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दिवंगत शिक्षक के वेतन निर्धारण का समय पर अनुमोदन नहीं कराने और लंबित पेंशन के संबंध में गलत जानकारी भेजने का मामला
रायपुर,/ लोक शिक्षण संचालनालय ने मुंगेली जिले में दिवंगत शिक्षक के पेंशन प्रकरण से जुड़े कार्यों में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर छह अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालक श्री ऋतुराज रघुवंशी ने आदेश जारी किया है।
आदेशानुसार, शासकीय हाईस्कूल लाखासार में पदस्थ सहायक शिक्षक विज्ञान अंजनी त्रिपाठी का 25 सितंबर 2022 को सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था। उनकी मृत्यु के बाद परिवार पेंशन और मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति उपादान के प्रकरण की प्रक्रिया में यह पाया गया कि वर्ष 2018 में सहायक शिक्षक एल बी संवर्ग संविलियन के बाद किए गए वेतन निर्धारण की सक्षम प्राधिकारी से समय पर जांच और अनुमोदन नहीं कराया गया। विलंब से अनुमोदन के कारण अधिक भुगतान की वसूली की स्थिति बनी।साथ ही लंबित पेंशन के संबंध में संचालनालय लोक शिक्षण को गलत जानकारी भेजे जाने का भी उल्लेख है।
इस मामले में तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य राघवेन्द्र कुमार सोनी, प्रभारी प्राचार्य रघुनंदन सिंह राजपूत, सहायक ग्रेड-3 मोतीराम यादव, सहायक ग्रेड-2 त्रिवेणी ध्रुव, सहायक ग्रेड-3 अशोक ध्रुव तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पेंशन कक्ष प्रभारी एवं कनिष्ठ लेखा परीक्षक शत्रुघन कुलमित्र को निलंबित किया गया है। आदेश में कहा गया है कि संबंधित कर्मचारियों द्वारा सौंपे गए दायित्वों के निर्वहन में नियम विरुद्ध कार्य, गंभीर लापरवाही और शासकीय कार्य में विलंब पाया गया। निलंबन अवधि में सभी का मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर का कार्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
रायपुर, / छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए 14 करोड़ 78 लाख 61 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं।
जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के टेकापार जलाशय जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 94 लाख 42 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूरा होने से 133 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसी तरह से साल्हेवारा जलाशय का जीर्णोद्धार, नहरों का रिमाडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 85 लाख 33 रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 164 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। सिंगारपुर व्यपवर्तन शीर्ष कार्य का जीर्णोद्धार एवं नहरों का रिमाडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 98 लाख 86 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 111 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।
अंत्योदय के संकल्प के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री श्री साय
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एकात्म मानववाद के प्रणेता और प्रखर राष्ट्रचिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने विचारों और सिद्धांतों के माध्यम से राष्ट्र के समग्र विकास की ऐसी दृष्टि प्रस्तुत की, जिसके केंद्र में समाज का अंतिम व्यक्ति है। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि विकास की सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उनका ‘अंत्योदय’ का सिद्धांत गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती को ‘अंत्योदय दिवस’ के रूप में मनाना उनके विचारों के अनुरूप समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण और उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के संकल्प को अभिव्यक्त करता है। एकात्म मानववाद और अंत्योदय का उनका दर्शन आज भी राष्ट्र निर्माण और जनकल्याण की दिशा में प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार, आदर्श और राष्ट्रसेवा का भाव सदैव देश और समाज को प्रेरित करता रहेगा।
मोंगरा बैराज से 8 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद बढ़ा जलस्तर, जेवरा-सिरसा पुलिस ने दोनों ओर की बेरिकेडिंग
दुर्ग। मोंगरा बैराज से 8 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने और अन्य बैराजों से पानी की आवक बढ़ने के बाद शिवनाथ नदी उफान पर आ गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने से समोदा नाला पर दुर्ग-बेमेतरा मार्ग की पुलिया पानी में डूब गई, जिसके चलते इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जेवरा-सिरसा चौकी पुलिस ने सड़क के दोनों ओर बेरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी है। पुलिस द्वारा वाहन चालकों को मार्ग पर आगे नहीं बढ़ने तथा वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने की अपील की गई है।
जलस्तर बढ़ने से बढ़ी सतर्कता
