
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की सेहत की जांच, पौष्टिक आहार और मुनगा के महत्व की दी जानकारी
राजनांदगांव / शौर्यपथ / सेवा संकल्प अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम गठुला स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-6 में ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य के प्रति अभिभावकों एवं ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी केंद्र में संचालित प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई। बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं बौद्धिक विकास के महत्व पर चर्चा करते हुए अभिभावकों को बच्चों की नियमित देखभाल और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया गया।
बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की जांच
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के वजन और ऊंचाई का माप लिया गया तथा उनके स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति की जानकारी प्राप्त की गई। उपस्थित लोगों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व के बारे में बताया गया। साथ ही बाहरी खाद्य पदार्थों के अत्यधिक सेवन से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए बच्चों को घर पर तैयार पौष्टिक एवं स्थानीय खाद्य पदार्थ देने की सलाह दी गई।
विभिन्न गतिविधियों और संवाद के माध्यम से बच्चों तथा परिवारों को पोषण एवं स्वास्थ्य से जुड़े जरूरी संदेश दिए गए।
‘हर घर मुनगा’ का भी दिया संदेश
कार्यक्रम के दौरान ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान के तहत मुनगा पौधे का रोपण किया गया। ग्रामीण परिवारों को मुनगा के पोषण संबंधी महत्व की जानकारी देते हुए घरेलू स्तर पर इसके उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सरपंच, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। आयोजन के माध्यम से बच्चों के स्वस्थ विकास के साथ परिवारों में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए एसओपी अंतर्गत जिले के नगरीय निकायों के वार्डों एवं ग्राम पंचायतों में मोबाईल कैम्प का आयोजन किया जा रहा है। मोबाईल कैम्प के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण के लिए चलाए जा रहे शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जा रही है तथा पात्र आवेदक को योजनाओं से लाभान्वित करने आवेदन प्राप्त किए जा रहे है। इसी क्रम में डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम चारभांठा एवं राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सोमनी में मोबाईल कैम्प एवं ई-केवायसी शिविर का आयोजन किया गया। इन मोबाईल कैम्प एवं ई-केवायसी शिविर में 197 श्रमिक उपस्थित हुए। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत तथा छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मण्डल अंतर्गत 8 श्रमिकों का पंजीयन हेतु आवेदन किया गया। शिविर में 26 वैधता अवधि समाप्त होने वाले श्रमिक पंजीयन का नवीनीकरण आवेदन किया गया एवं 2 हितग्राहियों के संशोधन एवं 2 योजनाओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए गए। शिविर में 23 श्रमिकों का ई-केवायसी सत्यापन किया गया। शिविर में 220 श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं से संबंधित जानकारी दी गई एवं ब्रोसर का वितरण किया गया। सहायक श्रमायुक्त ने श्रमिकों से जिले में आयोजित मोबाईल कैम्पों में शामिल होकर नवीन श्रमिक पंजीयन एवं श्रमिक पंजीयन नवीनीकरण कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत करने की अपील की है। मोबाईल कैम्पों में श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
कहा—संजू की उपलब्धि ने देश के साथ पूरे छत्तीसगढ़ को किया गौरवान्वित, अनुभव से प्रदेश के खिलाड़ियों को मिलेगा लाभ
रायपुर/शौर्यपथ। जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली छत्तीसगढ़ की खिलाड़ी संजू देवी से उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नवा रायपुर, अटल नगर स्थित शासकीय आवास/कार्यालय में मुलाकात की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने संजू देवी की माता अमरीका बाई और पिता रामजी से भी भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने संजू देवी को देश और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि संजू देवी की उपलब्धि ने भारत के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के करोड़ों लोगों को गौरवान्वित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की बेटी का उत्कृष्ट प्रदर्शन राज्य के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायी है।
संजू ने साझा किए एशियन गेम्स के अनुभव
मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री ने संजू देवी से एशियन गेम्स में उनके अनुभवों की जानकारी ली। संजू ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम की अजेय यात्रा और मुकाबलों के दौरान अपनाई गई रणनीतियों एवं खेल तकनीकों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि किस तरह टीम ने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के खेल को समझते हुए रणनीति बनाकर मुकाबलों में सफलता हासिल की।
अरुण साव ने कहा कि एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच का अनुभव संजू देवी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी उपयोगी साबित होगा। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने से मिलने वाला अनुभव प्रदेश के खिलाड़ियों को उच्च स्तर पर अपनी प्रतिभा निखारने में मदद करेगा।
उन्होंने संजू देवी के उज्ज्वल खेल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
परिवहन संघ के पदाधिकारियों को दी यातायात नियमों की समझाइश, अव्यवस्थित पार्किंग से बचने की अपील
नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। आगामी त्योहारों के दौरान शहर में बढ़ने वाली भीड़ और यातायात दबाव को देखते हुए बस्तर पुलिस ने सुरक्षित एवं सुगम यातायात व्यवस्था के लिए जागरूकता और शपथ कार्यक्रम आयोजित किया। पुलिस अधीक्षक बस्तर शलभ कुमार सिन्हा के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में बस्तर परिवहन संघ के पदाधिकारियों, वाहन मालिकों और चालकों को यातायात नियमों के पालन के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में बस्तर परिवहन संघ के अध्यक्ष प्रदीप पाठक, उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह नयन, रोशन यादव, सचिव सुखदेव सिंह जोशी, ज्वाइंट सेक्रेटरी संतोष यादव, रामबाबू सिंह ठाकुर तथा कोषाध्यक्ष जगन लाल उर्फ राजू झंवर सहित करीब 180 वाहन मालिक एवं चालक शामिल हुए।
अव्यवस्थित पार्किंग से बचने की दी समझाइश
त्योहारों के दौरान बाजारों और प्रमुख मार्गों पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए वाहन चालकों को यातायात सुचारु बनाए रखने में सहयोग करने की समझाइश दी गई। पुलिस ने वाहनों को निर्धारित एवं व्यवस्थित पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करने तथा मुख्य मार्गों एवं सड़क किनारे असुरक्षित ढंग से वाहन पार्क नहीं करने पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर उपस्थित परिवहन संघ के पदाधिकारियों, वाहन मालिकों और चालकों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए संकल्प पत्र की शपथ भी दिलाई गई।
कार्यक्रम में यातायात उप पुलिस अधीक्षक जयराम चेरमाको, यातायात प्रभारी मधुसूदन सिंह नाग, निरीक्षक कमलेश देवांगन सहित यातायात विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
त्योहारों से पहले पुलिस द्वारा केवल नियमों की सख्ती के बजाय जागरूकता, संवाद और सहभागिता पर जोर देने की पहल से यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में परिवहन संघ और वाहन चालकों के सहयोग की उम्मीद बढ़ी है। पुलिस की इस पहल का उद्देश्य त्योहारों के दौरान आम नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन उपलब्ध कराना है।
भोजराज सिन्हा बोले—SIR समेत प्रमुख फैसलों पर तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति, संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना बंद करे विपक्ष
भिलाई / शौर्यपथ / चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस एवं विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच भिलाई जिला भाजपा अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने मंगलवार को संयुक्त पत्रकार वार्ता की। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग के हालिया संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस के उन दावों पर सवाल उठाए, जिनमें आयोग के भीतर मतभेद होने की बात कही गई थी।
नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. एस.एस. संधू एवं डॉ. विवेक जोशी के संयुक्त बयान से स्पष्ट हो गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) सहित प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाला है।
सिन्हा ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग की चुनावी प्रक्रिया को लेकर देश और दुनिया में उसकी संस्थागत भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुसार, चुनाव परिणामों के बाद कभी ईवीएम तो कभी चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाना विपक्ष की राजनीति का हिस्सा बन गया है।
अंग्रेजी अखबार में कैबिनेट सचिव को लिखे कथित पत्र के संबंध में सिन्हा ने कहा कि जिस पत्र का उल्लेख किया गया है, वह किसी नीतिगत विषय या SIR से संबंधित नहीं था, बल्कि सामान्य प्रशासनिक विषय से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग सीधे राष्ट्रपति के प्रति संवैधानिक रूप से जिम्मेदार है, इसलिए इसे किसी नीतिगत मामले से जोड़ना उचित नहीं है।
भोजराज सिन्हा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने बैठक के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर प्रमुख निर्णयों पर सर्वसम्मति की स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा SIR प्रक्रिया को लेकर दिए गए आदेश के बावजूद विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने भी पत्रकार वार्ता में चुनाव आयोग के संयुक्त बयान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद का केंद्र बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
दोनों नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस नेतृत्व को अपने लगाए गए आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
टीचर्स एसोसिएशन ने जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, 10 दिन अर्जित और 7 दिन आकस्मिक अवकाश देने की मांग
कोण्डागांव / शौर्यपथ / अनुसूचित क्षेत्र में पदस्थ शिक्षकों एवं कर्मचारियों को शासन के प्रावधानों के अनुरूप अतिरिक्त अवकाश का लाभ दिलाने की मांग तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन जिला कोण्डागांव ने जिलाध्यक्ष ऋषिदेव सिंह के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती भारती प्रधान को ज्ञापन सौंपकर पात्र शिक्षकों-कर्मचारियों को 10 दिवस का अतिरिक्त अर्जित अवकाश एवं 7 दिवस का अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश प्रदान करने की मांग की।
1981-84 के प्रावधानों का हवाला, नियमित लाभ नहीं मिलने की शिकायत
संगठन ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ सभी विभागों एवं सभी श्रेणी के कर्मचारियों के लिए शासन स्तर पर अतिरिक्त अवकाश का प्रावधान किया गया है। म.प्र. शासन वित्त विभाग के 11 जनवरी 1984 के ज्ञापन के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों को वर्ष में 10 दिन का अतिरिक्त अर्जित अवकाश दिए जाने का प्रावधान है।
इसी तरह सामान्य प्रशासन विभाग के 25 जुलाई 1981 तथा 11 जनवरी 1984 के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र में पदस्थ सभी श्रेणी के कर्मचारियों को सामान्य आकस्मिक अवकाश के अतिरिक्त 7 दिन का अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश दिए जाने का प्रावधान है। संगठन का कहना है कि इन प्रावधानों के बावजूद कर्मचारियों को इसका नियमित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कई जिलों में जारी हो चुके हैं आदेश
टीचर्स एसोसिएशन ने बताया कि अनुसूचित क्षेत्र के बस्तर, उत्तर बस्तर कांकेर, बीजापुर, सुकमा, जशपुर, सरगुजा और बालोद जिलों के शिक्षा अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त अवकाश के संबंध में आदेश जारी किए जा चुके हैं। संगठन ने कोण्डागांव जिले में भी पात्र शिक्षकों एवं कर्मचारियों को इसका लाभ दिलाने के लिए शीघ्र आदेश जारी करने की मांग की।
जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती भारती प्रधान ने संगठन के प्रतिनिधिमंडल को शीघ्र आवश्यक आदेश जारी करने का आश्वासन दिया है।
ये पदाधिकारी रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने वालों में जिलाध्यक्ष ऋषिदेव सिंह, प्रदेश सहसचिव चंद्रकांत ठाकुर, प्रदेश संगठन मंत्री नीलम श्रीवास्तव, जिला संयोजक महिला प्रकोष्ठ श्रीमती दंतेश्वरी राव, जिला सचिव संजय राठौर, ब्लॉक अध्यक्ष कोण्डागांव मन्नाराम नेताम, आईटी सेल से अवध किशोर मिश्रा, मनोज फिलीप, राजेन्द्र पाण्डेय, लखीराम बघेल, दीपमाला वैष्णव, भानुप्रताप राव सहित जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
संगठन ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र में पदस्थ शिक्षकों-कर्मचारियों को शासन के निर्धारित प्रावधानों का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई तक मांग जारी रहेगी।
गरियाबंद दूसरे, बिलासपुर तीसरे और दुर्ग चौथे स्थान पर; साइबर ठगी से बचाव के लिए पुलिस का व्यापक जनजागरूकता अभियान
रायपुर / शौर्यपथ / साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान में कोंडागांव जिले ने एक बार फिर प्रदेश में सर्वाधिक जागरूकता गतिविधियों के साथ पहला स्थान हासिल किया है। अभियान के तहत लोगों को साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी लिंक, ओटीपी और डिजिटल अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
अभियान के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कोंडागांव में 55,157 जागरूकता गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिसके साथ जिला प्रदेश में शीर्ष पर है। गरियाबंद 46,930 गतिविधियों के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं बिलासपुर तीसरे और दुर्ग चौथे स्थान पर हैं।
कोंडागांव पुलिस द्वारा लगातार स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच आम नागरिकों को साइबर अपराध के तरीकों और उनसे बचने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी देना है।
एक छोटी चूक, बड़ा नुकसान—पुलिस दे रही सतर्क रहने का संदेश
जागरूकता अभियान के दौरान लोगों को अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, ओटीपी, एटीएम/बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने तथा संदिग्ध कॉल और मैसेज से सावधान रहने की सलाह दी जा रही है। साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देरी किए संबंधित माध्यम से शिकायत दर्ज कराने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
कोंडागांव का लगातार शीर्ष स्थान पर बने रहना जिले में चल रही साइबर जागरूकता गतिविधियों की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। पुलिस का प्रयास है कि डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाला प्रत्येक नागरिक साइबर अपराधों के संभावित खतरे को समझे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल सतर्क कदम उठाए।
दुर्ग / शौर्यपथ / महिला एवं बाल विकास विभाग दुर्ग द्वारा सेवा संकल्प योजना के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 स्थित शंकर नगर नौखोरिया बस्ती में जागरूकता एवं विविध गतिविधियों से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, एएनएम एवं मितानिन शामिल हुईं।
कार्यक्रम में पार्षद खालिद रिजवी शेरू, महिला मोर्चा अध्यक्ष दिनेश्वरी पुरकर, पार्षद चंद्रशेखर चंद्राकर (वार्ड-10), अजीत वैद्य (वार्ड-12), ज्योति चौहान, छाया सोनी, बब्बीता चौधरी, जाकिर खोखर, वसीम कुरैशी एवं लक्ष्मता कुशरे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे। एएनएम श्रीमती पुष्पा धनकर और मितानिन कविता यादव ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
सेवा संकल्प योजना के तहत बलून रेस, मेहंदी और रंगोली प्रतियोगिता सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम के दौरान स्वस्थ शिशुओं का चयन कर उन्हें सम्मानित किया गया। वहीं विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में 2 स्वस्थ शिशु, 2 गोदभराई की महिलाएं, 2 अन्नप्राशन कार्यक्रम, 10 किशोरियां और 29 अन्य महिलाएं सहित हितग्राहियों ने सहभागिता की। इस दौरान महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
मेहंदी एवं रंगोली प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले हितग्राहियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों में स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करना रहा।
बिना निविदा लगातार कार्य दिए जाने का आधार क्या था? NULM कर्मचारी अपर्णा क्षत्रिय और पूर्व प्लेसमेंट अधिकारी मुक्तेश की भूमिका भी जांच के घेरे में; दो रेन बसेरों की अनियमितताओं की शिकायतें लंबित होने के बावजूद नई निविदा में ‘5 साल के अनुभव’ का आधार क्यों?
शौर्यपथ विशेष /
दुर्ग। जिला अस्पताल परिसर स्थित आश्रय स्थल की हालिया निविदा प्रक्रिया अब केवल एक संस्था की पात्रता का मामला नहीं रह गई है, बल्कि पिछले तीन वर्षों से चली आ रही कथित प्रक्रिया और पारदर्शिता के सवाल भी इसके केंद्र में आ गए हैं। शहर के कई महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा पिछले लगभग तीन वर्षों से राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) की कर्मचारी अपर्णा क्षत्रिय तथा पूर्व प्लेसमेंट अधिकारी मुक्तेश से आश्रय स्थल के संचालन और निविदा संबंधी जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अन्य महिला समूह लगातार निविदा की जानकारी मांग रहे थे, तो पिछले तीन वर्षों के दौरान सार्थक महिला स्व-सहायता समूह को किस प्रक्रिया, आदेश अथवा प्राधिकरण के आधार पर लगातार कार्य दिया जाता रहा?
यदि उस अवधि में विधिवत निविदा आमंत्रित नहीं की गई थी तो कार्य आवंटन का आधार क्या था? और यदि निविदा प्रक्रिया हुई थी तो उसकी सूचना अन्य इच्छुक महिला समूहों तक क्यों नहीं पहुंची? इन दोनों प्रश्नों का उत्तर संबंधित अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकता है।
तीन साल की चुप्पी के बाद अचानक ‘5 साल का अनुभव’ क्यों महत्वपूर्ण?
हालिया निविदा में सार्थक महिला स्व-सहायता समूह के पांच वर्ष के अनुभव को पात्रता के आधार के रूप में नोटशीट में स्वीकार किए जाने की बात सामने आई है। यहां प्रशासनिक जांच का महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि संबंधित पांच वर्षों के अनुभव का दस्तावेजी और भौतिक सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
क्या संबंधित वर्षों के कार्यादेश, अनुबंध, भुगतान अभिलेख, कर्मचारी उपस्थिति, वेतन भुगतान, PF, दुर्घटना बीमा, शिफ्टवार ड्यूटी और आश्रयार्थियों के रजिस्टर की जांच की गई?
यदि जांच की गई है तो उसका निरीक्षण प्रतिवेदन कहां है?
और यदि जांच नहीं की गई तो केवल अनुभव के दावे के आधार पर पात्रता निर्धारित करने का आधार क्या था?
पिछले तीन साल से दूसरे समूह पूछते रहे—निविदा कहां है?
यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई महिला समूहों द्वारा लगातार निविदा संबंधी जानकारी मांगी जाती रही। यदि इच्छुक समूहों ने तीन वर्षों तक निविदा प्रक्रिया के बारे में जानकारी चाही, तो निगम और NULM के रिकॉर्ड में उनके आवेदन, पत्राचार और अधिकारियों द्वारा दिए गए जवाब उपलब्ध होने चाहिए।
अब यह जांच का विषय है कि—
पिछले तीन वर्षों में आश्रय स्थल के संचालन के लिए किस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई?
किस आदेश के आधार पर सार्थक महिला स्व-सहायता समूह को कार्य जारी रखा गया?
क्या प्रत्येक वर्ष कार्य विस्तार अथवा संचालन जारी रखने का लिखित आदेश था?
क्या किसी सक्षम समिति अथवा अधिकारी ने इसकी स्वीकृति बिना निविदा के किस आधार पर दी?
अन्य इच्छुक महिला समूहों को समान अवसर देने के लिए कोई प्रक्रिया अपनाई गई?
यदि निविदा नहीं हुई तो उसका प्रशासनिक कारण क्या था?
और यदि निविदा हुई तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक अथवा संबंधित आवेदकों को उपलब्ध क्यों नहीं कराए गए?
इन सवालों के जवाब के बिना हालिया निविदा में पांच वर्ष के अनुभव को आधार बनाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दो रैन बसेरों की शिकायतें भी बाजार विभाग में लंबित
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सार्थक महिला स्व-सहायता समूह द्वारा शहर के दो लाइन बसेरों के संचालन को लेकर भी कई अनियमितताओं की शिकायतें बाजार विभाग के समक्ष लंबित होने की बात सामने आई है।
यदि किसी संस्था के पूर्व कार्यों के संबंध में शिकायतें लंबित थीं तो नई निविदा में उसी संस्था के अनुभव को पात्रता के महत्वपूर्ण आधार के रूप में स्वीकार करने से पहले उन शिकायतों का परीक्षण किया गया या नहीं—यह सवाल भी जांच का विषय होना चाहिए।
यहां प्रशासनिक दृष्टि से मूल प्रश्न यह नहीं है कि संस्था दोषी है या निर्दोष, बल्कि यह है कि उसके पूर्व कार्यों से संबंधित शिकायतों का निस्तारण किए बिना उसके अनुभव को पात्रता के आधार के रूप में स्वीकार करने से पहले संबंधित अधिकारियों ने क्या सत्यापन किया?
अपर्णा क्षत्रिय और पूर्व अधिकारी मुक्तेश से भी मांगा जाना चाहिए रिकॉर्ड
पिछले तीन वर्षों में निविदा की जानकारी मांगने वाले महिला समूहों के आवेदन, उनके जवाब, संबंधित फाइलों की नोटशीट और अधिकारियों के बीच हुआ पत्राचार अब इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेज बन सकते हैं।
NULM से जुड़ी कर्मचारी अपर्णा क्षत्रिय तथा पूर्व प्लेसमेंट अधिकारी मुक्तेश के कार्यकाल से संबंधित रिकॉर्ड में यह स्पष्ट होना चाहिए कि आश्रय स्थल के संचालन के संबंध में कौन-कौन से प्रस्ताव आए, किन संस्थाओं ने जानकारी मांगी, उन्हें क्या जवाब दिया गया और सार्थक महिला स्व-सहायता समूह का कार्य किस आधार पर जारी रखा गया।
यदि तीन वर्षों तक किसी वैकल्पिक निविदा प्रक्रिया के बिना कार्य जारी रहा है, तो उसकी प्रशासनिक वैधता और सक्षम स्वीकृति की जांच आवश्यक है।
रात की ड्यूटी से लेकर मैनेजर तक—सिर्फ प्रमाणपत्र नहीं, जमीन पर सत्यापन जरूरी
आश्रय स्थल के संचालन में पूर्णकालिक मैनेजर, शिफ्टवार केयरगिवर, महिला निवासियों के लिए महिला कर्मचारी, कर्मचारियों के भुगतान, PF, दुर्घटना बीमा और उपस्थिति जैसे विषय केवल कागजी औपचारिकताएं नहीं हैं।
इसलिए पिछले चार-पांच वर्षों का—
मैनेजर → केयरगिवर → शिफ्ट ड्यूटी → उपस्थिति → वेतन भुगतान → PF → बीमा → आश्रयार्थी रजिस्टर → प्रवेश-निकासी रिकॉर्ड → रात्रिकालीन सुरक्षा → भौतिक निरीक्षण
का पूरा रिकॉर्ड जांच के दायरे में आना चाहिए।
यदि रिकॉर्ड में कर्मचारी दर्ज हैं तो क्या वे वास्तव में ड्यूटी पर उपस्थित थे? यदि रात्रिकालीन चौकीदार की व्यवस्था थी तो उसका नाम, ड्यूटी चार्ट और भुगतान अभिलेख क्या कहते हैं? यदि आश्रय स्थल में महिलाओं के ठहरने की व्यवस्था थी तो पिछले वर्षों में कितनी महिलाएं वहां रुकीं?
इन प्रश्नों का उत्तर कागज और मौके की वास्तविकता के मिलान से ही मिल सकता है।
अब मामला केवल निविदा का नहीं, तीन साल की पूरी प्रक्रिया का है
पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रश्न यही बनता है कि यदि तीन वर्षों से महिला समूह निविदा की जानकारी मांग रहे थे, तो उस अवधि में पारदर्शी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया क्यों नहीं दिखाई देती? और यदि प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी तो उसके दस्तावेज संबंधित समूहों और जांच के लिए उपलब्ध क्यों नहीं हैं?
इसी तरह दो लाइन बसेरों के संचालन से संबंधित शिकायतें यदि बाजार विभाग में लंबित हैं, तो उनका परीक्षण किए बिना उसी संस्था के पूर्व अनुभव को नई निविदा में कितना और किस आधार पर महत्व दिया गया—यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
निगम आयुक्त लीना कोसाम के सामने अब पूरी फाइल खोलने का सवाल
दुर्ग नगर निगम की आयुक्त IAS लीना कोसाम के समक्ष अब इस मामले में केवल हालिया निविदा की जांच पर्याप्त नहीं होगी। निष्पक्ष जांच के लिए पिछले तीन वर्षों की पूरी प्रक्रिया, सभी निविदा/कार्यादेश, विस्तार आदेश, भुगतान, शिकायतें, निरीक्षण रिपोर्ट, अनुभव प्रमाणपत्र, कर्मचारी व्यवस्था और आश्रयार्थियों के रजिस्टर को एक साथ देखा जाना चाहिए।
साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि बाजार विभाग के अधिकारी अभ्युदय मिश्रा ने हालिया निविदा में पांच वर्ष के अनुभव को स्वीकार करने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज स्वयं जांचे और NULM स्तर पर अपर्णा क्षत्रिय द्वारा किस प्रकार का सत्यापन किया गया।
यदि अधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया है तो दस्तावेज उन्हें सही साबित करेंगे। यदि प्रक्रिया में कमी रही है तो वही रिकॉर्ड जिम्मेदारी तय करने का आधार बन सकता है।
आश्रय स्थल गरीब और बेघर लोगों के लिए है। इसलिए उसकी निविदा और संचालन में सबसे महत्वपूर्ण कसौटी किसी समूह का नाम या अनुभव प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि पारदर्शिता, पात्रता, वास्तविक सेवा और सार्वजनिक धन का जवाबदेह उपयोग होना चाहिए।
अब दुर्ग नगर निगम प्रशासन के सामने मूल प्रश्न यही है—
तीन साल से निविदा की जानकारी मांगने वाले महिला समूहों को जवाब क्यों नहीं मिला, बिना स्पष्ट निविदा प्रक्रिया के कार्य जारी रखने का आधार क्या था और लंबित शिकायतों के बीच ‘पांच साल के अनुभव’ को किस स्तर पर सत्यापित किया गया?
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की पहली आधिकारिक राज्य स्तरीय छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) के पहले सीजन के लिए दो दिवसीय चयन ट्रायल सोमवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, रायपुर के पिच-1 पर शुरू हुआ। ट्रायल के लिए पंजीकृत 373 खिलाड़ियों में से 223 खिलाड़ी पहले दिन मैदान पर उतरे और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने ट्रायल स्थल पहुंचकर खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हॉकी की जड़ें गहरी हैं और मैदान पर खिलाड़ियों का उत्साह इसका प्रमाण है। सीएचएल का उद्देश्य युवा खिलाड़ियों को ऐसा मंच देना है, जहां उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनुभव मिले।
छह टीमों के लिए होगा चयन
खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा लीग की छह टीमों के खिलाड़ियों के चयन के लिए ट्रायल आयोजित किया गया है। चयन प्रक्रिया छत्तीसगढ़ हॉकी संघ द्वारा निर्धारित नियमों और मापदंडों के अनुसार खेल अधिकारियों, विशेषज्ञों, हॉकी संघ तथा वरिष्ठ खिलाड़ियों के पैनल की निगरानी में संचालित हो रही है।
पैनल में खेल अधिकारी दीनू प्रसाद पटेल, वरिष्ठ प्रशिक्षक रश्मि संध्या एक्का और राकेश टोप्पो, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मृणाल चौबे, अनुराग श्रीवास्तव तथा वरिष्ठ खिलाड़ी अमिताभ मानिकपुरी शामिल हैं।
29 सितंबर को सुबह 9 बजे से ट्रायल जारी रहेगा। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित खिलाड़ियों की सूची और प्रतिवेदन खेल संचालनालय को सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर छह टीमों का गठन होगा।
21 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होगा पहला सीजन
छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का पहला सीजन 21 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, रायपुर में होगा। इसमें राजधानी रॉयल्स, चित्रकोट चैलेंजर्स, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स, चक्रधर चैंपियंस, न्यायधानी नाइट्स और मैनपाट टाइटन्स छह फ्रेंचाइजी टीमें खिताब के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी।
प्रत्येक टीम में 22 खिलाड़ी होंगे, जिनमें छत्तीसगढ़ के 18 और राज्य के बाहर के चार राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल होंगे। लीग का उद्देश्य राज्य के हॉकी इकोसिस्टम को मजबूत करना, उभरती प्रतिभाओं को प्रतिस्पर्धी अनुभव देना और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके लिए अवसर बढ़ाना है।
“चलो रे संगी, हॉकी खेलबो” टैगलाइन के साथ आयोजित यह लीग छत्तीसगढ़ में हॉकी के प्रति बढ़ती रुचि और क्षेत्रीय खेल प्रतिभाओं को बड़े मंच से जोड़ने की पहल के रूप में सामने आई है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
