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दैनिक शौर्यपथ महासमुंद जिला ब्यूरो संतराम कुर्रे
महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत बुंदेली गंगा इंग्लिश स्कूल में डायरेक्टर प्रेम नायक स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का अनूठा माहौल देखने को मिला। ग्राम पंचायत बुंदेली स्थित गंगा इंग्लिश स्कूल के नन्हे स्कूली बच्चों, गंगा इंग्लिश स्कूल के डायरेक्टर प्रेम नायक अध्यक्षता कर रहे विमल दास महंत शिक्षकों और ग्रामीणों ने मिलकर हर घर तिरंगा यात्रा निकाली। हाथों में तिरंगा लेकर निकले नन्हे बच्चों के उत्साह ने पूरे क्षेत्र में देशभक्ति की भावना जगा दी।
हर घर तिरंगा अभियान के तहत निकाली गई इस यात्रा में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों के साथ शिक्षक और ग्रामीण शामिल हुए। यात्रा के दौरान बच्चों ने एक साथ देशभक्ति गीत “हर घर तिरंगा” का सामूहिक गायन किया। बच्चों की सुरीली और मासूम आवाज में गूंजता देशभक्ति गीत पूरे बुंदेली पंचायत सहित क्षेत्र में सुनाई देने लगा। बच्चों के उत्साह और जोश को देखकर ग्रामीण भी उनके साथ कदम से कदम मिलाते नजर आए।
*नन्हे कदमों ने दिया एकता और देशप्रेम का संदेश*
बच्चों ने तिरंगा हाथों में लेकर लोगों को हर घर तिरंगा अभियान का संदेश दिया। छोटे-छोटे बच्चों में देश के राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति का जज्बा देखते ही बन रहा था। बच्चों के चेहरे पर उत्साह और हाथों में लहराता तिरंगा पूरे आयोजन को खास बना रहा था।
इस कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे विमल दास महंत शिक्षकों ने बच्चों को राष्ट्रीय ध्वज के महत्व और स्वतंत्रता दिवस के गौरव के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि तिरंगा केवल देश की पहचान ही नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। बच्चों में बचपन से ही देशप्रेम और राष्ट्रीय भावना विकसित करने के उद्देश्य से इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण हैं।
*ग्रामीणों ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह*
हर घर तिरंगा यात्रा में ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, लोगों में भी देशभक्ति का उत्साह देखने को मिला। बच्चों के सामूहिक गीत और हाथों में लहराते तिरंगे ने पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि गांव के नन्हे बच्चों द्वारा जिस उत्साह के साथ हर घर तिरंगा यात्रा में भाग लिया गया, वह सराहनीय है। बच्चों की भागीदारी से अभियान को नई ऊर्जा मिली और लोगों को भी अपने घरों में तिरंगा फहराने के लिए प्रेरणा मिली
शासन द्वारा चलाए जा रहे हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने के लिए बुंदेली के नन्हे बच्चों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों के मार्गदर्शन और ग्रामीणों के सहयोग से निकली इस यात्रा ने ग्रामीण क्षेत्र में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति का संदेश पहुंचाया।
गंगा इंग्लिश स्कूल बुंदेली प्राथमिक शाला के बच्चों की इस पहल की ग्रामीणों ने सराहना की। नन्हे बच्चों की आवाज में गूंजता “हर घर तिरंगा” गीत और हाथों में लहराता राष्ट्रीय ध्वज लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। भांसी पंचायत और बंगली कैम्प में निकली यह यात्रा बच्चों की देशभक्ति और सामूहिक सहभागिता की एक खूबसूरत मिसाल बन गई।
पानी की टंकी में गंदगी का अंबार, सांकरा के स्कूली बच्चे दूषित पानी पीने मजबूर
गंदे पानी की टंकी से प्यास बुझा रहे सांकरा हाईस्कूल के विद्यार्थी, जिम्मेदारों की अनदेखी पर उठे सवाल
Report by Tharun Nishad
धमतरी- नगरी ब्लॉक के शासकीय हाईस्कूल सांकरा में विद्यार्थियों को साफ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विद्यालय में पीने के पानी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टंकी कई दिनों से साफ नहीं किए जाने के कारण उसमें गंदगी और तलछट जमा होने की बात सामने आई है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को इसी टंकी के पानी का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
एनएसयूआई कार्यकर्ता भावेश चंदनिया ने विद्यालय की पेयजल व्यवस्था को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं हुई है और उसमें गंदगी स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना विद्यालय की मूलभूत जिम्मेदारी है। नागरिक होने के नाते बच्चों की समस्याओं को सामने लाना उनका दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य राजनीति करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं में सुधार सुनिश्चित करना है।