शिवनाथ नदी सहित आसपास के नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने के बाद पुलिस और प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विशेष रूप से लोगों को नदी और नालों के आसपास जाने से बचने तथा पानी के तेज बहाव वाले स्थानों पर किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाने की सलाह दी गई है।
पुलिस द्वारा मार्ग पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि जलभराव और तेज बहाव के बीच कोई वाहन या व्यक्ति जोखिम में न पड़े। फिलहाल दुर्ग-बेमेतरा मार्ग पर समोदा नाला की पुलिया से आवागमन बंद है।
‘मेरी पौष्टिक थाली’ से लेकर स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता तक हुए आयोजन, ‘घर-घर मुनगा, हर घर मुनगा’ का दिया संदेश
दैनिक शौर्यपथ महासमुंद जिला ब्यूरो / संतराम कुर्रे
पिथौरा। विकासखंड पिथौरा के गौरव ग्राम बुंदेली में पोषण माह के अंतर्गत पांचों आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘सेवा संकल्प आंगन मिलन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। पिथौरा सेक्टर भुरकुनी के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों में पोषण, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सहभागिता को लेकर विभिन्न गतिविधियां कराई गईं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जनपद सदस्य श्रीमती जयंती सिदार एवं वक्ता श्रीमती अलका शर्मा उपस्थित रहीं। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक श्रीमती क्षमा ताड़े ने कार्यक्रम की गतिविधियों और उद्देश्य की जानकारी दी।
हल्दी-चावल से अतिथियों को न्योता
सेवा संकल्प अभियान के तहत आंगन मिलन कार्यक्रम में अतिथियों को आमंत्रित करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक रूप से हल्दी-चावल देकर सादर आमंत्रित किया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के मनोरंजन के लिए खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ रंगोली और मेहंदी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। बच्चों को मिठाई एवं फल का वितरण किया गया।
‘मेरी पौष्टिक थाली’ और स्वास्थ्य जांच बनी आकर्षण
बुंदेली के पांचों आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘मेरी पौष्टिक थाली’ और पौष्टिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, बच्चों की खेल गतिविधियां और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ‘न्योता भोज’ का आयोजन किया गया।
पोषण वाटिका को बढ़ावा देने के लिए पौधरोपण किया गया तथा ग्रामीणों को ‘घर-घर मुनगा, हर घर मुनगा’ का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य परिवारों में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बच्चों एवं माताओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना रहा।
25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलेगा आंगन मिलन
महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक श्रीमती क्षमा ताड़े ने बताया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आंगनबाड़ी केंद्रों में विभिन्न चरणों में आंगन मिलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान के दौरान पोषण, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी गतिविधियां होंगी।
इस दौरान महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की हितग्राही महिलाएं अपने अनुभव साझा करेंगी तथा पात्र हितग्राहियों का पंजीयन भी किया जाएगा। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का उपयोग स्वयं एवं बच्चों के पोषण के लिए करने वाली माताओं को ‘पोषण शक्ति सम्मान’ प्रदान किया जाएगा।
पहले दिन 25 सितंबर को कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जिसके बाद निर्धारित तिथियों के अनुसार यह आयोजन 7 अक्टूबर तक जारी रहेगा। कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिलाओं, बच्चों और समुदाय की सहभागिता से पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज (25 सितंबर) देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ा और राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस आंदोलन को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), और विभिन्न नागरिक संगठनों (Civil Society) का समर्थन प्राप्त था।
इस पूरे घटनाक्रम और विवाद से जुड़ी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:
आंदोलन और विरोध का मुख्य कारणयह प्रदर्शन मुख्य रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर हो रहा था।
वोट चोरी के आरोप: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा की गई इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, जिससे झुग्गी-झोपड़ियों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले हजारों गरीब नागरिकों के नाम मतदाता सूची से प्रभावित हुए हैं।
मुख्य मांग: आंदोलनकारियों का नारा था "वोट चोरी इस देशद्रोह"। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
