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Shouryapath news Bastar। *जगदलपुर --शिव मंदिर वार्ड के पार्षद निर्मल पानीग्राही के द्वारा खाद्य सामग्री पूर्व विधायक संतोष बाफना की मुख्यातिथि में वार्ड के डोंगाघाट में मंगलवार को 200 परिवारों को खाद्यान सामग्री बाटा गया। इस अवसर पर भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेश गुप्ता एवम नेता प्रतिपक्ष संजय पांडे भी उपस्थित थे। पूर्व विधायक संतोष बाफना ने कहा कि कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीन लगाना जरूरी है, सभी वैक्सीन जरूर लगाएं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वैक्सीन के लिए धन्यवाद देता हूं एवं उन महान वैज्ञानिकों को नमन करता हूं जिन्होंने वैक्सीन बनाया। जगदलपुर के भाजपा पार्षदों ने लगातार अपने वार्डो में जरूरतमंद लोगों के बीच जाकर सहयोग प्रदान कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी परिवार हर व्यक्ति की चिंता कर रहा है ।मुझे विश्वास है। कोरोना की इस लड़ाई को हम बहुत जल्द लड़कर जीत हासिल कर लेंगे। नगर अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने कहा हमारे कार्यकर्ता लगातार दिन रात मेहनत करके पूरे 48 वार्डो तक लोगों में जागरूकता के साथ साथ सेवा कार्य में लगे हुए हैं। नेता प्रतिपक्ष संजय पांडे ने कहा कि इस कोरोना काल में वैक्सीन को लेकर कांग्रेस के लोग राजनीति कर रहे है और भाजपा के लोग राहत कार्य में लगे हुए हैं।वार्ड पार्षद निर्मल पाणिग्रही ने कहा कि वार्ड के 700 परिवारों तक राशन पहुंचाने का लक्ष्य मैंने रखा है। कोई भी भूखा ना सोए ,हर जरूरत मंद लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचे।इसकी चिंता मैं कर रहा हूँ। हर व्यक्ति सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, मास्क लगाएं एवं कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीन जरूर लगाएं। कार्यक्रम का संचालन संग्राम सिंह राणा ने किया।इस अवसर पर लक्ष्मण झा,ध्रुनाथ जोशी,पीताम्बर ठाकुर, पंकज आचार्य,अनिल,करुण,धर्मेंद्र,उमेश,राजेश दास,ज्ञाने जोशी सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।*
खेल /शौर्यपथ / इंग्लैंड प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2021 को 29 मैचों के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा है। इस टी20 लीग के बचे हुए 31 मैच कब और कहां खेले जाएंगे, इसको लेकर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया जा सका है। इस बीच आईपीएल फ्रेंचाइजी टीमों के लिए एक बुरी खबर है। इंग्लैंड के खिलाड़ियों का आईपीएल के बचे हुए मैचों में हिस्सा लेना काफी मुश्किल हो सकता है। इंग्लैंड क्रिकेट टीम का जून के बाद शेड्यूल काफी व्यस्त है और अगर आईपीएल के बचे हुए मैच इस साल नए सिरे से आयोजित होते हैं, तो इंग्लैंड के क्रिकेटर नहीं खेल सकेंगे। ईसीबी के क्रिकेट निदेशक एश्ले जाइल्स ने यह जानकारी दी।
आईपीएल बायो बबल में कोरोना पॉजिटिव केस आने के बाद इस टी20 लीग को 4 मई को स्थगित करने का फैसला लिया गया था। अब इसे या तो सितंबर के आखिर में टी20 वर्ल्ड कप से पहले या नवंबर के बीच में आयोजित किया जा सकता है। इंग्लैंड के टॉप क्रिकेटर दोनों समय व्यस्त होंगे। उन्हें सितंबर और अक्टूबर में बांग्लदेश जाना है जबकि टी20 वर्ल्ड कप के ठीक बाद एशेज सीरीज खेली जाएगी।
जाइल्स ने ईएसपीएन क्रिकइन्फो से कहा, 'हमारा एफटीपी शेड्यूल काफी व्यस्त है। पाकिस्तान और बांग्लादेश का दौरा है।' आईपीएल की अलग-अलग टीमों में इंग्लैंड के 11 क्रिकेटर भाग ले रहे हैं। जाइल्स ने कहा ,'हमें नहीं पता कि आईपीएल के बाकी मैचों का शेड्यूल क्या होगा और ये कब और कहां होंगे । इस सीजन में न्यूजीलैंड के खिलाफ मैचों से हमारा शेड्यूल काफी व्यस्त है।' उन्होंने कहा, 'हमें टी20 वर्ल्ड कप और उसके बाद एशेज सीरीज खेलनी है। अपने खिलाड़ियों के कार्यभार का भी ध्यान रखना है।'
मनोरंजन /शौर्यपथ / इन दिनों दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली 'अनुपमाÓ लीड एक्ट्रेस रुपाली गांगुली अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़े एक खुलासे को लेकर खबरों में हैं। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि वह भी बॉडी शेमिंग का शिकार हो चुकी हैं। एक समय उनके लिए ऐसा था जब लोगों ने उनके बढ़े हुए वजन को देखकर उन्हें ओल्ड आंटी कहकर बुलाने लगे थे। यह तब हुआ जब उन्होंने अपने बेटे रुद्रांश को जन्म दिया। उस समय उनका वेट 30 किलो बढ़ गया था।