चंदनिया ने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों पर विद्यालय स्तर से अनावश्यक दबाव भी बनाया जाता है और उन्हें अपनी समस्याएं बाहरी लोगों के सामने नहीं रखने की बात कही जाती है। यदि विद्यार्थियों को अपनी मूलभूत समस्याएं बताने से रोका जा रहा है तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने मांग की कि विद्यालय की पानी टंकी की तत्काल सफाई कराकर पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए तथा विद्यार्थियों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने बताया कि दो दिन पहले कलेक्टर अविनाश मिश्रा के नगरी-सिहावा वनांचल क्षेत्र के दौरे के दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने उन्हें सांकरा हाईस्कूल की इस समस्या से अवगत कराया था। इसके बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विद्यार्थियों के स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में अब शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन से त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है। बच्चों को स्वच्छ पानी देना सुविधा नहीं, उनकी बुनियादी जरूरत है। ऐसे में गंदे पानी की टंकी की तत्काल सफाई और नियमित रखरखाव की व्यवस्था जरूरी है।
कोंडागांव, छत्तीसगढ़ |
छत्तीसगढ़ की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक संपदा और हरियाली से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध लोक-संस्कृति, पारम्परिक कला, लोकगीत, लोकनृत्य, स्थानीय बोलियों, साहित्य और कृषि परम्पराओं से भी है। विशेष रूप से बस्तर अंचल की सांस्कृतिक विरासत अपने आप में एक जीवंत इतिहास है, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारे लोक कलाकारों, साहित्यकारों, शिल्पकारों और समाज ने अपने जीवन और सृजन के माध्यम से संजोकर रखा है।
इसी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित, संवर्धित और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से कोंडागांव जिले में “बस्तर सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं कला परिषद” का गठन किया गया। स्थानीय कलाकारों एवं संस्कृति प्रेमियों की सर्वसम्मत सहमति से श्री गोकुल वैद्य को परिषद का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। परिषद का यह प्रयास बस्तर की लोक परम्पराओं, स्थानीय भाषाओं-बोलियों, साहित्य, कला और कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
इसी सांस्कृतिक संकल्प को आगे बढ़ाते हुए बस्तर सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं कला परिषद, कोंडागांव द्वारा दिनांक 16 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़-बस्तर की माटी, संस्कृति, लोककला एवं कृषि परम्परा से जुड़े हमारे गौरवशाली हरेली (अमुस) तिहार के पावन अवसर पर “हरेली महोत्सव 2026” का भव्य आयोजन किया गया।
हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि किसान, खेत, प्रकृति, पशुधन, कृषि औजार और धरती माता के प्रति हमारी कृतज्ञता का लोकपर्व है। इस अवसर पर आयोजित महोत्सव ने बस्तर की माटी में रची-बसी परम्पराओं को मंच पर जीवंत कर दिया।
? अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
हरेली महोत्सव 2026 में मुख्य अतिथि माननीया सुश्री लता उसेंडी, विधायक कोंडागांव एवं उपाध्यक्ष, बस्तर विकास प्राधिकरण, माननीया सुश्री मोना सेन, अध्यक्ष, राज्य फिल्म विकास निगम, छत्तीसगढ़ शासन तथा माननीया श्रीमती शालिनी राजपूत, अध्यक्ष, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, छत्तीसगढ़ शासन की गरिमामयी उपस्थिति रही।
वहीं विशिष्ट अतिथियों के रूप में छत्तीसगढ़ एवं बस्तर की कला-संस्कृति के गौरव—
पद्मश्री श्री पंडी राम मंडावी — काष्ठ शिल्पकार एवं जनजातीय वाद्य यंत्र विशेषज्ञ,
पद्मश्री श्रीमती ऊषा वारले — पंडवानी गायिका,
पद्मश्री श्री अजय कुमार मंडावी — काष्ठ शिल्पकार,
माननीय श्री राजेन्द्र बघेल — राष्ट्रपति पुरस्कृत अंतर्राष्ट्रीय बेलमेटल शिल्पकार,
श्री पंचुराम सागर — राष्ट्रपति पुरस्कृत अंतर्राष्ट्रीय बेलमेटल शिल्पकार,
श्री तीजु राम विश्वकर्मा — राष्ट्रपति पुरस्कृत अंतर्राष्ट्रीय लौह शिल्पकार,