2. पुलिस की सख्त कार्रवाई और नाकेबंदीदिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए थे:
रास्ते पूरी तरह बंद: जंतर-मंतर जाने वाले सभी रास्तों पर कई परतों (Layers) की भारी बैरिकेडिंग कर दी गई थी। यहां तक कि मीडिया कर्मियों और प्रदर्शनकारियों को भी घटना स्थल पर प्रवेश करने से पूरी तरह रोक दिया गया।
अनुमति नहीं होने का दावा: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आयोजकों ने इस प्रदर्शन के लिए कोई औपचारिक आवेदन नहीं दिया था और न ही कोई अनुमति ली गई थी, इसलिए भीड़ को जमा होने से रोका गया।
3. दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासतजंतर-मंतर पर जैसे ही प्रदर्शनकारी और छात्र जुटने लगे, पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से हटाना शुरू कर दिया:
प्रमुख गिरफ्तारियां/हिरासत: प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, और प्रसिद्ध वकील व सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण सहित कई छात्र नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
प्रशांत भूषण का बयान: हिरासत में लिए जाने के बाद प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया (X) पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकना सरकार की हताशा को दिखाता है और अब ऐसे आंदोलन देश के कोने-कोने में फैलेंगे।
4. देशव्यापी असर और विपक्षी दलों का मार्चयह आंदोलन सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक राष्ट्रव्यापी आक्रोश का हिस्सा था
:यूथ कांग्रेस और दिल्ली कांग्रेस: इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) और दिल्ली कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी रायसीना रोड और राउज एवेन्यू से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग कार्यालय) की तरफ मार्च निकाला, जहां सुरक्षा बलों को भारी संख्या में तैनात रहना पड़ा।
अन्य राज्यों में प्रदर्शन: कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में चुनाव कार्यालय की तरफ मार्च निकाला गया, जहां पुलिस के साथ नोकझोंक हुई और पुतले फूंके गए। वहीं असम में भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई और कई वरिष्ठ नेताओं को इसी मुद्दे पर प्रदर्शन करने के कारण हिरासत में लिया गया है।
5 साल में सरकारी खजाने से करोड़ों बाहर, 84 हजार से ज्यादा शिकायतें फिर भी सिर्फ ₹27,218 की पेनाल्टी—अब अनुबंध खत्म होने पर खरीद की तैयारी
रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में इस्तेमाल हो रही ई-पॉस मशीनों का रेंटल मॉडल अब सरकारी खर्च, तकनीकी व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवालों के केंद्र में है। उपलब्ध आंकड़ों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 14,085 राशन दुकानों में उपयोग की जा रही मशीनों के लिए पांच वर्ष में ₹140 करोड़ से अधिक भुगतान का अनुमान है। वहीं, मशीनों की सीधी खरीद और डेटा सुविधा सहित कुल लागत करीब ₹35 करोड़ आंकी गई थी। इस अंतर को लेकर लगभग ₹105 करोड़ के अतिरिक्त वित्तीय भार का सवाल उठ रहा है।
यानी सवाल सिर्फ मशीनों के खराब होने का नहीं, बल्कि यह है कि सरकारी धन से खरीदी जा सकने वाली व्यवस्था को इतने वर्षों तक किराए पर चलाने का आर्थिक औचित्य क्या था?
₹1,214 प्रतिमाह प्रति मशीन—किराया चलता रहा, सवाल बढ़ते रहे
रिपोर्टों के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने हैदराबाद की लिंकवेल टेलीसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ पांच वर्ष का अनुबंध किया था। अनुबंध में ई-पॉस मशीन के साथ सॉफ्टवेयर, 4G कनेक्टिविटी और तकनीकी रखरखाव जैसी सेवाएं शामिल थीं।
प्रारंभिक व्यवस्था में प्रति मशीन ₹1,214 प्रतिमाह किराया निर्धारित होने की बात सामने आई। लगभग 14,085 मशीनों के हिसाब से पांच साल में किराए की रकम करोड़ों में पहुंचना स्वाभाविक था। उपलब्ध गणना के अनुसार चार वर्षों में ही लगभग ₹91.78 करोड़ का भुगतान किया जा चुका था।
मशीन खराब, सर्वर डाउन और राशन लेने कतार में जनता
ई-पॉस व्यवस्था का उद्देश्य राशन वितरण को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना था। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2022 से अब तक 84 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं।
शिकायतों में मशीन बंद होने, सर्वर डाउन रहने, बायोमीट्रिक अथवा आइरिस स्कैनर काम नहीं करने जैसी समस्याएं शामिल बताई गई हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी उस समय सामने आती है जब तकनीकी खराबी के कारण राशन वितरण प्रभावित होता है। रोज कमाने-खाने वाले मजदूर, बुजुर्ग और जरूरतमंद उपभोक्ता तकनीकी व्यवस्था की समस्या के कारण राशन के लिए इंतजार करने को मजबूर होते हैं।
सवाल यह है कि जिस तकनीक पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, उसका सबसे जरूरी पैमाना—राशन उपभोक्ता को समय पर राशन मिलना—कितना पूरा हो रहा है?
14 हजार से ज्यादा मशीनों के लिए करीब 80 इंजीनियर
रखरखाव व्यवस्था का आंकड़ा भी ध्यान खींचता है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक प्रदेश की लगभग 14,085 ई-पॉस मशीनों के लिए करीब 80 इंजीनियर तैनात हैं।
इस हिसाब से औसतन एक इंजीनियर के हिस्से में लगभग 176 मशीनों की जिम्मेदारी आती है।
ऐसे में दूरदराज के किसी राशन केंद्र पर मशीन खराब होने के बाद तत्काल तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है—यह भी जांच का विषय है।
84 हजार शिकायतों के बीच पेनाल्टी सिर्फ ₹27,218
मामले का सबसे बड़ा सवाल शिकायतों और दंड के बीच दिखाई देने वाले अंतर को लेकर है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2024 में कंपनी पर लापरवाही के लिए सिर्फ ₹27,218 की पेनाल्टी लगाई गई।
एक तरफ हजारों शिकायतों का आंकड़ा और दूसरी तरफ इतनी कम दंड राशि—यह अंतर अपने आप में अनुबंध की सर्विस लेवल शर्तों और पेनाल्टी प्रावधानों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
अब पांच साल बाद सरकार को ‘खरीद’ क्यों याद आई?
पांच वर्षीय अनुबंध अब समाप्ति के चरण में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभाग ने आगे इसी रेंटल व्यवस्था को जारी रखने के बजाय ई-पॉस मशीनों की सीधी खरीद पर विचार शुरू किया है।
यहीं सबसे बड़ा वित्तीय सवाल सामने आता है—
अगर खरीद मॉडल अब व्यवहारिक और बेहतर विकल्प माना जा रहा है, तो पांच वर्ष पहले इसी विकल्प पर विचार क्यों नहीं किया गया?
क्या उस समय रेंटल मॉडल के पक्ष में कोई विस्तृत लागत-लाभ अध्ययन किया गया था?
क्या पांच वर्षों के कुल संभावित खर्च की तुलना मशीन खरीदने की लागत से की गई थी?
क्या अनुबंध में मशीनों की उपलब्धता, सर्वर अपटाइम और शिकायतों के निपटारे के लिए पर्याप्त दंडात्मक प्रावधान थे?
अब जरूरी है पूरे मॉडल का ऑडिट
यह मामला किसी एक कंपनी या किसी एक अधिकारी तक सीमित करने के बजाय पूरे निर्णय-प्रक्रिया और अनुबंध व्यवस्था की जांच का विषय है।
सरकार को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि—
पांच वर्षों में ई-पॉस व्यवस्था पर कुल कितना भुगतान हुआ?
अनुबंध की मूल लागत और अब तक हुए भुगतान में कितना अंतर है?
मशीनों की खरीद बनाम किराए की व्यवस्था का लागत-लाभ आकलन क्या था?
84 हजार से अधिक शिकायतों में कितनी शिकायतें समयसीमा में हल हुईं?
कंपनी पर कुल कितनी पेनाल्टी लगाई गई और कितनी वसूली हुई?
तकनीकी कर्मचारियों की संख्या अनुबंध के अनुसार कितनी निर्धारित थी?
4G डेटा, सर्वर और रखरखाव के लिए कंपनी की वास्तविक जिम्मेदारी क्या थी?
और सबसे महत्वपूर्ण—लगभग ₹105 करोड़ के बताए जा रहे अतिरिक्त वित्तीय भार की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है?
जनता का राशन, जनता का पैसा—जवाबदेही भी जनता के सामने हो
PDS कोई सामान्य सरकारी सेवा नहीं है। यह प्रदेश के लाखों परिवारों के भोजन और खाद्य सुरक्षा से सीधे जुड़ी व्यवस्था है।
इसलिए ई-पॉस मशीनों का मामला सिर्फ ‘किराया बनाम खरीद’ का वित्तीय विवाद नहीं है। यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि तकनीक पर खर्च होने वाले सार्वजनिक धन का लाभ जमीन पर राशन लेने वाले व्यक्ति तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है।
अब जबकि रेंटल मॉडल समाप्ति की ओर है और सीधी खरीद की तैयारी की बात सामने आ रही है, तो नई व्यवस्था शुरू करने से पहले पिछले पांच वर्षों के खर्च, अनुबंध, शिकायतों, तकनीकी प्रदर्शन और पेनाल्टी की स्वतंत्र वित्तीय एवं प्रशासनिक समीक्षा जरूरी दिखाई देती है।
क्योंकि सवाल सिर्फ यह नहीं कि नई मशीनें कितने में खरीदी जाएंगी—सवाल यह भी है कि पुरानी व्यवस्था में जनता के पैसे का हिसाब आखिर कौन देगा?
रायपुर/बेमेतरा। छत्तीसगढ़ में कैदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर 6 खुली जेलों (Open Jails) की शुरुआत करने जा रही है। इस योजना का प्रमुख केंद्र बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में विकसित खुली जेल होगी, जिसे करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
खुली जेल की व्यवस्था में पात्र सजायाफ्ता कैदियों को परिवार के साथ रहने और जेल परिसर से बाहर जाकर रोजगार या स्वरोजगार करने का अवसर मिलेगा। पथर्रा में 200 पुरुष सजायाफ्ता कैदी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अलग-अलग क्वार्टरों में रह सकेंगे।
छह स्थानों पर अलग-अलग क्षमता
बेमेतरा (पथर्रा): 200 पुरुष कैदी
दुर्ग: 50 पुरुष कैदी
जगदलपुर: 25 पुरुष और 25 महिला कैदी
रायपुर: 25 महिला कैदी
अंबिकापुर: 15 पुरुष कैदी
बिलासपुर: उपलब्ध जानकारी के अनुसार सीमित क्षमता का परिसर
खुली जेल में पारंपरिक जेलों जैसी ऊंची दीवारों और कठोर सुरक्षा व्यवस्था के बजाय अनुशासन आधारित व्यवस्था होगी। कैदी दिन में परिसर से बाहर जाकर खेती, पशुपालन, डेयरी, सिलाई-कढ़ाई, बुनाई, लघु वनोपज प्रसंस्करण, हस्तशिल्प या अन्य रोजगार कर सकेंगे। उन्हें सूर्यास्त से पहले वापस लौटकर अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
नियमों का उल्लंघन या निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटने पर कैदी को सामान्य जेल में वापस भेजे जाने का प्रावधान रहेगा।
चयन में आचरण और पात्रता महत्वपूर्ण
खुली जेल में स्थानांतरण के लिए कैदी को पहले जेल अधीक्षक के समक्ष आवेदन करना होगा। जेल प्रशासन उसके आचरण, स्वास्थ्य और आपराधिक रिकॉर्ड की समीक्षा करेगा, जिसके बाद निर्धारित समिति की जांच और अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया होगी।
प्रस्तावित पात्रता में उम्र, सजा की अवधि, जेल में आचरण तथा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य जैसे मानकों को महत्व दिया गया है। वहीं गंभीर यौन अपराध, जघन्य हत्या, UAPA, POTA, TADA, NSA, छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, NDPS और जाली नोट से जुड़े मामलों में सजायाफ्ता या संबंधित श्रेणियों के बंदियों को योजना से बाहर रखने का प्रावधान बताया गया है।
पुनर्वास के साथ आत्मनिर्भरता पर जोर
खुली जेल की अवधारणा का उद्देश्य केवल कैदियों को अधिक स्वतंत्रता देना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में पुनर्वासित करना है। परिवार के साथ रहने, रोजगार करने और सामाजिक वातावरण में जिम्मेदारियों का निर्वहन करने से सजा पूरी होने के बाद समाज में पुनः स्थापित होने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
साथ ही, कैदियों के रोजगार से आत्मनिर्भर बनने की स्थिति में जेल प्रशासन पर उनके भोजन और रखरखाव का आर्थिक भार भी कम होने की संभावना है। इस तरह यह व्यवस्था दंड के साथ सुधार और पुनर्वास को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
48.44 लाख हेक्टेयर में बोनी पूर्ण, 4.58 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण; किसानों को 8,125 करोड़ रुपये से अधिक का अल्पकालीन कृषि ऋण
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में खरीफ फसलों की बोनी का कार्य लगभग पूरा हो गया है। 22 सितंबर तक 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 99 प्रतिशत है। राज्य सरकार ने इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर किसानों को उनकी मांग के अनुसार प्रमाणित खाद-बीज उपलब्ध कराने और समितियों में पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। खाद-बीज वितरण में लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
13.14 लाख मीट्रिक टन खाद का वितरण
कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में खरीफ सीजन के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध सहकारी और निजी क्षेत्रों में 17.64 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है। अब तक किसानों को 13.14 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरित किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का 74 प्रतिशत है।
इसी तरह 4.80 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का भंडारण किया गया है, जबकि अब तक किसानों को 4.58 लाख क्विंटल बीज वितरित किया जा चुका है। यह निर्धारित मांग का करीब 93 प्रतिशत है।
प्रदेश में धान के साथ मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल सहित विभिन्न फसलों की बोनी की गई है।
अब तक 1008.1 मिमी औसत वर्षा
22 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में 1008.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिलीमीटर है। पिछले 10 वर्षों की इसी अवधि की औसत वर्षा 1061.6 मिलीमीटर की तुलना में इस वर्ष अब तक 53.5 मिलीमीटर कम वर्षा हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 881.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी।
किसानों को 8,125 करोड़ रुपये से अधिक कृषि ऋण
किसानों को खेती-किसानी में आर्थिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्पकालीन कृषि ऋण भी वितरित किया जा रहा है। 21 सितंबर तक किसानों को 8,125.51 करोड़ रुपये का ऋण दिया जा चुका है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह राशि 6,740.75 करोड़ रुपये थी।
चालू खरीफ सीजन में किसानों को कुल 8,800 करोड़ रुपये का अल्पकालीन कृषि ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
महतारी वंदन से 68 लाख से अधिक महिलाओं को हर माह आर्थिक संबल, 13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि माताओं-बहनों का सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। वे मंगलवार को राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने माताओं-बहनों को तीज पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में मातृशक्ति का विशेष स्थान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 31 किस्तों में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस आर्थिक संबल का उपयोग महिलाएं घरेलू जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा, बचत और स्वरोजगार के लिए भी कर रही हैं।
13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न आर्थिक गतिविधियों और छोटे व्यवसायों के माध्यम से परिवार की आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
650 करोड़ की फिल्म सिटी से स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककला, संस्कृति और प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाने के लिए करीब 650 करोड़ रुपये की लागत से फिल्म सिटी तैयार की जा रही है। इससे फिल्म निर्माण, पर्यटन और स्थानीय कलाकारों व तकनीशियनों के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।
समारोह में मुख्यमंत्री ने लोक कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों का सम्मान भी किया। उन्होंने कहा कि लोकगीत, लोकनृत्य और परंपराएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान हैं और इनके संरक्षण में कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
विकास और जनकल्याण पर भी मुख्यमंत्री ने रखी बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए काम कर रही है। प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आवास, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर भी तेजी से काम हो रहा है।
उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से इन क्षेत्रों में विकास के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
राजस्व मंत्री ने लोकगीत से किया अभिनंदन
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने तीज मिलन समारोह को माताओं-बहनों के सम्मान का अवसर बताया और छत्तीसगढ़ी लोकगीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। उन्होंने प्रदेश में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। समारोह में विभिन्न बोर्डों के अध्यक्ष, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, कलाकार, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में माताएं-बहनें उपस्थित रहीं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