मनोरंजन न्यूज साइट बॉलीवुड बबल की खास बातचीत में रुपाली ने कहा कि प्रेग्नेंसी के बाद मेरा वजन काफी बढ़ गया। वह आगे कहती हैं,"कभी जब मैं प्रेग्नेंट हुई तो मैं 58 किलो की थी, लेकिन जब मेरा बेटा रुद्रांश हुआ तो मेरा वेट बढ़ गया और मैं 86 किलो की हो गईं। उस समय मैं काफी मोटी दिखती थी।"
आंटी कहकर बुलाने लगे पड़ोसी
रुपाली के अनुसार, जब बेटे के जन्म के बाद वह बाहर टहलने के लिए जाती थीं तब उनके पड़ोसी उन्हें बुढ़ी आंटी कहकर बुलाने लगे। लोग मुझसे कहते अरे तुम तो मोनिशा हो, कितनी मोती हो गई हो ( मोनिशा उनका एक किरदार था) । हालांकि इन बातों का असर उनपर कोई असर नहीं पडऩे दिया। वह कहती हैं कि आज जब भी मैं काम करती हूं उस समय मैं वजन को बीच में नहीं आने देती। मैं सभी चीजों को काफी लाइट और पॉजिटिव लेती हूं। शायद यही वजह है कि लोगों का प्यार मुझ पर से कम नहीं हुआ है।
इस लिए लिया टीवी से ब्रेक
रुपाली आगे कहती हैं कि ये लोग कौन होते जो एक मां को जज करते हैं? किसी को पता नहीं है कि एक महिला किस तरह के मुद्दों से गुजर कर वह एक मां के बनती हैं। वह आगे कहती हैं कि मुझे थायरॉयड की समस्या थी, जिसमें प्रजनन क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा कई स्वास्थ संबंधी तकलीफ थी और मैंने बहुत से डॉक्टरों से सलाह ली। काफी इंतजार के बाद मेरे बेटे का जन्म हुआ इसलिए मेरा बेटा मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।
जानकारी के लिए बता दें कि अनुपमा से पहले रूपाली ने कुछ वर्षों के लिए छोटे पर्दे से ब्रेक लिया था। इस बारें में बताते हुए वह कहती हैं कि उस समय मैं एक माँ बनने के अलावा और कुछ नहीं चाहती थी, इसलिए जब मेरे बेटे का जन्म हुआ तो मैं काम से ब्रेक ले ली।
रुपाली गांगुली टीवी शोज
रुपाली गांगुली इन दिनों स्टार प्लस के शो 'अनुपमाÓ की वजह से सभी दिलों पर छाई हुईं है। आए दिन इस शो में ट्वीस्ट और टर्न से वह लोगों का मनोरंजन कर रही हैं। रुपाली गांगुली इससे पहले टीवी शो परवरिश,कुछ खट्टा कुछ मीठा, साराभाई ङ्कह्य साराभाई-2 में भी नजर आ चुकी हैं।
सेहत /शौर्यपथ / गाय और भैंस का दूध सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। तंदुरुस्ती के लिए इन दोनों पशुओं का दूध दूसरों के मुकाबले अधिक फायदेमंद है। लेकिन बकरी के दूध में भी कई सारे सेहत के राज छिपे हैं। इसके सेवन से कई बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। बकरी के दूध में मौजूद पोषण आपको शारीरिक और मानसिक समस्याओं से निजात दिलाने में सहायक होता है। आइए विस्तार से जानते हैं बकरी के दूध के फायदे -
1.एनीमिया रोकने में मददगार- शरीर में आयरन की कमी होने पर एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है। एनीमिया होने से खून पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने में असफल होता जाता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह ले कर बकरी के दूध का सेवन किया जा सकता है। ताकि एनीमिया जैसी घातक बीमारी में राहत मिल सकें।
2.बालों के लिए फायदेमंद- बालों के स्वास्थ्य के लिए विटामिन ए और विटामिन बी की आवश्यकता होती है। इससे बाल झड़ना बंद हो जाते हैं। बकरी के दूध में दोनों ही विटामिन की मात्रा पाई जाती है। इसके सेवन से बालों का झड़ना कम किया जा सकता है।
3.हड्डियां मजबूत- बकरी के दूध में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे हड्डियां मजबूत होती है। इसलिए बकरी के दूध का सेवन फायदेमंद होता है।
4.ह्दय रोग पीड़ित- दिल की बीमारी होने पर कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ना चाहिए। इस बात का काफी ध्यान रखा जाता है। बकरी के दूध में अधिक मात्रा में फैटी एसिड पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। इससे दिल का आकस्मिक दौरा या स्ट्रोक जैसी बीमारी का खतरा टल जाता है।
5.इम्यूनिटी बूस्टर- बकरी के दूध में सेलेनियम नामक मिनरल्स अधिक पाए जाते हैं। जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। यह दूध एड्स से पीड़ित मरीजों को दिया जाता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो जाती है।
6.प्लेटलेट्स बढ़ाने में सहायक- बकरी के दूध का सेवन चिकनगुनिया, डेंगू जैसी बीमारियों में अधिक किया जाता है। कहा जाता है कि जब शरीर में प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं तो बकरी का दूध देना चाहिए। ताकि खून गाढ़ा नहीं पड़ें। हालांकि ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
7.सूजन कम करने में मददगार- बकरी के दूध में मौजूद एंटी बैक्टीरियल से शरीर में आ रही सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके सेवन से शरीर में हो रही जलन भी कम होने लगती है।
8.वजन कम करता है- वर्तमान में अधिकतर लोग अपनी हेल्थ के प्रति सजग हो रहे हैं। बढ़ते वजन को कम करने के लिए फूड चार्ट में भी बदलाव कर रहे हैं। डाइट में अब बकरी का दूध भी शामिल किया जाने लगा है। इसमें फैटी एसिड मौजूद रहता है। इससे मोटापा नहीं बढ़ता है।
9.त्वचा के लिए बेहतर- बकरी के दूध में पीएच स्तर त्वचा के पीएच स्तर के बराबर पाया जाता है। इसके सेवन से झुर्रियां कम होती है साथ ही चेहरे पर हो रहे दाग -धब्बे भी कम होने लगते हैं।
10.बच्चों को बकरी का दूध- नवजात शिशु के लिए मां का दूध ही सबसे अच्छा होता है लेकिन जब नहीं मिल पाता है तो बकरी का दूध दिया जा सकता है। वह आसानी से पच जाता है। हालांकि बच्चों को बकरी का दूध देने से पहले डॉक्टर से जरूर चर्चा करें।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /कोरोना वायरस से बचाव के लिए हर बेजोड़ कोशिश भी की जा रही है। वैक्सीनेशन अभियान भारत में तेजी से चलाया जा रहा है। इसी के साथ अलग - अलग पद्धति का प्रयोग भी किया जा रहा है ताकि इस बीमारी से लोगों की जान बचाई जा सकें। उन्हीं में से एक है
प्लाज्मा थैरेपी।
संपूर्ण देश में जो कोविड पैशेंट्स ठीक हो गए हैं उनसे प्लाज्मा डोनेट करने के लिए कहा जा रहा है। आखिर ये प्लाज्मा क्या है? कैसे इसे डोनेट किया जा सकता है? कौन इसे डोनेट कर सकता है और कौन नहीं? कब इसे डोनेट किया जा सकता है? आइए जानते हैं प्लाज्मा के बारे में सबकुछ -
प्लाज्मा क्या है?
प्लाज्मा खून में मौजूद तरल पदार्थ होता है। यह पीले रंग का होता है। इसकी मदद से सेल्स और प्रोटीन शरीर के विभिन्न अंगों में खून पहुंचाता है। शरीर में इसकी मात्रा 52 से 62 फीसदी तक होती है। वहीं रेड ब्लड सेल्स 38 से 48 फीसदी तक होता है।
प्लाज्मा थैरेपी क्या होती है?
जो व्यक्ति कोविड-19 से ठीक हो गए है। उनकी बॉडी से खून निकालकर प्लाज्मा को अलग किया जाता है। जिस कोविड पैशेंट की बॉडी से प्लाज्मा लिया जाता है उसके ब्लड में एंटीबाडीज होती है। वह एंटीबाडीज एंटीजन से लड़ने में मदद करती है। यह एंटीबाडीज कोविड संक्रमितों को दी जाती है। डॉ के मुताबिक एक इंसान के प्लाज्मा से दो इंसानों का इलाज किया जा सकता है।
प्लाज्मा कब डोनेट किया जा सकता है?
कोविड से ठीक होने के दो सप्ताह यानि 14 दिन बाद आप रक्त डोनेट कर सकते हैं।
प्लाज्मा कौन डोनेट नहीं कर सकता है?
डायबिटीज, कैंसर, हाइपरटेंशन, किडनी, लिवर के पैशेंट प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकते हैं।
प्लाज्मा से रिएक्शन का खतरा भी रहता है?
इससे एलर्जिक रिएक्शन, सांस लेने में प्रॉब्लम हो सकती है। हालांकि आज की स्थिति में प्लाज्मा से कई लोग ठीक हो रहे हैं। यह समस्या बहुत दुर्लभ स्थिति में हो रही है। इटली में प्लाज्मा थेरेपी से मृत्यदर में गिरावट दर्ज की गई है।
वैक्सीन और प्लाज्मा थेरेपी में क्या अंतर है?
दोनों आपकी बॉडी में एंटीबाडीज पैदा करती है। लेकिन तरीका अलग - अलग है। जी हां, वैक्सीन किसी वायरस को आपकी बॉडी में फैलने से रोकने में मदद करती है। यह आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। इसका परीक्षण कर इसे बनाया जाता है। करीब 1 साल या उससे अधिक समय भी लग जाता है।
प्लाज्मा किसी व्यक्ति के बॉडी में तैयार एंटीबाडीज की मदद से दूसरे की बॉडी में दिया जाता है। इससे कोरोना से ठीक हो चुके एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे व्यक्ति का इलाज किया जाता है।
प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किन - किन देशों में किया जा रहा है?
प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल आज के वक्त में भारत सहित अन्य 20 देशों में भी किया जा रहा है। उनमें - अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन और इटली प्रमुख देश हैं।
खाना खजाना /शौर्यपथ / कोरोना महामारी ने एक बार फिर से पूरी दुनिया को चारदीवारी में कैद करके रख दिया है। लेकिन मौके का फायदा उठाया जाए तो यह समय बहुत उपयोगी हो सकता है। यह वक्त ऐसा है कि बच्चे घर में रहकर कई तरह की रेसिपी सीख सकते हैं।
1. पॉपकॉर्न- बच्चे अलग-अलग तरह के पॉपकॉर्न घर पर बना सकते हैं।
सामग्री- डेढ़ चम्मच तेल, पौन कटोरी मक्की, चीज, पैरी-पैरी मसाला या जीरावन और नमक।
विधि- सबसे पहले गैस पर कुकर रखकर उसमे डेढ़ चम्मच तेल डालें। तेल हल्का सा गर्म होने के बाद उसमें मक्की डाल दें और कुकर पर सिर्फ ढक्कन रख दें। सेफ्टी के लिए आप उसे 2 मिनट पकड़ भी सकते हैं। धीरे-धीरे मक्की फूटने लगेगी। जब सारी मक्की फूट जाएं तब उसे एक बड़े बर्तन में निकालकर गरम-गरम पॉपकॉर्न पर स्वादनुसार नमक डाल लें। इसके बाद आपके पास चीज या पैरी-पैरी मसाला हो तो वह भी डाल सकते हो। मैगी मसाला भी डाल सकते हैं। यह नहीं होने पर जीरावन भी डाल सकते हो। बस देखो आपके पॉपकॉर्न तैयार हो गए।
2. पुलाव
सामग्री- चावल बने हुए, हरी मिर्च, प्याज, स्वीट कॉर्न, अनार के दाने, दाख, काजू और खड़ा मसाला।
विधि- सबसे पहले कड़ाही में ढाई चम्मच तेल रखें, उसे हल्का सा गर्म होने दें। इसके बाद उसमें हींग, थोड़ी राई और जीरा डालें। इसके बाद बारीक कटे हुए प्याज, स्वीट कॉर्न, शिमला मिर्च, हरी मिर्च और खड़ा मसाला डाल दीजिए। सब्जी हल्की सी बफ जाने के बाद उसमें हल्दी डाल दें। सब अच्छे से मिक्स कर लें। आखिरी में चावल डाल दें। आपका पुलाव तैयार है।
3. सैंडविच
सामग्री- ब्रेड, सेंव, टोमेटो सॉस, हरी चटनी, गोल कटे हुए प्याज, बटर और चीज
विधि- सबसे पहले ब्रेड पर हरी चटनी लगाएं। उस पर हल्का-सा टॉमेटो सॉस लगाएं। फिर गोल प्याज के टुकड़े रखें, सेंव डाले और चीज बारीक करके डाल दें। दूसरी ब्रेड पर आप सिर्फ हरी चटनी लगाएं। इससे ब्रेड फीकी नहीं लगेगी। इसके बाद तवा गरम कर उस पर हल्का सा बटर डाल दें और ब्रेड रखकर सेक लें। जब तक सैंडविच दोनों तरफ से हल्का सा कड़क नहीं हो जाता है तब तक उसे सेंकते रहें। अब गरमा-गरम आपका सेंव प्याज सैंडविच तैयार है।
4. रोटी पोहा
सामग्री- बासी रोटी, बारीक प्याज, 1 हरी मिर्च, नमक, चीनी, तेल
विधि- सबसे पहले रोटी को अच्छा बारीक कर लें। इसके बाद उसमें पहले ही नमक और चीनी स्वादानुसार मिक्स कर लें। एक कड़ाही में 2 चम्मच तेल रखें। हल्का सा गरम होने पर थोड़ी सी राई, हल्दी, हरी मिर्च और प्याज डाल दें। प्याज हल्के से पकने के बाद रोटी का चूरा डाल दें। ध्यान रहे ज्यादा देर तक गैस पर नहीं पकाएं। इससे वह कड़क हो जाएंगे। गैस बंद करने से पहले उसमें थोड़ा सा पानी का छिड़काव कर दें। ताकि वह नरम रहें। इसके बाद आप इसे हरा धनिया, सेंव और नींबू डालकर खा सकते हैं।
5. भजिए
जी हां, कभी भी भूख लगने पर आप एक साथ कई वैरायटी के भजिए बना सकते हैं। आलू, प्याज, आम, केले। सभी को बनाने की विधि एक ही है। एक ही जैसा बेसन का घोल बनेगा।
सामग्री- 1 कटोरी बेसन, 1 कटोरी पानी, आलू, प्याज, आम और केले के छोटे-छोटे पीसेस तैयार करके रख लें। लाल मिर्च, नमक, जीरा, हरी मिर्च, हींग, तेल।
विधि- सबसे पहले बेसन को घोल लें। ध्यान रहे बेसन पतला नहीं हो। इसके बाद उसमें 1 चम्मच लाल मिर्च, स्वादनुसार नमक, थोड़ा सा जीरा, बारीक हरी मिर्च, आखिरी में थोड़ा-सा तेल भी मिक्स करें।। सभी को अच्छे से मिक्स कर लें। इसके बाद कड़ाही रखकर उसमें तेल डाल लें। गर्म होने पर एक-एक कर सभी तरह के भजिए बना लीजिए।
आस्था /शौर्यपथ / इस साल अक्षय तृतीया 14 मई 2021 को है। अक्षय तृतीया को सर्वसिद्ध मुहूर्त माना गया है। जिस तरह दीपावली के दिन लक्ष्मी की कृपा प्राप्त की जा सकती है उसी तरह अक्षय तृतीया को भी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए उपाय किए जा सकते हैं...
अक्षय तृतीया पर बना है धन योग का संयोग
अक्षय तृतीया पर चंद्रमा का शुक्र के साथ शुक्रवार को वृष राशि में गोचर, धन, समृद्धि और निवेश के लिए बहुत ही शुभ फलदायी है। अक्षय तृतीया पर चंद्रमा संध्या काल में मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। मिथुन राशि में इस समय मंगल का संचार हो रहा है। ऐसे में चंद्रमा के मिथुन राशि में आने से यहां धन योग का निर्माण होगा।
लॉक डाउन के कारण अगर आप सोना नहीं खरीद सकते हैं तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आप मात्र 5 रुपए की चीज घर में रखकर भी शुभता प्राप्त कर सकते हैं।
1। मिट्टी का दीपक : मिट्टी की महत्ता सोने के बराबर है। अगर सोने की खरीदी न कर सके तो मिट्टी का कोई भी पात्र या मिट्टी का एक छोटा दीपक भी अक्षय तृतीया के दिन घर में शुभता ला सकता है।
2। मौसमी फल : अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में मौसम के रसीले फल रखना भी शुभ होता है। आप कम से कम कीमत में अच्छे फल रख सकते हैं।
3। कपास : अक्षय तृतीया पर 5 रुपए की कपास यानी रुई भी रखी जा सकती है।
4। नमक : अक्षय तृतीया पर सेंधा नमक घर में रखना शुभ माना जाता है। लेकिन इस नमक का सेवन कतई न करें।
5। पीली सरसो : मुट्ठी भर पीली सरसो रखने से मां लक्ष्मी का आशीष मिलता है।
लॉक डाउन के कारण खरीदी सम्भव नहीं है तो घर में रखी सामग्री को शुद्धकर प्रयोग कर सकते हैं.....
अक्षय तृतीया शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि का आरंभ: 14 मई 2021 को प्रात: 05 बजकर 38 मिनट से।
तृतीया तिथि का समापन: 15 मई 2021 को प्रात: 07 बजकर 59 मिनट तक।
अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त: प्रात: 05 बजकर 38 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक
अवधि: 06 घंटा 40 मिनट
धर्म संसार / शौर्यपथ /अमावस्या के दिन चन्द्र नहीं दिखाई देता अर्थात जिसका क्षय और उदय नहीं होता है उसे अमावस्या कहा गया है, तब इसे 'कुहू अमावस्या' भी कहा जाता है। अमावस्या सूर्य और चन्द्र के मिलन का काल है। इस दिन दोनों ही एक ही राशि में रहते हैं। इस बार अमावस्या वैशाख अमावस्या की तिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 11 मई 2021 को मंगलवार के दिन है। मंगलवार होने के कारण इसे भौम अमावस्या या भौमवती अमावस्या भी कहते हैं। भौमवती अमावस्या तिथि 10 मई की रात 09 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ हो जाएगी जो 12 मई को 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में हनुमानजी की पूजा का महत्व बढ़ जाता है।
अमावस्या की प्रकृति : अमावस्या के दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय और उन्मुक्त रहते हैं। ऐसे दिन की प्रकृति को जानकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं।
ज्योतिष में चन्द्र को मन का देवता माना गया है। अमावस्या के दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसे में जो लोग अति भावुक होते हैं, उन पर इस बात का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। लड़कियां मन से बहुत ही भावुक होती हैं। इस दिन चन्द्रमा नहीं दिखाई देता तो ऐसे में हमारे शरीर में हलचल अधिक बढ़ जाती है। जो व्यक्ति नकारात्मक सोच वाला होता है उसे नकारात्मक शक्ति अपने प्रभाव में ले लेती है।
हनुमान पूजा :
1. अमावस्या के दिन विशेष रूप से हनुमानजी की पूजा या उनका पाठ करने से व्यक्ति नकारात्मक विचार और शक्तियों से बच जाता है। इसके लिए हनुमान चालीसा पढ़ें, बजरंग बाण बढ़ें या सुंदरकाण्ड पढ़ें। हनुमानजी की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और साफ आसन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। आप चाहें तो श्रीराम दूताय नम: मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
2. मंगल दोष से मुक्ति के लिए इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाएं, गुड़ और चने का प्रसाद बांटें, चमेली के तेल और सिंदूर से अभिषेक करें। हनुमान मंत्र का जाप करें।
3. हनुमानजी को पान का बीड़ा अर्पित करें और अपनी मनोकामना उन्हें बताएं। भय से मुक्ति हेतु इस दिन निरंत हनुमानजी के 12 नामों का जप करते रहें।
भौमवती अमावस्या के दिन तांबे का त्रिकोण मंगल यंत्र घर में स्थापित करके नित्य इसकी पूजा कर मंगल स्तोत्र का पाठ करें। यंत्र पर लाल चंदन का तिलक करें। इससे आपको धनलाभ प्राप्त होगा। भौमवती अमावस्या के दिन श्रीयंत्र की विधिवत पूजा करें और श्रीसूक्त का पाठ करें। यह उपाय करने से भी आपकी आर्थिक संकट दूर होगा और आपको धन लाभ मिलेगा।
शौर्यपथ लेख / 3 अप्रैल 2021 एक ऐसा दिन जब नक्सलियों के कायराना हमले में हमारे 22 जांबाज भाई शहीद हो गए। इस दुखद घटना से मेरे जेहन में अपने दंतेवाड़ा और सुकमा में बिताए 4 वर्षों की स्मृतियां उभरने लगीं। यहां घटित हर नक्सली घटना के बाद विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों में यही चर्चा होती है कि नक्सलवाद ग्रामीणों के समर्थन पर टिका है और इसी के बूते फलफूल रहा है। मुझे तब लगता है कि सबसे बड़ा दुष्प्रचार ग्रामीणों के लिए यही होगा कि उन्हें नक्सलियों से जोड़ा जाए और उन्हें नक्सलियों का हितैषी माना जाए। यह बात कॉरपोरेट ऑफिस में बैठकर या किसी ऐसी बड़ी घटना होने के बाद एक या 2 दिन घटनास्थल जाकर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गांव में भ्रमण कर नहीं जानी जा सकती, मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि मैंने अपने कार्यकाल के 4 साल 2015 से 19 नक्सल प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा एवं सुकमा में बिताए हैं, जिसमें 3 साल मैंने एसडीओपी दोरनापाल के रूप में जो कि सुकमा जिले में स्थित है कार्य किया है। इस दौरान हमने वहां ग्रामीणों को जोडऩे वाला एक अभियान तेदमुन्ता बस्तर चलाया जिसके तहत हम नक्सल गढ़ कहे जाने वाले सुकमा के अति नक्सल प्रभावित गांव में जाकर ग्रामीणों के साथ बैठक कर उन से निरंतर संवाद स्थापित कर वहां की वास्तविक स्थिति को समझा है। इसलिए मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं कि कोई भी ग्रामीण नक्सलियों का साथ नहीं देना चाहता, क्योंकि वह चाहते ही नहीं कि उनके क्षेत्र में नक्सलवाद रहे। ऐसा कहने के पीछे तार्किक कारण यह है कि तेदमुंता बस्तर अभियान के दौरान जब हम अनेक गांव में जाकर बैठक लेते थे। तब हम वहां उपस्थित ग्रामीणों को पूछते थे कि क्या आप नक्सलवाद का खात्मा चाहते हैं तो वह बोलते थे हां।
फिर हम उन्हें बताते थे कि 3 तरीके से नक्सलवाद को खत्म किया जा सकता है।
पहला शिक्षा जिसमें हम बताते थे कि शिक्षा के माध्यम से नक्सलवाद खत्म किया जा सकता हैं परंतु यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें आने वाली पीढ़ी नक्सलवाद के चंगुल से मुक्त हो जाएगी। दूसरा एकता इसके माध्यम से प्रत्येक गांव नक्सलियों के खिलाफ खड़ा होकर उनसे प्रश्न करेगा कि 40 वर्षों में नक्सलियों ने उन्हें क्या दिया है? और इस प्रकार नक्सलियों का विरोध एक-एक करके सभी गांव वाले करना शुरू करेंगे और इस एकजुटता और एकता के माध्यम से नक्सलवाद खत्म किया जा सकता है।
तीसरा तरीका 1857 की क्रांति जैसा कुछ जिसमें हम कोई दिन निर्धारित करेंगे और इस दिन सभी गांव वाले एक साथ अपने अपने घरों एवम गांव से निकलेंगे, और बड़ी संख्या में उस क्षेत्र की ओर जाएंगे जहां पर नक्सली रहते हैं, और पूरी एक श्रृंखला बनाते हुए हम गांव, जंगल, नदी, पहाड़ पार करते उनको खोजते हुए आगे बढ़ते जाएंगे। हमारे हाथ में जो भी औजार हथियार, डंडा, हँसिया, धनुष आये उसे लेकर चलेंगे, और जो भी नक्सली मिले उसे बोलें या तो आत्मसमर्पण कर दे नहीं तो वह मारा जाएगा। इस प्रकार हम पूरे नक्सली खत्म कर देंगे। तब उनके बीच से कोई पूछता था इसमें पूरे गांव वाले जाएंगे ना ? क्योंकि उन्हें डर था कि कोई एक गांव वाले भी यदि नही जाएंगे तो उनको खतरा हो जाएगा।
तीसरे तरीक़े को सुनने के बाद एक अजीब सी खुशी उनके चेहरे में दिखाई देती थी। जैसे वह यह बोल रहे हो कि काश ऐसा हो पाता जब मैं यहां पूछता कि इन तीनों ही तरीकों में से कौन सा तरीका आप नक्सलवाद के खात्मे के लिए चुनेंगे? तो वह हंसते हुए तीसरे तरीके की ओर इशारा करते, उनके इस संकेतों से यह स्पष्ट था कि वो कितने आतुर हैं कि नक्सलवाद उनके क्षेत्र से समाप्त हो जाए। क्योंकि उन्हें भी पता है कि नक्सलियों ने उन्हें इन 40 सालों में कुछ नहीं दिया ना सड़क ना बिजली ना पानी ना स्वास्थ्य सुविधाएं अगर नक्सली जनता के लिए लड़ रहे हैं तो इन 40 वर्षों में नक्सली जनता को मूलभूत सुविधाए तो दे ही सकते थे। अपितु सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं से भी उन्हें नक्सली मरहूम कर रहे है। नक्सलवाद की जमीनी हकीकत जानने के लिए यह जानना भी आवश्यक है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद आया कैसे ? छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद 1980 के आसपास तेलंगाना क्षेत्र से आए 7 समूहों जो की 7 - 7 सदस्यों के रूप में आए थे, वहां से पनपा। इन लोगों ने कैसे छत्तीसगढ़ को पूरे भारत का नक्सलवाद का केंद्र बना दिया इसके लिए यहां की भौगोलिक सांस्कृतिक एवं पिछड़ेपन की परिस्थिति प्रमुख रही। मेरे विचार से इस क्षेत्र में नक्सल समस्या इसलिए नहीं है क्योंकि ये क्षेत्र विकसित नहीं है या यहाँ विकास नहीं हुआ है 7 बस्तर क्षेत्र के आदिवासी तो पकृति के साथ जीते है , एवं अपनी विकसित संस्कृति के साथ वे खुश थे। उन्हें शहरी मॉल संस्कृति या औद्योगीकरण की चाह नहीं थी , ना ही वे संचयी प्रवित्ति के लोग है वे तो सुबह जंगल जाकर वनोपज संग्रह कर शाम उसे उपभोग करना जैसी अपनी सिमित आवश्कताओं से खुश रहते थे 7 जब नक्सल लीडर इन क्षेत्र में आये तो उन्हें यहाँ के निवासियो का भोलापन तथा निस्वार्थ छबि तथा यहाँ की भौगोलिक स्थिति उपयुक्त लगी , फिर यहाँ के भोले भाले आदिवासियों को बहकाने का उन्होंने खेल खेला 7 इन लीडरो ने उन आदिवासियों को यह विशवास दिला दिया की सरकार या प्रशासन उनके जल , जंगल, जमीन पर अधिकार कर लेगी, और उन्हें यहाँ से बेदखल कर देगी। उन्होंने इस क्षेत्र में चलने एवम् खुलने वाले खनिज खदानों एवम् उनसे होने वाले विस्थापितों का उदाहरण प्रस्तुत किया। साथ ही व्यापारियो द्वारा किये जा रहे शोषण आदि का भी हवाला दिया , और उन्हें धीरे धीरे अपने साथ मिलाना शुरू किया 7 फिर इन खनिज खदानों के कारण होने वाले जमीन अधिग्रहण एवम् विस्थापन का विरोध शुरू हुआ , इन सब पर नियत्रण करने के लिए अधिक से अधिक पुलिस बल को यहाँ स्थापित किया गया 7 इस तरह नक्सलियो को यहाँ अपना विस्तार करने के लिए एक उपयुक्त नींव मिल गयी। इस प्रकार नक्सलियों के द्वारा इस झूठ के दम पर अपना प्रचार करना शुरू कर दिया गया। परंतु ऐसा नहीं था कि उस समय लोगों को यह समझ नहीं आ रहा था कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें यह एहसास हो चुका था कि नक्सली झूठे है और जल, जंगल, जमीन की बात कर वे लोगों को बरगला रहे हैं। ऐसे लोगों ने जब उनका विरोध करना शुरू किया तो नक्सलियों ने अपना असली चेहरा दिखाना शुरू किया। नक्सलियों द्वारा ऐसी पहली राजनीतिक हत्या 1986 में माड़वी जोगा नामक ग्राम पटेल की गई, क्योंकि वह नक्सलियों की हकीकत जान कर उनके विरोध में उठ खड़ा हुआ था। उसके बाद लगातार नक्सलियों द्वारा हत्याओं का सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक अनवरत जारी है। अब मैं फिर से उसी पुराने प्रश्न पर आता हूं क्या ग्रामीण नक्सलियों का समर्थन करते हैं ? इसके जवाब में मैं यहां बताना चाहूंगा कि तेदमुन्ता बस्तर अभियान के दौरान जब मैं विभिन्न गांव में बैठकें लेता तो उस संवाद में हमारा उनसे एक प्रश्न होता था कि इस गांव से कितने ग्रामीणों को की हत्या नक्सलियों द्वारा अभी तक की गई है ? आप विश्वास नहीं करेंगे हमने ऐसा कोई भी गांव नहीं पाया जहां नक्सलियों द्वारा ग्रामीणों की हत्या नहीं की गई हो और कोई कोई गांव उदाहरण दोरनापाल जगरगुंडा रोड से 5 किलोमीटर अंदर दूरी पर स्थित पालामडग़ू गांव में नक्सलियों ने विभिन्न समय पर 17 ग्रामीणों को मौत के घाट उतारा था। बैठकों के दौरान हमने पाया कि औसतन 4 से 5 ग्रामीणों की हत्या सभी गांव में नक्सलियों द्वारा की गई थी। उनमें से कुछ गांव का नाम मैं बताना चाहूंगा गोलगुंडा, पोलमपल्ली, पालामडग़ु, अर्र्णमपल्ली, जग्गावरम, डब्बाकोन्टा, रामाराम, पिडमेल, कांकेरलंका, पुसवाड़ा, तिमिलवाड़ा, बुर्कापाल, चिंतागुफा गोडेलगुड़ा, मेड़वाही, इत्तगुड़ा, पेंटा, मिसमा, पेदाकुर्ति, गगनपल्ली, एर्राबोर...... यूं तो गांव के नामों की सूची काफी लंबी है, परंतु इन उदाहरणों से मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि, आप इन गांव में हुए नक्सली बर्बरता और हत्या की जानकारी ले सकते हैं।
अब मैं आपको यह पूछना चाहूंगा कि देश के बाहुबली गुंडे इनके खिलाफ कितने लोगों ने आवाज बुलंद करने की हिम्मत की है? जिन्होंने भी हिम्मत कि ऐसे गुंडों बदमाशों ने उनकी हत्या कर दिया या करवा दी तो नक्सली भी इन गुंडे बदमाशों से कहां अलग है? कोई उनके खिलाफ आवाज उठाता है, तो पूरे गांव वालों को बुलाकर जनअदालत लगाकर निर्ममता पूर्वक सबके सामने में उसकी हत्या कर दी जाती है। और उस पर झूठे आरोप लगाए जाते हैं कि वह पुलिस मुखबिर है, ऐसे झूठे आरोप लगाकर हत्या करना उनकी एक रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि वे आतंक का माहौल बनाकर लोगों को अपने विरुद्ध ना खड़े हो इसके लिए हत्या का उदाहरण प्रस्तुत करते है। ग्राम पलामडग़ू में जब मैं एक बार बैठक लेने गया तो वहां पर ग्रामीणों से मैंने पूछा कि आप नक्सलियों का साथ क्यों देते हैं? तो वहाँ उपस्थित ग्रामीणों में से बैठा हुआ एक युवक खड़ा हुआ और बहुत हिम्मत करते हुए उसने बोला अगर हम उनका साथ नहीं देंगे सर तो वह ( नक्सली ) हमें मार देंगे। बाद में मुझे पता चला कि पूर्व में उस युवक के पिता की हत्या भी नक्सलियों के द्वारा कर दी गई थी।
यह लेख मैंने वहाँ रहते हुए अपने अनुभव के आधार पर लिखा है। और कोशिश की है कि वहाँ की सच्चाई आप लोगों तक पहुँचाऊ। मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन जरूर आएगा जब स्थानीय आदिवासी नक्सलवाद से त्रस्त होकर तीसरा तरीका अपनाते हुए अपने घरों से गांव से निकलेंगे, और उस दिन पूरे आदिवासी नक्सलवाद का खात्मा सुनिश्चित करेंगे। और वह दिन कोई सरकार द्वारा प्रायोजित या राजनीतिक आंदोलन (सलवा जुडूम जैसा) से प्रभावित ना होकर उनका स्वत:स्फूर्त आंदोलन होगा, जिसमें नक्सलवाद का खात्मा निश्चित ही होगा।
लेख - विवेक शुक्ला
सीएसपी , दुर्ग शहर ( छत्तीसगढ़ पुलिस )
रायपुर / शौर्यपथ / आज पूरे विश्व के सामने कोरोना संकट छाया हुआ है। संकट से निपटने देश एवं प्रदेश जी जान से जुटा है। यह हमारी परीक्षा की घड़ी है, किसी भी कठिन परीक्षा की घड़ी का सामना करना हो तो धैर्य होना आवश्यक है। यदि हम हिम्मत रखे और योजनाबद्ध तरीकों से प्रयास करें तो जरूर सफलता मिलती है। ये बात इस कोरोना संकट में भी लागू होती है। पहले की अपेक्षा कोरोना संक्रमण सुधर रही है और जल्द ही इस संकट से मुक्ति पा लेंगे। यह बात राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई द्वारा आयोजित वेबिनार ‘‘कोविड-19 जागरूकता एवं बचाव’’ में अपने संबोधन में कही। राज्यपाल ने चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मी, सफाई-कर्मचारी, सुरक्षाबल, पुलिसकर्मी, मीडियाकर्मी सहित सभी कोरोना वारियर्स को धन्यवाद देते हुए कहा कि जिस प्रकार से इस संकट के पहले चरण में और अब भी जिस समर्पण भाव से सेवा कर रहे है वह सराहनीय है।
राज्यपाल ने कहा कि कोरोना के खिलाफ अब तक बड़ी मजबूती से और बड़े धैर्य से जो लड़ाई हम सभी ने लड़ी है। इसका श्रेय आप सभी राज्यवासियों को ही जाता है। जिसने अनुशासन व धैर्य के साथ कोरोना से लड़ते हुए राज्य को और देश को यहां तक लाए हैं। मुझे विश्वास है कि जनभागिदारी की ताकत से हम कोरोना के तूफान को परास्त कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमारा राज्य संकट से जूझ रहा है, ऐसे प्रतिकूल परिस्थितियों मंे शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका भी अहम हो जाती है। इस समय हमें लड़ाई को जीतने के लिए सही सलाह और सहयोग को प्राथमिक्ता देनी है। मैं सभी कालेजों के प्रिंसिपल और निदेशकों सेआग्रह करती हूं कि अपने कॉलेज के छात्र-छात्राओं और अध्यापकों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए और आम जनता को जागरूक करें। साथ ही जरूरतमंद को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना, फोन या वाटसअप पर डाक्टरों से परामर्श दिलाना-काउंसलिंग कराना, उनके मन का डर का दूर करने के लिए स्थानीय निवासियों की सहायता से सकारात्मक वातावरण विकसित करना इत्यादी प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ प्रभावी वैक्सीन बनाने का काम काफी पहले शुरू कर दिया था और हम सफल भी हुए। हमारे वैज्ञानिकों ने दिन रात एक करके बहुत कम समय में देशवासियों के लिए वैक्सीन विकसित किया हैं। आज दुनिया की सबसे सस्ती वैक्सीन भारत के पास है। एक टीम एफर्ट के साथ हमारा भारत दो मेड इन इंडिया वैक्सीन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू कर पाया।
उन्होंने कहा कि टीकाकरण के पहले चरण से ही गति के साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों में जरूरतमंदों तक वैक्सीन पहुंचे और फ्रंटलाइन वर्कर जैसे चिकित्सक, पुलिसकर्मी इत्यादि को वैक्सीनेशन किया गया। अब 18 वर्ष के ऊपर आयु वाले को वैक्सीन लगाया जा रहा है। अतः मेरा आग्रह है कि अधिक से अधिक लोग वैक्सीनेशन कराएं। इस वेबिनार में कुलपति श्री एम.के. वर्मा सहित विश्वविद्यालय से संबंधित विभिन्न कॉलेजों के निदेशक एवं प्राचार्यगण उपस्थित थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
