कांग्रेस के अनुसार, काफिले के वाहनों पर पत्थर और बोतलें फेंकी गईं, जिससे कुछ वाहनों के शीशे क्षतिग्रस्त हुए। गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि हमले के पीछे भाजपा समर्थक थे। कांग्रेस की ओर से यह भी दावा किया गया कि AICC सचिव मनोज चौहान को पत्थर लगने से चोट आई।

    घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस और सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। कांग्रेस की ओर से पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

    सवाल सिर्फ एक काफिले का नहीं, चुनावी माहौल का है

    चुनावी प्रचार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच विरोध या नारेबाजी लोकतांत्रिक राजनीति में देखी जा सकती है, लेकिन यदि किसी चुनावी काफिले पर वास्तव में पथराव हुआ है तो यह कानून-व्यवस्था और चुनावी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    सबसे अहम सवाल अब यही हैं—

    काफिले पर हमला किसने किया?

    हमले की शुरुआत कैसे हुई?

    क्या पहले से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी प्रशासन को थी?

    वाहनों को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान कब होगी?

    और शिकायत के आधार पर पुलिस की कार्रवाई का अगला कदम क्या होगा?

    आरोपों पर सियासी टकराव भी तेज

    कांग्रेस ने घटना के लिए भाजपा समर्थकों को जिम्मेदार ठहराते हुए असम सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है और घटना को लेकर अलग दावा किया है। इसलिए हमले के वास्तविक जिम्मेदारों का निर्धारण जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

    नगांव लोकसभा उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होना है। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान हुई यह घटना प्रशासन और निर्वाचन तंत्र के सामने एक सीधी चुनौती है—चुनावी मुकाबला राजनीतिक बहस और जनसमर्थन से होगा या सड़क पर टकराव से?

    अब निगाहें पुलिस की जांच और निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर हैं।

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision