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मनोरंजन /शौर्यपथ /वक्त बदल गया है, एक्ट्रेस पूजा बेदी ने ये बात अपने लेटेस्ट इंटरव्यू में बखूबी बयां की है। एक वक्त पर वो स्टार रह चुकी हैं और अब वहीं उनकी बेटी अलाया भी उनकी राह पर निकल चुकी हैं। पूजा बेदी ने बेटी अलाया की लव लाइफ पर खुलकर बातें की है। उन्होंने अलाया और ऐश्वर्य ठाकरे की डेटिंग की अफवाहों पर प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने बताया कि उनके वक्त में डेटिंग और आज के टाइम में कितना फर्क आ गया है। इस दौरान उन्होंने ये भी कह दिया कि उनके वक्त पर महिलाओं का कुवांरी और वर्जिन होना जरूरी था।
अलाया की डेटिंग पर दिया रिएक्शन
पूजा बेदी की बेटी अलाा फर्नीचरवाला बॉलीवुड में डेब्यू कर चुकी हैं। वहीं इसके अलावा वो सोशल मीडिया पर कभी अपने बोल्ड अंदाज तो कभी अपने डांस वीडियो के वजह से सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में पूजा ने एक इंटरव्यू के दौरान अपनी बेटी के डेटिंग लाइफ से जुड़ी अफवाहों को लेकर बात करते हुए ना ही इन खबरों को कंफर्म किया है और ना ही इससे इनकार किया है। बल्कि उनका कहना है कि अब अलाया की पर्सनल लाइफ को लेकर तरह तरह के कयास लगाए जाते रहेंगे।
मेरे वक्त में बॉयफ्रेंड-फ्री और वर्जिन होना...
पूजा ने इस इंटरव्यू के दौरान कहा- 'मेरे वक्त में, चीजें अलग थीं! आपको बॉयफ्रेंड-फ्री, एक वर्जिन और बिना शादी के होना जरूरी था। लेकिन आज हर एक इंसान अपनी पर्सनल लाइफ के लिए खुद जिम्मेदार है'। उनका कहना है कि- 'करीना कपूर खान अपनी शादी में कितना अच्छा कर रही हैं। इसलिए मैं कहूंगी कि अब इंडस्ट्री में काफी बदलाव आ चुका है और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि ऑडिएंस की मानसिकता बदली है। सोशल मीडिया का शुक्रिया'।
सेहत /शौर्यपथ / उत्तर प्रदेश समेत समूचे देश में कोविड संक्रमण में लगाम कसने के लिये प्राकृतिक चिकित्सा और योग क्रिया अहम योगदान दे सकती है। गुरू राम राय यूनिवर्सिटी (देहरादून) के योग विभाग की अध्यक्ष एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में कार्य कर चुकी सुप्रसिद्ध डा सरस्वती काला ने बताया कि जो लोग आहार एवं दिनचयार् को लेकर संवेदनशील है और प्रतिदिन योग प्राणायाम करते है, उनको कोरोना संक्रमण होने की संभावना अति क्षीण होती है। इस तथ्य को देश के जानेमाने चिकित्सक भी मान रहे है। गहरी श्वांस लेने का अभ्यास, प्राणायाम, स्टीम इनहलेशन कोरोना संक्रमण से रक्षा करने में सक्षम है।
प्राकृतिक चिकित्सा को समझना जरूरी
उन्होने कहा कि फेफड़ों में से कफ को निकालने के लिए स्टीम इन्हलेशन किया जाए। रोगी को वमन या कुंजर क्रिया द्वारा छाती के बलगम को बाहर निकाला जाना चाहिए जिससे सांस लेने में सुविधा मिलती है। प्रात:काल खाली पेट गुनगुने जल को पीकर वमन कर दे जिससे कफ बाहर निकल आयेगा और रोगी को आराम मिल जाएगा। प्राणायाम पर जोर दिया जाना चाहिये जिससे आक्सीजन लेवल बढ जाता है।
प्राय: ऐसा देखा गया है कि कोरोना होने के डर से लोगों की सांस फूलने लगती है। डा काला ने बताया यदि नेचरोपैथी मे रोगी को यदि चेस्ट पैक व गीली पट्टी की लपेट दी जाए तो बुखार कम हो जाता है। उन्होने आश्चर्य व्यक्त किया कि सरकार आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा शैली पर जोर देने के बजाय एलौपैथी ट्रीटमेंट को बढावा दे रही है। आखिर नेचर क्योर व अन्य भारतीय पद्धति को उजागर क्यों नही होने दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लोगों को घर के भीतर भी मास्क लगाने की सलाह दी जा रही है जो गलत है। मास्क लगा होने पर अपनी ही छोडी गयी दूषित वायु ( कार्बनडाइऑक्साइड) को दोबारा बार बार अपने ही लंग्स मे दोबारा अन्दर लिया जाने से संक्रमण की संभावना बढेगी और सांस लेने में परेशानी होगी। टॉक्सिन बॉडी मे वायरस को वातावरण मिलता है वही यह वायरस पनपता है जो लोग अल्कलाइन डाइट लेते हैं, उनको इस कोरोना काल में कोई परेशानी नही हुई । इसलिए हमे अपना आहार में 8० फीसदी क्षारीय तथा 20 प्रतिशत अम्लीय आहार लेना चाहिए ।
सेहत /शौर्यपथ /कोरोना वायरस की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रही है लेकिन इस संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम खुद जागरूक रहें और समझदारी के साथ इस वायरस से लड़ें और जीत भी हासिल करें।
ऐसे कई लोग हैं, जो पूरी हिम्मत के साथ इस वायरस से मुकाबला कर रहे हैं और उसे मात भी दे रहे हैं, वहीं लगातार इस कोविड-19 से छुटकारा पाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं जिसमें लॉकडाउन का पालन करना सबसे ज्यादा जरूरी है। वहीं इस कुछ लोग होम आइसोलेशन में भी हैं। लेकिन इस दौरान हमें कुछ बातों का विशेष तौर पर ध्यान रखने की जरूरत है। तो आइए जानते हैं कुछ खास बातें-
होम आइसोलेशन के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
अगर कोई व्यक्ति होम आइसोलेशन में है तो इस बात का जरूर ध्यान रखें कि घर के बुजुर्गों और बच्चों के संपर्क में बिलकुल भी न आएं, क्योंकि आपके परिवार की सुरक्षा आपके हाथों में है। इसलिए इस बात का अवश्य ध्यान रखें।
होम आइसोलेशन में मरीज का कमरा अलग होना जरूरी है। उसका सोने का बिस्तर व खाने की प्लेट इन सबको अलग रखें।
यदि कोई व्यक्ति मरीज या मरीज के कमरे के संपर्क में आता है तो उसे अच्छी तरह से अपने हाथों को धोना चाहिए।
मरीज के कमरे में जाएं तो ट्रिपल लेयर वाला मेडिकल मास्क पहनना होगा।
जब भी मरीज के बर्तन को साफ करें तो ग्लव्स पहनकर ही उन्हें साफ करें। इस दौरान बर्तन को साबुन या डिटर्जेंट से अच्छी तरह साफ करें और इसके बाद ग्लव्स उतारकर अपने हाथों को भी अच्छी तरह साबुन से धोएं।
देखभाल करने वाला व्यक्ति अपनी हेल्थ को खुद मॉनिटर करे। रोज शरीर के तापमान की जांच करें।
अब सबसे जरूरी बात कि जो व्यक्ति होम आइसोलेशन में है, उसे इस बात का जरूर एहसास करवाए कि वह बहुत जल्द ठीक हो जाएगा। उसे नकारात्मकता से दूर रखें और यह बात जरूर बताएं कि जो सावधानियां रखी जा रही हैं, वे अपने परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखकर रखी जा रही हैं जिससे कि उन पर नकारात्मकता हावी न हो पाए।
सेहत /शौर्यपथ / PCOD आज के वक्त में सबसे कॉमन बीमारी महिलाओं को होने लगी है। यह बीमारी जरूर आम हो सकती है है। लेकिन इसका प्रभाव जान ले सकता है।
जी हां, यह बीमारी महिलाएं और लड़कियां दोनों में हो रही है। इसकी वजह से थायराइड, मेंस्ट्रुएशन प्रॉब्लम, अनचाहे बाल आना, वजन बढ़ना जैसी समस्याएं घर करने लगी है। अगर इस पर कंट्रोल नहीं किया जाता है तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी आपको घेर सकती है। बेहतर होगा समय रहते सही डाइट और शरीर का ध्यान रखना शुरू कर दिया जाएं। आज इस पोस्ट में आप जानेंगे कि पीसीओडी होने पर कैसे अपने शरीर का ध्यान रखें-
1. डाइट- अपनी डाइट में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर को शामिल करें। इससे आपको वजन कम करने में मदद मिलेगी। कोशिश करें हर 3 घंटे में छोटा-छोटा मील लेते रहें। आप चाहे तो डॉक्टर से चर्चा कर मल्टीविटामिन टैबलेट भी ले सकते हैं।
2. एक्सरसाइज- जी हां, बेहतर होगा पीसीओडी और पीसीओएस के बारे में पता चलने के बाद आप अपने लाइफस्टाइल में बदलाव कर लें। इन दोनों बीमारीयों का मुख्य कारण है आपका खराब लाइफस्टाइल। प्रॉपर डाइट के साथ आप फिजिकल एक्टिविटी पर भी वर्क करना शुरू कर दें। शुरुआत में आप छोटे-छोटे वर्कआउट कर सकते हैं। जॉगिंग, एरोबिक्स, वॉक, योगा जैसी फिजिकल एक्टिविटी आप शुरू कर सकते हैं।
3. जंक फूड- जंक फूड आपकी लाइफ को जंक कर सकते हैं। वहीं इससे उभरने के लिए आपको लंबी जंग लड़ना पड़ सकती है। अगर आपको पीसीओडी या पीसीओएस के बारे में पता चलता है तो जंक फूड खाने से बचें। जंक फूड में मैदा, चीज, ऑयल जैसी चीजें होती जो आपको मोटा बनाती है। जैसे-जैसे आपका मोटापा बढ़ता जाएगा पीसीओडी या पीसीओएस जैसी बीमारी भी बढ़ने लगेगी।
4. शुगर- इस बीमारी में जितना हो सकें मीठा कम कर दें। इससे आपके वजन पर कंट्रोल बना रहेगा। वहीं रिफाइंड शुगर हानिकारक होती है। इसकी जगह पर आप गुड़ का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
5. स्ट्रेस- पीसीओडी बीमारी अक्सर स्ट्रेस के कारण ही होती है। इसलिए बेहतर होगा अगर आप स्ट्रेस को ना कह दें और पॉजेटिव थिंकिंग के साथ कोई भी कार्य की शुरुआत करें क्योंकि पॉजिटिव सोच आपको किसी बीमारी से उभरने में जल्दी मदद करती है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /यूं तो राजस्थान की तेजस्वी व ओजस्वी, जप-तप, धर्म-कर्म गुणों से परिपूर्ण माटी में कई वीर-वीरांगनाओं ने जन्म लेकर इसका रुतबा ऊंचा किया है लेकिन महाराणा प्रताप उन चुनिंदा शासकों में से एक हैं जिनकी वीरता, शौर्य-पराक्रम के किस्से और गौरवमयी संघर्ष गाथा को सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। अमर राष्ट्रनायक, दृढ़ प्रतिज्ञ और स्वाधीनता के लिए जीवन भर मुगलों से मुकाबला करने वाले साहसिक रणबांकुर महाराणा प्रताप को जंगल-जंगल भटक कर घास की रोटी खाना मंजूर था, लेकिन किसी भी परिस्थिति व प्रलोभन में अकबर की अधीनता को स्वीकार करना कतई मंजूर नहीं था।
1540 ईसवी को राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में पिता उदयसिंह की 33वीं संतान और माता जयवंताबाई की कोख से जन्मे मेवाड़ मुकुट-मणि महाराणा प्रताप जिन्हें बचपन में 'कीका' कहकर संबोधित किया जाता, जो अपनी निडर प्रवृत्ति, अनुशासन-प्रियता और निष्ठा, कुशल नेतृत्व क्षमता, बुजुर्गों व महिलाओं के प्रति विशेष सम्मानजनक दृष्टिकोण, ऊंच-नीच की भावनाओं से रहित, निहत्थे पर वार नहीं करने वाले, शस्त्र व शास्त्र दोनों में पारंगत एवं छापामार युद्ध कला में निपुण व उसके जनक थे।
महाराणा प्रताप कुटनीतिज्ञ, राजनीतिज्ञ, मानसिक व शारीरिक क्षमता में अद्वितीय थे। उनकी लंबाई 7 फीट और वजन 110 किलोग्राम था तथा वे 72 किलो के छाती कवच, 81 किलो के भाले, 208 किलो की दो वजनदार तलवारों को लेकर चलते थे। उनके पास उस समय का सर्वश्रेष्ठ घोड़ा 'चेतक' था, जिसने अंतिम समय में जब महाराणा प्रताप के पीछे मुगल सेना पड़ी थी तब अपनी पीठ पर लांघकर 26 फीट ऊंची छलांग लगाकर नाला पार कराया और वीरगति को प्राप्त हुआ। जबकि इस नाले को मुगल घुड़सवार पार नहीं कर सकें।
पिता उदयसिंह द्वारा अपनी मृत्यु से पहले ही अपनी सबसे छोटी पत्नी के पुत्र जगमाल को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने से मेवाड़ की जनता असहमत थी। महाराणा प्रताप ने मेवाड़ छोड़ने का निर्णय किया लेकिन जनता के अनुनय-विनय के बाद वे रुक गए और 1 मार्च, 1573 को उन्होंने सिंहासन की कमान संभाली। उस समय दिल्ली में मुगल शासक अकबर का राज था और उसकी अधीनता कई हिन्दू राजा स्वीकार करने के लिए संधि-समझौता कर रहे थे, तो कई मुगल औरतों से अपने वैवाहिक संबंध स्थापित करने में लगे थे। लेकिन इनसे अलग महाराणा प्रताप को अकबर की दासता मंजूर नहीं थी। इससे आहत होकर अकबर ने मानसिंह और जहांगीर के अध्यक्षता में मेवाड़ आक्रमण को लेकर अपनी सेना भेजी। 18 जून, 1576 को आमेर के राजा मानसिंह और आसफ खां के नेतृत्व में मुगल सेना और महाराणा प्रताप के बीच हल्दीघाटी का युद्ध हुआ। माना जाता है कि इस युद्ध में न तो अकबर की जीत हो सकी और न ही महाराणा प्रताप की हार हो सकी। एक तरफ अकबर की विशालकाय, साजो-सामान से सुरक्षित सेना थी तो दूसरी ओर महाराणा प्रताप की जुझारू सैनिकों की फौज थी।
हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध के बाद महाराणा प्रताप परिवार सहित जंगलों में विचरण करते हुए अपनी सेना को संगठित करते रहे। एक दिन जब उन्होंने अपने बेटे अमरसिंह की भूख शांत करने के लिए घास की रोटी बनाई तो उसे भी जंगली बिल्ली ले भागी। इससे विचलित होकर महाराणा प्रताप का स्वाभिमान डगमगाने लगा। उनके हौसले कमजोर पड़ने लगे। ऐसी अफवाह फैल गई कि महाराणा प्रताप की विवशता ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली। तभी बीकानेर के कवि पृथ्वीराज राठौड़ ने महाराणा को पत्र लिखकर उनके सुप्त स्वाभिमान को पुन: जगा दिया। फिर महाराणा प्रताप को मरते दम तक अकबर अधीन करने में असफल ही रहा।
अंततः महाराणा प्रताप की मृत्यु अपनी राजधानी चावंड में धनुष की डोर खींचने से उनकी आंत में लगने के कारण इलाज के बाद 57 वर्ष की उम्र में 29 जनवरी, 1597 को हो गई।
महाराणा प्रताप की मृत्यु का समाचार सुनकर अकबर की आंखों में भी प्रताप की अटल देशभक्ति को देखकर आंसू छलक आए थे। मुगल दरबार के कवि अब्दुर रहमान ने लिखा है, 'इस दुनिया में सभी चीज खत्म होने वाली है। धन-दौलत खत्म हो जाएंगे लेकिन महान इंसान के गुण हमेशा जिंदा रहेंगे।
प्रताप ने धन-दौलत को छोड़ दिया लेकिन अपना सिर कभी नहीं झुकाया। हिन्द के सभी राजकुमारों में अकेले उन्होंने अपना सम्मान कायम रखा।'
और तो और एक बार अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन भारत के दौरे पर आ रहे थे, तो उन्होंने अपनी मां से पूछा… मैं आपके लिए भारत से क्या लेकर आऊं, तो उनकी मां ने कहा था भारत से तुम हल्दीघाटी की मिट्टी लेकर आना जिसे हजारों वीरों ने अपने रक्त से सींचा है।
लेकिन, इन सब के उपरांत भी इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में महाराणा प्रताप की वीरता के अध्याय पढ़ाने की बजाय अकबर की महानता के किस्से पढ़ाना इस सच्चे राष्ट्रनायक के बलिदान के साथ नाइंसाफी है।
धरती के इस वीर पुत्र के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी कि जब उसकी महानता व माटी के प्रति कृतज्ञता की कहानी हरेक जन तक पहुंचाई जाएगी।
धर्म संसार /शौर्यपथ / अक्षय तृतीया का पर्व हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे आखातीज या अक्खा तीज कहते हैं। आओ जानते हैं 10 पौराणिक तथ्य।
अक्षय तृतीया तिथि शुभ मुहूर्त:-14 मई 2021 को सुबह 05 बजकर 38 मिनट से प्रारंभ होकर 15 मई 2021 को सुबह 07 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। इस बीच पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 38 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। पूजा की कुल अवधि 06 घंटा 40 मिनट रहेगी। बताया जाता है कि वर्ष में साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त है। जिसमें प्रथम व विशेष स्थान अक्षय तृतीया का है।
क्यों मनाई जाती है अखातीज : अक्षय तृतीया (अखातीज) को अनंत-अक्षय-अक्षुण्ण फलदायक कहा जाता है जो कभी क्षय नहीं होती उसे अक्षय कहते हैं। बताया जाता है कि वर्ष में साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त है। जिसमें प्रथम व विशेष स्थान अक्षय तृतीया का है। अक्षय मुहूर्त होने के कारण इस दिन विवाह करना, गृह प्रवेश करना और सोना खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। खासकर अक्षय तृतीया के स्वर्ण खरीदना और विवाह करने का सबसे ज्यादा महत्व है। क्योंकि इस दिन जो भी कार्य किया जाता है उसका क्षय नहीं होता है। नाश नहीं होता है।
इस दिन को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। समस्त शुभ कार्यों के अलावा प्रमुख रूप से शादी, स्वर्ण खरीदने, नया सामान, गृह प्रवेश, पदभार ग्रहण, वाहन क्रय, भूमि पूजन तथा नया व्यापार प्रारंभ कर सकते हैं। इस दिन आप चाहे तो ऑनलान सोना खरीद सकते हैं। जो लोग 'स्वर्ण रश योजना' से जुड़े हैं वे तो खरीदते ही हैं।
अक्षय तृतीया के दिन स्नान, ध्यान, जप-तप करना, हवन करना, स्वाध्याय और पितृ तर्पण करने से पुण्य मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन पंखा, चावल, नमक, घी, चीनी, सब्जी, फल, इमली और वस्त्र वगैरह का दान अच्छा माना जाता है।
10 पौराणिक तथ्य :
1. इस दिन भगवान नर-नारायण सहित परशुराम और हय ग्रीव का अवतार हुआ था।
2. बद्रीनारायण के कपाट भी इसी दिन खुलते हैं। मां गंगा का अवतरण भी इसी दिन हुआ था।
3. इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर के पूछने पर यह बताया था कि आज के दिन जो भी रचनात्मक या सांसारिक कार्य करोगे, उसका पुण्य मिलेगा। अक्षय तृतीया के दिन ही वृंदावन के बांके बिहारी जी के मंदिर में श्री विग्रह के चरणों के दर्शन होते हैं। सुदामा भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचे थे।
4. अक्षय तृतीया के दिन श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ, श्री सूक्त का पाठ या श्री रामचरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करना चाहिए। इससे जीवन में ऋषियों का आशीर्वाद, धन, यश, पद और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
5. जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभनाथ का जन्म चैत्र कृष्ण नौवीं के दिन सूर्योदय के समय हुआ। उन्हें आदिनाथ भी कहा जाता है। जैन धर्म के मतानुसार भगवान ऋषभदेव ने एक वर्ष की पूर्ण तपस्या करने के पश्चात इक्षु (शोरडी-गन्ने) रस से पारायण किया था। जब यह घटना घटी थी तब अक्षय तृतीया थी इसलिए यह महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
6. अक्षय तृतीया के पावन दिन पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष प्रदान होता है।
7. अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा विधि-विधान से करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
8. इसी दिन सतयुग और त्रैतायुग का प्रारंभ हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ।
9. अक्षय तृतीया के दिन से ही वेद व्यास और भगवान गणेश ने महाभारत ग्रंथ लिखना शुरू किया था। इसी दिन महाभारत की लड़ाई खत्म हुई।
10. ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इसी दिन हुआ था।
दुर्ग / शौर्यपथ / कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए धमधा प्लान विशेष रूप से कारगर रहा है। इस प्लान में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ कैम्प लगाकर टेस्टिंग की गई। सर्दी खांसीए बुखारए कमजोरी जैसे लक्षण महसूस कर रहे ग्रामीणों ने यहाँ टेस्ट कराए। 2500 से अधिक टेस्ट हुए और 10 प्रतिशत से थो?े कम लोग पॉजिटिव आये। चूंकि लगातार हेल्थ कैम्प आयोजित किये गए अत: लोगों को काफी प्रारंभिक चरण में चिन्हांकित कर लिया गयाए इसकी वजह से इन्हें प्रोफिलैक्टिक किट दे दी गई और इन्हें आइसोलेट कर इनका इलाज आरंभ हो गया जिसकी वजह से धमधा में संक्रमण की दर कम रही। साथ ही धमधा में कोविड केयर के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया गया। यह जानकारी देते हुए एसडीएम श्री बृजेश क्षत्रिय ने बताया कि कलेक्टर डॉण् सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे के आदेश अनुसार लगातार ब्लॉक में टेस्टिंग की गई। इसका अच्छा नतीजा रहा और लोगों को चिन्हित कर उनका इलाज तुरंत आरम्भ हो गया।
उल्लेखनीय है कि दुर्ग जिले में ब?ते हुए संक्रमण कि स्थिति से निपटने के लिए राज्य कार्यालय से प्राप्त दिशा निर्देशों एवं जिला प्रशासन के सहयोग से विकास खण्ड धमधा के बीण्एलण्टीण्एफण् ;ब्लाक स्तरीय टॉस्क फोर्सद्ध ने निर्णय लिया कि विकास खण्ड के उस गांव में विशेष शिविर लगाकर लक्षण वाले मरीजों की जांच की जाए एवं साथ ही अनिवार्य रूप से प्रायमरी कान्टेक्ट की पहचान की जाए एवं मुख्यमंत्री महोदय के निर्देशानुसार ऐसे मरीजों को प्रोफाईलेटिक कीट वितरण किया गयाए जिसके परिप्रेक्ष्य में विगत सप्ताह में 60 पंचायतों एवं शहरी क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया जिसमें कुल एंटीजन संख्या 2329ए आरटीपीसीआर 137ए ट्रुनॉट 61ए कुल टेस्ट 2527ए किया गया जिसमें कुल 223 मरीज पॉजिटिव पाए गए। इस प्रकार कुल जॉच के अनुपात में 10 प्रतिशत से कम रहाए जो काफी कम है इस प्रकार सभी पॉजिटिव मरीजों के परिजनों का प्रोफाईलेटिक किट वितरण किया गयाए इसके अतिरिक्त विकासखण्ड धमधा में निर्देशों तहत् मितानिनों के माध्यम से प्रोफाईलेटिक कीट का वितरण पॉजिटिव पाए गए मरीजों के परिजनों को दिया जा रहा हैए कमेटी द्वारा निर्णय लिया गया है कि अगले सप्ताह भी स्वास्थ्य शिविरों की कार्ययोजना बनाकर ग्राम स्तर पर शिविर लगाकर जॉच करवाई जाएगी। उक्त कार्यक्रम अनुविभागीय अधिकारी ;राजस्वद्ध धमधा के मार्गदर्शन एवं डॉण् डी पी ठाकुर बीएमओए धमधा के निर्देश अनुसार विकासखण्ड प्रबंधक राजेन्द्र वर्मा एवं समस्त चिकित्सा अधिकारीए ग्रामीण स्वास्थ्य सहायकए सुपरवाईजर महिला.पुरूषए स्टॉफ नर्सए ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक महिला.पुरूषए लैब टेक्नोलोजिस्ट सीएचओ तथा समस्त अधिकारी कर्मचारी द्वारा वर्तमान में मानव सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं।
भिलाई / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा टीकाकरण को लेकर एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, इसी अभियान के तहत वार्ड क्रमांक 26 हाउसिंग बोर्ड क्रिकेट मैदान में वरिष्ठ जनों के लिए आज से टीकाकरण प्रारंभ हो गया है, समय सायं 5:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक वरिष्ठ नागरिकों को टीका लगाया जाएगा! आज प्रथम दिन टीकाकरण के लिए आए हुए पात्र हितग्राहियों को टीकाकरण के पश्चात गुलाब का फूल देकर उनका स्वागत किया गया! वरिष्ठ नागरिक बड़े ही उत्साह से हाउसिंग बोर्ड क्रिकेट मैदान पहुंच रहे हैं और अपने निजी चार पहिया वाहन में बैठकर ही टीका लगवा रहे हैं, इस टीकाकरण केंद्र की खासियत यह है कि सायं से लेकर रात्रि के निर्धारित समय तक कोविड का टीका लगाया जाएगा!
सूर्या मॉल में वरिष्ठ नागरिकों को करवाए जा रहे टीकाकरण की अपार सफलता के बाद भिलाई के दूसरे क्षेत्र में इसकी स्थापना करने का निर्णय लिया गया है! भिलाई के सूर्या मॉल में लगातार वाहनों की कतारें लग रही है! 4 दिनों में 660 वरिष्ठ नागरिकों ने सूर्या मॉल के पार्किंग प्लेस में कोविड का टीका लगवाया है! इनके उत्साह और हुजूम को देखते हुए आज से वैशाली नगर क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 26 हाउसिंग बोर्ड क्रिकेट मैदान में भी ड्राइव इन वैक्सीनेशन प्रारंभ कर दिया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक आकर आसानी से टीका लगवा रहे हैं! 1 घंटे में ही 32 लोगों ने यहां कोविड का टीका लगवा लिया! विधायक श्री देवेंद्र यादव ने हाउसिंग बोर्ड मैदान में ड्राइव इन वैक्सीनेशन के शुरुआत करने की पहल की थी, आज मैदान में पहुंचकर उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों का उत्साहवर्धन किया! यहां सबसे अहम बात है कि यह बड़ा मैदान है, गर्मी का मौसम है जिसको देखते हुए रात्रि में टीकाकरण का फैसला लिया गया है, पूरे मैदान रोशनी से भरा हुआ है, ऑब्जरवेशन के लिए यहां पर पर्याप्त स्थल है, रजिस्ट्रेशन, वैक्सीनेशन एवं वेरीफायर का काउंटर स्थापित करने के लिए भी एवं वाहनों के कतार के लिए तथा टीकाकरण के पश्चात ऑब्जरवेशन के दौरान वाहनों के पार्किंग के लिए भी पर्याप्त स्थल मौजूद है यही कारण है कि इस स्थल का चयन वरिष्ठ नागरिकों के टीकाकरण ड्राइव इन वैक्सीनेशन के लिए किया गया है!
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे एवं निगम आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी के निर्देश पर टीकाकरण को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है! इसी तर्ज पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए ड्राइव इन वैक्सीनेशन की शुरुआत नगर पालिक निगम भिलाई में की गई है! आज टीकाकरण के प्रारंभ के दौरान उपायुक्त अशोक द्विवेदी, जोन आयुक्त पूजा पिल्ले, सहायक अभियंता कुलदीप गुप्ता एवं जावेद अली मौजूद रहे
कोमार्बिडिटी वाले व्यक्ति, भोजन प्रदाय करने वाले, सब्जी विक्रेता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, पंचायत सचिव, कोटवार-पटेल और पीडीएस प्रबंधक और विक्रेता फ्रंट लाईन वर्कर की सूची में शामिल
राज्य सरकार के कर्मचारी, राज्य पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के कर्मचारी और उनके इमिडियेट परिजन भी शामिल
मुख्यमंत्री के पूर्व निर्देश और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की समिति की अनुशंसा पर राज्य सरकार ने लिया निर्णय
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए टीकाकरण के लिए अहम घोषणा की है जिसके तहत विभिन्न श्रेणियों के लोगों को फ्रंट लाईन वर्कर मानते हुए उनके टीकाकरण करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही राज्य के पत्रकार और वकीलों तथा उनके परिजनों को भी फ्रंट लाईन वर्कर के समान ही टीकाकरण करने की मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने घोषणा की है।
गौरतलब है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा पूर्व में ही निर्देश दे दिए गए थे परंतु मामला न्यायलयीन होने के कारण लंबित था। कई अन्य राज्यों में पत्रकारों और वकीलों को फ्रंट लाईन वर्कर मानते हुए उनका टीकाकरण किया जा रहा है परंतु मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इससे एक कदम और आगे बढ़ते हुए राज्य के पत्रकारों और वकीलों के साथ ही उनके परिजनों को भी फ्रंट लाईन वर्कर के समान टीकाकरण में प्राथमिकता देने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री बघेल द्वारा इस संबंध में पूर्व में दिए निर्देश और टीकाकरण के संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की समिति की अनुशंसा पर राज्य सरकार द्वारा फ्रंट लाईन वर्कर की सूची में जिन श्रेणियों को शामिल किया है उनमें स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिभाषित कोमार्बिडिटी वाले व्यक्ति, भोजन प्रदाय करने वाले एवं सब्जी विक्रेता, बस ड्राइवर कंडक्टर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, पंचायत सचिव/कर्मी, पीडीएस दुकान प्रबंधक और विक्रेता, इंसटिटुशनल केयर में रहने वाली महिलाएं, गांव के कोटवार एवं पटेल, राज्य सरकार के कर्मचारी, राज्य पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के कर्मचारी और उनके इमिडियेट परिजन शामिल हैं।
इसी तरह इस सूची में वृद्धाश्रम में, महिला देखभाल केन्द्रों एवं बाल देखभाल में कार्यरत व्यक्ति, शमशान, कब्रिस्तान में कार्यरत व्यक्ति, दिव्यांग व्यक्ति, आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाली अर्धशासकीय संस्थाओं जैसे- प्राथमिक कृषि सहकारी समिति, मार्कफेड, सहकारी बैंक में कार्यरत कर्मचारी, कलेक्टर द्वारा कोरोना ड्यूटी पर लगाए गए व्यक्ति, राज्य शासन द्वारा परिभाषित किसी अन्य श्रेणी के व्यक्ति को भी शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा फ्रंट लाईन वर्कर की पहचान के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शी सिद्धांत जारी किया जाएगा। यदि फ्रंटलाइन वर्कर श्रेणी का कोई व्यक्ति एपीएल का छोड़कर अन्य कोई राशनकार्ड लाता है तो उसे भी उस राशनकार्ड की श्रेणी में माना जाएगा और यदि राशनकार्ड लेकर नही आता है तो उसे फ्रंट लाईन वर्कर की श्रेणी में माना जाएगा। जेल में रहने वाले बंदियों को भी टीकाकरण में वही प्राथमिकता दी जाए जो फ्रंटलाइन वर्कर को दी जाएगी क्योकि वो अपनी सुरक्षा नही कर सकते। इसी प्रकार वकीलों और पत्रकारों तथा उनके इमिडियेट परिजनों को भी फ्रंटलाईन वर्कर के समान ही टीकाकरण में प्राथमिकता दी जाएगी।
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग जिले में पिछले माह की ६ अप्रैल से लॉक डाउन लगा हुआ है ऐसे में जिले सहित प्रदेश की सभी शराब दुकाने बंद है . शराब दुकानों के बंद होने के कारण अवैध शराब के व्यापार पर लगाम लगाने लगातार पुलिस प्रशासन द्वारा कार्यवाही की जा रही है उसी कड़ी में आज पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर के मार्गदर्शन में, एवं अति.पुलिस अधीक्षक(शहर) संजय ध्रुव, तथा नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग विवेक शुक्ला के निर्देशन में कोतवाली थाना प्रभारी राजेश बागड़े एवं उनकी टीम द्वारा जियो खुलकर नशा मुक्ति अभियान के तहत मुखबीर मिली की बांधातालाब गंजपारा रमेश कडंरा के घर के सामने तालाब किनारे दुर्ग में एक व्यक्ति अवैध रूप से शराब अपने कब्जे में रखकर बेचने के लिये ग्राहक की तलाश कर रहा है .
सूचना पर रेड कार्यवाही कर मौके पर जाकर घेराबंदी कर एक व्यक्ति को पकडा जिससे नाम पता पूछने पर अपना नाम अनित कुंजाम पिता नंदु कुंजाम उम्र 30 साल निवासी गंजपारा बांधातालाब दुर्ग को पकडा गया आरोपी के कब्जे से 40 पौवा अंग्रेजी शराब किमती 7800/- रू. मुताबिक जप्ती पत्रक के जप्त कर आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर ज्यूडिशियल रिमाण्ड पर माननीय न्यायालय में पेश किया गया। इस कार्यवाही में निरीक्षक राजेश बागडे, प्र.आर.राजेन्द्र तिवारी, आरक्षक शौकत अली एवं जी.रवि का सराहनीय योगदान रहा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