श्री अविनाश प्रसाद — फिल्म निर्देशक,
श्री राकेश यादव — फिल्म अभिनेता,
श्री नरपती पटेल — अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, कोंडागांव,
तथा श्री जशकेतु उसेंडी — उपाध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, कोंडागांव
की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और अधिक बढ़ाया।
? मंच पर साकार हुई बस्तर की आत्मा
हरेली महोत्सव में छत्तीसगढ़ और बस्तर की लोक-संस्कृति का ऐसा मनोहारी रंग देखने को मिला, जिसमें लोकगीतों की मिठास, लोकनृत्यों की थिरकन, पारम्परिक वाद्य यंत्रों की गूंज और जनजातीय परम्पराओं की जीवंतता एक साथ दिखाई दी।
मंच पर प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के माध्यम से बस्तर की उस सांस्कृतिक आत्मा को अभिव्यक्त किया, जो सदियों से जल, जंगल, जमीन, प्रकृति और सामुदायिक जीवन के साथ जुड़ी हुई है।
पारम्परिक वेशभूषा में सजे कलाकार, लोकवाद्यों की धुन पर थिरकते कदम, जनजातीय नृत्य की ऊर्जा और लोकगीतों की स्वर-लहरियाँ पूरे वातावरण को बस्तर की माटी की सुगंध से भर रही थीं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बस्तर की संस्कृति स्वयं मंच पर उतरकर अपनी कहानी सुना रही हो।
? कलाकारों का सम्मान — हमारी संस्कृति का सम्मान
इस महोत्सव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक रहा हमारे उन लोक कलाकारों, शिल्पकारों और संस्कृति साधकों का सम्मान, जिन्होंने अपना जीवन छत्तीसगढ़ की पारम्परिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत को समर्पित किया है।
काष्ठ शिल्प, बेलमेटल शिल्प, लौह शिल्प, जनजातीय वाद्य यंत्र, पंडवानी, लोकनृत्य और लोकसंगीत जैसे क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले कलाकारों का सम्मान वास्तव में केवल व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उनकी कला, उनकी परम्परा और बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता का सम्मान है।
समारोह के दौरान सम्मान एवं स्मृति-चिह्न प्रदान किए जाने के अनेक भावुक और गौरवपूर्ण क्षण कैमरे में कैद हुए। ये तस्वीरें आने वाले समय में इस बात की साक्षी रहेंगी कि कोंडागांव ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को केवल याद नहीं किया, बल्कि उसे सम्मान के साथ मंच भी दिया।
? संस्कृति तभी जीवित रहती है, जब नई पीढ़ी उससे जुड़ती है
आज आधुनिकता और तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश के बीच स्थानीय बोलियों, पारम्परिक कलाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों और मौखिक साहित्य के संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
बस्तर सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं कला परिषद का प्रयास इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें, अपने लोक कलाकारों को सम्मान दें, स्थानीय भाषाओं और बोलियों को बचाएँ तथा बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ें।
क्योंकि संस्कृति केवल संग्रहालयों में रखी कोई वस्तु नहीं है।
संस्कृति हमारी पहचान है।
संस्कृति हमारी स्मृति है।
संस्कृति हमारी जड़ों की आवाज है।
और संस्कृति ही आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सबसे अनमोल विरासत है।
? हरेली महोत्सव का संदेश
हरेली महोत्सव 2026 ने यह संदेश दिया कि कृषि और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। खेतों में अन्न उगाने वाला किसान हो या अपनी कला से बस्तर की पहचान बनाने वाला कलाकार—दोनों हमारी धरती और हमारी परम्परा के सच्चे संवाहक हैं।
कोंडागांव की धरती पर आयोजित यह आयोजन निश्चित रूप से केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की अस्मिता, गौरवशाली परम्पराओं और लोकजीवन को संरक्षित करने का एक सांस्कृतिक संकल्प था।
आज जब हम इन तस्वीरों को देखते हैं तो इनमें केवल मंच, कलाकार और सम्मान समारोह दिखाई नहीं देते, बल्कि इनके पीछे बस्तर की सदियों पुरानी संस्कृति, लोकजीवन की सरलता, कलाकारों का समर्पण और अपनी पहचान को बचाए रखने का संकल्प दिखाई देता है।
“हमारी संस्कृति • हमारी पहचान • हमारा अभिमान”
हरेली महोत्सव 2026 की ये स्मृतियाँ कोंडागांव और बस्तर की उस जीवंत सांस्कृतिक यात्रा की अमिट तस्वीरें हैं, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बस्तर की माटी को नमन।
लोक कलाकारों को नमन।
हमारी संस्कृति और परम्पराओं को नमन।
हरेली तिहार की हार्दिक शुभकामनाएँ। ??
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि, प्रख्यात फिल्मकार डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी होंगे मुख्य वक्ता
विभाजन की त्रासदी, विस्थापन और संघर्ष की स्मृतियों को किया जाएगा साझा, विशेष प्रदर्शनी भी होगी आयोजित
रायपुर / भारत विभाजन की विभीषिका में असंख्य परिवारों द्वारा झेली गई पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष को स्मरण करने तथा नई पीढ़ी को इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय से परिचित कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। राजधानी रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, संचालनालय पुरातत्व परिसर, लोकभवन के पास, सिविल लाइन्स में दोपहर 12:30 बजे आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय होंगे।
समारोह की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल करेंगे। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। प्रख्यात फिल्मकार एवं अभिनेता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी समारोह के मुख्य वक्ता होंगे।
विभाजन की पीड़ा और मानवीय संघर्ष पर होगा विमर्श
‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के राज्य स्तरीय आयोजन में वर्ष 1947 के भारत विभाजन के दौरान लाखों लोगों द्वारा झेले गए विस्थापन, पीड़ा और संघर्ष की स्मृतियों को साझा किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास की एक घटना के रूप में नहीं, बल्कि उससे प्रभावित परिवारों के संघर्ष, साहस और नए सिरे से जीवन खड़ा करने की अदम्य जिजीविषा के रूप में भी नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करना है।
इस अवसर पर विभाजन की विभीषिका और उस दौर की परिस्थितियों पर केंद्रित विशेष प्रदर्शनी एवं स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विभाजन से प्रभावित सिंधी, पंजाबी और बंगाली समाज के प्रतिनिधि वक्ता अपने परिवारों एवं समाज से जुड़ी स्मृतियों और अनुभवों को साझा करेंगे। कार्यक्रम में स्कूल एवं कॉलेज के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे, जिससे वे इतिहास के इस अध्याय और विभाजन की मानवीय पीड़ा को निकटता से समझ सकें।
समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी भारतीय इतिहास, संस्कृति और साहित्य को सिनेमा तथा टेलीविजन के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए विख्यात हैं। लोकप्रिय धारावाहिक ‘चाणक्य’ से देशभर में विशिष्ट पहचान बनाने वाले डॉ. द्विवेदी ने भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित चर्चित फिल्म ‘पिंजर’ का निर्देशन भी किया है। वे समारोह में विभाजन की ऐतिहासिक-सामाजिक पृष्ठभूमि, उसकी मानवीय त्रासदी और उससे जुड़ी स्मृतियों पर अपने विचार रखेंगे।
कार्यक्रम में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति श्री सच्चिदानंद शुक्ल भी अपने विचार व्यक्त करेंगे। आयोजन में प्रबुद्ध नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों तथा मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति रहेगी।
इन विशिष्ट अतिथियों की रहेगी गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ के पीठाधीश्वर पूज्य डॉ. युधिष्ठिर लाल महाराज, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री राजेश मूणत, श्री सुनील सोनी, श्री मोतीलाल साहू, श्री पुरंदर मिश्रा एवं श्री अनुज शर्मा, रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन कुमार अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री यशवंत जैन सहित संस्कृति परिषद के सदस्य, शिक्षाविद् एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे।
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह राज्य स्तरीय समारोह विभाजन की त्रासदी में अपना सर्वस्व गंवाने वाले और विस्थापन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले लाखों लोगों की स्मृतियों को नमन करने के साथ ही समाज में एकता, सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं के मूल्यों को सुदृढ़ करने का अवसर होगा।
इंटर्न्स एवं आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा के मध्य मांगों को लेकर सकारात्मक चर्चा
रायपुर, /
आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री रितेश अग्रवाल की अध्यक्षता में आईएमए प्रतिनिधियों और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न्स के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य इंटर्न्स की समस्याओं पर चर्चा कर उनका समाधान निकालना था।
स्टाइपेंड बढ़ाने की माँग
बैठक के दौरान इंटर्न्स ने अपनी प्रमुख माँग रखते हुए स्टाइपेंड बढ़ाने की बात कही। इस पर विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया कि छात्र हित में सरकार द्वारा हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं और इंटर्न्स की स्टाइपेंड संबंधी माँग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
हॉस्टल निर्माण को मंजूरी
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में प्रायः सभी मेडिकल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं, जो छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।
स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित न करने की अपील
बैठक के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों से अपील की गई कि स्वास्थ्य सेवाएँ सीधे तौर पर जनहित से जुड़ी होती हैं, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी परिस्थिति में सेवाएँ प्रभावित न हों।
बैठक में IMA-MSN Chhattisgarh के संयोजक श्री शाहदिल ख़ुसरू ने कहा कि आज की यह बैठक समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल साबित हुई है। दोनों पक्षों ने सकारात्मक वातावरण में चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की और बैठक का समापन भी सकारात्मक माहौल में हुआ। उन्होंने कहा कि
हमें उम्मीद है कि प्रशासन और इंटर्न्स, दोनों की ओर से इसी प्रकार संवाद और सहयोग की भावना बनी रहेगी तथा इस समस्या का जल्द ही संतोषजनक समाधान निकलेगा।
बैठक में पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर (PT. JNM Raipur), छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर (CIMS Bilaspur), शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, राजनांदगांव (GMC Rajnandgaon), शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कांकेर (GMC Kanker) एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर (GMC Ambikapur) के इंटर्न्स उपस्थित रहे।
रायपुर /
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की कार्य शैली और नियम आधारित टेंडर प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है। अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें CGMSC पर 1 लाख का जुर्माना (हर्जाना) लगाया गया था। इस फैसले से साफ हो गया है कि कंपनी की टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी और नियमों के हिसाब से थी।
पूरा मामला यह था कि टेंडर से जुड़े एक मामले में एक ठेकेदार ने हाईकोर्ट में शिकायत की थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने CGMSC पर 1 लाख का जुर्माना लगा दिया था। इसके खिलाफ CGMSC सुप्रीम कोर्ट गया। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई में पाया कि निगम की तरफ से कोई गलती नहीं हुई थी।
अदालत ने माना कि ठेकेदार ने फॉर्म में जो अपनी ऑफिशियल ईमेल आईडी दी थी, उसी पर समय रहते सारी जरूरी जानकारियां और मैसेज भेजे गए थे। ठेकेदार ने खुद तय समय में जवाब नहीं दिया, इसलिए नियमों के तहत ही उसे टेंडर से बाहर किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पूरे मामले में CGMSC का काम बिल्कुल सही था और उस पर लगा 1 लाख का जुर्माना ग़लत है। इस फैसले से साबित हो गया है कि CGMSC अपने सभी टेंडर और खरीदारी में पूरी ईमानदारी और नियमों का पालन करता है। निगम ने कहा है कि वह आगे भी राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ऐसे ही पूरी ईमानदारी के साथ काम करता रहेगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सरगुजा के ग्रामीण अंचलों से शैक्षणिक भ्रमण पर आए मेधावी विद्यार्थियों ने की सौजन्य मुलाकात
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से किया आत्मीय संवाद, कहा - सफलता केवल डॉक्टर-इंजीनियर बनने तक सीमित नहीं, हर क्षेत्र में हैं आगे बढ़ने के अवसर
आईआईएम, ट्रिपल आईटी सहित प्रतिष्ठित संस्थानों का विद्यार्थियों ने किया भ्रमण
रायपुर 6/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज शाम उनके निवास कार्यालय में सरगुजा जिले के ग्रामीण अंचलों से शैक्षणिक भ्रमण पर आए मेधावी छात्र-छात्राओं ने सौजन्य मुलाकात की। अंबिकापुर क्षेत्र के सात शासकीय विद्यालयों के लगभग 50 विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री श्री साय ने आत्मीय संवाद किया और उनके अनुभव, रुचियों तथा भविष्य के सपनों के बारे में जाना। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने और उसे हासिल करने के लिए पूरी लगन, अनुशासन और परिश्रम के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से कहा कि विद्यार्थी जीवन भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण समय है। इस दौर में देखा गया सपना और उसे पूरा करने के लिए किया गया परिश्रम जीवन की दिशा तय करता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए और उन सपनों को साकार करने के लिए पूरे मनोयोग से प्रयास करना चाहिए। कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण से जीवन में कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सफलता का अर्थ केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना नहीं है। आज युवाओं के लिए शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, खेल, तकनीक, प्रशासन, उद्यमिता सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रत्येक विद्यार्थी की अपनी प्रतिभा और रुचि होती है। आवश्यकता इस बात की है कि वह अपनी क्षमता को पहचाने, सही लक्ष्य चुने और पूरी प्रतिबद्धता के साथ उसे हासिल करने में जुट जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रदेश की विभिन्न प्रतिभाओं और उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्तित्वों के प्रेरक प्रसंग भी सुनाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर विस्तार हुआ है। आज छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्तर के अनेक प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित हैं, जहां प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध हों। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण बच्चों के मन में नई जिज्ञासा पैदा करने के साथ उनके सपनों को नया विस्तार देते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल के बच्चों को प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से परिचित कराने और उन्हें भविष्य की संभावनाओं के प्रति जागरूक करने की यह पहल सराहनीय है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने माता-पिता, विद्यालय तथा प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के संपूर्ण जीवन की नींव होता है। जिस प्रकार किसी मजबूत भवन के लिए उसकी नींव मजबूत होना आवश्यक है, उसी प्रकार उज्ज्वल भविष्य के लिए विद्यार्थी जीवन में अनुशासन, परिश्रम और समय का सदुपयोग आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस महत्वपूर्ण समय का उपयोग अपने लक्ष्य को पहचानने, ज्ञान अर्जित करने और व्यक्तित्व निर्माण में करने का आह्वान किया।
शैक्षणिक भ्रमण में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कनकालों, बकिरमा, सुखरी, रामपुर, मेंड्राकला एवं करजी तथा शासकीय सेजेस केशवपुर के छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी), ट्राइबल म्यूजियम और छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग कार्यालय सहित विभिन्न प्रमुख संस्थानों एवं स्थलों का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने इन संस्थानों की शैक्षणिक गतिविधियों, अध्ययन के अवसरों और भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। राजधानी और नवा रायपुर के प्रमुख संस्थानों को नजदीक से देखने का अनुभव विद्यार्थियों के लिए उत्साहवर्धक रहा।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्वविजय सिंह तोमर, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती पायल सिंह तोमर सहित शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
दुर्ग । शौर्यपथ । छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती 2026 को लेकर अभ्यर्थियों की मांगें अब तेज होती नजर आ रही हैं। विज्ञान शिक्षक, जीव विज्ञान व्याख्याता और रसायन विज्ञान व्याख्याता के पदों पर भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को ज्ञापन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन करने और अधिक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों को अवसर देने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्तमान रिक्त पदों, पात्रता शर्तों और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के कारण प्रदेश के हजारों अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं।
विज्ञान शिक्षक के पद बढ़ाने की मांग
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग शिक्षक भर्ती 2026 में विज्ञान शिक्षक के पर्याप्त पद जोड़कर संशोधित भर्ती विज्ञापन जारी करने की की गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि विज्ञान विषय में बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध हैं, ऐसे में पदों की संख्या बढ़ाकर उन्हें रोजगार का अवसर दिया जाना चाहिए।
जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान में भी पद सृजित करने की मांग
अभ्यर्थियों ने जीव विज्ञान व्याख्याता एवं रसायन विज्ञान व्याख्याता के आवश्यक/रिक्त पद सृजित कर भर्ती में शामिल करने की मांग रखी है। उनका तर्क है कि इन विषयों के भी बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी हैं और रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी।
6 सितंबर की CTET परीक्षा देने वालों को भी मिले मौका
ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण मांग 6 सितंबर 2026 को होने वाली CTET परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को भी शिक्षक भर्ती 2026 में आवेदन का अवसर देने की है। अभ्यर्थियों ने कहा है कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में CTET Application Number के लिए अलग कॉलम रखा जाए तथा केवल Roll Number उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी पात्र अभ्यर्थी को अवसर से वंचित न किया जाए।
50 प्रतिशत की अनिवार्यता में 5 प्रतिशत छूट की मांग
अभ्यर्थियों ने स्नातक स्तर पर निर्धारित 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता में 5 प्रतिशत की छूट सभी पात्र अभ्यर्थियों को देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि पात्रता मानदंड में व्यवहारिक और न्यायसंगत संशोधन से बड़ी संख्या में उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष करने की मांग
ज्ञापन में शिक्षक भर्ती की उच्चतम आयु सीमा 40 वर्ष के स्थान पर 45 वर्ष किए जाने की मांग की गई है। साथ ही नियमानुसार मिलने वाली आयु सीमा में छूट को भी लागू करने की बात कही गई है।
स्वामी आत्मानंद स्कूलों में हिंदी-अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को समान अवसर
अभ्यर्थियों ने स्वामी आत्मानंद विद्यालयों की भर्ती में हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों माध्यमों के योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर देने की मांग की है। उनका कहना है कि माध्यम के आधार पर योग्य उम्मीदवारों के अवसर सीमित नहीं किए जाने चाहिए।
‘टकराव नहीं, संवाद और समाधान’ की अपील
ज्ञापन के अंत में अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें किसी टकराव के उद्देश्य से नहीं, बल्कि संवाद, समाधान और न्यायपूर्ण अवसर की अपेक्षा से रखी गई हैं। उन्होंने स्कूल शिक्षा मंत्री से हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती विज्ञापन में आवश्यक संशोधन, अतिरिक्त पदों का समावेश, CTET अभ्यर्थियों को अवसर तथा पात्रता एवं आयु सीमा में राहत मिलने से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अधिक व्यापक और न्यायसंगत बन सकेगी। अब सभी की निगाहें स्कूल शिक्षा विभाग और शासन के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।
शौर्यपथ लेख / 15 अगस्त 2026 को भारतवासी आजादी के 80 वां पर्वोल्लास से सराबोर होंगे।खुले आसमान में लहराते तिरंगा तले जयहिन्द, भारत माता की जय का उद्घोष जनमन को भावविभोर कर देगा। यह विशेष दिवस आत्मविश्लेषण-आत्मचिंतन की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण दिवस होता है। यही वजह है कि देशभर में आजादी के पूर्व और बाद की स्थिति "अतीत से अद्यतन" की चर्चा इस पर्व पर विविध माध्यमों से की जाती है। वीर-वीरांगनाओं के त्याग- समर्पण का स्मरण करके उन्हे शत शत नमन् किया जाता है।
स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास बताता है कि 15 अगस्त 1947 के पहले अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और बढ़ते अत्याचारों के सामने हर हिंदुस्तानी दासत्व में जीने को विवश हो चला था। दिन में भी घटाटोप अंधियारी रात का अहसास होता था। ऐसे दमघोटू माहौल से आक्रोशित देशभक्त हिंदुस्तानियों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंक दिया। 1857 की क्रांति के साथ ही हर ओर भारत छोड़ो का नारा गूंज उठा था। उस दौर में क्रांतिकारियों के हृदय में धधकती ज्वाला को ओजस्वी शब्दों में चित्रित करते हुए कविश्री लिखते हैं उठो जवानों नाम मिटा दो,पापी और शैतान का, दुश्मन की छाती में गाड़ो झण्डा हिन्दुस्तान का।
स्वतंत्र भारत की पवित्र धरा पर खुली हवा में सांस लेते हुए देशवासियों ने आज तक जो कुछ भी अर्जित किया है, वह प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप से तीन सौ वर्षों की गुलामी की पीड़ा सहे वीर पूर्वजों की देन है। फिरंगियों के खिलाफ विद्रोह की मशाल लेकर क्रांति में कूदे, शहीद हुए माँ भारती के सपूतों की कुर्बानी का सुफल है।
इस नाते सदैव नवपीढ़ी को यह स्मरण रखना होगा कि उन्हें विरासत में मिली आजादी की पूंजी खैरात की नहीं है। यह वीर वीरांगनाओं की कठोर तपस्या से तैयार की गई फसल से उपजी पूंजी है। इसकी हिफाजत हर हाल में किसी भी कीमत पर करने के लिए युवा वर्ग को तत्पर रहना होगा।
प्रदेशवासियों के लिए गर्व की बात है कि आजादी की लड़ाई में छत्तीसगढ़ के सपूतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 1824 में ही छत्तीसगढ़ के वीर आदिवासी सपूतों ने फिरंगियों के खिलाफ जंग छेड़ दी थी। आदिवासी सेनानियों की हुंकार से ताकतवर अंग्रेज हुकुमत थरथर कांपती थी।
ऐसे पारंपरिक शौर्य का प्रदर्शन करने वालों में छत्तीसगढ़ महतारी के महावीर बेटो में वीर गेंदसिंह, गुंडापुर, इंदरू केवट, वीरनारायण सिंह, राजा भेरम देव आदि शामिल है। उन दिनों सोना खान के सपूत वीर नारायण सिंह का शौर्य और साहस जनगीत बनकर गुंजता था- परन ठान के,कफन बांध के,भारत माँ के करीन बिचार,गरजिस बधवा बीर नारायण, लिन तलवार निकाल।
स्वराज पथ गामियों में अग्रणीय ऐसे आदिवासी समाज की विशेषताओं को अभिव्यक्त करती हैं ये पंक्तियां- छत्तीसगढ़ के आदिवासी भाईयों के मिजाज लाजवाब है, गणित की किताब में ये रखते गुलाब है।
फिरंगियों के राज को नेस्तनाबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ की वीरांगनाओं ने भी ब्रिटिश हुकूमत की ईंट से ईंट बजा दी थी। रणचंडी की तरह हूंकार भरती रौद्ररुपा डॉ. राधाबाई, रोहणी बाई परगनिहा, केतकी बाई, बेला बाई, फूलकुंवर बाई और मीनाक्षी देवी (मिनीमाता) की राष्ट्रवादी भावना के आगे अंग्रेजों के नापाक ईरादे ताश के पत्तों से बने मीनार की भांति भरभरा कर गिरते-टूटते चले गए थे।
अंततः अंग्रेजों को मां भारती के वीर लाल और ललनाओं के सामने झुकना पड़ा। पराधीनता की बेड़ियों से माँ भारती को मुक्ति मिल गई। मां भारती की आन- बान- शान के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाले शूरवीरों की शहादत की कीमत चुकाना असंभव है। इसे अजर अमर बनाए रखने के लिए महान विभूतियों की तस्वीरें केवल शासकीय कार्यालयों में ही नहीं घर-घर में भी लगनी चाहिए।
स्वतंत्रता सेनानियों ने देशवासियों पर जो उपकार किया है, वह अमूल्य है। अतुल्य है। वे पूज्य है अतः आजादी के पर्व पर एक नया संकल्प लें कि घर घर तिरंगा फहराएंगे। दीवारों पर परिवार के पूज्य सदस्यों की भांति कम से कम एक महान विभूति की तस्वीर लगाएंगे। यह नई पहल आत्मसुख देगी। नई पीढ़ी के मानस पटल पर देशभक्ति का बीजारोपण करने में अवश्य कारगर होगी। शूरवीरों को नमन करते हुए कहें दिल से - यही पूजा सुबह-शाम कर लें, देश के अमर शहीदों को बस प्रणाम कर लें।
विजय मिश्रा 'अमित' अग्रोहा कॉलोनी रायपुर (छग) 492013 मो.9893123310
बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से बिलासपुर जिले के पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बिलासपुर के ग्राम रहंगी (बिल्हा) में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। 100 करोड़ से ज्यादा की यह स्वास्थ्य परियोजना है।
श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी सुलभ
बिलासपुर जिले में लंबे समय से पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के उपचार के लिए ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना की मांग की जा रही थी। श्रमिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया था।
बिलासपुर में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति
श्रम मंत्री श्री देवांगन के प्रयासों को सफलता मिली। 30 जून 2026 को आयोजित ईएसआईसी कॉरपोरेशन की 198 वीं बोर्ड बैठक में बिलासपुर के रहंगी ग्राम में 100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना के लिए 5 एकड़ भूमि की स्वीकृति प्रदान की गई। अस्पताल के स्थापित होने से बिलासपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में ईएसआईसी से जुड़े पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रित परिवारजनों को बेहतर, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इससे श्रमिक परिवारों को उपचार के लिए दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भरता भी कम होगी।
पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का मिलेगा लाभ
श्रमिक हितों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बिलासपुर में ईएसआईसी अस्पताल की स्थापना से जिले के हजारों पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
